महिलाओं में आयरन की कमी क्यों ज़्यादा होती है? माहवारी और गर्भावस्था की अहम भूमिका
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महिलाओं में आयरन की कमी क्यों ज़्यादा होती है? माहवारी और गर्भावस्था की अहम भूमिका

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Summary

महिलाओं में आयरन की कमी मुख्यतः माहवारी और गर्भावस्था के कारण बढ़ती है, जिससे उनकी सेहत पर कई गंभीर असर पड़ सकते हैं। समय पर पहचान और सही खानपान से कमी को दूर किया जा सकता है।

अगर आप लगातार थकान महसूस करती हैं, सिर चकराता है या बाल झड़ने लगे हैं, तो हो सकता है यह आपके शरीर में आयरन की कमी का संकेत हो। महिलाओं में आयरन की कमी आम है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना आपके स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यह समस्या खासकर माहवारी यानी पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान उत्पन्न होती है। अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें, समय रहते जाँच कराएं और सही इलाज पाएं, ताकि आगे किसी बड़ी समस्या से बचा जा सके। जांच और इलाज के लिए आप हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिल सकती हैं और इलाज ले सकती हैं।

आयरन की कमी क्या है और इसके सामान्य कारण?

आयरन हमारे शरीर के लिए एक आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट है, जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन बनता है। हीमोग्लोबिन वही प्रोटीन है जो हमारे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। जब शरीर में आयरन या हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, तो 'आयरन की कमी' (Iron Deficiency) की स्थिति बनती है। इससे हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है और एनीमिया (Iron Deficiency Anemia) का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि इस स्थिति में कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं जैसे कि - 

सामान्य कारण

शरीर में आयरन की कमी के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं - 

  • खून की कमी या अत्यधिक रक्त हानि होना (जैसे कि अक्सर और अधिक मात्रा में पीरियड में ब्लड निकलना)
  • संतुलित और आयरन युक्त भोजन की कमी।
  • प्रेगनेंसी में आयरन की आवश्यकता अधिक होना।
  • लंबे समय तक पेट की बीमारी (जैसे कि पेट में अल्सर, आंतों में समस्या या आंतों से खून आना)।
  • वेजिटेरियन या वेगन जीवनशैली में आयरन युक्त स्रोतों की कमी।

हाल की रिसर्च के अनुसार, दुनिया भर में 15% से 30% महिलाएं आयरन की कमी से प्रभावित होती हैं, और लगभग 40% प्रेग्नेंट महिलाएं आयरन की कमी का अनुभव करती हैं। यही कारण है कि हम इस विषय पर ब्लॉग लिख रहे हैं और हम चाहते हैं कि आप भी इस विषय के बारे में अधिक जानकारी रखें।

आयरन की कमी से जुड़े रोग

आयरन की कमी से शरीर में कई बीमारियां विकसित हो सकती हैं - 

  • एनीमिया (Iron Deficiency Anemia) सबसे आम है।
  • हार्ट संबंधी समस्या होना।
  • इम्यूनिटी कमजोर होना और बार-बार इन्फेक्शन होना
  • दिमागी थकान और सीखने में परेशानी
  • गर्भावस्था की माँ और बच्चे के स्वास्थ्य पर असर

महिलाओं में आयरन की कमी क्यों अधिक होती है?

महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव, पीरियड्स, प्रेगनेंसी और विशेष खानपान की जरूरतें आयरन की कमी के जोखिम को बढ़ा देते हैं।

  • पीरियड्स के दौरान रक्त हानि: हर माह महिलाओं के शरीर से पीरियड्स में ब्लीडिंग होती है, जो आयरन स्टोर्स को जल्दी घटा देती है। खासकर जिन महिलाओं को पीरियड लंबे समय तक होते हैं या रक्त का बहाव अधिक होता है, तो एनीमिया का जोखिम अधिक हो जाता है।
  • प्रेगनेंसी और स्तनपान: गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मां और बच्चे दोनों के लिए ज्यादा आयरन की जरूरत होती है। यदि जरूरत पूरी नहीं होती, तो माँ और बच्चे पर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे हो सकते हैं।
  • पोषक तत्वों की कमी वाला खाना: महिलाओं के लिए संतुलित भोजन जरूरी है, लेकिन अक्सर डाइट में आयरन वाले फूड्स की कमी रह जाती है।
  • जीआई समस्याएं और एनीमिया: पेट और आंतों की बीमारी, बार-बार ब्लड डोनेशन या पुरानी बीमारियों से शरीर में आयरन की कमी बढ़ सकती है।

माहवारी और आयरन की कमी का संबंध

पीरियड्स इसका एक बड़ा कारण है, जिससे महिलाओं में आयरन की कमी शुरू होती है।

  • महीने में एक बार होने वाली ब्लीडिंग से आयरन स्टोर्स की भरपाई जरूरी है। दी हेन्री फोर्ड हेल्थ सिस्टम के अनुसार, हर पांच में एक महिला को माहवारी की वजह से आयरन की कमी होती है। हल्की थकान, कमजोरी, चेहरे और हाथ-पैरों में पीलापन माहवारी में आयरन की कमी के संकेत हो सकते हैं।
  • जिन महिलाओं को पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उसमें आयरन की कमी या एनीमिया का जोखिम कई गुना ज्यादा है।

गर्भावस्था में आयरन की आवश्यकता

गर्भावस्था में महिला का शरीर बच्चे के विकास के लिए अतिरिक्त आयरन चाहता है, जिससे माँ और बच्चे दोनों के लिए एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।

