
विश्व एड्स दिवस 2025 का उद्देश्य हमेशा से HIV/AIDS के प्रति जागरूकता फैलाना और भेदभाव खत्म करना है। सही समय पर जांच, ART उपचार और सुरक्षित यौन आदतों से HIV को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। लक्षणों को नजरअंदाज किए बिना
क्या आपको पता है कि दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं, जो HIV के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तब तक नहीं मिलती जब तक बहुत देर नहीं हो जाती? "एड्स" शब्द सुनते ही अक्सर मन में एक अनजाना डर और समाज से कट जाने का खौफ पैदा हो जाता है। यह एक खतरनाक बात है कि भारत में लगभग 2.5 मिलियन लोग HIV वायरस के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि जागरूकता और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण पिछले वर्षों की तुलना में नए मामलों में गिरावट आई है।
आज चिकित्सा विज्ञान इतना आगे बढ़ चुका है कि HIV अब 'मौत की सजा' नहीं, बल्कि एक 'प्रबंधनीय स्थिति' है। जरूरत है तो बस सही समय पर सही जानकारी और जागरूकता की। यदि आप लगातार थकान, बुखार या वजन कम होने जैसे लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। CK Birla Hospital (RBH) के विशेषज्ञों से आज ही परामर्श लें। हम मानते हैं कि आपकी जानकारी कितनी गोपनीय होनी चाहिए, इसलिए हम अपने किसी भी पेशेंट की जानकारी किसी से भी साझा नहीं करते हैं।
कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है कि विश्व एड्स दिवस कब मनाया जाता है। हर साल 1 दिसंबर को पूरी दुनिया एकजुट होकर HIV के खिलाफ अपनी लड़ाई को याद करती है। यह दिन उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि देने का भी है, जिन्होंने इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवाई, और उन लोगों का समर्थन करने का है जो आज भी hiv/aids के साथ जी रहे हैं।
भारत में भी वैश्विक स्तर के साथ ही 1 दिसंबर को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन सरकारी और गैर-सरकारी संगठन जागरूकता अभियान चलाते हैं ताकि समाज में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सके।
हर साल UNAIDS एक विशेष थीम निर्धारित करता है। विश्व एड्स दिवस थीम 2025 का मुख्य उद्देश्य "मानवाधिकारों की रक्षा" और "एड्स को 2030 तक समाप्त करने" के लक्ष्य को हासिल करना है। इस वर्ष का फोकस इस बात पर है कि स्वास्थ्य सेवा हर किसी का अधिकार है, चाहे वह किसी भी समुदाय से आता हो। 2025 की थीम हमें याद दिलाती है कि जब तक हम समाज के हर व्यक्ति (विशेषकर हाशिए पर रहने वाले लोग) तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचाएंगे, तब तक हम एड्स को पूरी तरह नहीं हरा सकते।
बहुत से लोग आज भी इस बात को लेकर भ्रम में रहते हैं कि HIV कैसे फैलता है। तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद, समाज का एक बड़ा हिस्सा आज भी यह मानता है कि छूने या साथ बैठने से यह वायरस फैलता है, जो कि पूरी तरह गलत है। HIV/AIDS मुख्य रूप से शरीर के कुछ तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। आइए समझते हैं कि यह संक्रमण कैसे फैलता है -
HIV का सबसे डरावना पहलू यह है कि कई बार इसके लक्षण सालों तक दिखाई ही नहीं देते। इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जा सकता है। लेकिन, संक्रमण के शुरुआती हफ्तों में शरीर कुछ संकेत देता है, जिन्हें पहचानना जरूरी है।
संक्रमण के 2 से 4 सप्ताह के भीतर, लगभग दो-तिहाई लोगों को फ्लू जैसी बीमारी होती है। इसे शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया कहा जाता है। इस स्थिति में निम्न लक्षण उत्पन्न होते हैं -
जब HIV का इलाज नहीं किया जाता, तो यह AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) में बदल जाता है। इस स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) पूरी तरह नष्ट हो जाती है। इस स्थिति में लक्षण थोडे गंभीर होते हैं, जिसमें निम्न लक्षण उत्पन्न होते हैं -
