महिलाओं में माइग्रेन क्यों ज्यादा होता है? हार्मोनल कनेक्शन
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महिलाओं में माइग्रेन क्यों ज्यादा होता है? हार्मोनल कनेक्शन

Neuro Sciences | by Dr. Gouri kumar Prusty on 28/10/2025 | Last Updated : 27/10/2025

Summary

महिलाओं में माइग्रेन हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण ज्यादा होता है। खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरना माइग्रेन के मुख्य कारणों में शामिल है। सही खानपान, घरेलू उपाय और विशेषज्ञ से समय पर सलाह माइग्रेन के लक्षणों को कम कर सकते हैं।

इस बात में कोई संशय नहीं है कि इस आधुनिक युग में माइग्रेन एक ऐसी समस्या बन गई है, जो लगभग सभी 9-5 की जॉब करने वाले लोगों को परेशान कर रही है। एक रिपोर्ट यह कहती है कि महिलाओं में माइग्रेन की समस्या अधिक आम है, जो कि स्वयं एक चिंता का विषय है। यह न केवल दर्दनाक सिरदर्द है, बल्कि महिलाओं के जीवन को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित करता है। 

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपकी पीरियड से पहले या दौरान सिरदर्द बढ़ क्यों जाता है? या फिर कभी प्रेगनेंसी और मेनोपॉज के दौरान माइग्रेन की तीव्रता में बदलाव देखा जाता है? यह सब कुछ हार्मोन की वजह से होता है। हार्मोन महिलाओं के दिमाग और शरीर पर गहरा प्रभाव डालते हैं, यही कारण है कि महिलाओं में माइग्रेन पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होता है। यदि यह समस्या आपको रोजाना की जिंदगी में बाधित कर रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें बल्कि माइग्रेन विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही उपचार शुरू करें।

माइग्रेन क्या है और क्यों होता है?

माइग्रेन केवल एक सामान्य सिरदर्द नहीं है। यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या भी है, जिसमें अचानक तेज और अक्सर एक तरफा सिर में दर्द होता है, जो कि 4 से 72 घंटे तक रह सकता है। यह समय हर महिला के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। माइग्रेन के दौरान मतली, उल्टी, लाइट और ध्वनि से संवेदनशीलता जैसी समस्याएं भी होती हैं। इसका कारण दिमाग में नसों और रसायनों के असामान्य बदलावों को माना जाता है, जो दर्द के सिग्नल भेजते हैं।

चलिए समझते हैं कि माइग्रेन क्यों होता है? इस स्थिति के प्रमुख कारणों में निम्न शामिल है - 

  • दिमाग की नसों और रसायनों (विशेषकर सेरोटोनिन) में बदलाव, जिससे दिमाग में दर्द के सिग्नल एक्टिव होते हैं। 
  • हार्मोनल बदलाव
  • तनाव
  • नींद की कमी
  • मौसम का बदलना
  • कुछ फूड ट्रिगर (चॉकलेट, कैफीन, प्रोसेस्ड मीट आदि)
  • जेनेटिक्स 
  • शरीर की संवेदनशीलता 

माइग्रेन की समस्या यूथ और महिलाओं में अधिक आम है। महिलाओं में यह समस्या तीन गुना ज्यादा देखी जाती है। यह समस्या जेनेटिक भी हो सकती है और आमतौर पर किशोरावस्था या युवावस्था से शुरू हो जाती है।

महिलाओं में माइग्रेन अधिक होने के कारण

महिलाओं में माइग्रेन का सबसे बड़ा कारण उनके हार्मोन, खासतौर पर एस्ट्रोजन में होने वाले बदलाव है। जब भी महिला के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता या बढ़ता है, तो उससे मस्तिष्क की रासायनिक प्रक्रिया असंतुलित हो जाती है, जो माइग्रेन के अटैक को ट्रिगर करती है। महिलाओं के शरीर में यह हार्मोनल बदलाव निम्न कारणों से हो सकते हैं - 

  • पीरियड्स शुरू होने से पहले और मासिक धर्म के दौरान यह बदलाव होते हैं। हर महीने एस्ट्रोजन तेजी से गिरता है, जिससे "पीरियड्स माइग्रेन" हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी में कभी-कभी माइग्रेन में सुधार आ सकता है, क्योंकि इस दौरान एस्ट्रोजन लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है, लेकिन पहले तिमाही में उतार-चढ़ाव के कारण सिरदर्द बढ़ सकता है।
  • मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के समय जब हार्मोन अनियंत्रित होते हैं, माइग्रेन के दौरे ज्यादा आ सकते हैं या कम भी हो सकते हैं।

इसलिए महिलाओं में माइग्रेन पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होता है। उनके शरीर में हार्मोन ज्यादा बदलते रहते हैं, और मस्तिष्क की संवेदनशीलता भी ज्यादा होती है।

हार्मोन और माइग्रेन का संबंध

एस्ट्रोजन हार्मोन, जो महिलाओं के मेंस्ट्रुअल साइकिल और प्रजनन स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, मस्तिष्क में सेरोटोनिन (serotonin) नामक न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन और संतुलन को प्रभावित करता है। जब एस्ट्रोजन का स्तर अचानक गिरता है, तब सेरोटोनिन भी कम हो जाता है, जिससे मस्तिष्क में दर्द के संकेत सक्रिय हो जाते हैं और माइग्रेन का खतरा बढ़ जाता है। विशेष तौर पर, पीरियड्स से पहले और दौरान एस्ट्रोजन में गिरावट माइग्रेन की आम वजह है। दूसरी तरफ, गर्भावस्था में लगातार उच्च एस्ट्रोजन के कारण कई महिलाओं को माइग्रेन में राहत मिल सकती है, जबकि मेनोपॉज के समय हार्मोन के अनियमित उतार-चढ़ाव माइग्रेन को और बढ़ा सकते हैं।

