स्लिप डिस्क क्या होती है?- कमर दर्द और स्लिप डिस्क में कैसे करें फर्क?
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स्लिप डिस्क क्या होती है?- कमर दर्द और स्लिप डिस्क में कैसे करें फर्क?

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Summary

  • स्लिप डिस्क और सामान्य कमर दर्द एक नहीं हैं - दोनों के लक्षण, कारण और इलाज अलग-अलग हैं।
  • स्लिप डिस्क में दर्द सिर्फ कमर तक नहीं, पैर या बांह तक भी जाता है, जो सबसे बड़ा फर्क है।
  • गलत बैठने की आदत, भारी वजन उठाना, मोटापा और धूम्रपान स्लिप डिस्क के सबसे बड़े कारण हैं।
  • स्लिप डिस्क के 90% मामलों में सही फिजियोथेरेपी और व्यायाम से बिना ऑपरेशन के स्थिति ठीक हो जाती है।
  • पैर में सुन्नपन, कमजोरी, या पेशाब-मल पर नियंत्रण न रहना, ये कुछ ऐसे लक्षण हैं जिनके महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • स्लिप डिस्क में क्या नहीं करना चाहिए, यह उतना ही जरूरी है जितना इलाज।

सुबह उठते ही कमर में जकड़न। ऑफिस में घंटों बैठने के बाद पीठ में तेज दर्द या फिर वो झनझनाहट जो पैर तक उतर जाती है और रातों की नींद चुरा लेती है। हम में से ज्यादातर लोग इसे 'स्लिप डिस्क' मान बैठते हैं और बिना जांच के दवाइयां शुरू कर देते हैं, या इसे नज़रअंदाज़ करते रहते हैं जब तक दर्द असहनीय न हो जाए।

सच यह है कि हर कमर दर्द स्लिप डिस्क नहीं होता और जो सच में स्लिप डिस्क है, उसे सामान्य दर्द की दवा से ठीक नहीं किया जा सकता। दोनों में फर्क करना ज़रूरी है और यही हम इस ब्लॉग से आपको समझाने वाले हैं। अगर आप भी लंबे समय से कमर दर्द से परेशान हैं और समझ नहीं पा रहे कि यह सामान्य मांसपेशियों का दर्द है या कुछ और तो सीके बिरला अस्पताल, (CMRI) के अनुभवी स्पाइन विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट लें। देर करना कभी-कभी बड़ी तकलीफ बन जाता है।

स्लिप डिस्क क्या होती है और यह क्यों होती है?

इसे समझने के लिए पहले रीढ़ की हड्डी की बनावट समझनी होगी। हमारी रीढ़ की हड्डी 33 छोटी-छोटी हड्डियों, जिन्हें वर्टेब्रा (Vertebrae) कहते हैं, से बनी होती है। इन हड्डियों के बीच में गद्दे जैसी संरचनाएं होती हैं, जिन्हें इंटरवर्टेब्रल डिस्क (Intervertebral Discs) कहते हैं।

यह डिस्क दो परतों से बनी होती है - 

  • बाहरी भाग: एक सख्त रेशेदार कवच, जिसे एनुलस फाइब्रोसस (Annulus Fibrosus) कहते हैं।
  • आंतरिक भाग: अंदर का एक मुलायम जेल जैसा पदार्थ, जिसे न्यूक्लियस पल्पोसस (Nucleus Pulposus) कहते हैं।

स्लिप डिस्क कैसे होती है?

स्लिप डिस्क तब होती है, जब इस मुलायम पदार्थ का कुछ हिस्सा बाहरी कवच को तोड़कर बाहर आ जाता है और पास की नसों पर दबाव डालता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में हर्निएटेड डिस्क (Herniated Disc) या प्रोलैर्प्सड डिस्क (Prolapsed Disc) भी कहते हैं।

यह समस्या सबसे अधिक इन क्षेत्रों में होती है - 

  • कमर का निचला हिस्सा: लम्बर रीजन (Lumbar region), मुख्य रूप से एल 4 - एल 5 (L4-L5) और एल5-एस1 (L5-S1) में ये समस्या देखने को मिलती है।
  • गर्दन के पास का हिस्सा: सर्वाइकल रीजन (Cervical region) में ये समस्या होती है।

सामान्य कमर दर्द और स्लिप डिस्क में क्या अंतर है?