इन लक्षणों का मतलब हमेशा HIV नहीं होता, लेकिन अगर आपने कोई जोखिम भरा व्यवहार किया है, तो एड्स दिवस के अवसर पर यह संकल्प लें कि आप अपनी जांच जरूर करवाएं।
HIV का पता केवल रक्त जांच से ही लगाया जा सकता है। लक्षणों के आधार पर कभी भी खुद को पॉजिटिव न मानें और डॉक्टर से मिलकर टेस्ट कराएं -
सीके बिरला अस्पताल, जयपुर में, हम समझते हैं कि यह एक संवेदनशील मामला है। इसलिए, हमारे यहां HIV टेस्टिंग पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और टेस्ट से पहले और बाद में काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पेशेंट को बहुत मदद मिलेगी।
HIV संक्रमण से बचने के लिए 'सावधानी' ही सबसे बड़ा उपाय है। अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके आप इस वायरस से सुरक्षित रह सकते हैं। निम्न उपायों का पालन करें और सुरक्षित रहें -
अगर किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि जिंदगी खत्म हो गई। Antiretroviral Therapy (ART) ने HIV के इलाज में क्रांति ला दी है। पहले समझते हैं इसका इलाज कैसे संभव है -
नियमित दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से आप इस गंभीर स्थिति को आसानी से मैनेज कर सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
विश्व एड्स दिवस 2025 हमें यह याद दिलाने का मौका देता है कि अज्ञानता ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। HIV/AIDS अब एक प्रबंधनीय बीमारी है, लेकिन इसके लिए जागरूकता और समय पर इलाज अनिवार्य है। HIV/AIDS को एक कलंक के रूप में न देखते हुए, इसके इलाज की तरफ हमको देखना चाहिए। आपका स्वास्थ्य आपके हाथों में है। यदि आपके मन में कोई भी शंका है, तो आज ही सीके बिरला अस्पताल, जयपुर में हमारे विशेषज्ञों से संपर्क करें। एक छोटा सा टेस्ट आपके जीवन को सुरक्षित बना सकता है।
HIV (ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) वह वायरस है जो संक्रमण का कारण बनता है और प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। वहीं, AIDS (एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम) HIV संक्रमण की सबसे आखिरी और गंभीर अवस्था है, जब शरीर की लड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है।
जी हां, इसे 'क्लिनिकल लेटेंसी' (Clinical Latency) कहा जाता है। एक व्यक्ति बिना किसी लक्षण के 10 से 15 साल तक HIV के साथ जी सकता है, लेकिन वह इस दौरान दूसरों को वायरस फैला सकता है।
हर टेस्ट का एक 'विंडो पीरियड' होता है। जोखिम भरे संपर्क के तुरंत बाद टेस्ट शायद सही न आए। आमतौर पर संपर्क के 3 महीने (90 दिन) बाद किया गया टेस्ट सबसे भरोसेमंद माना जाता है।
बिल्कुल। आधुनिक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की मदद से HIV संक्रमित व्यक्ति एक स्वस्थ, लंबा और सामान्य जीवन जी सकता है, बिल्कुल किसी सामान्य व्यक्ति की तरह।
नहीं, यह एक बहुत बड़ा मिथक है। HIV मच्छर, खटमल या किसी अन्य कीड़े के काटने से नहीं फैलता। यह वायरस मानव शरीर के बाहर जीवित नहीं रह सकता।
हां, यह पूरी तरह संभव है। अगर मां गर्भावस्था के दौरान और बाद में सही ART दवाएं लेती है और डॉक्टर की सलाह का पालन करती है, तो बच्चे में संक्रमण फैलने का जोखिम 1% से भी कम हो जाता है।
फिलहाल इसे जड़ से खत्म करने का कोई इलाज (Cure) नहीं है, लेकिन ART (एंटिरेट्रोवायरल थेरेपी) के माध्यम से वायरस को पूरी तरह नियंत्रित (Control) किया जा सकता है, जिससे मरीज स्वस्थ जीवन जीता है।
हां, HIV संक्रमित व्यक्ति शादी कर सकता है और संबंध भी बना सकता है। कंडोम का उपयोग और वायरल लोड को 'अनडिटेकटेबल' रखने वाली दवाएं पार्टनर को सुरक्षित रखती हैं।
Written and Verified by:

Dr. Shabbar H. K. Joad is the Director of Critical Care Medicine in Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 25 years of experience. He is a leading intensivist focusing on ICU performance improvement, patient safety, infection control, and emergency critical care.
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