ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) का कारण, लक्षण और उपचार
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ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) का कारण, लक्षण और उपचार

Pulmonology | by Dr. Raja Dhar on 12/04/2023 | Last Updated : 18/08/2026

Summary

टीबी (Tuberculosis) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाली संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह मुख्य रूप से हवा के जरिए फैलती है, खासकर सक्रिय फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने पर। कमजोर इम्यूनिटी, कुपोषण, मधुमेह और लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहने से टीबी होने का जोखिम बढ़ सकता है।

टीबी (Tuberculosis/क्षय रोग) एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बीमारी सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों जैसे लिम्फ नोड्स, हड्डियों, रीढ़, गुर्दे और मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकती है।

टीबी मुख्य रूप से हवा के माध्यम से फैलती है। लंबे समय तक रहने वाली खांसी, बुखार, रात में पसीना, कमजोरी या बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना महत्वपूर्ण है। सही समय पर निदान और पूरा इलाज कराने पर टीबी ठीक हो सकती है।

क्षय रोग (टीबी) क्या है?

टीबी को अंग्रेजी भाषा में ट्यूबरक्लोसिस कहा जाता है। टीबी एक संक्रामक रोग है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सांस के द्वारा फैलता है। इस रोग के कारण बहुत सारे लक्षण उत्पन्न होते हैं, जिन्हे आप इस ब्लॉग के माध्यम से जानने वाले हैं। जैसा कि हमने आपको पहले बताया है कि यह रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नाम के बैक्टीरिया से फैलता है। टीबी के फैलने के पीछे का मुख्य कारण है हवा। खांसी, छींक, या फिर लार के द्वारा टीबी की समस्या संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। 

इस बैक्टीरिया का मुख्य कार्य हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाना है। यह रोग हमारे शरीर के उन भागों को प्रभावित करता है, जहां खून और ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि टीबी के अधिकतर मामले फेफड़ों में संक्रमण वाले होते हैं। फेफड़ों में टीबी को पल्मोनरी टीबी भी कहा जाता है। 

टीबी के मुख्य कारण क्या हैं?

टीबी का सीधा कारण Mycobacterium tuberculosis बैक्टीरिया से संक्रमण है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है।

जब सक्रिय फेफड़ों या गले की टीबी वाला व्यक्ति खांसता, छींकता, बोलता या गाता है, तो बैक्टीरिया वाले छोटे श्वसन कण हवा में फैल सकते हैं। यदि कोई दूसरा व्यक्ति इन्हें सांस के साथ अंदर लेता है, तो उसे टीबी संक्रमण हो सकता है। बंद और कम हवादार जगहों में लंबे समय तक निकट संपर्क रहने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

टीबी होने का खतरा किन लोगों में अधिक होता है?

टीबी संक्रमण किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में टीबी रोग विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग
  • HIV से संक्रमित व्यक्ति
  • मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति
  • कुपोषण या कम पोषण वाले लोग
  • तंबाकू का सेवन करने वाले लोग
  • ऐसे लोग जो सक्रिय टीबी वाले व्यक्ति के साथ लंबे समय तक निकट संपर्क में रहते हैं
  • भीड़भाड़ वाली या कम हवादार जगहों में लंबे समय तक रहने वाले लोग

टीबी के प्रकार -

कई प्रकार के टीबी रोग एक व्यक्ति को परेशान करते हैं जैसे -

  • लेटेंट टीबी: इस प्रकार के टीबी में बैक्टीरिया शरीर में निष्क्रिय रूप में रहता है, क्योंकि शरीर को मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता इसे सक्रिय नहीं होने देती है। इस स्थिति में टीबी के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन भविष्य में यह सक्रिय हो सकता है, जो बहुत सारी समस्या का कारण बन सकता है। 
  • एक्टिव टीबी: इस प्रकार के टीबी में बैक्टीरिया का निर्माण शरीर के भीतर ही होता है, तथा इसमें रोग के सभी लक्षण दिखाई देते हैं। यह एक संक्रामक प्रकार का रोग है। 
  • पल्मोनरी टीबी: इस प्रकार के टीबी को इस रोग का शुरुआती (प्राथमिक) रूप मान सकते हैं, जो सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिससे लंबे समय तक खांसी की समस्या होती है।
  • एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी: इस प्रकार की टीबी में यह रोग फेफड़ों से अन्य भाग में भी फैल जाता है। फेफड़ों के साथ यह समस्या हड्डी, गुर्दे और लिम्फ नोड्स में भी फैल सकती है। 

टीबी के लक्षण

टीबी रोग के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर में टीबी के जीवाणु कहां बढ़ रहे हैं। सामान्यतः इस रोग के लक्षण अलग होते हैं, लेकिन हड्डी के टीबी के कुछ लक्षण गले की टीबी के लक्षण से अलग होते हैं। आमतौर पर टीबी बैक्टीरिया फेफड़ों (फुफ्फुसीय टीबी) में बढ़ता है। टीबी की स्थिति में निम्नलिखित लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं - 

  • खांसी की समस्या जो 3 सप्ताह या उससे अधिक समय तक बनी रहे।
  • सीने में दर्द होना
  • कफ में खून आना।
  • कमजोरी या थकान।
  • वजन घटना
  • भूख न लगना
  • ठंड लगना
  • बुखार
  • रात में पसीना आना

कई लोगों को गलतफहमी हो जाती है कि महिलाओं में टीबी के लक्षण और पुरुषों में टीबी के लक्षण से अलग होते हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। यदि आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का सामना कर रहे हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि तुरंत चिकित्सा सहायता लें और टीबी जैसी गंभीर समस्या को हराएं। 

टीबी की जांच कैसे होती है?

