पेल्विक इन्फेक्शन क्या है? महिलाओं में इसके लक्षण, कारण और उपचार की पूरी जानकारी
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पेल्विक इन्फेक्शन क्या है? महिलाओं में इसके लक्षण, कारण और उपचार की पूरी जानकारी

Summary

  • पेल्विक इंफेक्शन (PID) महिलाओं के गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय का बैक्टीरियल संक्रमण है, जो अक्सर STI से शुरू होता है।
  • शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, जैसे पेट के निचले भाग में दर्द, असामान्य डिस्चार्ज और हल्का बुखार, इसलिए इन्हें अनदेखा न करें।
  • समय पर इलाज न होने पर यह बांझपन, एक्टोपिक प्रेगनेंसी और लंबे समय तक पेल्विक दर्द का कारण बन सकता है।
  • पेल्विक परीक्षण, स्वैब टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और कभी-कभी लैप्रोस्कोपी से निदान किया जाता है।
  • एंटीबायोटिक्स से समय पर इलाज होने पर ज़्यादातर महिलाएं पूरी तरह ठीक हो जाती हैं।
  • सुरक्षित यौन संबंध और नियमित जांच से PID से बचाव पूरी तरह संभव है।

पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द, जिसे आप शुरू में पीरियड्स का असर समझकर टाल देती हैं। कुछ दिनों बाद यही दर्द बढ़ जाता है, साथ में असामान्य डिस्चार्ज और हल्का बुखार भी जुड़ जाता है। बहुत सी महिलाएं इस स्थिति से गुज़रती हैं, फिर भी शर्म या जानकारी की कमी के चलते डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। जबकि यही देरी आगे चलकर प्रजनन स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है।

इस स्थिति को पेल्विक इंफेक्शन कहा जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज (Pelvic Inflammatory Disease - PID) कहते हैं। इस ब्लॉग में हम पेल्विक इंफेक्शन को पूरी तरह से समझेंगे, इसके लक्षण, कारण, जांच के तरीके, इलाज और बचाव को लेकर हर वह जानकारी देंगे जो एक महिला को जाननी चाहिए। यदि आपको पेट के निचले भाग में लगातार दर्द या असामान्य डिस्चार्ज जैसी कोई भी तकलीफ महसूस हो रही है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही समय पर सही जांच कराएं।

पेल्विक इंफेक्शन (PID) क्या है और महिलाओं में यह क्यों होता है?

पेल्विक इंफेक्शन दरअसल एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय ग्रीवा (Cervix), गर्भाशय की परत (Endometrium), फैलोपियन ट्यूब या अंडाशय में से किसी एक या एक से ज़्यादा हिस्सों में बैक्टीरियल संक्रमण फैल जाता है। ज्यादातर मामलों में यह उन बैक्टीरिया से शुरू होता है, जो योनि या गर्भाशय ग्रीवा में मौजूद होते हैं, और उपचार न मिलने पर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ प्रजनन अंगों तक फैल जाते हैं।

यह समस्या मुख्यतः यौन रूप से सक्रिय महिलाओं में देखी जाती है, खासकर 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। यह बात समझनी जरूरी है कि PID कोई अकेली बीमारी नहीं, बल्कि अक्सर किसी और अनदेखे संक्रमण का आगे बढ़ा हुआ रूप है, जिसे समय पर पहचान कर रोका जा सकता है।

पेल्विक इन्फेक्शन के लक्षण क्या है? 

Symptoms of pelvic infection

पेल्विक इन्फेक्शन के लक्षण शुरुआत में इतने हल्के हो सकते हैं कि उन्हें सामान्य पीरियड क्रैम्प या पेट की गैस समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही वजह है कि इन लक्षणों को ध्यान से पहचानना जरूरी है - 

  • पेट के निचले भाग में हल्के से लेकर तेज दर्द, जो अक्सर एक तरफ ज्यादा महसूस होता है।
  • असामान्य योनि स्राव, जिसमें कभी-कभी दुर्गंध भी हो सकती है।
  • मासिक धर्म के बीच में या उसके बाद अनियमित रक्तस्राव।
  • हल्का बुखार, जो संक्रमण बढ़ने पर तेज भी हो सकता है।
  • यौन संबंध के दौरान या उसके बाद दर्द।
  • पेशाब करते समय जलन या तकलीफ होना।
  • जी मिचलाना और कभी-कभी उल्टी, खासकर जब संक्रमण गंभीर हो चुका हो।

यहां एक बात समझनी बेहद ज़रूरी है, कई बार PID के लक्षण बेहद हल्के होते हैं या दिखते ही नहीं, खासकर जब यह क्लैमाइडिया या माइकोप्लाज्मा जैसे बैक्टीरिया से हुआ हो। इसका मतलब यह नहीं कि संक्रमण गंभीर नहीं है, बल्कि यही "साइलेंट" प्रकृति इसे और खतरनाक बना देती है, क्योंकि महिला को पता चलने तक नुकसान हो चुका होता है।

पेल्विक इंफेक्शन के कारण और संभावित जटिलताएं

पेल्विक इंफेक्शन के पीछे सबसे आम कारण यौन संचारित संक्रमण (STI) होते हैं। गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसे बैक्टीरिया इसकी सबसे बड़ी वजह माने जाते हैं। इसके अलावा बैक्टीरियल वेजिनोसिस, जिसमें योनि में मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा असंतुलित हो जाती है, भी संक्रमण को ऊपर की तरफ फैलने में मदद कर सकता है।

कुछ और कारक भी PID के जोखिम को बढ़ाते हैं - 

  • एक से ज़्यादा या नए यौन साथी होना, खासकर बिना कंडोम के संबंध बनाना।
  • पहले कभी PID हो चुका होना, जिसमें दोबारा संक्रमण की आशंका काफी बढ़ जाती है।
  • डूशिंग जैसी आदतें, जो योनि के प्राकृतिक बैक्टीरियल संतुलन को बिगाड़ सकती हैं।
  • प्रसव, गर्भपात या किसी स्त्री रोग संबंधी प्रक्रिया के बाद संक्रमण का खतरा।

अगर PID का इलाज समय पर न हो, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। फैलोपियन ट्यूब में रुकावट आना, पस बनना, पेट की झिल्ली तक संक्रमण फैलना (पेरिटोनाइटिस), और लंबे समय तक पेल्विक दर्द बने रहना, यह सभी इसकी जटिलताएं हो सकती हैं। 

पेल्विक इंफेक्शन की जांच कैसे होती है?

