पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है? गर्भावस्था में प्लेसेंटा की भूमिका
Home >Blogs >पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है? गर्भावस्था में प्लेसेंटा की भूमिका

पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है? गर्भावस्था में प्लेसेंटा की भूमिका

Table of Contents

Summary

  • गर्भावस्था में प्लेसेंटा कई अलग-अलग स्थिति में होती है, जिसमें से 'पोस्टीरियर प्लेसेंटा' को एक सुरक्षित स्थिति माना जाता है।
  • जब प्लेसेंटा गर्भाशय की पिछली दीवार (रीढ़ की हड्डी की तरफ) से जुड़ा होता है, तो इसे पोस्टीरियर प्लेसेंटा कहा जाता है।
  • यह एक पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित स्थिति है, जो नॉर्मल डिलीवरी के लिए अनुकूल मानी जाती है।
  • प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को समझना इसलिए जरूरी है, ताकि प्लेसेंटा की सही पोजीशन और ग्रेड (जैसे ग्रेड 2) का पता चल सके।

प्रेग्नेंसी का सफर हर महिला के लिए भावनाओं और जिज्ञासाओं से भरा होता है। जैसे ही आप अपनी पहली या दूसरी तिमाही की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट हाथ में लेती हैं, उसमें लिखे मेडिकल शब्द जैसे कि 'पोस्टीरियर प्लेसेंटा' (Posterior Placenta) अक्सर मन में कई सवाल पैदा कर देते हैं। क्या यह बच्चे के लिए सुरक्षित है? क्या इससे डिलीवरी पर कोई असर पड़ेगा? सीके बिरला हॉस्पिटल (CMRI) में हम समझते हैं कि एक माँ के लिए ये जानकारियां कितनी महत्वपूर्ण हैं। 

पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या होता है, इसे समझना न केवल आपके तनाव को कम करता है, बल्कि आपको अपनी प्रेग्नेंसी यात्रा के प्रति अधिक आश्वस्त भी बनाता है। इस ब्लॉग में हम प्लेसेंटा की स्थिति से लेकर इसके ग्रेड और बच्चे पर पड़ने वाले असर तक, हर छोटी-बड़ी जानकारी को गहराई से समझेंगे। यदि आप भी अपने मन में कई सवालों को लेकर चल रही हैं और नहीं जानती कि अब क्या करना चाहिए, आपको हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से मिलना चाहिए और उनसे सलाह लेना चाहिए। 

गर्भावस्था में प्लेसेंटा की भूमिका क्या है?

इससे पहले कि हम 'पोस्टीरियर' शब्द को समझें, यह जानना जरूरी है कि प्लेसेंटा (Placenta) आखिर है क्या। प्लेसेंटा, जिसे हिंदी में 'अपरा' या 'फूल' भी कहा जाता है, एक अस्थाई अंग है, जो गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय में विकसित होता है।

इसकी भूमिका को आप एक 'लाइफलाइन' की तरह समझ सकते हैं - 

  1. पोषण की आपूर्ति: यह माँ के रक्त से ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को छानकर गर्भनाल (Umbilical Cord) के जरिए बच्चे तक पहुँचाता है।
  2. अपशिष्ट को हटाना: बच्चे के रक्त में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य वेस्ट प्रोडक्ट्स को वापस माँ के रक्त में भेजता है ताकि शरीर उन्हें बाहर निकाल सके।
  3. हार्मोन का उत्पादन: यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे जरूरी हार्मोन बनाता है, जो गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  4. सुरक्षा कवच: यह एक फिल्टर की तरह काम करता है, जो कई हानिकारक बैक्टीरिया को बच्चे तक पहुँचने से रोकता है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या होता है?

जब एक महिला गर्भधारण करती है, तो निषेचित अंडा (Fertilized Egg) गर्भाशय की दीवार से कहीं न कहीं चिपक जाता है। प्लेसेंटा वहीं विकसित होता है, जहाँ अंडा चिपकता है।

यदि प्लेसेंटा गर्भाशय की पिछली दीवार (Posterior Wall) पर स्थित है; यानी वह हिस्सा जो आपकी रीढ़ की हड्डी (Backbone) की तरफ है, तो इसे मेडिकल भाषा में पोस्टीरियर प्लेसेंटा कहा जाता है।

प्रेग्नेंसी में अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट समझना आपके लिए तब आसान हो जाता है जब आप जानते हैं कि 'पोस्टीरियर' का सीधा अर्थ 'पीछे' है। यह स्थिति पूरी तरह से सामान्य (Normal) है। सांख्यिकीय रूप से देखा जाए तो लगभग 40-50% महिलाओं में प्लेसेंटा की स्थिति पोस्टीरियर होती है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा ग्रेड 2 का क्या मतलब है?

