
प्रेग्नेंसी का पता चलते ही जिंदगी में जितनी खुशियां आती हैं, उतने ही सवाल और झिझक भी साथ आ जाते हैं। सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला, लेकिन सबसे कम बोला जाने वाला सवाल यही होता है, क्या प्रेग्नेंसी में शारीरिक संबंध बनाना ठीक है? कहीं इससे बच्चे को नुकसान तो नहीं होगा? यह सवाल अक्सर कपल्स के मन में रहता है, लेकिन शर्म या झिझक के कारण वे इसे अपने डॉक्टर से भी पूछने से बचते हैं और इंटरनेट पर मौजूद अधूरी जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं।
अगर आपके मन में भी प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स को लेकर सवाल हैं, तो घबराए नहीं, क्योंकि इस ब्लॉग से आपको अपने सारे सवालों के जवाब मिल जाएगा, जिसे मैंने अपने चिकित्सीय अनुभव के आधार पर लिखा है। अगर आपकी प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क है या आपको किसी भी तरह की असमंजस है, तो हमारे अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने और अपने बच्चे की सेहत को लेकर पूरी जानकारी के साथ आगे बढ़ें।
मेडिकल साइंस के अनुसार, एक सामान्य और स्वस्थ प्रेग्नेंसी में सेक्स करना बच्चे के लिए किसी भी तरह से नुकसानदायक नहीं होता है। कई रिसर्च में यह साफ पाया गया है कि सामान्य प्रेग्नेंसी में यौन संबंध बनाने से समय से पहले प्रसव या मिसकैरेज का खतरा नहीं बढ़ता।
इसकी वजह यह है कि बच्चा गर्भाशय के अंदर तीन प्राकृतिक परतों से पूरी तरह सुरक्षित रहता है, गर्भाशय की मजबूत मांसपेशियां, चारों तरफ मौजूद एम्नियोटिक फ्लूइड और सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) के मुंह पर बना मोटा म्यूकस प्लग। यह म्यूकस प्लग एक तरह की प्राकृतिक दीवार की तरह काम करता है, जो बैक्टीरिया और किसी भी बाहरी संपर्क को गर्भाशय के अंदर जाने से रोकता है। यानी पार्टनर का शारीरिक संपर्क सीधे बच्चे तक कभी नहीं पहुंचता।
हालांकि, हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है। हार्मोनल बदलाव, जी मिचलाना, थकान और शरीर में हो रहे बदलावों के कारण सेक्स की इच्छा में कमी या बढ़ोतरी होना बिल्कुल सामान्य है। इसे लेकर किसी तरह का प्रेशर या अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं है।
आमतौर पर बिना जटिलता वाली प्रेग्नेंसी में तीनों तिमाही में सेक्स सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हर तिमाही में शरीर और आराम का स्तर अलग होता है जैसे कि -
हर महिला की प्रेग्नेंसी एक जैसी नहीं होती है। कुछ खास स्थितियों में डॉक्टर शारीरिक संबंध बनाने से पूरी तरह परहेज करने की सलाह देते हैं। इसे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था यानी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी कहा जाता है। इनमें शामिल हैं -
ऐसी स्थितियों में डॉक्टर अक्सर "पेल्विक रेस्ट" की सलाह देते हैं, जिसका मतलब है यौन संबंध, ऑर्गेज्म और योनि में किसी भी चीज के प्रवेश से पूरी तरह बचना।
अगर आपकी प्रेग्नेंसी सामान्य है और डॉक्टर ने कोई मनाही नहीं की है, तो कुछ छोटी सावधानियों के साथ आप अपने यौन संबंध को आरामदायक बना सकते हैं। प्रेग्नेंसी में सुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का खास ध्यान रखें -

यह विषय जितना जरूरी है, इससे जुड़े मिथक भी उतने ही ज्यादा हैं। आइए प्रेग्नेंसी में सेक्स से जुड़े मिथक को सच्चाई के साथ समझते हैं -
मिथक 1: सेक्स से बच्चे को चोट लग सकती है।
सच्चाई: बच्चा एम्नियोटिक फ्लूइड और गर्भाशय की मजबूत दीवारों से पूरी तरह सुरक्षित रहता है। पार्टनर का शारीरिक संपर्क बच्चे तक नहीं पहुंचता।
मिथक 2: ऑर्गेज्म से समय से पहले प्रसव हो सकता है।
सच्चाई: सामान्य प्रेग्नेंसी में ऑर्गेज्म के बाद हल्के संकुचन हो सकते हैं, लेकिन यह लेबर को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
