स्मोकिंग से फेफड़ों को क्या नुकसान होता है? पूरी जानकारी और बचाव के तरीके
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स्मोकिंग से फेफड़ों को क्या नुकसान होता है? पूरी जानकारी और बचाव के तरीके

Pulmonology | by Dr. Raja Dhar on 23/12/2025 | Last Updated : 26/12/2025

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Summary

फेफड़ों पर धूम्रपान के प्रभाव को दो श्रेणियों में समझा जा सकता है। अस्थायी प्रभावों में श्वसन संक्रमण और आवाज में बदलाव प्रमुख हैं, जिन्हें शुरुआती चेतावनी माना जाना चाहिए। वहीं, इसके स्थायी परिणामों में फेफड़ों का कैंसर और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) शामिल हैं, जो फेफड़ों की कार्यक्षमता को पूरी तरह नष्ट कर सकते हैं।

क्या आप जानते हैं कि एक इंसान दिन में लगभग 20,000 बार सांस लेता है? हर एक सांस हमारे जीवन के लिए ईंधन का काम करता है। लेकिन, जरा सोचिए कि यदि इस ईंधन में धीमा जहर मिला दिया जाए तो क्या होगा?

धूम्रपान और आजकल की खराब हवा (Poor Air Quality) मिलकर ठीक यही काम कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग, फेफड़ों, को एक ऐसे रास्ते पर ले जा रहे हैं, जहां से लौटना बेहद मुश्किल हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हाल के आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू हर साल दुनिया भर में 80 लाख से अधिक लोगों की जान ले रहा है। इंसान इस प्रकार की मृत्यु के बाद एक आंकड़ा ही बन कर रह जाता है। 

अक्सर लोग सोचते हैं, "मैं तो दिन में बस एक-दो सिगरेट पीता हूं, मुझे कुछ नहीं होगा," लेकिन हकीकत यह है कि स्मोकिंग से होने वाले नुकसान की शुरुआत पहली कश से ही हो जाती है। यह फेफड़ों की बीमारियों का गंभीर संकेत हो सकता है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर्स आपकी मदद के लिए हमेशा तत्पर हैं, लेकिन उसके लिए आपको हमारे विशेषज्ञों से परामर्श लेना होगा।

स्मोकिंग फेफड़ों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

जब आप सिगरेट के धुएं को अंदर खींचते हैं, तो आप केवल निकोटीन ही नहीं, बल्कि 7,000 से अधिक रसायनों को अपने शरीर में आमंत्रित कर रहे होते हैं। इनमें से कम से कम 69 रसायन ऐसे हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।

फेफड़ों पर इसका असर तीन मुख्य चरणों में होता है:

  • सिलिया (Cilia) का विनाश: हमारे फेफड़ों के अंदर छोटे-छोटे बालों जैसी संरचनाएं होती हैं, जिन्हें 'सिलिया' कहते हैं। इनका काम एक झाड़ू की तरह होता है, जो बलगम और गंदगी को बाहर निकालकर फेफड़ों को साफ रखते हैं। स्मोकिंग के नुकसान सबसे पहले इन्ही पर होते हैं, जो इसे लकवाग्रस्त (paralyze) कर देता है या जला देता है। इससे फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
  • एल्वियोली (Alveoli) को क्षति: फेफड़ों के अंत में लाखों छोटी-छोटी हवा की थैलियां होती हैं, जिन्हें एल्वियोली कहते हैं। यहां ऑक्सीजन खून में मिलता है, लेकिन सिगरेट का धुआं इन थैलियों की दीवारों को तोड़ देता है, जिससे व्यक्ति सांस तो लेता है, लेकिन शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है।
  • वायु मार्ग में सूजन (Inflammation): लगातार धूम्रपान करने से सांस की नली में हमेशा सूजन रहती है। नली संकरी हो जाती है और फेफड़े खुद को बचाने के लिए अतिरिक्त बलगम बनाने लगते हैं। यही कारण है कि स्मोकर्स को अक्सर सुबह के समय भारी खांसी आती है।

प्रदूषण और स्मोकिंग: फेफड़ों पर दोहरी मार

आज के दौर में हम केवल सिगरेट के धुएं से ही नहीं जूझ रहे हैं, बल्कि खराब एयर क्वालिटी भी एक बड़ी चुनौती है। जब प्रदूषित हवा (जिसमें PM 2.5 कण होते हैं) और सिगरेट का धुआं मिलते हैं, तो यह फेफड़ों के लिए एक 'जहरीला कॉकटेल' बन जाता है।

प्रदूषण से पहले से ही कमजोर फेफड़े, सिगरेट के धुएं को झेलने में असमर्थ हो जाते हैं। इसलिए, यदि आप प्रदूषित शहर में रहते हैं, तो सिगरेट छोड़ना आपके लिए कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक मजबूरी बन जाता है। इसके अतिरिक्त खराब हवा से भी लड़ने के उपायों को खोजना पड़ता है।