  • कई बड़े स्वास्थ्य संस्थानों की रिपोर्ट बताती है कि महिला को गर्भावस्था में रोजाना करीब 27 mg आयरन की जरूरत होती है, जबकि सामान्य महिलाओं के लिए यह मात्रा करीब 18 mg है।
  • आयरन की कमी से माँ में थकान, चक्कर आना, जल्दी सांस फूलना, इम्यूनिटी कमजोर होना जैसी समस्या हो सकती है।
  • बच्चे के लिए, आयरन की कमी से समय से पहले डिलीवरी, जन्म के समय वजन कम होना या धीमा विकास जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

आयरन की कमी के लक्षण और पहचान

आयरन की कमी के रोग पहचानना जरूरी है, खासकर जब लक्षण सामान्य लगते हैं।

महिलाओं में आयरन की कमी के लक्षण - 

  • हमेशा थकान या कमजोरी महसूस होना
  • सिर चकराना या हल्का महसूस करना
  • स्किन, होठ और आंखों के आसपास पीला पड़ना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • बाल झड़ना, त्वचा रूखी होना
  • सांस लेने में तकलीफ, खासकर थोड़ी मेहनत पर
  • मन-मूड में चिड़चिड़ापन या ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना
  • शरीर में बार-बार संक्रमण/बीमारी होना

आयरन की कमी की पहचान कैसे करें?

  • ब्लड टेस्ट: हीमोग्लोबिन, फेरिटिन और आयरन लेवल की जांच से आयरन की कमी का पता चलता है। सामान्य डॉक्टर लक्षणों और जोखिम को देखकर आयरन के विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।

आयरन की कमी को पूरा करने के उपाय

आयरन की कमी को समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है, ताकि लंबी बीमारी और एनीमिया से बचा जा सके।

  • आहार में बदलाव (आयरन की कमी में क्या खाना चाहिए):
    • हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी)
    • लाल मांस, चिकन और मछली
    • अंडा, दाल, चना, सोयाबीन, टोफू
    • मेवे (काजू, बादाम)
    • अनार, चुकंदर, खजूर, किशमिश
    • विटामिन सी (Vitamin C) वाली चीजें साथ लें: संतरा, नींबू, अमरूद, ब्रोकली जैसी चीज़ें आयरन के अवशोषण को तेज करती हैं।
    • आयरन सप्लीमेंट: डॉक्टर की सलाह पर आयरन टैबलेट या सिरप लें।
    • सही समय और डोज़ का ध्यान रखें, दवाइयों के साइड इफेक्ट्स (जैसे पेट ख़राब होना, कब्जियत) को नियंत्रित करें।
  • माहवारी/गर्भावस्था की देखरेख:
    • भारी ब्लीडिंग की स्थिति में डॉक्टर की राय लें, जरूरत पड़ने पर ब्लीडिंग नियंत्रण की दवा या थेरेपी अपनाएं।
    • गर्भावस्था में नियमित चेकअप मुख्य रूप से आयरन लेवल पर कराते रहें।
  • सही निदान और इलाज:
    • विशेषज्ञ डॉक्टर (हेमेटोलॉजिस्ट) से संपर्क करें, खासकर लंबी कमजोरी या लक्षण बने रहने पर यह और भी ज्यादा आवश्यक हो जाता है।
  • पूर्ति के लिए लाइफस्टाइल बदलें:
    • फास्ट फूड कम और पोषणयुक्त खाना ज्यादा लें
    • रेगुलर एक्सरसाइज और डॉक्टर से सलाह लें

निष्कर्ष

महिलाओं में आयरन की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो मुख्यतः माहवारी और गर्भावस्था के कारण और भी अधिक बढ़ जाती है। समय पर पहचान और सही खानपान, नियमित जांच, और विशेषज्ञ सलाह से न सिर्फ आयरन की कमी बल्कि इससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से भी बचाव संभव है। महिलाओं के लिए यह जरूरी है कि वह अपने शरीर में आयरन के स्तर को नजरअंदाज न करें, ताकि वे स्वस्थ, ऊर्जा से भरपूर और सक्रिय जीवन जी सकें

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में आयरन की कमी से माँ और बच्चे को क्या खतरा हो सकता है?

गर्भावस्था में आयरन की कमी से माँ में थकान, जल्दी सांस फूलना, और एनीमिया हो सकता है। बच्चे में समय से पहले जन्म, कम वजन और धीमे विकास का खतरा बढ़ जाता है।

आयरन की कमी को कैसे रोका या सुधार किया जा सकता है?

संतुलित भोजन लें जिसमें आयरन युक्त चीजें शामिल हों, Vitamin C के साथ खान पान करें, नियमित चेकअप व डॉक्टर से सलाह लें।

कौन-से खाद्य पदार्थ आयरन बढ़ाते हैं?

पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, लाल मांस, मछली, अंडा, दाल-चना, सोयाबीन, अनार, चुकंदर, खजूर, किशमिश।

क्या आयरन की कमी थकान का कारण बनती है?

हाँ, आयरन की कमी सीधे तौर पर कमजोरी और थकान का मुख्य कारण है।

आयरन की कमी के लिए कौन-से सप्लीमेंट अच्छे हैं?

डॉक्टर द्वारा बताए गए आयरन टैबलेट या सिरप, जिन्हें सही डोज़ और डॉक्टर की सलाह पर लिया जाना चाहिए।

आयरन की कमी से बाल और त्वचा पर क्या असर पड़ता है?

इसकी वजह से बाल झड़ सकते हैं, त्वचा पीली और रूखी हो सकती है।

Written and Verified by:

Dr. Shubham Bhattacharya

Dr. Shubham Bhattacharya

Consultant Exp: 15 Yr

Hematology

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Dr. Shubham Bhattacharya is a Hematologist who is associated with CMRI. He has an experience of 15 years. His areas of expertise are Bone marrow transplant, anemia, leukemia and malignant hematological disorders.

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