पीरियड खुलकर न आना या कम आना
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पीरियड खुलकर न आना या कम आना

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Summary

अनियमित पीरियड्स ऐसी स्थिति है, जब मासिक चक्र 21 दिनों से कम या 35 दिनों से अधिक हो, पीरियड्स रुक-रुककर आएं या ब्लीडिंग कम हो। इसके कारण तनाव, हार्मोनल असंतुलन, थायराइड विकार, पीसीओएस, वजन में बदलाव और अधिक व्यायाम हो सकते हैं।

क्या आप हर महीने कैलेंडर देखते हुए इस चिंता में रहती हैं कि आपके पीरियड्स खुलकर क्यों नहीं आए? आप अकेली नहीं हैं। एक शोध के अनुसार, भारत में लगभग 20% से अधिक महिलाएं हार्मोनल असंतुलन या PCOS के कारण अनियमित या कम पीरियड्स का सामना करती हैं। पीरियड का कम आना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह आपकी मानसिक शांति को भी प्रभावित करता है। 

यदि आप पीरियड रुक रुक के आना क्या कारण है जैसे सवालों से जूझ रही हैं, तो CK Birla Hospital (CMRI) के विशेषज्ञ आपकी इस चिंता को दूर करने में आपकी मदद कर सकते हैं। सही समय पर सही सलाह और पीरियड लाने का उपाय अपनाकर आप फिर से स्वस्थ महसूस कर सकती हैं। अनियमित पीरियड्स के संबंध में आप हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं और इस स्थिति का उत्तम इलाज प्राप्त कर सकते हैं।

अनियमित पीरियड क्या है?

अनियमित पीरियड्स वह स्थिति है, जिसमें पीरियड साइकिल में बदलाव आता है। आमतौर पर, पीरियड्स साइकल 28 से 35 दिनों के बीच ही होते हैं और इसका समय 4-6 दिनों तक होता है। पीरियड्स में अनियमितता तब मानी जाती है जब - 

  • पीरियड्स 21 दिनों से भी कम अंतराल पर आएं।
  • पीरियड्स 35 दिनों से भी ज्यादा अंतराल पर आएं।
  • पीरियड्स के आने के बीच का समय बार-बार बदले।
  • पीरियड का पूरी तरह से रुक जाना।
  • पीरियड्स में रुक-रुक कर ब्लीडिंग होना।

पीरियड कम आने के नुकसान बहुत सारे हैं। अनियमित पीरियड्स की समस्या होने पर तुरंत परामर्श लें। परामर्श की सहायता से पीरियड्स में अनियमितता के कारण को निर्धारित करने में मदद मिल सकती है, जिसकी सहायता से इलाज के विभिन्न विकल्पों पर बात की जा सकती है। 

पीरियड रुक-रुक के आना क्या कारण है?

पीरियड्स रुकने के कारण बहुत सारे होते हैं जैसे कि - खराब जीवनशैली, अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति, इत्यादि। मुख्य रूप से पीरियड्स में अनियमितता के निम्न कारण हो सकते हैं - 

  • उम्र: एक उम्र के बाद पीरियड्स रुक रुक कर ही आते हैं। 40 से 50 साल के उम्र के बीच पीरियड्स रुक-रुक कर ही आते हैं। 
  • तनाव: तनाव के कारण हमारे शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे पीरियड साइकिल में अनियमितता आती है। तनाव के कारण ओव्यूलेशन का समय भी प्रभावित होता है, जिससे पीरियड की शुरुआत में देरी होती है।
  • वजन में परिवर्तन: अचानक अधिक वजन घटना या बढ़ना हार्मोन में असंतुलन का संकेत देता है, जिससे पीरियड्स में अनियमितता देखने को मिलती है। 
  • अत्यधिक व्यायाम: तीव्र शारीरिक गतिविधि हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे पीरियड्स में देरी होती है। अधिकतर मामलों में महिला एथलीट इस स्थिति का सामना करती हैं। 
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस): पीसीओएस एक हार्मोनल विकार है, जहां अंडाशय पर छोटे-छोटे सिस्ट का निर्माण हो जाता है। यह सिस्ट हार्मोनल असंतुलन के कारण बनते हैं, जो अंततः अनियमित पीरियड्स का कारण भी बनते हैं। 
  • थायराइड विकार: थायराइड रोग पीरियड साइकिल के समय को नियमित नहीं रहने देते हैं। हाइपोथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म दोनों प्रकार के थायरॉयड अनियमित पीरियड्स का कारण बन सकते हैं।
  • दवाएं: कुछ दवाएं, जैसे गर्भनिरोधक गोलियां पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव का कारण बन सकते हैं। जन्म नियंत्रण विधियों को बंद करने या बदलने से अस्थायी अनियमितता उत्पन्न हो सकती है।