अक्सर रिपोर्ट्स में लिखा होता है - पोस्टीरियर प्लेसेंटा ग्रेड 2। यहाँ 'ग्रेड' प्लेसेंटा की परिपक्वता (Maturity) को दर्शाता है। चलिए सभी ग्रेड को एक-एक करके समझते हैं - 

  • ग्रेड 0: गर्भावस्था की शुरुआत से 18 सप्ताह तक की स्थिति को ग्रेड 0 कहा जाता है। इस चरण में प्लेसेंटा की बनावट पूरी तरह से एक समान (Smooth) होती है और इसमें कोई कैल्सीफिकेशन नहीं दिखता। यह दर्शाता है कि प्लेसेंटा अभी बिल्कुल नया है और बच्चे को शुरुआती विकास के लिए भरपूर पोषण दे रहा है।
  • ग्रेड 1: लगभग 18 से 29 सप्ताह के बीच की स्थिति को ग्रेड 1 कहा जाता है। इस दौरान प्लेसेंटा में हल्के बदलाव शुरू होते हैं और छोटे-छोटे सफेद धब्बे या बारीक रेखाएं दिखाई दे सकती हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो बताती है कि प्लेसेंटा दूसरी तिमाही की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल रहा है।
  • ग्रेड 2: यह आमतौर पर 30 से 36 सप्ताह के बीच देखा जाता है। इसका मतलब है कि प्लेसेंटा स्वस्थ है और सही तरीके से मैच्योर हो रहा है। इस स्तर पर प्लेसेंटा की सतह थोड़ी उबड़-खाबड़ (Indentations) होने लगती है और इसमें कैल्सीफिकेशन के स्पष्ट लक्षण दिखते हैं। पोस्टीरियर प्लेसेंटा ग्रेड 2 का रिपोर्ट में होना यह सुनिश्चित करता है कि डिलीवरी के करीब पहुँचते समय भी बच्चा सुरक्षित है।
  • ग्रेड 3: यह गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों (37+ सप्ताह) में दिखता है, जो संकेत देता है कि अब डिलीवरी का समय नजदीक है। इस ग्रेड में प्लेसेंटा पूरी तरह से परिपक्व हो जाता है और इसमें गोलाकार छल्ले जैसे हिस्से दिखाई देने लगते हैं। यह इस बात का संकेत है कि प्लेसेंटा ने अपना काम बखूबी पूरा कर लिया है और अब आपका शरीर और बच्चा जन्म के लिए तैयार हैं।

प्लेसेंटा की अलग-अलग पोजीशन और उनका मतलब 

अल्ट्रासाउंड के दौरान डॉक्टर प्लेसेंटा की स्थिति का मतलब समझाते समय इन चार मुख्य स्थितियों का जिक्र कर सकते हैं - 

  • एंटीरियर प्लेसेंटा (Anterior Placenta): जब प्लेसेंटा गर्भाशय की सामने वाली दीवार (पेट की तरफ) पर होता है। इसमें बच्चे की किक महसूस होने में थोड़ा समय लग सकता है। लगभग 33% से 38% गर्भवती महिलाओं में यह स्थिति देखी जाती है, जो कि पूरी तरह से सामान्य है।
  • पोस्टीरियर प्लेसेंटा (Posterior Placenta): जैसा कि हमने चर्चा की, यह रीढ़ की हड्डी की तरफ होता है। शोध के अनुसार, लगभग 45% से 50% मामलों में प्लेसेंटा इसी स्थिति में होता है, जिसे प्रसव के लिए सबसे सुरक्षित और आदर्श माना जाता है।
  • फंडल प्लेसेंटा (Fundal Placenta): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के सबसे ऊपरी हिस्से (Top) पर स्थित हो। यह लगभग 10% से 15% महिलाओं में पाया जाता है और बच्चे को बढ़ने के लिए नीचे की ओर काफी जगह प्रदान करता है।
  • लो-लाइंग प्लेसेंटा (Low-lying/Previa): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के निचले भाग में, गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के मुंह) के पास हो। यह स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

प्लेसेंटा की स्थिति का बेबी मूवमेंट और डिलीवरी पर असर

पोस्टीरियर प्लेसेंटा को अक्सर "गोल्डन पोजीशन" माना जाता है, और इसके पीछे कई कारण हैं जैसे कि - 

  • जल्दी बेबी मूवमेंट महसूस होना: चूंकि प्लेसेंटा पीछे की तरफ है, इसलिए बच्चे और आपके पेट की त्वचा के बीच कोई 'गद्दी' या बाधा नहीं होती। इस वजह से पोस्टीरियर प्लेसेंटा वाली महिलाएं बच्चे की हलचल (Baby Kicks) को अधिक स्पष्टता और जल्दी (अक्सर 18-20 सप्ताह में) महसूस कर पाती हैं।
  • नॉर्मल डिलीवरी में आसानी: पोस्टीरियर पोजीशन में बच्चे का सिर नीचे की तरफ आने (Engagement) के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। यह 'ओसीसीपिट एंटीरियर' पोजीशन (बच्चे का चेहरा माँ की पीठ की तरफ) को बढ़ावा देता है, जो नॉर्मल डिलीवरी के लिए सबसे आदर्श स्थिति है।
  • डॉक्टर के लिए आसानी: चेकअप के दौरान डॉक्टर को बच्चे के दिल की धड़कन (Fetal Heart Sound) सुनने और बच्चे की स्थिति को महसूस करने में अधिक आसानी होती है। यह स्थिति केवल 0.5% से 1% मामलों में ही गर्भावस्था के अंत तक बनी रहती है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में गर्भाशय बढ़ने के साथ प्लेसेंटा अपने आप ऊपर की ओर खिसक जाता है। 

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा में कोई जोखिम है?