यह वो सवाल है, जिसका जवाब ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता है। आइए इन दोनों के मुख्य अंतरों को आसान पॉइंट्स में समझते हैं - 

normal back pain vs slip disc

सामान्य कमर दर्द (Normal Back Pain)

  • दर्द का क्षेत्र: यह दर्द सिर्फ कमर या पीठ के हिस्से तक ही सीमित रहता है।
  • दर्द का फैलाव: यह शरीर के अन्य अंगों (जैसे पैरों या कूल्हों) की तरफ नीचे नहीं फैलता।
  • झनझनाहट या सुन्नपन: इसमें पैरों या उंगलियों में किसी भी प्रकार की झनझनाहट या सुन्नपन (Numbness) नहीं होता।
  • शारीरिक कमजोरी: पैरों या मांसपेशियों में कोई कमजोरी महसूस नहीं होती।
  • मुख्य कारण: यह आमतौर पर मांसपेशियों में खिंचाव, गलत तरीके से बैठने-उठने (गलत पोस्चर) या अचानक भारी वजन उठाने से होता है।
  • ठीक होने का समय: यह थोड़ा आराम करने या गर्म सिकाई से अक्सर 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है।
  • MRI की आवश्यकता: इसके निदान के लिए आमतौर पर MRI कराने की कोई ज़रूरत नहीं होती।

स्लिप डिस्क (Slip Disc)

  • दर्द का फैलाव: इसमें दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों के रास्ते पैर या पैर की उंगलियों तक नीचे उतरता है (जिसे साइटिका भी कहते हैं)। कभी-कभी यह गर्दन से बाहों तक जाता है।
  • झनझनाहट और सुन्नपन: पैर, तलवों या उंगलियों में लगातार झनझनाहट (चींटी चलना) और सुन्न पड़ जाना इसका सबसे प्रमुख संकेत है।
  • मांसपेशियों में कमजोरी: नस दबने के कारण पैरों में कमजोरी आने लगती है, जिससे चलने या खड़े होने में दिक्कत हो सकती है।
  • मुख्य कारण: रीढ़ की हड्डी के जोड़ों के बीच की डिस्क का अपनी जगह से खिसक जाना और रीढ़ की नस (nerve) को दबाना।
  • ठीक होने का समय: इसे ठीक होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। इसमें फिजियोथेरेपी और डॉक्टरी इलाज जरूरी होता है।
  • MRI की आवश्यकता: नस पर दबाव और डिस्क की सही स्थिति जानने के लिए MRI स्कैन कराना बेहद जरूरी होता है।

सबसे आसान पहचान: अगर कमर दर्द के साथ दर्द पैर या बांह तक नीचे उतरता है, या अंगों में झनझनाहट और सुन्नपन है, तो यह सामान्य दर्द नहीं बल्कि स्लिप डिस्क का संकेत हो सकता है।

स्लिप डिस्क के लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

स्लिप डिस्क के लक्षण हर इंसान में थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जो सीधे इस समस्या की तरफ इशारा करते हैं - 

कमर की स्लिप डिस्क (Lumbar) में - 

  • कमर के निचले भाग में तेज़ या जलन जैसा दर्द होना
  • दर्द जो नितंब (buttock) से होकर जांघ, घुटने और पैर तक जाए , जिसे साइटिका (Sciatica) कहते हैं
  • पैर की उंगलियों या तलवों में सुन्नपन या झनझनाहट
  • लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने से दर्द बढ़ जाना
  • खांसने, छींकने या झुकने पर दर्द अचानक तेज़ हो जाना
  • चलते समय पैर में कमजोरी महसूस होना

