
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कोई गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन लोग इसके बारे में बात ही नहीं करना चाहते हैं, जो इस स्थिति को गंभीर बना देते हैं। वर्तमान में बहुत सारे युवाओं में यह समस्या आम हो गई है और इसके कारण वह ऑनलाइन इसके उपाय या दवाएं ढूंढ रहे हैं।
कुछ मामलों में तो ये युवाओं में डिप्रेशन का भी कारण बन रहा है। सबसे मुश्किल बात यह है कि इस पर बात करना लगभग वर्जित सा माना जाता है, ना दोस्तों से, ना परिवार से और कई बार तो डॉक्टर से भी नहीं। लेकिन सच यह है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है, जिसका इलाज मौजूद है। बस शर्त ये है कि आपको हमारे डॉक्टर से मिलकर अपनी स्थिति के बारे में मुखर होना पड़ेगा।
सीधी भाषा में कहें तो, जब कोई पुरुष संभोग के लिए पर्याप्त इरेक्शन प्राप्त करने में या उसे बनाए रखने में लगातार असमर्थ रहता है, तो इस स्थिति को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कहा जाता है। यही “इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्या होता है?” जैसे सवाल का सबसे सरल जवाब है। पहले इसे सिर्फ 50-60 साल की उम्र के बाद होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है।
हाल ही में हुए मेडिकल रिसर्च के नतीजे काफी परेशान करने वाले हैं। जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, 18 से 31 साल की उम्र के यौन रूप से सक्रिय युवाओं में करीब 11 प्रतिशत को हल्के स्तर की और लगभग 3 प्रतिशत को मध्यम से गंभीर स्तर की ईडी की समस्या पाई गई। यानी अगर आपकी उम्र कम है, तो भी यह समस्या असामान्य नहीं है, और इसे नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है।
बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्क्रीन टाइम, नींद की कमी, काम का दबाव और मानसिक तनाव, ये सब मिलकर युवाओं के शरीर पर ऐसा असर डाल रहे हैं जो पहले सिर्फ बड़ी उम्र में देखा जाता था।
अक्सर मरीज पूछते हैं कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्यों होता है, खासकर तब जब उम्र सिर्फ 25-30 साल हो। कारण दो हिस्सों में बांटे जा सकते हैं: शारीरिक और मानसिक।
दिलचस्प बात यह है कि कम उम्र के मरीजों में मानसिक कारण, खासतौर पर एंग्जायटी और तनाव, अक्सर शारीरिक कारणों से भी ज्यादा जिम्मेदार पाए जाते हैं। इसलिए इलाज सिर्फ दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि काउंसलिंग और लाइफस्टाइल में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। पोर्नोग्राफी में जो चीजें दिखाई जाती हैं, वो सच नहीं होती हैं।
समय पर पहचान इलाज को आसान बना देती है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षण पहचानने में देर न करें। इन लक्षणों पर खास ध्यान रखें -
अगर यह लक्षण कभी-कभार दिखे तो चिंता की बात नहीं, थकान या तनाव के दिन किसी को भी हो सकते हैं। रेस्ट के बाद स्थिति फिर से ठीक हो सकती है, लेकिन अगर यह पैटर्न लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक बना रहे, तो यह शरीर का एक संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एक बात और ध्यान देने वाली है, कई बार युवा मरीज ऐसे भी क्लिनिक पहुंचते हैं जिन्हें लगता है कि उनकी समस्या सिर्फ मानसिक है, लेकिन जांच में डायबिटीज या हार्मोनल असंतुलन जैसी स्वास्थ्य समस्या सामने आ जाती है। यही वजह है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को सिर्फ बेडरूम की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत का एक शुरुआती संकेतक भी माना जाता है, और कई बार यह हृदय संबंधी जोखिमों की तरफ भी इशारा कर सकता है, क्योंकि लिंग की रक्त वाहिकाएं शरीर की सबसे छोटी वाहिकाओं में से हैं, और वहां खराबी अक्सर दिल तक पहुंचने से पहले दिखाई देती है।