फेफड़ों पर स्मोकिंग के आम लक्षण

शरीर हमेशा बीमारी के संकेत देता है, जरूरत है, उन्हें समय रहते पहचाना जाए। स्मोकिंग से होने वाले नुकसान अक्सर इन लक्षणों के रूप में सामने आते हैं - 

  • क्रोनिक खांसी (Smoker’s Cough): यह सामान्य खांसी नहीं है। यह ऐसी खांसी है, जो ठीक नहीं होती और इसके साथ अक्सर गाढ़ा बलगम आता है।
  • सांस फूलना (Shortness of Breath): थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही अगर आपकी सांस फूलने लगे, तो समझ लीजिए कि फेफड़ों की क्षमता कम हो रही है।
  • फेफड़ों से खून आना (Hemoptysis): यह एक अत्यंत गंभीर लक्षण है। यदि खांसी के साथ खून आता है, तो यह फेफड़ों के कैंसर या गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसे बिल्कुल भी इग्नोर न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • बार-बार संक्रमण: यदि आपको बार-बार निमोनिया या ब्रोंकाइटिस हो रहा है, तो यह कमजोर इम्यूनिटी का संकेत हो सकता है।
  • आवाज़ में बदलाव: लंबे समय तक धूम्रपान से आवाज़ में भारीपन या कर्कशता आ सकती है।

ई-सिगरेट और वेपिंग: क्या यह सुरक्षित विकल्प है?

आजकल युवाओं में ई-सिगरेट या वेपिंग (Vaping) का चलन बहुत बढ़ गया है। कई लोग इसे सिगरेट का सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन रिसर्च बताते हैं कि यह धारणा गलत है। चलिए समझते हैं कि यह सुरक्षित विकल्प क्यों नहीं है - 

  • केमिकल का खतरा: वेपिंग लिक्विड को गर्म करने पर जो एयरोसोल बनता है, उसमें निकोटीन और भारी धातुएं (जैसे सीसा) होती हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक होती हैं।
  • पॉपकॉर्न लंग (Popcorn Lung): डायएसिटाइल नामक रसायन, जो अक्सर वेपिंग फ्लेवर्स में होता है, छोटी वायु नलिकाओं को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • विटामिन ई एसीटेट: यह रसायन फेफड़ों में जाकर जम जाता है और सांस लेने में दिक्कत आती है।

याद रखें, धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, चाहे वह पारंपरिक सिगरेट हो, हुक्का हो या फिर फैंसी ई-सिगरेट।

लंबे समय तक स्मोकिंग करने से होने वाली बीमारियां

ज्यादा स्मोकिंग के नुकसान केवल खांसी तक सीमित नहीं हैं। लंबे समय तक धूम्रपान कई जानलेवा बीमारियों को जन्म देता है - 

  • सीओपीडी (COPD): यह बीमारियों का एक समूह है, जिसमें एम्फाइसीमा और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस शामिल है। इसमें सांस लेना इतना मुश्किल हो जाता है कि मरीज को दिन-रात ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।
  • फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer): धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का नंबर एक कारण है। कैंसर कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
  • टीबी (Tuberculosis) और निमोनिया: धूम्रपान करने वालों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे उन्हें फेफड़ों के संक्रमण जैसे टीबी होने का खतरा अधिक होता है।

फेफड़ों की जांच कैसे की जाती है?

यदि आप धूम्रपान करते हैं या आपने हाल ही में छोड़ दिया है, तो फेफड़ों की नियमित जांच करवाना अनिवार्य है। CMRI जैसे अस्पतालों में अत्याधुनिक तकनीक से यह जांचें की जाती हैं - 

  • स्पाइरोमेट्री (Spirometry/PFT): यह सबसे आम टेस्ट है। इसमें आप एक मशीन में फूंक मारते हैं, जिससे पता चलता है कि आपके फेफड़े कितनी हवा भर सकते हैं। यह COPD का पता लगाने के लिए बेहतरीन है।
  • चेस्ट एक्स-रे (Chest X-ray): इससे फेफड़ों में निमोनिया या ट्यूमर का शुरुआती पता चलता है।
  • लो-डोज सीटी स्कैन (Low-dose CT Scan): यह उन लोगों के लिए वरदान है, जो भारी धूम्रपान करते हैं, क्योंकि यह कैंसर को बहुत शुरुआती स्टेज में पकड़ सकता है, जब इलाज सबसे ज्यादा प्रभावी होता है।
  • ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy): अगर फेफड़ों से खून आने जैसी समस्या है, तो डॉक्टर एक पतली ट्यूब के जरिए फेफड़ों के अंदर झांककर कारण पता लगाते हैं।

स्मोकिंग छोड़ने के बाद फेफड़ों की रिकवरी

अच्छी खबर यह है कि मानव शरीर में खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता होती है। जैसे ही आप आखिरी सिगरेट पीते हैं, रिकवरी शुरू हो जाती है। चलिए समझते हैं कि सिगरेट छोड़ने पर धीरे-धीरे क्या असर पड़ता है - 

