
कम पेशाब आना यानी 24 घंटे में सामान्य से काफी कम मात्रा में यूरिन बनना, जिसे मेडिकल भाषा में ओलिगुरिया कहते हैं।
अक्सर यह पानी कम पीने या गर्मी में पसीना ज्यादा आने जैसी सामान्य वजहों से होता है, पर कई बार यह किडनी फेलियर, यूरिन इन्फेक्शन, प्रोस्टेट की समस्या या दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
अगर पेशाब कम आने के साथ जलन, सूजन, थकान या पेट दर्द भी हो, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों से असली कारण पता चलता है।
समय पर पानी की मात्रा सुधारने और डॉक्टर से सलाह लेने से ज्यादातर मामलों में यह समस्या नियंत्रण में आ जाती है।
रात को अचानक नींद खुलती है, वॉशरूम जाते हैं, और महसूस होता है कि जितना जाना चाहिए था, उतना पेशाब हुआ ही नहीं। पहले दिन को हम इग्नोर कर देते हैं, सोचते हैं; शायद पानी कम पिया होगा। लेकिन जब यही सिलसिला दो-तीन दिन तक चलता रहे, पेशाब का रंग गहरा पीला दिखने लगे और शरीर में हल्की सूजन या थकान भी महसूस हो, तो मन में एक अनकहा डर बैठ जाता है। "कहीं यह कोई बड़ी बीमारी तो नहीं?" यही सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो पेशाब कम आना जैसी दिक्कत से गुजर रहा होता है, और सबसे मुश्किल बात यह है कि इस विषय पर लोग खुलकर बात करने से भी झिझकते हैं।
सच कहें तो पेशाब की मात्रा हमारी किडनी, दिल और पूरे शरीर के पानी के संतुलन का आईना होती है। इसलिए इसे हल्के में लेना सही नहीं है। इस ब्लॉग में हम पेशाब कम होने का कारण, इससे जुड़े गंभीर संकेत, जांच और इलाज के बारे में विस्तार से बात करेंगे, ताकि आप सही समय पर सही कदम उठा सकें। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को यह लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देर न करें और हमारे अनुभवी यूरोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें।
आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति दिन भर में लगभग 1 से 2 लीटर पेशाब बनाता है, और दिन में 4 से 7 बार वॉशरूम जाना सामान्य माना जाता है। जब यह मात्रा 24 घंटे में करीब 400 से 500 मिलीलीटर से भी कम हो जाए, तो इसे मेडिकल भाषा में ओलिगुरिया (Oliguria) कहा जाता है।
हर बार पेशाब कम आना बीमारी का संकेत नहीं होता। अगर आपने गर्मी में ज्यादा पसीना बहाया है, कम पानी पिया है, या किसी वर्कआउट के बाद शरीर से पानी की मात्रा घट गई है, तो एक-दो बार पेशाब कम आना सामान्य प्रतिक्रिया है। शरीर खुद पानी बचाने की कोशिश करता है। लेकिन अगर यह स्थिति लगातार बनी रहे, पेशाब का फ्लो कम होना या पेशाब का प्रेशर कम होना जैसी दिक्कत रोज महसूस हो, तो यह शरीर के अंदर किसी गड़बड़ी का इशारा हो सकता है।

कम पेशाब आने के कारण कई तरह के हो सकते हैं, हल्के से लेकर गंभीर तक। कुछ मुख्य वजहें इस प्रकार हैं -
यह ध्यान देने वाली बात है कि किडनी और दिल की सेहत आपस में गहराई से जुड़ी होती है। जब दिल कमजोर पड़ता है, तो किडनी पर सीधा असर पड़ता है, और यही वजह है कि पेशाब कम होना कई बार हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह लेने का भी संकेत बन जाता है। इसलिए अगर आप किसी ऐसे अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं जहां हृदय रोग विशेषज्ञ भी मौजूद हों, तो शुरुआती जांच में यह जुड़ाव पकड़ में आना आसान हो जाता है।
अगर सिर्फ पेशाब कम आना अकेला लक्षण है, तो चिंता की बात कम है। लेकिन जब इसके साथ ये लक्षण भी दिखें, तो सतर्क हो जाना जरूरी है -
एक उदाहरण से समझें, हमारे पास पहले एक ऐसे मरीज आए थे जो शुरुआत में सिर्फ थकान और हल्की सूजन की शिकायत लेकर आए थे। फिजिकल एग्जामिनेशन के दौरान कुछ सवाल पूछने पर पता चला कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से पेशाब कम आना और भूख कम लगना जैसी दिक्कतें भी हो रही थी। जांच में उनकी किडनी की कार्यक्षमता काफी कम मिली, और समय रहते इलाज शुरू होने से स्थिति बिगड़ने से बच गई। ऐसे मामलों में जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा हथियार होती है।
डॉक्टर आपकी हिस्ट्री और लक्षणों के आधार पर कुछ जरूरी जांचें सुझा सकते हैं, जैसे कि -
इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कम पेशाब आने का असली कारण क्या है। कुछ सामान्य उपाय और सावधानियां इस प्रकार हैं -
पेशाब कम आना घरेलू उपाय के तौर पर हल्के मामलों में पानी की मात्रा बढ़ाना, नारियल पानी या हल्का नमक-चीनी का घोल लेना कुछ राहत दे सकता है। लेकिन ध्यान रहे, यह घरेलू उपाय सिर्फ हल्के डिहाइड्रेशन के लिए हैं, न कि किडनी या दिल से जुड़ी गंभीर समस्या का इलाज। अगर लक्षण दो दिन से ज्यादा बने रहें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
अगर आपको या आपके परिवार में किसी को यह अनुभव हो, तो देर न करें -
इन स्थितियों में देरी करना किडनी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। कोलकाता में सीएमआरआई अस्पताल में अनुभवी विशेषज्ञों की टीम मौजूद है, जो किडनी और दिल दोनों से जुड़ी समस्याओं का एक साथ आकलन करती है। क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया, दिल और किडनी की सेहत आपस में जुड़ी होती है, इसलिए कई बार हृदय रोग विशेषज्ञ की राय लेना भी उतना ही जरूरी हो जाता है जितना नेफ्रोलॉजिस्ट की।
पेशाब कम आना एक ऐसा विषय है, जिस पर लोग खुलकर बात करने से बचते हैं, लेकिन शरीर का यह संकेत कभी नजरअंदाज करने लायक नहीं होता। कभी यह सिर्फ पानी की कमी की वजह से होता है, तो कभी यह किडनी, प्रोस्टेट या दिल से जुड़ी गहरी समस्या की तरफ इशारा करता है। सही समय पर पहचान और सही डॉक्टर से सलाह ही इसका सबसे भरोसेमंद हल है। अपने शरीर की इस सांकेतिक भाषा को सुनना सीखें, और किसी भी संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ की राय लेने में संकोच न करें।
हां, कम पानी पीना पेशाब कम आने की सबसे सामान्य वजह है। शरीर पानी बचाने के लिए यूरिन की मात्रा घटा देता है। पर्याप्त पानी पीने से यह समस्या अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।
यह हमेशा जरूरी नहीं, पर लगातार पेशाब कम आना, सूजन और थकान के साथ मिलकर किडनी फेलियर का शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे में जांच जरूर करवाएं।
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ वयस्क दिन में 4 से 7 बार पेशाब जाता है। यह मात्रा पानी के सेवन, मौसम और शारीरिक गतिविधि के अनुसार थोड़ी बदल सकती है।
बिल्कुल, डिहाइड्रेशन में शरीर पानी की कमी महसूस करता है और किडनी यूरिन बनाना कम कर देती है। तेज गर्मी, उल्टी-दस्त या पसीना ज्यादा आने पर यह आम है।
पर्याप्त पानी पिएं, नारियल पानी या ओआरएस लें, नमक कम खाएं। लेकिन लक्षण दो दिन से ज्यादा रहें तो घरेलू उपाय छोड़कर डॉक्टर से मिलें।
यह अक्सर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) का लक्षण होता है। समय पर जांच और एंटीबायोटिक इलाज से यह जल्दी ठीक हो जाता है, देरी करने पर संक्रमण किडनी तक फैल सकता है।
हां, बढ़ती उम्र में किडनी की कार्यक्षमता वैसे भी कम होने लगती है, इसलिए बुजुर्गों में पेशाब कम होना जल्दी जांच और इलाज मांगता है ताकि जटिलताओं से बचा जा सके।
Written and Verified by:

Consultant Urologist, Uro-Oncologist & Renal Transplant Surgeon Exp: 15 Yr
Urology, Uro-Oncology, Robotic Surgery & Renal Transplantation
Dr. Zeeshan Rahman is a highly skilled Consultant Urologist with over 15 years of clinical and surgical experience in the management of complex urological diseases. Trained at the prestigious Christian Medical College (CMC), Vellore, he is committed to delivering evidence-based, patient-centric care using the latest minimally invasive, laparoscopic and robotic surgical techniques. His practice encompasses the entire spectrum of adult and paediatric urology, with particular expertise in uro-oncology, reconstructive urology and renal transplantation. He is actively involved in academics, research and surgical training.
Similar Renal Sciences Blogs
Book Your Appointment TODAY
© 2024 CMRI Kolkata. All Rights Reserved.