गर्दन की स्लिप डिस्क (Cervical) में - 

  • गर्दन में दर्द जो कंधे या बांह तक जाए
  • बांह, हाथ या उंगलियों में सुन्नपन
  • गर्दन घुमाने पर दर्द बढ़ना
  • हाथ में कमजोरी या चीजें पकड़ने में दिक्कत

तुरंत डॉक्टर के पास जाएं अगर - 

  • दोनों पैरों में एक साथ कमजोरी या सुन्नपन
  • पेशाब या मल पर नियंत्रण न रहे। यह कौडा इक्विना सिंड्रोम (Cauda Equina Syndrome) का संकेत हो सकता है, जो मेडिकल इमरजेंसी है।
  • दर्द इतना असहनीय हो कि रात को नींद न आए और दवाइयों से कोई फर्क न पड़े।

स्लिप डिस्क के कारण

स्लिप डिस्क एक दिन में नहीं होती - यह एक लंबी प्रक्रिया का नतीजा है - 

  • उम्र के साथ डिस्क का घिसना: 30-50 साल की उम्र में डिस्क की लचक कम होने लगती है, जिससे यह जल्दी क्षतिग्रस्त होती है।
  • गलत मुद्रा में लंबे समय तक बैठना: आईटी प्रोफेशनल्स (IT professionals), ड्राइवर्स (Drivers) और छात्रों (Students) में यह सबसे बड़ा कारण है।
  • भारी वजन गलत तरीके से उठाना: पीठ से उठाने की बजाय घुटनों से उठाना चाहिए, यह बात सभी जानते हैं, पर कम ही मानते हैं।
  • मोटापा: अतिरिक्त वजन रीढ़ की डिस्क पर लगातार अतिरिक्त दबाव डालता है।
  • धूम्रपान: धुआं डिस्क तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
  • चोट या दुर्घटना: सड़क दुर्घटना, खेल में चोट, या अचानक झटका।
  • आनुवंशिकता: परिवार में किसी को स्लिप डिस्क हो तो खतरा बढ़ जाता है।

भारत में काम करने वाली आबादी का एक बड़ा हिस्सा रोज 8-10 घंटे गलत मुद्रा में बैठकर काम करता है। यही आज 30-40 साल के युवाओं में स्लिप डिस्क के मामले बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।

स्लिप डिस्क की जांच और इलाज के विकल्प

जांच कैसे होती है?

  • MRI (Magnetic Resonance Imaging): स्लिप डिस्क की पुष्टि के लिए सबसे सटीक जांच - डिस्क का बाहर आना और नस पर दबाव साफ दिखता है।
  • X-Ray: हड्डियों की स्थिति देखने के लिए इसका उपयोग होता है, लेकिन डिस्क X-ray में नहीं दिखती।
  • CT Scan: जब MRI संभव न हो तो ये स्कैन होता है।
  • Nerve Conduction Study (NCS): नसों पर दबाव कितना है यह मापने के लिए ये जांच होती है।
  • शारीरिक परीक्षण: इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर Straight Leg Raise Test और रिफ्लेक्सिस की जांच करते हैं।

इलाज के विकल्प

खुशखबरी यह है कि लगभग 90% स्लिप डिस्क के मामले बिना ऑपरेशन के ठीक हो जाते हैं। इलाज के लिए निम्न विकल्प मौजूद हैं -

शुरुआती इलाज (Conservative Treatment) 

  • आराम: आराम करें लेकिन पूरी तरह बिस्तर पर न रहें, हल्की गतिविधि ज़रूरी है।
  • पेन किलर्स और दवाइयां (NSAIDs):दर्द निवारक दवाएं आपको कुछ हद तक मदद कर सकती हैं।
  • मसल्स रिलैक्सेंट (Muscle relaxants): यदि समस्या ज्यादा गंभीर है तो मसल्स रिलैक्सेंट आपकी मदद कर सकते हैं।
  • हॉट/कोल्ड थेरेपी (Hot/Cold therapy): इससे हड्डियों के बीच के कुशन पर बड़ा आराम मिलता है।

