
कभी-कभी हमारे पास पेशेंट एक सवाल लेकर आते हैं - "डॉक्टर, क्या पीरियड्स के दौरान सेक्स करना सुरक्षित है?” यह सवाल अकेले उनका नहीं होता, ऐसे कई कपल्स हैं जो इस विषय पर खुलकर बात करना चाहते हैं, लेकिन सामाजिक झिझक के कारण चुप रह जाते हैं।
भारतीय समाज में पीरियड्स और सेक्स, दोनों ही विषयों पर खुलकर बात करना आज भी असहज माना जाता है, जबकि यह हर कपल की सामान्य और वाजिब जिज्ञासा है। इंटरनेट पर मौजूद अधूरी या गलत जानकारी लोगों को और उलझन में डाल देती है। इसलिए इस ब्लॉग में हम पूरी तरह मेडिकल आधार पर, बिना किसी शर्म या झिझक के, यह समझने का प्रयास करेंगे कि पीरियड्स के दौरान सेक्स करना वाकई सुरक्षित है या नहीं, इसके क्या फायदे और नुकसान हैं, और किन सावधानियों का पालन जरूरी है। अगर आपके मन में भी इससे जुड़े सवाल हैं या आपको बार-बार दर्द, भारी ब्लीडिंग या इंफेक्शन जैसी शिकायत रहती है, तो बिना डर के हमारे अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें, सही जानकारी और सही सलाह ही आपकी सेहत की सबसे अच्छी सुरक्षा है।
सीधा और साफ जवाब है, हाँ। ज्यादातर महिलाएं और उनके पार्टनर्स मानते हैं कि पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान सेक्स सुरक्षित नहीं होता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यदि दोनों पार्टनर की आपसी सहमति है और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए, तो आप पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान सेक्स कर सकते हैं। योनि खुद एक सेल्फ-क्लीनिंग अंग है, यानी सिर्फ पीरियड्स का खून होने से वह अस्वच्छ या खतरनाक नहीं बन जाती।
फिर भी, हर महिला का शरीर अलग होता है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान आराम ज्यादा पसंद आता है, तो कुछ को इस समय सेक्स के दौरान ज्यादा उत्तेजना और आनंद महसूस होता है, क्योंकि इस दौरान पेल्विक एरिया में रक्त संचार बढ़ जाता है। पीरियड्स में सेक्स सुरक्षित है या नहीं यह सवाल सिर्फ स्वच्छता या शर्म का नहीं, बल्कि सही जानकारी और सही सावधानियों का भी है।
एक बात हमेशा ध्यान रखें, अगर महिला को उस समय गंभीर दर्द, भारी ब्लीडिंग, इंफेक्शन के लक्षण या कोई पेल्विक बीमारी है, तो सेक्स से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।
हर मेडिकल फैसले की तरह, इसमें भी कुछ जोखिम शामिल हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हैरानी की बात है, लेकिन पीरियड्स में संबंध बनाने के फायदे भी मेडिकल रूप से देखे गए हैं -
बहरहाल, यह जरूरी नहीं कि हर महिला को ये सारे फायदे महसूस हों। शरीर की प्रतिक्रिया व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग होती है, इसलिए अपने शरीर के संकेतों को समझना सबसे जरूरी है।
अगर आप और आपका पार्टनर इसके लिए सहज हैं, तो कुछ आसान सावधानियां अनुभव को सुरक्षित और आरामदायक बना सकती हैं जैसे कि -
सुरक्षित यौन संबंध का मतलब सिर्फ प्रेग्नेंसी रोकना नहीं, बल्कि दोनों पार्टनर की शारीरिक और भावनात्मक सेहत का ध्यान रखना भी है।
कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लिए बिना पीरियड सेक्स से परहेज करना ही बेहतर है -
ऐसे मामलों में शरीर की बात सुनना और डॉक्टर से खुलकर बात करना सबसे समझदारी भरा कदम है।
कुछ ऐसे प्रश्न हैं, जिनके जवाब आप सभी को पता होने चाहिए। इस टेबल की मदद से आपको इस विषय से संबंधित कुछ ऐसे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे, जिनके बारे में लोग अक्सर या तो बात करना नहीं चाहते हैं या फिर गलत जानकारी के साथ आगे बढ़ते हैं -

पीरियड्स के दौरान सेक्स करना कोई गलत या असामान्य बात नहीं है, यह पूरी तरह एक निजी और आपसी सहमति का फैसला है। मेडिकल रूप से देखा जाए तो सही हाइजीन, सही सुरक्षा और आपसी बातचीत के साथ यह ज्यादातर महिलाओं के लिए सुरक्षित है, और कई बार दर्द से राहत और भावनात्मक जुड़ाव जैसे फायदे भी दे सकता है। फिर भी, हर शरीर अलग है, इसलिए अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।
अगर आपको पीरियड्स से जुड़ी कोई असामान्य समस्या, बार-बार इंफेक्शन या अत्यधिक दर्द रहता है, तो शर्माने की बजाय हमारे अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से बात करें। सीके बिरला अस्पताल (CMRI), कोलकाता में हमारी विशेषज्ञ टीम पूरी संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ आपकी हर समस्या का समाधान करने के लिए मौजूद है। आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और सही जानकारी के साथ सही फैसला लें।
हां, हालांकि संभावना कम होती है, लेकिन शुक्राणु शरीर में पांच दिनों तक जीवित रह सकते हैं। छोटे मासिक चक्र वाली महिलाओं में गर्भधारण का खतरा बना रहता है।
नहीं, इससे STI और अनचाही प्रेग्नेंसी दोनों का खतरा बढ़ जाता है। पीरियड्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल और भी जरूरी हो जाता है।
इसका कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। गर्भाशय के संकुचन से अस्थायी रूप से फ्लो कम महसूस हो सकता है, लेकिन इससे पीरियड्स साइकिल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
हां, लेकिन STI के खतरे को कम करने के लिए डेंटल डैम जैसी सुरक्षा का इस्तेमाल करें और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
इस दौरान योनि का pH बदलने से संक्रमण की संभावना थोड़ी बढ़ सकती है। सही हाइजीन और कंडोम के इस्तेमाल से यह जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सामान्य तौर पर कोई सीधा नुकसान नहीं होता, लेकिन बिना सुरक्षा के संबंध बनाने से पुरुष को भी संक्रमण का खतरा रहता है, इसलिए कंडोम का इस्तेमाल जरूरी है।
नहीं, जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस, भारी ब्लीडिंग, इंफेक्शन या पेल्विक दर्द की समस्या है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लिए बिना यह नहीं आजमाना चाहिए।
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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.
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