छोटे बच्चों में बार-बार चक्कर: जानें दिल का चेतावनी संकेत है
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छोटे बच्चों में बार-बार चक्कर: जानें दिल का चेतावनी संकेत है

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Summary

अक्सर छोटे बच्चों में बार-बार चक्कर आने की स्थिति को एक साधारण स्थिति मानी जाती है, जो अक्सर डिहाइड्रेशन या भूख के कारण उत्पन्न होती है, लेकिन व्यायाम या कोई तीव्र गति के कार्य के दौरान बेहोशी, सीने में दर्द, या असामान्य तेज धड़कन दिल की गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकती है, इसलिए इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

यदि आपका बच्चा कहे कि "मुझे चक्कर आ रहा हैं, " तो भूल से भी इसे हल्के में न लें। यह सिर्फ थकान और कमजोरी के लक्षण नहीं है, यह इससे बहुत बड़ी समस्या है। यदि आप अपने बच्चे के स्वास्थ्य को अच्छे से समझने का प्रयास कर रहे हैं, तो सबसे पहले जानना होगा कि बच्चों को चक्कर क्यों आते हैं। हम सभी यह जानते हैं कि चक्कर आने के अधिकांश मामलों में इसके कारण साधारण ही होते हैं, लेकिन, कुछ मामलों में, बार बार चक्कर आने के कारण बच्चे के दिल में छिपी हुई किसी समस्या हो सकती है। रिसर्च के अनुसार हर 1000 नवजातों में से लगभग 8 से 10 बच्चे जन्मजात हृदय दोष - सीएचडी (Congenital heart defects) के साथ पैदा होते हैं।

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छोटे बच्चों में बार-बार चक्कर का क्या मतलब हो सकता है?

छोटे बच्चों को चक्कर आना या बेहोश हो जाना मुख्य रूप से उनके मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में अस्थायी प्रवाह को दर्शाता है। इसे मेडिकल भाषा में वेसोवागल सिंकोप (Vasovagal syncope) कहा जाता है, जो बच्चों में बेहोशी का सबसे आम और आमतौर पर हानिरहित कारण होता है।

चक्कर आने के सामान्य कारण

बच्चों में चक्कर आने के सामान्य कारणों को नीचे दिया गया है - 

  • डिहाइड्रेशन (Dehydration): पर्याप्त पानी न पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, जिससे चक्कर आने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 
  • अचानक खड़े होना: यदि आप लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं और फिर तेज़ी से उठते हैं, तो भी चक्कर आ सकता है, जिसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है। लंबे समय तक खड़े रहना या तेज भावनात्मक तनाव या भूख लगना भी बच्चों में चक्कर आने का एक मुख्य कारण साबित हो सकता है।

चक्कर आने के गंभीर (हार्ट-रिलेटेड) कारण

यदि आपके बच्चे को किसी शारीरिक गतिविधि के दौरान चक्कर आ जाए या वह बेहोश हो जाए, वह भी बिना किसी स्पष्ट ट्रिगर के तो यह एक गंभीर चेतावनी हो सकती है, जिस पर आपको ध्यान अवश्य देना चाहिए। यह संकेत दे सकता है कि दिल की संरचना या विद्युत प्रणाली (Electrical System) में कोई समस्या है, जैसे कि अतालता (Arrhythmia) या जन्मजात हृदय दोष। ऐसे में बच्चों में बेहोशी जैसे लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए और आवश्यकता के अनुसार सारे टेस्ट कराने चाहिए। 

बच्चों में दिल की समस्या के शुरुआती संकेत - हार्ट प्रॉब्लम के लक्षण

बच्चों में हृदय संबंधी दिल की बीमारी के कारण होने वाले चक्कर और अन्य लक्षण अक्सर साधारण समस्याओं से अलग होते हैं। चलिए सभी लक्षणों को समझते हैं - 