सामान्य तौर पर, पोस्टीरियर प्लेसेंटा में कोई जोखिम नहीं होता। हालांकि, दुर्लभ मामलों में यदि प्लेसेंटा बहुत ज्यादा पीछे है और बच्चा 'पोस्टीरियर पोजीशन' (फेस-अप) में है, तो प्रसव के दौरान माँ को पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द (Back Labor) महसूस हो सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से प्रबंधनीय है और इसके लिए अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है।

कब प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या के लिए डॉक्टर से मिलें?

चाहे प्लेसेंटा की स्थिति पोस्टीरियर हो या एंटीरियर, कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • वैजाइनल ब्लीडिंग: गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का रक्तस्राव चिंता का विषय साबित हो सकता है।
  • लगातार पेट दर्द: यदि पेट या पीठ में अचानक और तेज ऐंठन हो, तो तुरंत डॉक्टरी परामर्श लेना चाहिए।
  • बच्चे की हलचल कम होना: यदि आपको महसूस हो कि बच्चा सामान्य से कम मूव कर रहा है।
  • अचानक संकुचन (Contractions): समय से पहले तेज दर्द उठना।

सीके बिरला हॉस्पिटल्स (CMRI) के विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित एंटीनेटल चेकअप और अल्ट्रासाउंड के जरिए प्लेसेंटा की सेहत की निगरानी करते रहना चाहिए। इससे बच्चे की ग्रोथ का सही अनुमान लग सकता है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो, यदि आपकी रिपोर्ट में पोस्टीरियर प्लेसेंटा लिखा है, तो मुस्कुराइए! यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है। यह न केवल आपके बच्चे के विकास के लिए एक बेहतरीन आधार प्रदान करता है, बल्कि आपको अपने बच्चे की नन्ही हलचलों को गहराई से महसूस करने का मौका भी देता है। पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है यह जानने के बाद, अब आप अपनी गर्भावस्था के शेष समय का आनंद बिना किसी तनाव के ले सकती हैं। बस स्वस्थ आहार लें, हाइड्रेटेड रहें और अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करते रहें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा नॉर्मल माना जाता है?

हां, पोस्टीरियर प्लेसेंटा पूरी तरह से नॉर्मल और सुरक्षित है। यह प्लेसेंटा की सबसे आम स्थितियों में से एक है और इसे नॉर्मल डिलीवरी के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

प्लेसेंटा की पोजीशन कैसे पता चलती है?

प्लेसेंटा की सही स्थिति का पता केवल अल्ट्रासाउंड स्कैन (जैसे लेवल-2 स्कैन या एनोमली स्कैन) के जरिए ही चल सकता है। डॉक्टर रिपोर्ट में इसकी स्थिति दर्ज करते हैं।

क्या प्लेसेंटा बदल सकता है गर्भावस्था के दौरान?

प्लेसेंटा अपनी जगह से 'हिलता' नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है, प्लेसेंटा की सापेक्ष स्थिति (Relative Position) ऊपर की ओर जा सकती है। इसे 'प्लेसेंटल माइग्रेशन' कहते हैं।

क्या प्लेसेंटा का लो होना खतरनाक होता है?

लो-लाइंग प्लेसेंटा (Placenta Previa) में ब्लीडिंग का खतरा हो सकता है। यदि यह गर्भावस्था के अंत तक बना रहता है, तो डॉक्टर अक्सर सिजेरियन (C-section) की सलाह देते हैं।

क्या प्लेसेंटा की पोजीशन से बच्चे की ग्रोथ प्रभावित होती है?

नहीं, प्लेसेंटा चाहे एंटीरियर हो या पोस्टीरियर, यदि वह स्वस्थ है और बच्चे को सही पोषण दे रहा है, तो बच्चे की ग्रोथ पर पोजीशन का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा से लड़का होता है?

यह केवल एक मिथक है। प्लेसेंटा की पोजीशन (एंटीरियर या पोस्टीरियर) का बच्चे के लिंग (Gender) से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है।

Written and Verified by:

Dr. Bikash Banerjee

Dr. Bikash Banerjee

Director & HOD Obstetrics & Gynecology Exp: 44 Yr

Obstetrics and Gynaecology

Book an Appointment

Dr. Bikash Banerjee is Director & HOD of Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 30 years of experience. He specializes in infertility & ART, laparoscopy & robotic gynaecological surgery, high-risk pregnancies, and complex gynaecological disorders.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

Obstetrics and Gynaecology Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now