PID का सटीक निदान करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर कई तरीकों को एक साथ अपनाते हैं जैसे कि - 

  • पेल्विक परीक्षण: डॉक्टर पेल्विक एग्जामिनेशन के दौरान गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय और आस-पास के हिस्सों में दर्द या सूजन की जांच करते हैं। पेल्विक जांच के दौरान महसूस होने वाला दर्द निदान की पुष्टि करने में मदद करता है।
  • गर्भाशय ग्रीवा से स्वैब टेस्ट: गर्भाशय ग्रीवा से एक सैंपल लेकर यह जांचा जाता है कि कहीं गोनोरिया या क्लैमाइडिया संक्रमण तो मौजूद नहीं है।
  • अल्ट्रासोनोग्राफी: अगर दर्द की वजह से पूरी शारीरिक जांच मुश्किल हो या ज़्यादा जानकारी की ज़रूरत हो, तो पेल्विक अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। यह फैलोपियन ट्यूब या अंडाशय में पस या किसी असामान्यता का पता लगा सकता है।
  • गर्भावस्था परीक्षण: यह देखने के लिए किया जाता है कि कहीं लक्षणों की वजह एक्टोपिक प्रेगनेंसी तो नहीं है।
  • लैप्रोस्कोपी: अगर निदान अब भी अनिश्चित हो या इलाज का असर न दिख रहा हो, तो नाभि के पास एक छोटे चीरे के ज़रिए लैप्रोस्कोप डालकर पेट के अंदर की सीधी जांच की जाती है।

पेल्विक इन्फेक्शन का इलाज और रिकवरी

PID के इलाज के लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जाता है - 

  • प्राथमिक इलाज: PID का मुख्य इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, गंभीर जटिलताओं का खतरा उतना ही कम रहेगा।
  • घर पर इलाज (ओरल दवाएं): शुरुआती और हल्के मामलों में लगभग 2 हफ्तों तक मुंह से ली जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं से घर पर ही इलाज संभव है।

अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता

  1. 72 घंटों में सुधार न होने पर
  2. तेज बुखार होने पर
  3. गर्भावस्था की स्थिति में
  4. पस (Abscess) बनने की आशंका होने पर
  • दवा का पूरा कोर्स: लक्षण जल्दी ठीक महसूस होने पर भी एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करना अनिवार्य है।
  • पार्टनर की जांच व इलाज: संक्रमण को दोबारा फैलने से रोकने के लिए हाल के यौन साथी की जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज जरूरी है।
  • समय पर इलाज का महत्व: सही समय पर इलाज से पूरी रिकवरी हो जाती है, लेकिन बार-बार इन्फेक्शन होने से प्रजनन अंगों (Fertility) को नुकसान पहुँच सकता है।

पेल्विक इंफेक्शन से बचाव के उपाय और महिलाओं को कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

PID से बचाव पूरी तरह मुमकिन है, बशर्ते कुछ सावधानियों का लगातार पालन किया जाए।

  • सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं और कंडोम का सही इस्तेमाल करें
  • एक से ज़्यादा यौन साथी होने की स्थिति में नियमित STI जांच कराएं
  • डूशिंग जैसी आदतों से बचें, जो योनि के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकती हैं
  • असामान्य डिस्चार्ज या हल्के लक्षण दिखते ही जांच कराएं, इंतज़ार न करें
  • यौन साथी में STI के लक्षण दिखें तो दोनों की जांच और इलाज एक साथ कराए

अगर आपको पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, असामान्य डिस्चार्ज, अनियमित रक्तस्राव या यौन संबंध के दौरान दर्द जैसा कोई भी लक्षण महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। कोलकाता में रहने वाली महिलाओं के लिए, समय पर किसी अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे भरोसेमंद कदम है। सीके बिरला अस्पताल, CMRI जैसे मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में गायनेकोलॉजी के साथ-साथ कार्डियोलॉजी और अन्य विभागों की विशेषज्ञ टीम एक साथ उपलब्ध होने से अगर संक्रमण के कारण शरीर पर व्यापक असर पड़ रहा हो तो समग्र देखभाल मिलना आसान हो जाता है।

निष्कर्ष

पेल्विक इंफेक्शन कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे शर्म या झिझक के चलते टाला जाए। यह जितनी जल्दी पहचानी जाए, उतनी ही आसानी से इसका इलाज संभव है, और भविष्य में मां बनने की संभावनाओं को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। पेट के निचले हिस्से में बार-बार होने वाला दर्द, असामान्य डिस्चार्ज, या कोई भी लक्षण जो सामान्य नहीं लगता, उसे गंभीरता से लें और परामर्श लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

हां, बार-बार होने वाला या देर से पकड़ में आया PID फैलोपियन ट्यूब में घाव या रुकावट पैदा कर सकता है, जिससे गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है। समय पर इलाज इस जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।

Written and Verified by:

Dr. Manjari Chatterjee

Dr. Manjari Chatterjee

Consultant Exp: 28 Yr

Obstetrics and Gynaecology

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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.

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