RBH जयपुर जैसे अस्पतालों में जांच की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय और मरीज की सहूलियत को ध्यान में रखकर की जाती है। सामान्य तौर पर डॉक्टर इस स्थिति की जांच के लिए इन चरणों से गुजरते हैं -
यह पूरी प्रक्रिया मुश्किल से 30-40 मिनट में पूरी हो जाती है और सही डायग्नोसिस के बाद इलाज की दिशा तय करना बहुत आसान हो जाता है।
अब सबसे जरूरी सवाल: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कैसे ठीक करें? राहत की बात यह है कि ज्यादातर युवा मरीजों में यह पूरी तरह ठीक हो सकता है, बशर्ते सही समय पर सही इलाज लिया जाए और इलाज में निरंतरता हो।

अगर यह समस्या तीन महीने से ज्यादा समय से बनी हुई है, आत्मविश्वास और रिश्ते पर असर डाल रही है, या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के साथ जुड़ी है, तो देर न करें। सीके बिरला अस्पताल, RBH जयपुर के यूरोलॉजी विभाग में अनुभवी विशेषज्ञ पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ आपकी जांच और इलाज करते हैं। शुरुआती चरण में इलाज कराने से रिकवरी की संभावना कहीं ज्यादा बेहतर होती है।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, रिश्तों और मानसिक सेहत से जुड़ा मुद्दा है। युवाओं में इसकी बढ़ती दर चिंताजनक जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह लाइलाज है। सही जांच, सही सलाह और समय पर उठाया गया कदम इस समस्या को पूरी तरह पीछे छोड़ने में मदद कर सकता है। इसे शर्म का विषय बनाने के बजाय, इसे एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या की तरह देखें और खुलकर किसी विशेषज्ञ से बात करें।
हां, आजकल तनाव, खराब लाइफस्टाइल और मानसिक दबाव के कारण युवाओं में भी यह समस्या देखी जा रही है। यह चिंता की बात है, पर इलाज संभव है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बिल्कुल, मानसिक तनाव और परफॉर्मेंस एंग्जायटी दिमाग से शरीर तक जाने वाले सिग्नल को प्रभावित करते हैं, जिससे इरेक्शन बनाना मुश्किल हो जाता है। यह युवाओं में सबसे आम कारण है।
हां, अनियंत्रित डायबिटीज रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे इरेक्शन में दिक्कत होती है। ब्लड शुगर नियंत्रित रखना इस समस्या से बचाव में मदद करता है।
कई हल्के मामलों में एक्सरसाइज, संतुलित खानपान, नींद पूरी करना और नशा छोड़ने से काफी सुधार आता है। गंभीर मामलों में इसके साथ मेडिकल इलाज की भी जरूरत पड़ सकती है।
नहीं, ज्यादातर मामलों में खासकर युवाओं में यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। सही डायग्नोसिस और समय पर इलाज से अधिकतर मरीज सामान्य जीवन में वापस लौट आते हैं।
हां, कई बार यह हृदय संबंधी समस्याओं का शुरुआती संकेत हो सकता है, क्योंकि रक्त वाहिकाओं में खराबी सबसे पहले लिंग की छोटी वाहिकाओं में दिखती है। ऐसे में हृदय की जांच कराना भी उपयोगी हो सकता है।
नहीं, यह समस्या वैवाहिक स्थिति से जुड़ी नहीं है। यह किसी भी उम्र और स्थिति के पुरुष को हो सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर सलाह लेनी चाहिए।
Written and Verified by:
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Dr. Bibhas Ranjan Kundu is a Consultant Urologist & HOD of Urology at CMRI, Kolkata with 40+ years of experience. He specializes in LASER treatment for stones & prostate, reconstructive urology (urethra & bladder), and complex cases like urinary cancers and strictures.
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