यह सारे लाइट पीरियड्स के कारण हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त भी दूसरे स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं, जो इस स्थिति का मुख्य कारण बन सकती हैं। पीरियड्स कम आना हाइपोमेनोरिया (Hypomenorrhea) की स्थिति होती है, जिसकी पुष्टि निम्न स्थितियों में की जा सकती है - 

  • ब्लीडिंग केवल 1-2 दिन ही रहे।
  • पैड पर केवल हल्के धब्बे (Spotting) दिखाई दें।
  • ब्लीडिंग का फ्लो अचानक से पिछले महीनों की तुलना में बहुत कम हो जाए। 

यह सामान्य कुछ स्थितियों में सामान्य माना जाता जब मेनोपॉज के करीब होने पर या गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल हो। यदि आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं या अचानक बिना किसी कारण फ्लो कम हो गया हो जाए, तो यह एक गंभीर स्थिति है।

पीरियड्स खुलकर न होने के लक्षण

हर महिला का शरीर अलग-अलग होता है, इसलिए पीरियड्स का अनुभव भी उन्हें अलग-अलग ही होता है। यही कारण है कि इस स्थिति में सामान्य पीरियड साइकिल की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करना थोड़ा मुश्किल ही होता है। हालांकि कुछ लक्षण है, जिससे इस स्थिति की पुष्टि आसानी से हो सकती है जैसे कि - 

  • दो दिन या उससे कम ब्लीडिंग होना
  • ब्लीडिंग कम होना और ब्लड क्लॉट दिखाई देना
  • अचानक से ब्लीडिंग का स्तर कम होना
  • एक महीने के बाद, अगले महीने भी कम ब्लीडिंग होना

इस स्थिति में आपको अपना पीरियड्स साइकिल ट्रैक करना चाहिए। पीरियड्स साइकिल को ट्रैक करने का सबसे आसान तरीका है कैलेंडर या पीरियड ट्रैकिंग ऐप्लिकेशन का उपयोग। कैलेंडर में पीरियड के पहले दिन से शुरुआत करें और अगले पीरियड के पहले दिन तक निशान लगाएं। कुछ महीनों तक इसे करते रहने से आपको अपना संभावित पीरियड साइकिल मिल जाएगा। 

हार्मोनल असंतुलन और पीरियड्स कम आने का संबंध

हमारे शरीर में पीरियड्स का आना एक बहुत ही बारीक 'हार्मोनल मैसेजिंग' सिस्टम पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से दो हार्मोन्स होते हैं जैसे कि - एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)। गर्भाशय की परत (Uterine Lining) को बनाने और उसे बाहर निकालने का काम यह दोनों हार्मोन करते हैं। जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो उसका सीधा असर आपकी पीरियड्स ब्लीडिंग पर पड़ता है।

हार्मोनल असंतुलन पीरियड्स को निम्न प्रकार से प्रभावित करता है:

  • एस्ट्रोजन की कमी: एस्ट्रोजन हार्मोन गर्भाशय की परत को मोटा करने के लिए जिम्मेदार होता है। यदि शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम है, तो गर्भाशय की परत पतली रह जाती है, जिससे ब्लीडिंग बहुत कम होती है।
  • PCOS और एंड्रोजन: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में शरीर में पुरुष हार्मोन (Androgens) बढ़ जाते हैं। यह ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे पीरियड्स या तो मिस हो जाते हैं या फिर बहुत कम फ्लो के साथ आते हैं।
  • थायराइड ग्रंथि का प्रभाव: थायराइड हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म और प्रजनन प्रणाली दोनों को नियंत्रित करते हैं। थायराइड के स्तर में थोड़ा सा भी उतार-चढ़ाव पीरियड साइकिल को छोटा या बहुत हल्का (Light Period) बना सकता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर में इंसुलिन का बढ़ता स्तर अन्य हार्मोन्स को भी प्रभावित करता है, जिससे ओवरीज पर दबाव पड़ता है और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।

