क्या बार-बार चीजें भूलना अल्जाइमर का संकेत है? जानें 10 चेतावनी संकेत
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क्या बार-बार चीजें भूलना अल्जाइमर का संकेत है? जानें 10 चेतावनी संकेत

Summary

  • हर बार भूलना अल्जाइमर नहीं होता, ज्यादातर मामले तनाव, नींद की कमी या उम्र से जुड़े सामान्य बदलाव होते हैं
  • अल्जाइमर में भूली हुई बात दोबारा याद नहीं आती और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं
  • अल्जाइमर एसोसिएशन के अनुसार 10 शुरुआती चेतावनी संकेत हैं, जिनमें से 2-3 का लगातार दिखना जांच की वजह हो सकता है
  • हृदय स्वास्थ्य और दिमागी सेहत का सीधा संबंध है, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल अल्जाइमर का खतरा बढ़ाते हैं
  • समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से मिलना और सही जांच कराना बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है

चाबी कहाँ है? ये किसी फेमस मूवी का डायलॉग नहीं है। यदि नाम याद रखने में समस्या होना या मीटिंग से निकलते समय रास्ता भूल जाने जैसी स्थितियाँ बार-बार बनती है, तो ये एक अनचाहे और अनकहे डर की तरफ इशारा कर सकता है और वह है - अल्जाइमर।

यह सवाल आज बहुत सारे घरों में चुपचाप पूछा जा रहा है, पर खुलकर बात कोई नहीं करता। भारत में उम्रदराज आबादी तेजी से बढ़ रही है, और उसी के साथ भूलने की बीमारी और डिमेंशिया से जुड़े मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है। सबसे मुश्किल बात यह है कि शुरुआती लक्षणों को अक्सर "उम्र का असर" समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि सही समय पर पहचान और इलाज से मरीज और परिवार दोनों की जिंदगी बेहतर बनाई जा सकती है। अगर आप या आपके घर में कोई बुजुर्ग बार-बार भूलने की शिकायत कर रहा है, तो इसे टालें नहीं। हमारे अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही जांच के साथ इस चिंता को दूर करें।

क्या बार-बार चीजें भूलना हमेशा अल्जाइमर का संकेत होता है?

सीधा जवाब है: नहीं। रोज की भागदौड़ में दिमाग पर काम, नींद की कमी, तनाव और लगातार मोबाइल स्क्रीन देखने का दबाव पड़ता रहता है। इसका सीधा असर याददाश्त पर पड़ता है। जब दिमाग एक साथ कई काम करने की कोशिश करता है, तो कुछ जानकारी ठीक से दर्ज ही नहीं हो पाती और थोड़ी देर के लिए भूल जाती है। यही वजह है कि "याददाश्त कमजोर होना" शब्द सुनते ही घबराने की ज़रूरत नहीं है।

असली फर्क इस बात में है कि भूली हुई चीज दोबारा याद आती है या नहीं। अगर आप कुछ भूलकर बाद में खुद-ब-खुद याद कर लेते हैं, तो यह सामान्य बात है। लेकिन अगर वही जानकारी दोबारा याद ही नहीं आती, आप एक ही सवाल बार-बार पूछते हैं या रोजमर्रा के काम जैसे बिल भरना, खाना बनाना या रास्ता पहचानना मुश्किल होने लगे, तो यह सिर्फ याददाश्त कमजोर होना नहीं बल्कि अल्जाइमर रोग के लक्षण की तरफ इशारा कर सकता है।

सामान्य उम्र से जुड़ी भूलने की समस्या और अल्जाइमर में क्या अंतर है?

उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की गति थोड़ी धीमी होना स्वाभाविक है। कभी-कभार नाम भूल जाना, चश्मा कहां रखा यह याद न आना, ये सामान्य उम्र से जुड़े बदलाव माने जाते हैं। ऐसे मामलों में व्यक्ति खुद अपनी भूल को पहचान लेता है और थोड़ी देर बाद उसे सुधार भी लेता है।

वहीं अल्जाइमर रोग के लक्षण इससे कहीं आगे जाते हैं। इसमें व्यक्ति को अपनी भूल का एहसास ही नहीं होता, वह जगह और समय को लेकर उलझन में रहने लगता है, फैसले लेने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है और रोजमर्रा के सामान्य काम भी चुनौतीपूर्ण लगने लगते हैं। एक आसान तरीका समझने का यह है कि सामान्य भूलने में जानकारी दिमाग में मौजूद रहती है, बस समय पर सामने नहीं आती, जबकि अल्जाइमर में मस्तिष्क की कोशिकाएं वाकई क्षतिग्रस्त होने लगती है, खासकर हिप्पोकैंपस नामक हिस्सा, जो सीखने और याद रखने का काम करता है।

अल्जाइमर के शुरुआती 10 चेतावनी संकेत कौन-से हैं?