फिजियोथेरेपी और स्लिप डिस्क एक्सरसाइज

यह इलाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक अनुभवी थेरेपिस्ट आपको निम्न विकल्पों के साथ मदद कर सकते हैं - 

  • मैकेंजी एक्सरसाइज (McKenzie exercises) डिस्क को वापस अपनी जगह पर लाने में मदद करती हैं।
  • कोर स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज (Core strengthening exercises) से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां मजबूत होती हैं
  • स्ट्रेचिंग से नसों का दबाव कम होता है।

कृपया ध्यान दें कि खुद से स्लिप डिस्क एक्सरसाइज शुरू न करें, क्योंकि गलत व्यायाम से नुकसान हो सकता है।

स्टेरॉयड इंजेक्शन (Epidural Steroid Injections)

जब दवाइयों से राहत न मिले, तो डॉक्टर नस के पास स्टेरॉयड इंजेक्शन देते हैं जो सूजन कम करती है। यह इंजेक्शन प्रभावित हिस्से में दर्द को तुरंत कम करता है जिससे मरीज को काफी राहत मिलती है। दर्द कम होने के बाद मरीज के लिए फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) और अन्य जरूरी कसरत करना आसान हो जाता है, जो रीढ़ की हड्डी को दोबारा मजबूत बनाने में मदद करती हैं।

Surgery - कब ज़रूरी होती है?

  • जब 6-8 हफ्ते के शुरुआती इलाज से कोई सुधार न हो, तो सर्जरी का सुझाव दिया जाता है।
  • जब पैर या बांह में गंभीर कमजोरी हो, तो भी इसका सुझाव डॉक्टर देते हैं।
  • कौडा इक्विना सिंड्रोम (Cauda Equina Syndrome) में इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ती है।

सबसे आम सर्जरी है माइक्रोडिस्टेक्टॉमी, जिसमें बाहर निकली हुई डिस्क का हिस्सा हटाया जाता है।

स्लिप डिस्क का देसी इलाज - क्या काम करता है?

बहुत से लोग स्लिप डिस्क का देसी इलाज या स्लिप डिस्क का रामबाण इलाज खोजते हैं। हल्दी-दूध और अदरक की सूजन-विरोधी खूबियां दर्द में थोड़ी राहत दे सकती हैं, लेकिन ये डिस्क को वापस जगह पर नहीं लाते। किसी भी घरेलू उपाय को डॉक्टर की सलाह के साथ ही अपनाएं।

स्लिप डिस्क में क्या नहीं करना चाहिए?

  • कमर को आगे झुकाकर भारी सामान उठाना
  • लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना (हर 30 मिनट में उठकर चलें)
  • बिना डॉक्टर की सलाह के ज़ोरदार व्यायाम जैसे weightlifting या cycling
  • हाई हील वाले जूते पहनना
  • गद्दे से उठते समय झटका देना
  • दर्द को नजरअंदाज करके काम करते रहना

स्लिप डिस्क में कैसे सोना चाहिए?

  • करवट लेकर सोएं और उसी प्रकार उठें भी।
  • सोते समय घुटनों के बीच एक तकिया रखें
  • पीठ के बल सोएं तो घुटनों के नीचे तकिया रखें
  • पेट के बल सोने से बचें क्योंकि इससे रीढ़ पर दबाव बढ़ता है
  • सख्त और समतल गद्दे पर सोएं

कब कमर दर्द के लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?