यदि आपको लगता है कि हार्मोन्स की वजह से आपकी साइकिल गड़बड़ा गई है, तो रेगुलर पीरियड आने के उपाय के तौर पर सबसे पहले हार्मोनल प्रोफाइल टेस्ट करवाना और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। सही पोषण और तनाव प्रबंधन हार्मोन्स को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रेगुलर पीरियड के लिए क्या करें?

पीरियड खुलकर या रेगुलर पीरियड नहीं आने का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। यहां इलाज के कुछ विकल्प दिए गए हैं, जिसके उपयोग से अनियमित पीरियड्स की समस्या को ठीक किया जा सकता है - 

  • जीवनशैली में बदलाव: योग, ध्यान और अनुलोम-विलोम के माध्यम से तनाव को कम किया जा सकता है, जो हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने और नियमित पीरियड्स साइकिल को बढ़ावा देने में मदद करता है।
  • विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन:सामान्यतः यह जीवनशैली प्रबंधन में आ जाना चाहिए, लेकिन इसे हम अलग ही लिख रहे हैं, क्योंकि महिला को इस बिंदु का खास ख्याल रखना होता है। 
  • स्वस्थ वजन का प्रबंधन: स्वस्थ वजन रेगुलर पीरियड के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इस स्थिति में डाइटिशियन या फिर स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह आपके लिए लाभकारी साबित हो सकती है। 
  • मध्यम व्यायाम: अपने व्यायाम की तीव्रता को कम करें। मध्यम गति से व्यायाम करने से शरीर भी स्वस्थ रहता है और पीरियड साइकिल में समस्या भी नहीं होती है। शारीरिक गतिविधि और आराम के बीच संतुलन बनाए रखें।
  • चिकित्सा हस्तक्षेप: पीसीओएस या थायराइड विकारों जैसी अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों के मामलों में चिकित्सा हस्तक्षेप आवश्यक है। हार्मोनल थेरेपी, थायराइड दवाएं और अन्य उपचार पीरियड्स को नियमित करने में मदद कर सकते हैं।
  • डॉक्टर से परामर्श: यदि आपको अनियमित पीरियड की समस्या बार-बार परेशान कर रही है, तो हम आपको डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह देंगे। वह किसी भी अंतर्निहित स्थिति की पहचान करने के लिए आवश्यक परीक्षण कर सकते हैं और परिणाम के आधार पर उत्तम इलाज की योजना बनाई जा सकती है।
  • जन्म नियंत्रण दवाएं: हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियां जैसे जन्म नियंत्रण गोलियां, पीरियड साइकिल को नियंत्रित करने वाली दवाएं इत्यादि को बंद करें। हालांकि इसका उपयोग केवल एक विशेषज्ञ के सलाह के बाद ही करना चाहिए।

सुरक्षित घरेलू उपाय

कुछ सुरक्षित उपाय होते हैं, जिन्हें आप बिना डर के कर सकती हैं जैसे कि - 

  • अदरक और दालचीनी: यह पीरियड खुलकर आने के घरेलू उपाय के रूप में बहुत प्रभावी हैं। अदरक शरीर की गर्मी बढ़ाता है और दालचीनी हार्मोन्स को संतुलित करती है।
  • कच्चा पपीता: यह गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन पैदा करता है, जो पीरियड्स खुलकर आने के उपाय में से एक है।

जीवनशैली में बदलाव

जीवनशैली में बदलाव इलाज का एक महत्वपूर्ण कारक है। निम्न बदलावों को अपनाएं और खुद को सुरक्षित और स्वस्थ रखें - 