अल्जाइमर एसोसिएशन द्वारा बताए गए इन 10 संकेतों को समझना हर परिवार के लिए जरूरी है, ताकि सही समय पर मदद ली जा सके - 

अल्जाइमर के शुरुआती 10 चेतावनी संकेत

  1. रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली याददाश्त कमजोर होना - हाल की जानकारी बार-बार भूलना और उसी सवाल को दोहराना।
  2. योजना बनाने और समस्या सुलझाने में दिक्कत - महीने का बजट या किसी नुस्खे को फॉलो करने में उलझन होना।
  3. परिचित काम पूरे करने में परेशानी - रोज का रास्ता भूल जाना या घर के सामान्य काम में गड़बड़ी होना।
  4. समय और जगह को लेकर भ्रम - आज कौन-सा दिन है, यह याद न रहना।
  5. देखने और दूरी समझने में दिक्कत - सीढ़ियों पर चलते वक्त संतुलन बिगड़ना।
  6. बोलने-लिखने में नए शब्दों की समस्या - सही शब्द याद न आना, बातचीत बीच में छूट जाना।
  7. सामान गलत जगह रखना और ढूंढ न पाना - चाबी या चश्मा जैसी चीज़ें बेतुकी जगहों पर रखकर भूल जाना। 
  8. फैसले लेने की क्षमता कमजोर होना - पैसों या सेहत से जुड़े गलत फैसले लेना।
  9. काम और सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना - पहले जो पसंद था, अब उसमें रुचि खत्म होना
  10. मूड और स्वभाव में बदलाव - बेवजह चिड़चिड़ापन, शक करना या डर लगना

यदि परिवार में किसी को इनमें से दो या तीन संकेत लगातार कई महीनों तक दिखें, तो इसे नजरअंदाज करने की बजाय न्यूरोलॉजिस्ट से मिलना बेहतर रहता है।

अल्जाइमर की जांच कैसे की जाती है?

अल्जाइमर की पहचान के लिए कोई एक टेस्ट काफी नहीं होता, डॉक्टर कई तरीकों को मिलाकर तस्वीर साफ करते हैं। सबसे पहले मरीज़ और परिवार से विस्तार से बातचीत की जाती है, ताकि लक्षणों का पैटर्न समझा जा सके। इसके बाद कॉग्निटिव टेस्ट यानी याददाश्त, ध्यान और सोचने की क्षमता जांचने वाले सवाल पूछे जाते हैं।

अल्जाइमर की जांच के तरीके

  • MRI या CT स्कैन: दिमाग की बनावट और संरचना में आए बदलावों को देखने के लिए किया जाता है।
  • ब्लड टेस्ट:विटामिन B12 की कमी या थायराइड जैसे अन्य कारणों को खारिज करने के लिए, जो याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं।
  • PET स्कैन और स्पाइनल फ्लूइड टेस्ट: दिमाग में जमा होने वाले असामान्य प्रोटीन की पहचान करने के लिए किया जाता है।
  • सुविधाजनक जांच: कोलकाता के CMRI जैसे बड़े अस्पतालों में ये सभी जांचें एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।

दिल और दिमाग का संबंध

  • लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल रहने पर दिमाग तक खून का बहाव कम होने लगता है।
  • ब्लड सप्लाई प्रभावित होने से अल्जाइमर और अन्य डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है।
  • दिल की सेहत का ध्यान रखना सीधे तौर पर दिमाग की सेहत को बचाने जैसा है।

याददाश्त कमजोर होने पर कब न्यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए?

अगर भूलने की समस्या इतनी बढ़ जाए कि रोज़ के काम, नौकरी या रिश्तों पर असर पड़ने लगे, तो देर न करें। खासकर तब जब परिवार के लोग खुद बदलाव महसूस करने लगें, भले ही मरीज को खुद इसका एहसास न हो। बार-बार रास्ता भूलना, पैसों के हिसाब में गड़बड़ी करना, जानी-पहचानी चीजों को पहचानने में दिक्कत होना या अचानक स्वभाव में बदलाव आना, ये सभी संकेत हैं कि अब विशेषज्ञ की राय लेने का समय आ गया है।

याददाश्त कमजोर होने का कारण हमेशा अल्जाइमर नहीं होता, कई बार यह नींद की कमी, डिप्रेशन, विटामिन की कमी या थायराइड जैसी वजहों से भी होता है, और इनका इलाज संभव है। यही वजह है कि सही जांच के बिना खुद से कोई नतीजा निकालना ठीक नहीं। जितनी जल्दी सही वजह पता चलेगी, इलाज की दिशा भी उतनी ही साफ होगी।

निष्कर्ष

बार-बार चीजें भूलना डरावना लग सकता है, लेकिन हर बार इसका मतलब अल्जाइमर नहीं होता। ज्यादातर मामलों में यह तनाव, नींद की कमी या जीवनशैली से जुड़ा होता है, जिसे सुधारा जा सकता है। फिर भी अगर ऊपर बताए गए 10 चेतावनी संकेतों में से कुछ लगातार दिखें और रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं। सही समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से मिलना, जरूरी जांच कराना और दिल व दिमाग दोनों की सेहत का ध्यान रखना मरीज और परिवार दोनों के लिए बेहतर भविष्य की नींव रखता है। यह विषय भले ही घरों में खुलकर न बोला जाता हो, पर जागरूकता ही इस चुप्पी को तोड़ने का पहला कदम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

हां, थोड़ी-बहुत भूलने की समस्या उम्र के साथ सामान्य है। जैसे नाम या चीजें रखने की जगह भूल जाना, बशर्ते बाद में याद आ जाए और रोजमर्रा के काम प्रभावित न हों।

Written and Verified by:

Dr. Pahari Ghosh

Dr. Pahari Ghosh

Senior Consultant Neurologist Exp: 52 Yr

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Prof. Dr. Pahari Ghosh is a Senior Consultant Neurologist in the Neuro Sciences Department at CMRI, Kolkata with over 40 years of experience. He specializes in general neurology, stroke, multiple sclerosis, and epilepsy.

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