माइग्रेन के सामान्य लक्षण - Symptoms of Migraine

माइग्रेन की स्थिति में निम्न सामान्य लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं - 

  • सिर के एक तरफ तेज़ और धड़कन जैसा दर्द होना।
  • मतली और उल्टी जैसा महसूस होना।
  • प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता।
  • कभी-कभी विजुअल ऑरा (जैसे तिरछी रेखाएं या चमकदार बिंदु) दिखना
  • थकान और चक्कर आना

माइग्रेन का घरेलू उपाय

माइग्रेन की स्थिति को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। इसे मैनेज करने के लिए आपको कुछ आसान, सरल और प्रभावी उपायों का पालन करना चाहिए जैसे कि - 

  • नियमित और संतुलित भोजन करें: प्रयास करें कि आप एक स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करें। अपने भोजन का समय भी नियमित रखने से शरीर को आसानी से मैनेज करने में मदद भी मिलती है।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें: शरीर जब हाइड्रेट रहता है, तो हार्मोनल बदलाव होने की स्थिति कम उत्पन्न होती है। पानी हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है, इसलिए पानी पीते रहें और शरीर को स्वस्थ रखें।
  • स्ट्रेस कम करने के लिए योग या ध्यान करें: स्ट्रेस को कम करने का सबसे सही तरीका है योग और मेडिटेशन। स्ट्रेस भी हार्मोनल बदलाव का एक मुख्य कारण है, इसलिए इसका भी खास ख्याल रखें।
  • कैफीन, चॉकलेट, और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचें: इन सभी का सेवन हार्मोनल बदलावों और माइग्रेन की समस्या को ट्रिगक कर सकते हैं। इनसे दूरी बनाएं।
  • सोने और जागने का समय नियमित रखें: यदि आप अपने सोने और जागने का समय नियमित रखते हैं, तो इससे शरीर को पहले से ही ज्ञात होगा कि आपके सोने का समय नजदीक है, इसलिए अपना सोने और जागने का समय भी निर्धारित करें।
  • ज़रूरत हो तो विटामिन B2, मैग्नीशियम या कोएंजाइम Q10 जैसी सप्लीमेंट लें
  • ठंडी सिकाई से राहत मिल सकती है।

निष्कर्ष

महिलाओं में माइग्रेन हार्मोनल बदलावों के कारण अधिक होता है, खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव की वजह से। इस हार्मोन का स्तर मासिक धर्म से पहले, गर्भावस्था के दौरान और मेनोपॉज में बदलता रहता है, जिससे माइग्रेन के अटैक हो सकते हैं। सही खानपान, तनाव कम करना, पर्याप्त नींद लेना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। महिलाओं में माइग्रेन की समस्या पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक सामान्य है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता और सही उपचार आवश्यक है। यदि आप भी माइग्रेन की समस्या से लगातार परेशान रहती हैं, तो बिना देर किए हमारे डॉक्टरों से मिलें और इलाज के सभी विकल्पों पर विचार करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइग्रेन में क्या नहीं खाना चाहिए?

माइग्रेन की स्थिति में कैफीन, चॉकलेट, अधिक नमक, ज्यादा तैलीय और प्रोसेस्ड फूड, और कुछ पेय जैसे शराब से बचने की सलाह दी जाती है।

क्या माइग्रेन जानलेवा बीमारी है?

माइग्रेन जानलेवा नहीं है, लेकिन यह जीवन की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। यदि उचित उपचार न किया जाए, तो यह इतना तेज सिरदर्द करेगा कि आप सह नहीं पाएंगे और आपका जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो जाएगा।

क्या गर्भावस्था में महिलाओं को माइग्रेन ज्यादा होता है?

गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव के चलते कुछ महिलाओं को माइग्रेन की तीव्रता कम हो सकती है, जबकि कुछ में बढ़ भी सकती है।

क्या स्ट्रेस या नींद की कमी हार्मोनल माइग्रेन को बढ़ाती है?

हां, तनाव और नींद की कमी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाकर माइग्रेन को ज्यादा कर सकते हैं, इसलिए हम भी आपको सलाह देते हैं कि इस दौरान स्ट्रेस को कम करने का प्रयास करें।

क्या मेनोपॉज के दौरान माइग्रेन बढ़ सकता है?

मेनोपॉज के दौरान हार्मोन में अनियमितता के कारण माइग्रेन बढ़ सकता है, लेकिन बाद में हार्मोन स्थिर होने पर यह कम भी हो सकता है।

पीरियड के दौरान माइग्रेन क्यों बढ़ जाता है?

पीरियड में एस्ट्रोजन का स्तर गिरने के कारण मस्तिष्क में दर्द वाले रसायनों का स्तर बढ़ता है, जिससे माइग्रेन की संभावना होती है।

कौन-से ट्रिगर माइग्रेन को और ज्यादा करते हैं?

हार्मोनल बदलाव के अलावा स्ट्रेस, नींद की कमी, अनियमित खाने की आदतें, तेज़ रोशनी, और कुछ खाद्य पदार्थ माइग्रेन ट्रिगर कर सकते हैं।

Written and Verified by:

Dr. Gouri kumar Prusty

Dr. Gouri kumar Prusty

Senior consultant Exp: 45 Yr

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Dr. Gouri Kumar Prusty is a Senior Consultant in Neuro-surgery Dept. at CMRI Hospital, Kolkata, with over 45 years of experience. He specializes in brain, spine, and peripheral nerve surgeries, including microsurgical and endoscopic procedures.

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