  • संतुलित और पोषक आहार: अपनी डाइट में आयरन, विटामिन-C और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ (जैसे पालक, संतरा और नट्स) शामिल करें। यह रेगुलर पीरियड आने के उपाय में सबसे महत्वपूर्ण है।
  • तनाव कम करें (Stress Management): अत्यधिक तनाव 'कोर्टिसोल' बढ़ाता है जो पीरियड्स रोकता है। इसके लिए रोजाना 10-15 मिनट मेडिटेशन या गहरी सांस लेने वाले व्यायाम (Deep Breathing) करें।
  • मध्यम व्यायाम: रोजाना 30 मिनट पैदल चलें या योग करें। ध्यान रहे कि बहुत अधिक भारी एक्सरसाइज (Intense Workout) हार्मोन बिगाड़ सकती है, इसलिए संतुलन बनाए रखें।
  • पर्याप्त और गहरी नींद: शरीर को रिकवर करने और हार्मोन को संतुलित करने के लिए रोजाना 7-8 घंटे की सुकून भरी नींद लें। नींद की कमी सीधे साइकिल को प्रभावित करती है।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: अचानक वजन बढ़ना या कम होना ओव्यूलेशन को रोकता है। एक स्वस्थ BMI बनाए रखना पीरियड लाने का उपाय के तौर पर बेहतरीन काम करता है।
  • कैफीन और स्मोकिंग से दूरी: चाय, कॉफी और सिगरेट का सेवन कम करें। यह चीजें रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ती हैं, जिससे पीरियड फ्लो कम हो सकता है।

क्या न करें

हालांकि कुछ चीजें हैं जो महिलाओं को करने से बचना चाहिए जैसे कि -

  • अत्यधिक कैफीन (चाय/कॉफी) और शराब से बचें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी हार्मोनल पिल्स (Hormonal Pills) न लें।
  • क्रैश डाइटिंग या अचानक बहुत भारी एक्सरसाइज न शुरू करें।

पीरियड कम आने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से कब संपर्क करें?

पीरियड्स साइकिल में अनियमितता आम है। कुछ स्थितियों में आपको इलाज का सहारा लेना पड़ता है जैसे कि - 

  • लगातार अनियमितताओं का बना रहना: यदि अनियमित पीरियड आपको लगातार परेशान कर रहे हैं, तो एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।
  • असामान्य लक्षण: यदि पीरियड्स में देरी के साथ गंभीर दर्द, पीरियड में ब्लड कम आना या ज्यादा आना जैसे लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
  • अचानक परिवर्तन: यदि आपके पीरियड के समय में अचानक बदलाव आ गया है और आपकी उम्र 30 या फिर उससे अधिक है, तो एक अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लें।

पीरियड रेगुलर करने के उपाय (पीरियड खुलकर आने के उपाय)

जीवनशैली में बदलाव से लेकर चिकित्सा स्थितियों तक कई कारकों के कारण पीरियड में देरी हो सकती है। महिलाओं के लिए अपने शरीर को समझना, अपने पीरियड्स साइकिल पर नज़र रखना और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सलाह लेना आवश्यक है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि असंतुलित हार्मोन परिवर्तन के कारण पीरियड रेगुलर नहीं होते हैं। हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में कई चीजें आपकी मदद कर सकती हैं जैसे - 

  • नियमित व्यायाम करें।
  • ध्यान और योग का सहारा लें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।
  • नट्स, तैलीय मछली, फल और सब्जियां को अपने आहार में शामिल करें।
  • कैफीन, शराब और सिगरेट को अपने दिन आचार्य से दूर करें।
  • प्रोसेस्ड फ़ूड, कार्बोनेटेड ड्रिंक और अधिक मीठा या बहुत नमकीन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।

प्रेग्नेंसी और फर्टिलिटी पर असर

कम पीरियड आने का सीधा मतलब बांझपन नहीं है, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में ओवुलेशन (अंडा बनना) सही से नहीं हो रहा है। यदि आप मां बनने की योजना बना रही हैं और आपके पीरियड्स कम या अनियमित हैं, तो यह कंसीव करने में बाधा डाल सकता है। इसलिए आपको ऐसे लक्षण दिखते हैं तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिले और उनसे समझें कि आपकी आगे की योजना क्या होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीरियड ना आने से कौन सी बीमारी होती है?