  • व्यायाम या तेज गतिविधि के दौरान बेहोशी (Fainting during Exertion): यह सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक हार्ट प्रॉब्लम के लक्षणों में से एक है। यदि आपका बच्चा खेलने, दौड़ने या किसी गेम के दौरान बेहोश हो जाता है, तो यह दिल से संबंधित समस्या का स्पष्ट संकेत हो सकता है। यह वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया या हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM) जैसी जानलेवा स्थितियों का संकेत हो सकता है। यह बेहोशी के प्रकार सामान्य वेसोवागल सिंकोप से बिल्कुल अलग है।
  • अस्पष्टीकृत या तेज धड़कन (Palpitations): यदि आपका बच्चा शिकायत करता है कि उसका दिल अचानक से बहुत तेज धड़क रहा है और यह स्थिति आराम करते समय या बिना किसी स्पष्ट कारण के उत्पन्न होती है, तो यह अतालता/अर्थमिया (Arrhythmia) का संकेत हो सकता है। यह तेज धड़कन की स्थिति अक्सर चक्कर आने या छाती में दर्द से जुड़ी होता है।
  • असामान्य थकान और कमजोरी के लक्षण: यदि आपके बच्चे में लगातार और असामान्य थकान और कमजोरी के लक्षण दिखते हैं, जैसे कि वह अपने साथियों के साथ खेलने में असमर्थ हैं, जल्दी थक जाते हैं, छोटे बच्चों को दूध पीते समय या खेलते समय ज़्यादा पसीना आता है, सांस फूलना (शारीरिक प्रयास के बिना भी) या दूध पीते समय सांस का तेज़ चलना, तो यह लक्षण इस बात का संकेत देता है कि बच्चे का दिल पर्याप्त कुशलता से काम नहीं कर रहा है।
  • छाती में दर्द जो व्यायाम के साथ बिगड़ता है: सीने में दर्द जो अधिक शारीरिक परिश्रम के साथ होता है और जिसके साथ चक्कर या बेहोशी की स्थिति जुड़ी हो, वह हृदय संबंधी चिंता का विषय हो सकता है और इसके लिए तुरंत जांच की आवश्यकता होती है।
  • फैमिली मेडिकल हिस्ट्री: यदि परिवार में किसी भी करीबी रिश्तेदार को 50 वर्ष की आयु से पहले अचानक कार्डियक डेथ हुई है, या उन्हें जन्मजात हृदय रोग, या हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ी है, तो आपके बच्चे में भी इस स्थिति का जोखिम बढ़ जाता है।

चक्कर और कमजोरी के अन्य कारण

सभी बार-बार चक्कर आने के कारण हृदय से संबंधित नहीं होते हैं। अन्य सामान्य कारण भी इसमें शामिल होते हैं जैसे कि - 

  • डिहाइड्रेशन, भूख और नींद की कमी: खेलकूद या गर्मी में पर्याप्त पानी न पीने से ब्लड प्रेशर गिर जाता है। भोजन छोड़ना या पर्याप्त भोजन न करने से ब्लड शुगर गिरता है। अपर्याप्त नींद, अत्यधिक भूख या भोजन छोड़ने के कारण भी बच्चों को चक्कर महसूस हो सकता है।
  • खून की कमी (Anemia): जब शरीर में हीमोग्लोबिन या लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है, तो बच्चों को चक्कर आना और थकान और कमजोरी के लक्षण दिखते हैं, क्योंकि मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है।
  • वर्टिगो और कान की समस्याएं: वर्टिगो एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे को लगता है कि "कमरा घूम रहा है"। यह चक्कर आंतरिक कान (Inner Ear) की समस्याओं, संक्रमण या गति की बीमारी के कारण हो सकती है। इसमें संतुलन बनाए रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
  • दवाएं या माइग्रेन: कुछ दवाएं (जैसे कि खांसी या एलर्जी की) साइड इफेक्ट के रूप में चक्कर पैदा कर सकती हैं। बच्चों में माइग्रेन, खासकर वेस्टिबुलर माइग्रेन, भी चक्कर आने का कारण बन सकता है।

चक्कर आने के कारण और घरेलू उपाय

यदि चक्कर आने के कारण सामान्य है, तो यह चक्कर आने के कारण और घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं - 

  • तरल पदार्थ और नमक का सेवन: डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की बहुत आवश्यकता पड़ती है। डॉक्टर की सलाह पर नमक के सेवन को बढ़ाएं।
  • धीरे-धीरे उठना: अचानक खड़े होने से बचें, क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
  • तुरंत लेट जाएं: जैसे ही थकान और कमजोरी के लक्षण या चक्कर महसूस हो, तुरंत लेट जाएं और पैरों को ऊपर उठाएं और कुछ समय तक प्रतीक्षा करें।

यदि घरेलू उपाय अप्रभावी हो या लक्षण गंभीर हो, तो डॉक्टर अन्य कारणों के आधार पर उपचार कर सकते हैं - 

  • दवाइयां: सबसे पहले दवाएं ही दी जाती हैं। वर्टिगो जैसी स्थिति के लिए वेस्टिबुलर सप्रेशन (Vestibular suppressant) जैसी दवाएं दी जाती हैं। लेकिन कुछ समय में स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं होता है। यदि कारण एनीमिया (खून की कमी), संक्रमण या माइग्रेन है, तो उस विशिष्ट स्थिति का इलाज किया जा सकता है।
  • शारीरिक थेरेपी (Physical Therapy): आंतरिक कान से संबंधित वर्टीगो के लिए डॉक्टर 'वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (VRT)' की सलाह देते हैं।
  • आहार और जीवनशैली में बदलाव: ब्लड शुगर को नियंत्रित करने या ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने के लिए आहार विशेषज्ञों से परामर्श बहुत आवश्यक होता है।
  • हृदय संबंधी उपचार (Cardiac Care): यदि डॉक्टर को हृदय संबंधी समस्या (Heart Condition) का संदेह होता है, तो वह कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) से परामर्श लेने की सलाह देंगे। हृदय की अनियमित धड़कन या संरचनात्मक दोषों का इलाज दवा, सर्जरी या विशेष प्रक्रियाओं (जैसे पेसमेकर) द्वारा किया जा सकता है। किस दवा का उपयोग होगा, इसका निर्णय कुछ जांच के आधार पर किया जा सकता है।

