युवाओं में  इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या और इसका प्रभावी इलाज
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युवाओं में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या और इसका प्रभावी इलाज

Summary

  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी यौन संबंध के दौरान इरेक्शन बनाने या बनाए रखने में लगातार असमर्थता, यह अब सिर्फ बड़ी उम्र की नहीं, युवाओं की भी समस्या बनती जा रही है।
  • मुख्य कारण: तनाव, एंग्जायटी, खराब लाइफस्टाइल, डायबिटीज, मोटापा और हार्मोनल असंतुलन।
  • शुरुआती लक्षण: इरेक्शन में कठिनाई, यौन इच्छा में कमी, लगातार बना रहने वाला पैटर्न तीन महीने से ज्यादा।
  • जांच में ब्लड टेस्ट, हार्मोन लेवल और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड शामिल हैं।
  • इलाज में लाइफस्टाइल बदलाव, काउंसलिंग, दवाएं और एडवांस थेरेपी शामिल हैं। जल्दी इलाज से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
  • सीके बिरला अस्पताल RBH जयपुर के यूरोलॉजी विशेषज्ञों से गोपनीय और भरोसेमंद सलाह लें।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कोई गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन लोग इसके बारे में बात ही नहीं करना चाहते हैं, जो इस स्थिति को गंभीर बना देते हैं। वर्तमान में बहुत सारे युवाओं में यह समस्या आम हो गई है और इसके कारण वह ऑनलाइन इसके उपाय या दवाएं ढूंढ रहे हैं। 

कुछ मामलों में तो ये युवाओं में डिप्रेशन का भी कारण बन रहा है। सबसे मुश्किल बात यह है कि इस पर बात करना लगभग वर्जित सा माना जाता है, ना दोस्तों से, ना परिवार से और कई बार तो डॉक्टर से भी नहीं। लेकिन सच यह है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है, जिसका इलाज मौजूद है। बस शर्त ये है कि आपको हमारे डॉक्टर से मिलकर अपनी स्थिति के बारे में मुखर होना पड़ेगा। 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) क्या है और युवाओं में यह क्यों बढ़ रहा है?

सीधी भाषा में कहें तो, जब कोई पुरुष संभोग के लिए पर्याप्त इरेक्शन प्राप्त करने में या उसे बनाए रखने में लगातार असमर्थ रहता है, तो इस स्थिति को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कहा जाता है। यही “इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्या होता है?” जैसे सवाल का सबसे सरल जवाब है। पहले इसे सिर्फ 50-60 साल की उम्र के बाद होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है।

हाल ही में हुए मेडिकल रिसर्च के नतीजे काफी परेशान करने वाले हैं। जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, 18 से 31 साल की उम्र के यौन रूप से सक्रिय युवाओं में करीब 11 प्रतिशत को हल्के स्तर की और लगभग 3 प्रतिशत को मध्यम से गंभीर स्तर की ईडी की समस्या पाई गई। यानी अगर आपकी उम्र कम है, तो भी यह समस्या असामान्य नहीं है, और इसे नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है।

बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्क्रीन टाइम, नींद की कमी, काम का दबाव और मानसिक तनाव, ये सब मिलकर युवाओं के शरीर पर ऐसा असर डाल रहे हैं जो पहले सिर्फ बड़ी उम्र में देखा जाता था।

युवाओं में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के प्रमुख कारण क्या है?

अक्सर मरीज पूछते हैं कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्यों होता है, खासकर तब जब उम्र सिर्फ 25-30 साल हो। कारण दो हिस्सों में बांटे जा सकते हैं: शारीरिक और मानसिक।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के शारीरिक कारण

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के मानसिक और भावनात्मक कारण

  • काम या पढ़ाई से जुड़ा लगातार तनाव
  • परफॉरमेंस एंग्जायटी, यानी बिस्तर पर "सही साबित होने" का दबाव
  • रिश्ते में अनसुलझे मतभेद
  • डिप्रेशन और नींद की गड़बड़ी
  • सोशल मीडिया और पोर्नोग्राफी की अत्यधिक खपत, जो असल जिंदगी की अपेक्षाओं को बदल देती है

दिलचस्प बात यह है कि कम उम्र के मरीजों में मानसिक कारण, खासतौर पर एंग्जायटी और तनाव, अक्सर शारीरिक कारणों से भी ज्यादा जिम्मेदार पाए जाते हैं। इसलिए इलाज सिर्फ दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि काउंसलिंग और लाइफस्टाइल में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। पोर्नोग्राफी में जो चीजें दिखाई जाती हैं, वो सच नहीं होती हैं। 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के शुरुआती लक्षण और चेतावनी संकेत

समय पर पहचान इलाज को आसान बना देती है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षण पहचानने में देर न करें। इन लक्षणों पर खास ध्यान रखें - 

  • इरेक्शन प्राप्त करने में बार-बार कठिनाई
  • इरेक्शन बनने के बाद उसे बनाए रखने में परेशानी होना
  • सेक्शुअल डिजायर यानी यौन इच्छा में कमी
  • सुबह के समय होने वाले नेचुरल इरेक्शन की आवृत्ति घटना
  • सेक्स के दौरान या उससे पहले असामान्य घबराहट या चिंता महसूस होना

अगर यह लक्षण कभी-कभार दिखे तो चिंता की बात नहीं, थकान या तनाव के दिन किसी को भी हो सकते हैं। रेस्ट के बाद स्थिति फिर से ठीक हो सकती है, लेकिन अगर यह पैटर्न लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक बना रहे, तो यह शरीर का एक संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एक बात और ध्यान देने वाली है, कई बार युवा मरीज ऐसे भी क्लिनिक पहुंचते हैं जिन्हें लगता है कि उनकी समस्या सिर्फ मानसिक है, लेकिन जांच में डायबिटीज या हार्मोनल असंतुलन जैसी स्वास्थ्य समस्या सामने आ जाती है। यही वजह है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को सिर्फ बेडरूम की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत का एक शुरुआती संकेतक भी माना जाता है, और कई बार यह हृदय संबंधी जोखिमों की तरफ भी इशारा कर सकता है, क्योंकि लिंग की रक्त वाहिकाएं शरीर की सबसे छोटी वाहिकाओं में से हैं, और वहां खराबी अक्सर दिल तक पहुंचने से पहले दिखाई देती है।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की जांच कैसे की जाती है?

