
एक छोटे बच्चे की किलकारी आपके परिवार को खुशियों में सराबोर कर सकती है। लेकिन कभी-कभी, इस खुशी के बीच कुछ ऐसी बारीक आहटें छिपी होती हैं, जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी होता है। क्या आपने कभी गौर किया है कि आपका बच्चा दूध पीते हुए बहुत जल्दी थक तो नहीं जाता? क्या उसकी सांसें बाकी बच्चों के मुकाबले कुछ ज्यादा ही तेज चलती हैं?
दिल की धड़कन ही जीवन का आधार है, और जब बात एक नवजात की हो, तो यह और भी संवेदनशील हो जाती है। ऊपर बताए गए लक्षण जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) की तरफ इशारा कर सकते हैं, जिसके साथ कई बच्चे जन्म लेते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, विशेषकर हार्ट स्कैन और एडवांस हार्ट टेस्ट की मदद से, अब इन समस्याओं का समाधान समय रहते संभव है। इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि वह कौन से लक्षण हैं, जिन्हें आपको कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, ताकि आपके बच्चे का नन्हा दिल हमेशा सुरक्षित रहे। यदि कोई समस्या दिखे तो बिना देर किए बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
जब हम 'स्पेशल हार्ट स्कैन' की बात करते हैं, तो मुख्य रूप से हमारा अर्थ 'इकोकार्डियोग्राम' (Echocardiogram) या गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले फीटल इको टेस्ट से होता है। यह साधारण अल्ट्रासाउंड से कहीं अधिक एडवांस होता है। यह एक ऐसी इमेजिंग तकनीक है, जो ध्वनि तरंगों (Sound waves) का उपयोग करके बच्चे के दिल की संरचना और उसके काम करने के तरीके की स्पष्ट तस्वीर दिखाता है।
सी.के. बिरला हॉस्पिटल (BM Birla) के विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में दिल की बीमारी का पता लगाने के लिए यह सबसे सटीक तरीका है। यह स्कैन डॉक्टर को यह देखने में मदद करता है कि दिल के वाल्व सही तरह से खुल रहे हैं या नहीं, रक्त का प्रवाह सही दिशा में है या कहीं बच्चे के दिल में छेद के लक्षण तो नजर नहीं आ रहे हैं। यदि प्रेगनेंसी के 18वें से 24वें सप्ताह के बीच हार्ट जांच की जाए, तो जन्म से पहले ही कई जटिलताओं को सुलझाया जा सकता है।
इन 5 मुख्य लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए -
कभी-कभी लक्षण जन्म के बाद दिखते हैं, लेकिन कुछ जोखिम कारक प्रेगनेंसी के दौरान ही यह संकेत दे देते हैं कि शिशु को फीटल इको टेस्ट की आवश्यकता हो सकती है। एक बड़ी रिसर्च फर्म के रिसर्च और आंकड़ों के अनुसार, यदि नीचे दी गई स्थितियां हैं, तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए जैसे कि -
सी.के. बिरला हॉस्पिटल्स में उपलब्ध एडवांस डायग्नोस्टिक सुविधाएं ऐसे मामलों में शुरुआती पहचान (Early Diagnosis) में मदद करती हैं, जो सफल इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है। आपको समझना होगा कि जन्मजात हृदय रोगों (CHD) के समय पर इलाज से 90% से अधिक बच्चों को पूरी तरह स्वस्थ किया जा सकता है। देरी केवल जानकारी के अभाव में होती है। इसीलिए बच्चों में दिल की बीमारी को लेकर जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
यदि आपको ऊपर बताए गए संकेतों में से एक भी नज़र आता है, तो इंतजार करने की बजाए जल्द से जल्द कदम उठाएं। निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत बाल हृदय रोग विशेषज्ञ (Pediatric Cardiologist) से संपर्क करें -
आपके बच्चे का स्वास्थ्य आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बच्चों में दिल की बीमारी का नाम सुनकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन आज की तकनीक और विशेषज्ञों की टीम के साथ, यह अब कोई लाइलाज समस्या नहीं रही। हार्ट स्कैन, हार्ट जांच, और फीटल इको टेस्ट जैसे उपकरण माता-पिता को वह मानसिक शांति देते हैं, जिसकी उन्हें जरूरत होती है।
याद रखें, एक जागरूक माता-पिता ही बच्चे का सबसे अच्छा रक्षक होता है। यदि आप अपने शिशु में कोई भी असामान्य लक्षण देखते हैं, तो विशेषज्ञों से परामर्श लें। सी.के. बिड़ला हॉस्पिटल्स (BM Birla Hospital) जैसे संस्थानों में न केवल आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, बल्कि वहां का मानवीय दृष्टिकोण और मरीजों की देखभाल का अनुभव आपकी इस कठिन यात्रा को आसान बना सकता है।
अपने बच्चे के नन्हे दिल को सुरक्षा का कवच दें और उसे एक स्वस्थ कल की ओर ले जाएं।
यह एक विशेष अल्ट्रासाउंड है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की संरचना और कार्यप्रणाली की जांच करता है। यह साधारण स्कैन से अधिक विस्तृत होता है और हृदय दोषों की सटीक पहचान करता है।
आमतौर पर यह स्कैन गर्भावस्था के 18वें से 24वें सप्ताह के बीच किया जाता है। यदि मां को डायबिटीज है या परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास है, तो डॉक्टर इसे अनिवार्य बताते हैं।
नहीं, सभी को इसकी जरूरत नहीं होती। लेकिन यदि डॉक्टर को दिल की धड़कन में कोई असामान्यता महसूस होती है या बच्चा नीला पड़ रहा है, तो इसकी सलाह दी जाती है।
हां, इसे सायनोसिस कहते हैं। यह रक्त में ऑक्सीजन की कमी को दर्शाता है, जो अक्सर दिल में छेद या रक्त वाहिकाओं की गड़बड़ी के कारण होता है।
यदि शिशु को सांस लेने में दिक्कत हो, वह दूध पीते समय बहुत थकता हो, या उसका वजन ठीक से न बढ़ रहा हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
आजकल कई तरह के छेद (जैसे ASD/VSD) को 'हार्ट स्कैन' की मदद से पहचान कर कैथेटर आधारित तकनीक (बिना चीरा लगाए) से बंद किया जा सकता है, जो बहुत सुरक्षित है।
Written and Verified by:

Dr. Madhurima Ghosh specializes in complex congenital cardiac malformations and trans-catheter cardiac interventions in children. Awarded the Presidential Gold Medal in Paediatric Cardiology and certified by Sick Kids, Toronto.
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