
पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द, जिसे आप शुरू में पीरियड्स का असर समझकर टाल देती हैं। कुछ दिनों बाद यही दर्द बढ़ जाता है, साथ में असामान्य डिस्चार्ज और हल्का बुखार भी जुड़ जाता है। बहुत सी महिलाएं इस स्थिति से गुज़रती हैं, फिर भी शर्म या जानकारी की कमी के चलते डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। जबकि यही देरी आगे चलकर प्रजनन स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है।
इस स्थिति को पेल्विक इंफेक्शन कहा जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज (Pelvic Inflammatory Disease - PID) कहते हैं। इस ब्लॉग में हम पेल्विक इंफेक्शन को पूरी तरह से समझेंगे, इसके लक्षण, कारण, जांच के तरीके, इलाज और बचाव को लेकर हर वह जानकारी देंगे जो एक महिला को जाननी चाहिए। यदि आपको पेट के निचले भाग में लगातार दर्द या असामान्य डिस्चार्ज जैसी कोई भी तकलीफ महसूस हो रही है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही समय पर सही जांच कराएं।
पेल्विक इंफेक्शन दरअसल एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय ग्रीवा (Cervix), गर्भाशय की परत (Endometrium), फैलोपियन ट्यूब या अंडाशय में से किसी एक या एक से ज़्यादा हिस्सों में बैक्टीरियल संक्रमण फैल जाता है। ज्यादातर मामलों में यह उन बैक्टीरिया से शुरू होता है, जो योनि या गर्भाशय ग्रीवा में मौजूद होते हैं, और उपचार न मिलने पर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ प्रजनन अंगों तक फैल जाते हैं।
यह समस्या मुख्यतः यौन रूप से सक्रिय महिलाओं में देखी जाती है, खासकर 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। यह बात समझनी जरूरी है कि PID कोई अकेली बीमारी नहीं, बल्कि अक्सर किसी और अनदेखे संक्रमण का आगे बढ़ा हुआ रूप है, जिसे समय पर पहचान कर रोका जा सकता है।

पेल्विक इन्फेक्शन के लक्षण शुरुआत में इतने हल्के हो सकते हैं कि उन्हें सामान्य पीरियड क्रैम्प या पेट की गैस समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही वजह है कि इन लक्षणों को ध्यान से पहचानना जरूरी है -
यहां एक बात समझनी बेहद ज़रूरी है, कई बार PID के लक्षण बेहद हल्के होते हैं या दिखते ही नहीं, खासकर जब यह क्लैमाइडिया या माइकोप्लाज्मा जैसे बैक्टीरिया से हुआ हो। इसका मतलब यह नहीं कि संक्रमण गंभीर नहीं है, बल्कि यही "साइलेंट" प्रकृति इसे और खतरनाक बना देती है, क्योंकि महिला को पता चलने तक नुकसान हो चुका होता है।
पेल्विक इंफेक्शन के पीछे सबसे आम कारण यौन संचारित संक्रमण (STI) होते हैं। गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसे बैक्टीरिया इसकी सबसे बड़ी वजह माने जाते हैं। इसके अलावा बैक्टीरियल वेजिनोसिस, जिसमें योनि में मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा असंतुलित हो जाती है, भी संक्रमण को ऊपर की तरफ फैलने में मदद कर सकता है।
कुछ और कारक भी PID के जोखिम को बढ़ाते हैं -
अगर PID का इलाज समय पर न हो, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। फैलोपियन ट्यूब में रुकावट आना, पस बनना, पेट की झिल्ली तक संक्रमण फैलना (पेरिटोनाइटिस), और लंबे समय तक पेल्विक दर्द बने रहना, यह सभी इसकी जटिलताएं हो सकती हैं।
PID का सटीक निदान करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर कई तरीकों को एक साथ अपनाते हैं जैसे कि -
PID के इलाज के लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जाता है -
अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता
PID से बचाव पूरी तरह मुमकिन है, बशर्ते कुछ सावधानियों का लगातार पालन किया जाए।
अगर आपको पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, असामान्य डिस्चार्ज, अनियमित रक्तस्राव या यौन संबंध के दौरान दर्द जैसा कोई भी लक्षण महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। कोलकाता में रहने वाली महिलाओं के लिए, समय पर किसी अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे भरोसेमंद कदम है। सीके बिरला अस्पताल, CMRI जैसे मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में गायनेकोलॉजी के साथ-साथ कार्डियोलॉजी और अन्य विभागों की विशेषज्ञ टीम एक साथ उपलब्ध होने से अगर संक्रमण के कारण शरीर पर व्यापक असर पड़ रहा हो तो समग्र देखभाल मिलना आसान हो जाता है।
पेल्विक इंफेक्शन कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे शर्म या झिझक के चलते टाला जाए। यह जितनी जल्दी पहचानी जाए, उतनी ही आसानी से इसका इलाज संभव है, और भविष्य में मां बनने की संभावनाओं को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। पेट के निचले हिस्से में बार-बार होने वाला दर्द, असामान्य डिस्चार्ज, या कोई भी लक्षण जो सामान्य नहीं लगता, उसे गंभीरता से लें और परामर्श लें।
हां, बार-बार होने वाला या देर से पकड़ में आया PID फैलोपियन ट्यूब में घाव या रुकावट पैदा कर सकता है, जिससे गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है। समय पर इलाज इस जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।
हां, ज्यादातर मामलों में PID गोनोरिया या क्लैमाइडिया जैसे यौन संचारित बैक्टीरिया से शुरू होता है, जो योनि से ऊपर की ओर फैलकर प्रजनन अंगों को संक्रमित कर देते हैं।
हां, PID से एक्टोपिक (ट्यूबल) प्रेगनेंसी का खतरा काफी बढ़ जाता है, और अगर संक्रमण सक्रिय हो तो गर्भधारण की योजना से पहले इसका पूरा इलाज जरूरी है।
UTI मूत्र मार्ग तक सीमित संक्रमण है, जबकि PID गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय जैसे प्रजनन अंगों का संक्रमण है। दोनों के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए जांच से ही सही पहचान संभव है।
सही एंटीबायोटिक इलाज से ज्यादातर मामले लगभग दो हफ्तों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर या देर से पकड़ में आए मामलों में रिकवरी में ज़्यादा समय लग सकता है।
नहीं, इलाज पूरा होने और डॉक्टर द्वारा संक्रमण पूरी तरह ठीक होने की पुष्टि होने तक यौन संबंध से बचना चाहिए, ताकि संक्रमण साथी में न फैले और रिकवरी में देरी न हो।
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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.
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