
प्रेग्नेंसी का सफर हर महिला के लिए भावनाओं और जिज्ञासाओं से भरा होता है। जैसे ही आप अपनी पहली या दूसरी तिमाही की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट हाथ में लेती हैं, उसमें लिखे मेडिकल शब्द जैसे कि 'पोस्टीरियर प्लेसेंटा' (Posterior Placenta) अक्सर मन में कई सवाल पैदा कर देते हैं। क्या यह बच्चे के लिए सुरक्षित है? क्या इससे डिलीवरी पर कोई असर पड़ेगा? सीके बिरला हॉस्पिटल (CMRI) में हम समझते हैं कि एक माँ के लिए ये जानकारियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।
पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या होता है, इसे समझना न केवल आपके तनाव को कम करता है, बल्कि आपको अपनी प्रेग्नेंसी यात्रा के प्रति अधिक आश्वस्त भी बनाता है। इस ब्लॉग में हम प्लेसेंटा की स्थिति से लेकर इसके ग्रेड और बच्चे पर पड़ने वाले असर तक, हर छोटी-बड़ी जानकारी को गहराई से समझेंगे। यदि आप भी अपने मन में कई सवालों को लेकर चल रही हैं और नहीं जानती कि अब क्या करना चाहिए, आपको हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से मिलना चाहिए और उनसे सलाह लेना चाहिए।
इससे पहले कि हम 'पोस्टीरियर' शब्द को समझें, यह जानना जरूरी है कि प्लेसेंटा (Placenta) आखिर है क्या। प्लेसेंटा, जिसे हिंदी में 'अपरा' या 'फूल' भी कहा जाता है, एक अस्थाई अंग है, जो गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय में विकसित होता है।
इसकी भूमिका को आप एक 'लाइफलाइन' की तरह समझ सकते हैं -
जब एक महिला गर्भधारण करती है, तो निषेचित अंडा (Fertilized Egg) गर्भाशय की दीवार से कहीं न कहीं चिपक जाता है। प्लेसेंटा वहीं विकसित होता है, जहाँ अंडा चिपकता है।
यदि प्लेसेंटा गर्भाशय की पिछली दीवार (Posterior Wall) पर स्थित है; यानी वह हिस्सा जो आपकी रीढ़ की हड्डी (Backbone) की तरफ है, तो इसे मेडिकल भाषा में पोस्टीरियर प्लेसेंटा कहा जाता है।
प्रेग्नेंसी में अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट समझना आपके लिए तब आसान हो जाता है जब आप जानते हैं कि 'पोस्टीरियर' का सीधा अर्थ 'पीछे' है। यह स्थिति पूरी तरह से सामान्य (Normal) है। सांख्यिकीय रूप से देखा जाए तो लगभग 40-50% महिलाओं में प्लेसेंटा की स्थिति पोस्टीरियर होती है।
अक्सर रिपोर्ट्स में लिखा होता है - पोस्टीरियर प्लेसेंटा ग्रेड 2। यहाँ 'ग्रेड' प्लेसेंटा की परिपक्वता (Maturity) को दर्शाता है। चलिए सभी ग्रेड को एक-एक करके समझते हैं -
अल्ट्रासाउंड के दौरान डॉक्टर प्लेसेंटा की स्थिति का मतलब समझाते समय इन चार मुख्य स्थितियों का जिक्र कर सकते हैं -
पोस्टीरियर प्लेसेंटा को अक्सर "गोल्डन पोजीशन" माना जाता है, और इसके पीछे कई कारण हैं जैसे कि -
सामान्य तौर पर, पोस्टीरियर प्लेसेंटा में कोई जोखिम नहीं होता। हालांकि, दुर्लभ मामलों में यदि प्लेसेंटा बहुत ज्यादा पीछे है और बच्चा 'पोस्टीरियर पोजीशन' (फेस-अप) में है, तो प्रसव के दौरान माँ को पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द (Back Labor) महसूस हो सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से प्रबंधनीय है और इसके लिए अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है।
चाहे प्लेसेंटा की स्थिति पोस्टीरियर हो या एंटीरियर, कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
सीके बिरला हॉस्पिटल्स (CMRI) के विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित एंटीनेटल चेकअप और अल्ट्रासाउंड के जरिए प्लेसेंटा की सेहत की निगरानी करते रहना चाहिए। इससे बच्चे की ग्रोथ का सही अनुमान लग सकता है।
संक्षेप में कहें तो, यदि आपकी रिपोर्ट में पोस्टीरियर प्लेसेंटा लिखा है, तो मुस्कुराइए! यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है। यह न केवल आपके बच्चे के विकास के लिए एक बेहतरीन आधार प्रदान करता है, बल्कि आपको अपने बच्चे की नन्ही हलचलों को गहराई से महसूस करने का मौका भी देता है। पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है यह जानने के बाद, अब आप अपनी गर्भावस्था के शेष समय का आनंद बिना किसी तनाव के ले सकती हैं। बस स्वस्थ आहार लें, हाइड्रेटेड रहें और अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करते रहें।
हां, पोस्टीरियर प्लेसेंटा पूरी तरह से नॉर्मल और सुरक्षित है। यह प्लेसेंटा की सबसे आम स्थितियों में से एक है और इसे नॉर्मल डिलीवरी के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
प्लेसेंटा की सही स्थिति का पता केवल अल्ट्रासाउंड स्कैन (जैसे लेवल-2 स्कैन या एनोमली स्कैन) के जरिए ही चल सकता है। डॉक्टर रिपोर्ट में इसकी स्थिति दर्ज करते हैं।
प्लेसेंटा अपनी जगह से 'हिलता' नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है, प्लेसेंटा की सापेक्ष स्थिति (Relative Position) ऊपर की ओर जा सकती है। इसे 'प्लेसेंटल माइग्रेशन' कहते हैं।
लो-लाइंग प्लेसेंटा (Placenta Previa) में ब्लीडिंग का खतरा हो सकता है। यदि यह गर्भावस्था के अंत तक बना रहता है, तो डॉक्टर अक्सर सिजेरियन (C-section) की सलाह देते हैं।
नहीं, प्लेसेंटा चाहे एंटीरियर हो या पोस्टीरियर, यदि वह स्वस्थ है और बच्चे को सही पोषण दे रहा है, तो बच्चे की ग्रोथ पर पोजीशन का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
यह केवल एक मिथक है। प्लेसेंटा की पोजीशन (एंटीरियर या पोस्टीरियर) का बच्चे के लिंग (Gender) से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है।
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Director & HOD Obstetrics & Gynecology Exp: 44 Yr
Obstetrics and Gynaecology
Dr. Bikash Banerjee is Director & HOD of Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 30 years of experience. He specializes in infertility & ART, laparoscopy & robotic gynaecological surgery, high-risk pregnancies, and complex gynaecological disorders.
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