बच्चों में हार्ट-रिलेटेड चक्कर की जांच और टेस्ट

यदि डॉक्टर को हृदय संबंधी समस्या का संदेह है, तो वह निम्नलिखित जांच का सुझाव दे सकते हैं - 

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG/EKG): दिल की विद्युत गतिविधि रिकॉर्ड करने के लिए इस टेस्ट का सुझाव देते हैं।
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): दिल की संरचना और कार्य की विस्तृत छवि के लिए डॉक्टर इस टेस्ट को सुझाते हैं।
  • होल्टर मॉनिटर: 24 घंटों तक दिल की धड़कन रिकॉर्ड करने के लिए यह टेस्ट आवश्यक होता है।
  • एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट: यह देखने के लिए कि तीव्र गति की गतिविधि के दौरान दिल कैसे प्रतिक्रिया करता है हमेशा यह टेस्ट कारगर साबित होता है।

बाल रोग विशेषज्ञ से कब संपर्क करें?

निम्न स्थितियों में बिना देर किए बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज करें - 

  • बेहोशी जो तेज गति वाले व्यायाम या खेल के दौरान हुई हो।
  • अधिक चक्कर आना, जिसके कारण बच्चा चल न पाए।

इसके अतिरिक्त यदि आपको निम्न स्थितियां बनी रहती हैं, तो आपको हर कुछ समय में डॉक्टर से मिलना चाहिए और इलाज को जारी रखना चाहिए - 

  • बार-बार चक्कर आए जो तीन दिन से अधिक समय तक बना रहे।
  • बच्चों को चक्कर आना एक लगातार समस्या बन जाए।

निष्कर्ष

छोटे बच्चों को चक्कर आना एक जटिल लक्षण हो सकता है, जिसका कारण डिहाइड्रेशन जैसी स्थिति हो सकती है, लेकिन लगातार चक्कर आने की समस्या को नजरअंदाज न करें। माता-पिता के रूप में, आपका भावनात्मक अंतर्ज्ञान अक्सर आपका सबसे अच्छा मार्गदर्शक होता है। यदि आपके बच्चे में थकान और कमजोरी के लक्षण या चक्कर बार-बार आते हैं, और खासकर अगर यह लक्षण शारीरिक परिश्रम से जुड़े हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें, और तुरंत परामर्श लें।

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

कौन-से अन्य लक्षण बच्चों में हार्ट रोग का संकेत देते हैं?

शिशुओं में दूध पीते समय पसीना आना, नीले होंठ या नाखून, और शारीरिक परिश्रम पर सांस फूलना जैसे लक्षण बच्चों में गंभीर हार्ट प्रॉब्लम के लक्षण हो सकते हैं।

बार-बार चक्कर आने पर क्या घर पर उपाय किए जा सकते हैं?

डीहाइड्रेशन के लिए तरल पदार्थ और नमक का सेवन बढ़ाएं। चक्कर आने पर बच्चे को तुरंत लिटा दें और उनके पैरों को थोड़ा ऊपर उठाएं ताकि मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बहाल हो सके।

क्या चक्कर केवल नींद या भूख की वजह से भी हो सकता है?

हां, कम नींद, खाने में अंतराल या भोजन छोड़ने के कारण होने वाले लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) चक्कर आने के कारण हो सकते हैं, जो आमतौर पर कुछ देर में ठीक हो जाता है।

क्या बार-बार चक्कर आने पर कोई खास टेस्ट या जांच करानी चाहिए?

यदि चक्कर व्यायाम से संबंधित है या बेहोशी होती है, तो डॉक्टर ECG, इकोकार्डियोग्राम, या होल्टर मॉनिटर जैसे खास टेस्ट की सलाह दी जा सकती है, ताकि दिल की बीमारी को नकारा जा सके।

क्या सांस फूलना भी हार्ट रोग का संकेत है?

हां, बिना किसी प्रयास के सांस फूलना (खासकर छोटे बच्चों में खाते समय) एक महत्वपूर्ण हार्ट प्रॉब्लम का लक्षण है, क्योंकि यह दिल की विफलता (Heart Failure) का संकेत दे सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Mahua Roy

Dr. Mahua Roy

Consultant Exp: 24 Yr

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Dr. Mahua Roy is an accomplished Paediatric Cardiologist with over two decades of experience in paediatric medicine and cardiac care.

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