मिथक 3: पूरी प्रेग्नेंसी में सेक्स बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।
सच्चाई: जब तक डॉक्टर मना न करें, सामान्य प्रेग्नेंसी में सेक्स जारी रखा जा सकता है।
मिथक 4: तीसरी तिमाही में सेक्स करने से डिलीवरी जल्दी हो सकती है।
सच्चाई: इस दावे के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, इसलिए ऐसा सोच कर कुछ न करें।
कुछ लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, चाहे वे सेक्स के बाद हों या सामान्य दिनों में। अगर आपको इनमें से कोई भी अनुभव हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें:
हल्की स्पॉटिंग कई बार सर्विक्स के संवेदनशील होने के कारण हो सकती है और अपने आप ठीक भी हो जाती है, लेकिन इसे खुद से नजरअंदाज करने की बजाय एक बार डॉक्टर को दिखाना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है। कोलकाता जैसे शहरों में आजकल कई महिलाएं प्रेग्नेंसी से जुड़े ऐसे संवेदनशील सवालों के लिए भी खुलकर विशेषज्ञ की सलाह लेने लगी हैं, जो एक अच्छा बदलाव है।
प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स को लेकर झिझक या शर्म महसूस करना स्वाभाविक है, लेकिन यह एक ऐसा विषय है, जिस पर खुलकर बात करना उतना ही जरूरी है, जितनी बाकी मेडिकल जांचें। एक सामान्य और स्वस्थ प्रेग्नेंसी में शारीरिक संबंध बनाना पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन अगर आपकी प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क है या कोई असामान्य लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई फैसला न लें।
हर प्रेग्नेंसी अलग होती है, इसलिए सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि अपने गायनेकोलॉजिस्ट से खुलकर बात करें और अपनी स्थिति के अनुसार सही सलाह लें। अगर आपके मन में इस विषय से जुड़ा कोई भी सवाल है, तो झिझकिए मत, सीके बिरला अस्पताल, कोलकाता के अनुभवी प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी प्रेग्नेंसी को सुरक्षित व तनावमुक्त बनाएं।
हां, सामान्य और बिना जटिलता वाली प्रेग्नेंसी में सेक्स करना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, जब तक डॉक्टर ने कोई मनाही न की हो।
नहीं, बच्चा गर्भाशय की मजबूत मांसपेशियों, एम्नियोटिक फ्लूइड और म्यूकस प्लग से पूरी तरह सुरक्षित रहता है। पार्टनर का शारीरिक संपर्क सीधे बच्चे तक नहीं पहुंचता।
सामान्य प्रेग्नेंसी में इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में डॉक्टर एहतियातन सेक्स से बचने की सलाह दे सकते हैं।
अगर प्रेग्नेंसी सामान्य है, तो डिलीवरी के करीब तक सेक्स करना सुरक्षित माना जाता है। हालांकि आराम और पोजीशन का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
प्लेसेंटा प्रीविया, समय से पहले प्रसव के लक्षण या कमजोर सर्विक्स जैसी स्थितियों में सेक्स से जटिलताएं बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए डॉक्टर पेल्विक रेस्ट की सलाह देते हैं।
हल्की स्पॉटिंग कभी-कभी सामान्य हो सकती है, लेकिन तेज दर्द या भारी रक्तस्राव होने पर इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत अपने गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
जी हां, हार्मोनल बदलाव, थकान और शारीरिक बदलावों के कारण इच्छा में कमी या बढ़ोतरी होना बिल्कुल सामान्य है। इसे लेकर तनाव लेने की जरूरत नहीं है।
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Director & HOD Obstetrics & Gynecology Exp: 44 Yr
Obstetrics and Gynaecology
Dr. Bikash Banerjee is Director & HOD of Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 30 years of experience. He specializes in infertility & ART, laparoscopy & robotic gynaecological surgery, high-risk pregnancies, and complex gynaecological disorders.
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