
शादी की तैयारियों की लिस्ट देखें तो उसमें वेन्यू बुकिंग, कपड़े, ज्वेलरी और मेहमानों की सूची सबसे ऊपर होती है, लेकिन एक चीज जो अक्सर इस लिस्ट में सबसे नीचे या बिल्कुल छूट जाती है, वह है दोनों पार्टनर की सेहत की जांच। हम शादी से पहले सारी पूछताछ कर लेते है कि लड़का या लड़की क्या करते हैं, और क्या दोनों में ही कोई बुरी आदते तो नहीं है। लेकिन इन सभी कार्यों में हम अक्सर भूल जाते हैं कि शादी सिर्फ दो दिलों का नहीं, दो सेहत, दो फैमिली हिस्ट्री और आने वाली पीढ़ी का भी मिलन है।
प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप को शक या डर की नजर से देखने की बजाय, इसे एक-दूसरे की सेहत को लेकर सम्मान और जिम्मेदारी दिखाने के तरीके के रूप में देखा जाना चाहिए। यह जांच न सिर्फ आज की सेहत के बारे में बताती है, बल्कि आने वाले कल की तैयारी में भी मदद करती है। अगर आप या आपका होने वाला जीवनसाथी शादी की तैयारी में हैं, तो कोलकाता में हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलकर एक व्यापक प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप बुक करें और अपने रिश्ते की शुरुआत भरोसे और स्पष्टता के साथ करें।
प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप का मकसद किसी को "पास" या "फेल" करना नहीं, बल्कि दोनों पार्टनर को अपनी और एक-दूसरे की सेहत के बारे में पूरी जानकारी देना है। भारत जैसे देश में जहां थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी जेनेटिक रोग काफी आम है, वहां हर साल कई बच्चे ऐसी स्थितियों के साथ जन्म लेते हैं, जिन्हें सही समय पर जांच से रोका जा सकता था। कई मामलों में माता-पिता को खुद पता ही नहीं होता कि वे किसी बीमारी के "कैरियर" हैं, क्योंकि उनमें कोई लक्षण नजर ही नहीं आते।
इसके अतिरिक्त, यह जांच संक्रामक बीमारियों जैसे कि HIV और हेपेटाइटिस से जुड़ी अनजानी स्थिति को भी सामने लाती है, जिससे दोनों पार्टनर समय पर सही इलाज और सावधानी अपना सकें। यह सिर्फ मेडिकल जरूरत नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और पारदर्शी रिश्ते की नींव रखने का जरिया भी है।
कुछ टेस्ट दोनों पार्टनर के लिए समान रूप से जरूरी है, जबकि कुछ महिला और पुरुष के शरीर की अलग जरूरतों के अनुसार अलग होते हैं।

यह सवाल अक्सर असहज महसूस होता है, लेकिन इसका जवाब बेहद जरूरी है। फर्टिलिटी टेस्ट हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं, लेकिन अगर परिवार में पहले से बांझपन, बार-बार गर्भपात, कैंसर या पीसीओएस जैसी समस्याएं रही हों, तो शादी से पहले जांच करवाना भविष्य की योजना बनाने में काफी मदद करता है।
जेनेटिक टेस्ट खासतौर पर उन जोड़ों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है, जिनके परिवार में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया या कोई अन्य अनुवांशिक बीमारी का इतिहास रहा हो। कुछ समुदायों में जहां सगोत्र या करीबी रिश्तेदारी में शादी होती है, वहां जेनेटिक जांच की भूमिका और भी बढ़ जाती है। इन जांचों से यह पता चलता है कि दोनों पार्टनर एक ही जीन्स के कैरियर तो नहीं, जिससे भविष्य में संतान को होने वाले खतरे को समय रहते समझा और मैनेज किया जा सके।
रिपोर्ट में आए आंकड़े और मेडिकल शब्द अक्सर आम लोगों के लिए उलझन भरे हो सकते हैं, इसलिए कभी भी सिर्फ इंटरनेट पर देखकर नतीजों की व्याख्या नहीं करनी चाहिए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि डॉक्टरों ने इन सभी आंकड़ों और मेडिकल शब्दों की पढ़ाई के लिए अपने जीवन के 10 साल लगाए हैं और उन्हें आप सिर्फ 10 मिनट में गूगल से नहीं पढ़ सकते हैं।
अगर किसी टेस्ट में कोई असामान्य नतीजा आता है, जैसे थैलेसीमिया माइनर या कोई संक्रामक बीमारी, तो घबराने की बजाय सीधे विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। एक अनुभवी डॉक्टर न सिर्फ रिपोर्ट को सही तरीके से समझाता है, बल्कि यह भी बताता है कि आगे क्या कदम उठाने चाहिए, चाहे वह अतिरिक्त जांच हो, इलाज हो या जेनेटिक काउंसलिंग।