  • 20 मिनट बाद: ब्लड प्रेशर और पल्स सामान्य होने लगती है।
  • 12 घंटे बाद: शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य हो जाता है।
  • 2 सप्ताह से 3 महीने: फेफड़ों का कार्यक्षमता बेहतर होने लगता है और रक्त संचार सुधरता है।
  • 1 से 9 महीने: खांसी और सांस फूलने की समस्या कम हो जाती है। सिलिया दोबारा उगने लगते हैं और फेफड़ों की सफाई शुरू कर देते हैं।
  • 10 साल बाद: फेफड़ों के कैंसर का खतरा धूम्रपान करने वाले की तुलना में लगभग आधा हो जाता है।

फेफड़ों को साफ रखने और स्मोकिंग से बचाव के तरीके

फेफड़ों को स्वस्थ रखने और डिटॉक्स (Detox) करने के लिए आप निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं - 

  • हाइड्रेटेड रहें: खूब पानी पिएं। पानी फेफड़ों में जमा बलगम को पतला करने में मदद करता है।
  • प्राणायाम और व्यायाम: गहरी सांस लेने वाले व्यायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं।
  • एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार: विटामिन सी और ई से भरपूर चीजें (संतरा, आंवला, पालक) फेफड़ों की सूजन कम करने में मदद करती हैं।
  • नियमित चेकअप: भले ही आप स्वस्थ महसूस कर रहे हों, साल में एक बार फेफड़ों की जांच जरूर कराएं। CK Birla Hospitals (CMRI) में हमारे 'लंग हेल्थ चेकअप पैकेज' विशेष रूप से इसी उद्देश्य के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
  • निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT): यदि छोड़ने में दिक्कत हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह से निकोटिन पैच या गम का इस्तेमाल करें।

निष्कर्ष

सांस लेना जीवन का सबसे बुनियादी कार्य है। स्मोकिंग से होने वाले नुकसान केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहते, यह आपके पूरे शरीर को खोखला कर देते हैं। याद रखें, धूम्रपान छोड़ने की कोई उम्र नहीं होती। चाहे आपने 10 साल स्मोकिंग की हो या 40 साल, छोड़ने के बाद सेहत में सुधार निश्चित है।

आपके फेफड़े खुद को ठीक करने के लिए तैयार हैं, बस उन्हें एक मौका दीजिए। यदि आप स्मोकिंग छोड़ना चाहते हैं या फेफड़ों की बीमारियों के लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो आज ही CK Birla Hospitals (CMRI), कोलकाता में हमारे पल्मोनोलॉजी विभाग में संपर्क करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्मोकिंग छोड़ने के बाद फेफड़े पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं?

काफी हद तक सुधार होता है। सूजन कम होती है और सिलिया वापस आते हैं, लेकिन एल्वियोली (Emphysema) को हुआ नुकसान स्थायी हो सकता है। हालांकि, समय के साथ कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।

क्या ई-सिगरेट या वेपिंग भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है?

जी हां, वेपिंग में मौजूद रसायन फेफड़ों में सूजन और 'पॉपकॉर्न लंग' जैसी गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। यह बिल्कुल भी सुरक्षित विकल्प नहीं है।

स्मोकिंग से होने वाली फेफड़ों की बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में कैसे लगे?

लगातार खांसी, सांस फूलना या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। 'लो-डोज सीटी स्कैन' (Low-dose CT scan) शुरुआती जांच के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।

क्या लंबे समय से खांसी या बलगम स्मोकिंग से होने वाली बीमारी का संकेत है?

बिल्कुल, इसे 'स्मोकर्स कफ' कहते हैं। यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या COPD का शुरुआती लक्षण हो सकता है। इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

स्मोकिंग करने वालों को फेफड़ों की जांच कितनी बार करवानी चाहिए?

भारी धूम्रपान करने वालों (विशेषकर 50 वर्ष से अधिक) को साल में कम से कम एक बार फेफड़ों की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

क्या पैसिव स्मोकिंग से भी फेफड़ों को उतना ही नुकसान होता है?

जी हां, सेकंड हैंड स्मोक में भी 7000 से ज्यादा रसायन होते हैं। यह बच्चों और गैर-धूम्रपान करने वालों में अस्थमा, संक्रामक और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

Written and Verified by:

Dr. Raja Dhar

Dr. Raja Dhar

Director & HOD of Pulmonology Department Exp: 31 Yr

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Dr. Raja Dhar is the Director & Head of Pulmonology Dept. at BM Birla Heart Hospital and CMRI Hospital, Kolkata, with over 27 years of experience. He specializes in interstitial lung disease, asthma & allergy, COPD, sleep medicine, advanced lung function services, interventional & diagnostic pulmonology, rare stroke & orphan lung diseases, and all disciplines of respiratory medicine.

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