
क्या आप भी हर महीने पीरियड ट्रैकर ऐप के भरोसे कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं? सच यह है कि सिर्फ कैलेंडर देखने से बात नहीं बनेगी। आपको अपने शरीर का फर्टाइल विंडो (ओव्यूलेशन) समझना होगा। आइए सरल भाषा में जानें कि प्रेग्नेंट होने के लिए सही दिन कौन-से हैं और अपनी फर्टिलिटी को प्राकृतिक रूप से कैसे बढ़ाएं।
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ओव्यूलेशन किसे कहते हैं? जब अंडाशय (ओवरी) से एक परिपक्व (मैच्योर) अंडा निकलकर फैलोपियन ट्यूब में पहुंचता है, तो इस प्रक्रिया को ओव्यूलेशन कहते हैं। यही ओव्यूलेशन क्या होता है का सीधा जवाब है।
यह अंडा सिर्फ लगभग 12 से 24 घंटे तक जीवित रहता है। इसी छोटी सी अवधि में शुक्राणु से मिलन हो जाए तो गर्भधारण की शुरुआत होती है। अंडा न निकले, तो गर्भ ठहरना संभव नहीं। इसलिए प्रेग्नेंसी की योजना बनाने वाले हर जोड़े के लिए ओव्यूलेशन को समझना पहला और सबसे जरूरी कदम है।
बहुत से लोग मानते हैं कि इसका जवाब हमेशा "14वां दिन" है। यह पूरी तरह सच नहीं है। ओव्यूलेशन का समय अगले पीरियड से लगभग 12 से 16 दिन पहले होता है, पिछले पीरियड के बाद के दिनों से नहीं।
तनाव, बीमारी, यात्रा, नींद की कमी या हार्मोनल बदलाव से यह समय आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए एक ही अंदाजे पर भरोसा करने की जगह अपने शरीर के संकेतों को भी पढ़ना सीखें।
शुक्राणु महिला के शरीर में करीब 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं, जबकि अंडा सिर्फ एक दिन। इसलिए फर्टाइल विंडो लगभग 6 दिन की होती है: ओव्यूलेशन से 5 दिन पहले और ओव्यूलेशन का दिन।
इनमें सबसे उपजाऊ दिन ओव्यूलेशन से ठीक पहले के 2 दिन और ओव्यूलेशन का दिन माने जाते हैं। इन्हीं दिनों में संबंध बनाने पर गर्भधारण की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। हर दिन संबंध बनाना जरूरी नहीं। फर्टाइल विंडो में एक दिन छोड़कर संबंध बनाना भी अच्छा नतीजा दे सकता है और मन पर दबाव भी कम रहता है।
ओव्यूलेशन के लक्षण हर किसी में एक जैसे नहीं होते। कुछ महिलाओं को बिल्कुल पता नहीं चलता, जबकि कुछ को साफ संकेत मिलते हैं -
हल्का दर्द सामान्य है, लेकिन असहनीय दर्द, तेज बुखार या भारी ब्लीडिंग हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
फर्टाइल दिनों को पता करना कोई बड़ा वैज्ञानिक फ़ॉर्मूला नहीं है। नीचे बताए गए तरीकों का उपयोग करें -
ओव्यूलेशन कैलकुलेटर इस्तेमाल करना आसान है -
याद रखें, कैलकुलेटर एक अनुमान देता है। चक्र अनियमित हो तो नतीजा गलत हो सकता है। ऐसे में उसे किट और लक्षणों के साथ मिलाकर देखें और 2-3 महीने का औसत तारीख निकालें।
PCOS में ओव्यूलेशन अक्सर अनियमित हो जाता है या कई महीनों तक होता ही नहीं। भारत के कई बड़े अनुसंधान रिसर्च में ये सामने आया है कि प्रजनन आयु की महिलाओं में PCOS की दर लगभग 3.7% से 22.5% तक दर्ज की गई है। थायरॉइड की गड़बड़ी, अत्यधिक तनाव, बहुत ज्यादा वजन या बहुत कम वजन भी ओव्यूलेशन बिगाड़ सकते हैं। PCOS सिर्फ प्रजनन का मुद्दा नहीं है। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़े कोलेस्ट्रॉल का खतरा भी जुड़ा होता है, जो आगे चलकर दिल की सेहत पर असर डाल सकता है। इसलिए इसे हल्के में न लें और अगर पीरियड्स में अनियमितता है, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में लगभग हर 6 में से 1 व्यक्ति जीवन में कभी न कभी इनफर्टिलिटी का सामना किया है। यानी आप अकेली नहीं हैं, और इसका इलाज संभव है। इन स्थितियों में विशेषज्ञ से मिलें -
ओव्यूलेशन आपके शरीर की एक स्वाभाविक घड़ी है। इसे पहचान लेने पर फर्टाइल दिन का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है और उम्मीद का सफर कम तनावपूर्ण बनता है। चार्ट, लक्षणों और किट को साथ मिलाकर इस्तेमाल करें, और खुद को दोष न दें। अगर आपको लगे कि कुछ ठीक नहीं है, तो देर न करें। हमारे विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने शरीर की सही तस्वीर समझें।
नहीं, 14वां दिन सिर्फ 28 दिन के चक्र का औसत है। ओव्यूलेशन अगले पीरियड से लगभग 12 से 16 दिन पहले होता है, इसलिए 32 दिन के चक्र में यह करीब 18वें दिन होगा।
हां, कई महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में एक तरफ हल्का दर्द होता है, जो कुछ घंटों से एक-दो दिन में ठीक हो जाता है। तेज, लगातार दर्द या बुखार हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
फर्टाइल विंडो लगभग 6 दिन की होती है: ओव्यूलेशन से पहले के 5 दिन और ओव्यूलेशन का दिन। शुक्राणु 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं, जबकि अंडा केवल 12 से 24 घंटे।
पारदर्शी और खिंचने वाला स्राव, निचले पेट में एक तरफ हल्का दर्द, बेसल तापमान में बढ़ोतरी, स्तनों में संवेदनशीलता और सेक्स की इच्छा बढ़ना मुख्य लक्षण हैं। कुछ महिलाओं में कोई लक्षण नहीं दिखता।
हां, अगर ओव्यूलेशन से 5 दिन पहले के भीतर संबंध बने हों। शुक्राणु शरीर में कई दिन जीवित रहते हैं और अंडा निकलते ही उसे निषेचित कर सकते हैं।
हां, PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कारण ओव्यूलेशन देर से हो सकता है या कई महीनों तक न भी हो। जीवनशैली में बदलाव और सही इलाज से अक्सर ओव्यूलेशन सुधर जाता है।
ओव्यूलेशन के लगभग 14 दिन बाद, यानी पीरियड मिस होने पर टेस्ट करें। बहुत जल्दी टेस्ट करने पर नतीजा गलत नेगेटिव आ सकता है।
हल्की स्पॉटिंग हार्मोनल बदलाव से हो सकती है और आमतौर पर हानिरहित है। लेकिन बार-बार या भारी ब्लीडिंग हो, तो जांच करवाएं।
हां, ज्यादा तनाव हार्मोन के संतुलन को बिगाड़कर ओव्यूलेशन को देर से या बंद कर सकता है। नींद, योग और संतुलित खानपान मदद करते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Swarnali Dutta is a Consultant in Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 10 years of experience. She specializes in managing all types of gynaecological and obstetrical disorders, with advanced skills in laparoscopy and robotic surgery.
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