टीबी की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जाती। डॉक्टर व्यक्ति के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और संभावित संपर्क की जानकारी के आधार पर आवश्यक जांच की सलाह दे सकते हैं।

टीबी की जांच के लिए स्थिति के अनुसार मॉलिक्यूलर टेस्ट, बलगम (sputum) की जांच, छाती की इमेजिंग और अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं। WHO टीबी के लक्षण वाले लोगों में शुरुआती जांच के लिए तेज और अनुशंसित डायग्नोस्टिक टेस्ट को प्राथमिकता देता है।

टीबी का उपचार

टीबी रोग का इलाज टीबी के प्रकार पर निर्भर करता है। यदि आपको लेटेंट टीबी है, तो आपके डॉक्टर जीवाणुओं को मारने के लिए कुछ दवा दे सकते हैं, जिससे संक्रमण सक्रिय न हो। आपको अकेले या संयुक्त रूप से आइसोनियाज़िड, रिफैपेंटाइन या रिफैम्पिन सॉल्ट की दवाएं मिल सकती है। इस प्रकार की दवाओं का एक कोर्स होता है, जिसे पूरा करना बेहद अनिवार्य होता है। यदि आप सक्रिय टीबी के किसी भी लक्षण को खुद में महसूस करते हैं, तो तुरंत अपने पल्मोनोलॉजी डॉक्टर से संपर्क करें और इलाज लें। 

इसके अतिरिक्त डॉक्टर कुछ दवाओं के कॉबिनेशन का भी सुझाव दे सकते हैं। आमतौर पर डॉक्टर एथमब्यूटोल, आइसोनियाज़िड, पाइरैजिनेमाइड और रिफैम्पिन नाम की दवा के कॉम्बिनेशन का उपयोग करते हैं। इस दवा का कोर्स 6 से 12 महीने तक चलता है। वहीं पल्मोनरी और एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मामले में दवा का कोर्स थोड़ा और लंबा हो जाता है। 

यदि आपको किसी भी तरह का संक्रमण है या फिर किसी भी प्रकार की दवाएं आपकी चल रही है, तो इस बारे में पल्मोनोलॉजी डॉक्टर को ज़रूर बताएं। इसके साथ-साथ दवाओं के कोर्स को बिलुक्ल भी न रोकें। यदि आप दवाएं छोड़ देते हैं, तो बैक्टीरिया फिर से सक्रिय हो जाएगा और स्थिति और भी अधिक विकराल रूप ले लेगी।

टीबी से बचाव कैसे करें?

टीबी के इलाज के साथ-साथ बचाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। टीबी के प्रसार को रोकने में मदद के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं - 

  • यदि आपको लेटेंट टीबी है, तो अपनी सभी दवाएं समय पर लें ताकि यह सक्रिय और संक्रामक न हो और आप जल्दी दुरुस्त हो जाएं।
  • एक्टिव टीबी के संबंध में रोगी को स्वयं ही दूसरे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। हंसते, छींकते या खांसते समय अपना मुंह ढक लें। यदि आप किसी से मिलते भी हैं, तो सर्जिकल मास्क ज़रूर लगाएं।
  • यदि आप किसी ऐसी जगह की यात्रा कर रहे हैं, जहां टीबी एक आम रोग है, तो प्रयास करें कि भीड़ भाड़ वाले इलाके से दूरी बनाएं। 
  • अपने खानपान का विशेष ख्याल रखें जैसे - खिचड़ी, दूध, पनीर, ताजे फल एवं सब्जियां, साबुत अनाज और ग्रीन-टी के सेवन को बढ़ावा दें।
  • टीबी की स्थिति में सबसे ज़रूरी है डॉक्टर की बात मानना और अपने इलाज के कोर्स को पूरा करना।

टीबी में खान-पान का क्या महत्व है?

टीबी के दौरान संतुलित और पर्याप्त पोषण शरीर की रिकवरी में मदद कर सकता है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, कैलोरी, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

हालांकि, कोई विशेष भोजन टीबी का इलाज नहीं करता। टीबी का मुख्य उपचार डॉक्टर द्वारा निर्धारित एंटी-टीबी दवाएं हैं।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

यदि खांसी लंबे समय से बनी हुई है या इसके साथ वजन कम होना, बुखार, रात में पसीना, सीने में दर्द या खांसी में खून जैसे लक्षण हैं, तो टीबी की जांच के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

खांसी में खून आना, सांस लेने में गंभीर परेशानी या तेजी से बिगड़ती स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाज से टीबी लगभग हमेशा के लिए ठीक हो सकता है। आमतौर पर एंटीबायोटिक्स का एक कोर्स 6 महीने तक चलता है। कई अलग-अलग एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है, क्योंकि अलग-अलग प्रकार के टीबी कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी होती हैं।

Written and Verified by:

Dr. Raja Dhar

Dr. Raja Dhar

Director & HOD of Pulmonology Department Exp: 32 Yr

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Dr. Raja Dhar is the Director & Head of Pulmonology Dept. at BM Birla Heart Hospital and CMRI Hospital, Kolkata, with over 27 years of experience. He specializes in interstitial lung disease, asthma & allergy, COPD, sleep medicine, advanced lung function services, interventional & diagnostic pulmonology, rare stroke & orphan lung diseases, and all disciplines of respiratory medicine.

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