यह भी ध्यान रखें कि किसी एक टेस्ट का असामान्य आना शादी न करने की वजह नहीं होता, बल्कि यह सही जानकारी के साथ आगे बढ़ने और जरूरी सावधानियां अपनाने का मौका देता है।
सिर्फ टेस्ट करवा लेना काफी नहीं, बल्कि शादी से पहले और बाद दोनों समय स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी है -
ज्यादातर लोग प्री-मैरिटल चेकअप को सिर्फ फर्टिलिटी और जेनेटिक बीमारियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन दिल की सेहत की बेसलाइन जांच को भी इसमें शामिल करना उतना ही जरूरी है। अगर परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक, अनियमित दिल की धड़कन या अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी घटना हुई हो, तो यह जानकारी छुपाने या नजरअंदाज करने वाली नहीं, बल्कि डॉक्टर से जरूर साझा करने वाली है। कुछ दिल की बीमारियां अनुवांशिक होती हैं और परिवार की कई पीढ़ियों में देखी जा सकती हैं, ऐसे में एक साधारण ECG और ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल की बेसलाइन जांच भविष्य में समय पर सतर्कता बरतने में मदद कर सकती है।
खासतौर पर जिन जोड़ों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो, उनके लिए विस्तृत कार्डियक स्क्रीनिंग, जिसमें ECG और जरूरत पड़ने पर इकोकार्डियोग्राफी शामिल हो, एक समझदारी भरा कदम है। यह न सिर्फ मौजूदा सेहत की तस्वीर साफ करता है, बल्कि आने वाले वर्षों में दिल से जुड़ी किसी भी समस्या को समय रहते पहचानने में भी मदद करता है। सेहत की यह समझदारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की भलाई से जुड़ी होती है।
शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक साझा भविष्य की शुरुआत है, और उस भविष्य की सबसे मजबूत नींव सेहत की सही समझ पर टिकी होती है। प्रीमैरिटल हेल्थ चेकअप को झिझक या डर के साथ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और भरोसे के साथ अपनाना चाहिए। थैलेसीमिया, संक्रामक बीमारियों, फर्टिलिटी और दिल की सेहत तक की यह जांच आपको और आपके होने वाले जीवनसाथी को एक स्पष्ट, सूचित और सुरक्षित शुरुआत देती है। अगर आप शादी की तैयारी में हैं, तो देर न करें, कोलकाता में हमारे सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी विशेषज्ञों की टीम से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने रिश्ते की नींव सेहत की पूरी समझ के साथ रखें।
ज्यादातर बुनियादी ब्लड टेस्ट और सामान्य जांच एक ही दिन में हो सकती हैं, लेकिन कुछ रिपोर्ट आने और विशेषज्ञ परामर्श में एक से दो दिन तक का समय लग सकता है।
रूबेला, हेपेटाइटिस B और टिटनेस-डिप्थीरिया बूस्टर जैसी वैक्सीन फायदेमंद मानी जाती हैं, खासकर महिलाओं के लिए, क्योंकि यह भविष्य की गर्भावस्था को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं।
हां, यह पूरी तरह गोपनीय होती है और सिर्फ संबंधित व्यक्ति और उनकी सहमति से डॉक्टर के साथ साझा की जाती है। किसी तीसरे पक्ष को यह जानकारी नहीं दी जाती।
हां, अगर परिवार में थैलेसीमिया, सिकल सेल या हृदय रोग जैसी अनुवांशिक स्थिति रही हों, तो लक्षित जेनेटिक (Targeted Genetic testing) और जरूरी अतिरिक्त जांच करवाना बेहद जरूरी है।
हां, सामान्य चेकअप में मुख्यतः रूटीन सेहत की जांच होती है, जबकि प्री-मैरिटल चेकअप में थैलेसीमिया, फर्टिलिटी, संक्रामक बीमारियां और अनुवांशिक जोखिम जैसी विवाह-विशिष्ट जांचें शामिल होती हैं।
नहीं, यह जांच पुरुष और महिला दोनों के लिए बराबर जरूरी है। कई फर्टिलिटी, अनुवांशिक और संक्रामक बीमारियों से जुड़े जोखिम दोनों पार्टनर में समान रूप से मौजूद हो सकते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Tamal Kumar Bhaumik is a Senior Consultant in Internal Medicine Dept. at CMRI, Kolkata. He specializes in acute and chronic medical conditions, including infectious diseases, metabolic disorders, and lifestyle diseases.
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