RBH जयपुर जैसे अस्पतालों में जांच की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय और मरीज की सहूलियत को ध्यान में रखकर की जाती है। सामान्य तौर पर डॉक्टर इस स्थिति की जांच के लिए इन चरणों से गुजरते हैं - 

  • विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री और बातचीत: डॉक्टर मरीज से उनकी जीवनशैली, तनाव, नींद और रिश्तों से जुड़े सवाल पूछते हैं।
  • शारीरिक जांच: ब्लड प्रेशर, वजन और जननांग क्षेत्र की सामान्य जांच की जाती है। 
  • ब्लड टेस्ट: ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, टेस्टोस्टेरोन और थायरॉइड लेवल की जांच होती है।
  • IIEF-5 जैसे स्टैंडर्ड प्रश्नावली टूल: समस्या की गंभीरता मापने के लिए इस टेस्ट को कराया जाता है। 
  • जरूरत पड़ने पर डॉपलर अल्ट्रासाउंड: रक्त प्रवाह की जांच के लिए इस जांच का सुझाव दिया जाता है।

यह पूरी प्रक्रिया मुश्किल से 30-40 मिनट में पूरी हो जाती है और सही डायग्नोसिस के बाद इलाज की दिशा तय करना बहुत आसान हो जाता है।

युवाओं में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का प्रभावी इलाज

अब सबसे जरूरी सवाल: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कैसे ठीक करें? राहत की बात यह है कि ज्यादातर युवा मरीजों में यह पूरी तरह ठीक हो सकता है, बशर्ते सही समय पर सही इलाज लिया जाए और इलाज में निरंतरता हो।

युवाओं में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का प्रभावी इलाज

  1. लाइफस्टाइल में सुधार: नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, धूम्रपान और शराब छोड़ना, ये छोटे बदलाव भी बड़ा फर्क ला सकते हैं। एक रिसर्च में पाया गया कि नियमित शारीरिक गतिविधि करने वाले पुरुषों में ईडी के लक्षण काफी कम पाए गए।
  2. मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और थेरेपी: जब कारण एंग्जायटी, तनाव या रिश्ते की समस्या हो, तो सेक्स थेरेपिस्ट या साइकोलॉजिस्ट के साथ काउंसलिंग बेहद कारगर साबित होती है। कई बार सिर्फ पार्टनर से खुलकर बातचीत ही आधी समस्या हल कर देती है।
  3. मेडिकल इलाज: डॉक्टर की सलाह पर PDE-5 इनहिबिटर जैसी दवाएं दी जा सकती हैं। ध्यान रहे, इन्हें कभी भी बिना डॉक्टरी सलाह के, दोस्तों की सिफारिश पर या ऑनलाइन मंगाकर नहीं लेना चाहिए, क्योंकि गलत डोज हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है।
  4. हार्मोनल थेरेपी: अगर जांच में टेस्टोस्टेरोन की कमी सामने आती है, तो डॉक्टर की निगरानी में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा सकती है।
  5. एडवांस उपचार: जिन मामलों में सामान्य इलाज असरदार नहीं होता, वहां वैक्यूम इरेक्शन डिवाइस, इंजेक्शन थेरेपी या दुर्लभ मामलों में सर्जिकल विकल्प भी उपलब्ध हैं।

कब यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए?

अगर यह समस्या तीन महीने से ज्यादा समय से बनी हुई है, आत्मविश्वास और रिश्ते पर असर डाल रही है, या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के साथ जुड़ी है, तो देर न करें। सीके बिरला अस्पताल, RBH जयपुर के यूरोलॉजी विभाग में अनुभवी विशेषज्ञ पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ आपकी जांच और इलाज करते हैं। शुरुआती चरण में इलाज कराने से रिकवरी की संभावना कहीं ज्यादा बेहतर होती है।

निष्कर्ष

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, रिश्तों और मानसिक सेहत से जुड़ा मुद्दा है। युवाओं में इसकी बढ़ती दर चिंताजनक जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह लाइलाज है। सही जांच, सही सलाह और समय पर उठाया गया कदम इस समस्या को पूरी तरह पीछे छोड़ने में मदद कर सकता है। इसे शर्म का विषय बनाने के बजाय, इसे एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या की तरह देखें और खुलकर किसी विशेषज्ञ से बात करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

हां, आजकल तनाव, खराब लाइफस्टाइल और मानसिक दबाव के कारण युवाओं में भी यह समस्या देखी जा रही है। यह चिंता की बात है, पर इलाज संभव है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

Written and Verified by:

Dr. Bibhas Ranjan Kundu

Dr. Bibhas Ranjan Kundu

Consultant - Urologist Exp: 41 Yr

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Dr. Bibhas Ranjan Kundu is a Consultant Urologist & HOD of Urology at CMRI, Kolkata with 40+ years of experience. He specializes in LASER treatment for stones & prostate, reconstructive urology (urethra & bladder), and complex cases like urinary cancers and strictures.

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