कमर दर्द को हमेशा नजरअंदाज करने की भूल न करें। नीचे दिए इन संकेतों में से कोई भी दिखे - तुरंत स्पाइन स्पेशलिस्ट (spine specialist) से मिलें - 

  • दर्द 2 हफ्तों से ज्यादा बना हुआ हो और दवाइयों से राहत न मिले
  • दर्द रात को लेटने पर भी न जाए
  • पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी हो
  • बुखार के साथ कमर दर्द हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है।
  • कोई हालिया चोट या दुर्घटना हुई हो
  • पेशाब या पाखाने पर नियंत्रण कम हो
  • वजन अचानक कम हो रहा हो और कमर दर्द हो, तो कैंसर की जांच जरूरी।

निष्कर्ष

कमर दर्द आज के समय में सबसे आम समस्याओं में से एक है - लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे हल्के में लिया जाए। सामान्य कमर दर्द अक्सर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन स्लिप डिस्क एक structural समस्या है जिसे सही जांच और इलाज की जरूरत होती है।

अगर आपको लग रहा है कि आपका दर्द सामान्य नहीं है - पैर तक जाता है, झनझनाहट है, या लंबे समय से है - तो CK Birla Hospitals (CMRI) के Spine Care विशेषज्ञों से आज ही सलाह लें। याद रखें - सही समय पर सही कदम ही आपको लंबे समय तक दर्द से बचा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या ज्यादा देर बैठने से स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ता है?

हां। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से रीढ़ की डिस्क पर लगातार दबाव पड़ता है। IT professionals और desk workers में यह सबसे बड़ा जोखिम कारक है। हर 30-45 मिनट में उठकर थोड़ा चलना ज़रूरी है।

क्या भारी वजन उठाने से स्लिप डिस्क हो सकती है?

बिल्कुल, विशेषकर अगर वजन झुककर या गलत मुद्रा में उठाया जाए। हमेशा घुटने मोड़कर, पीठ सीधी रखकर उठाएं। एक बार में बहुत भारी सामान उठाने से बचें।

स्लिप डिस्क और साइटिका में क्या संबंध है?

Sciatica (साइटिका) एक लक्षण है, बीमारी नहीं। जब स्लिप डिस्क Sciatic nerve पर दबाव डालती है, तो कमर से पैर तक दर्द होता है - इसे Sciatica कहते हैं। यानी स्लिप डिस्क, साइटिका का सबसे आम कारण है।

स्लिप डिस्क का दर्द किस जगह महसूस होता है?

Lumbar (कमर) में होने पर — कमर, नितंब, जांघ, घुटना और पैर तक। Cervical (गर्दन) में होने पर — गर्दन, कंधे, बांह और हाथ तक। दर्द एक तरफा (usually) होता है।

क्या चलने-फिरने से स्लिप डिस्क का दर्द बढ़ता है?

यह निर्भर करता है। शुरुआत में हल्की walking फायदेमंद है — लेकिन ज्यादा देर खड़े रहना या तेज चलना दर्द बढ़ा सकता है। Doctor की सलाह से ही activity level तय करें।

क्या स्लिप डिस्क हमेशा के लिए ठीक हो जाती है?

ज्यादातर मामलों में हाँ, 90% मरीज़ बिना surgery के ठीक होते हैं। लेकिन lifestyle में बदलाव न हो तो दोबारा हो सकती है। नियमित व्यायाम, सही पोस्चर और वजन नियंत्रण से इस स्थिति के फिर से उत्पन्न होने का खतरा कम होता है।

L4-L5 और L5-S1 स्लिप डिस्क - इसका क्या मतलब है?

L4-L5 और L5-S1 रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से की डिस्क हैं। स्लिप डिस्क के 90% से ज़्यादा मामले इन्हीं दो जगहों पर होते हैं। इसलिए MRI रिपोर्ट में यही सबसे अधिक दिखता है।

Written and Verified by:

Dr. Arnab Karmakar

Dr. Arnab Karmakar

Sports Injury & Arthroscopic Surgeon Exp: 17 Yr

Orthopaedics

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Dr. Arnab Karmakar is a Consultant Sports Injury & Arthroscopic Surgeon at CMRI, Kolkata, with over 12 years of experience. He specializes in joint replacement surgeries, arthroscopy, sports injuries, complex trauma, and joint preservation procedures.

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