लगातार पीरियड न आना पीसीओएस (PCOS), थायराइड या समय से पहले मेनोपॉज का संकेत हो सकता है। इससे भविष्य में हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) और दिल की बीमारियां बढ़ सकती हैं।

पीरियड कम से कम कितने दिन आना चाहिए?

सामान्यतः पीरियड 3 से 7 दिनों तक रहता है। यदि फ्लो केवल 1-2 दिन रहता है, तो इसे 'लाइट पीरियड' माना जाता है, जिसके लिए विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

पीरियड रुक-रुक के आने के क्या कारण है?

पीरियड रेगुलर न आने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे - 

  • हार्मोनल असंतुलन
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
  • थायराइड विकार
  • गर्भधारण
  • स्तनपान
  • पीरियड्स चक्र की शुरुआत
  • अतिरिक्त व्यायाम
  • तनाव

पीरियड्स को रेगुलर कैसे करें?

पीरियड को रेगुलर करने के लिए निम्नलिखित उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है - 

  • स्वस्थ आहार लें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • तनाव से बचें।

इसके अतिरिक्त यदि आप पीरियड्स में अनियमितता का सामना करते हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि डॉक्टर से परामर्श लें।

पीरियड खुलकर आने के लिए क्या खाएं?

पीरियड को रेगुलर करने के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है - 

  • फल और सब्जियां
  • होल ग्रेन
  • कम वसा वाले प्रोटीन
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड
  • विटामिन बी-6
  • मैग्नीशियम

इसके अतिरिक्त डॉक्टर डाइट चार्ट के द्वारा भी आपकी मदद कर सकते हैं।

पीरियड खुलकर नहीं आ रहा है तो क्या करें?

सबसे पहले अपना स्ट्रेस लेवल कम करें और अपनी पीरियड साइकिल ट्रैक करें। यदि फ्लो लगातार कम है, तो किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर अपनी जांच करवाएं।

क्या एनीमिया (खून की कमी) से पीरियड कम आ सकते हैं?

हां, शरीर में आयरन की कमी से गर्भाशय की परत (lining) ठीक से नहीं बन पाती, जिससे पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग बहुत कम या केवल स्पॉटिंग महसूस होती है।

पीरियड में कम ब्लड आए तो क्या करें?

यदि फ्लो अचानक कम हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह एंडोमेट्रियोसिस या हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है। सही जांच और पीरियड लाने का उपाय अपनाना जरूरी है।

1 महीने से पीरियड नहीं आया तो क्या करें?

सबसे पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करें। यदि रिपोर्ट नेगेटिव है, तो यह तनाव या पीसीओएस हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श लें।

क्या घरेलू उपायों से पीरियड खुलकर आ सकते हैं?

हां, पीरियड में कम ब्लड आए तो कुछ उपायों को करने से स्थिति बेहतर हो सकती है जैसे कि - 

  • आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थो जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, रेड मीट, और फलियों को अपने आहार में शामिल करें।
  • विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जिसकी मदद से शरीर आयरन का उपयोग कर पाए। 
  • आराम करें और तनाव को कम करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।

8 दिनों में पीरियड्स आने का क्या कारण है?

जल्दी-जल्दी पीरियड्स आना हार्मोनल उतार-चढ़ाव, गर्भाशय में फाइब्रॉएड या अत्यधिक तनाव का संकेत हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए अल्ट्रासाउंड (USG) करवाना बेहतर रहता है।

क्या तनाव के कारण पीरियड मिस या लेट हो सकते हैं?

बिल्कुल, तनाव से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो ओव्यूलेशन को रोक देता है। इससे पीरियड्स देरी से आ सकते हैं या पूरी तरह मिस हो सकते हैं।

क्या हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड्स कम हो सकते हैं?

हां, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी गर्भाशय की परत को पतला कर देती है, जिससे पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग काफी कम हो जाती है।

क्या वजन बढ़ने या घटने से पीरियड्स प्रभावित होते हैं?

हां, वजन में अचानक बदलाव शरीर के फैट सेल्स और हार्मोन्स को प्रभावित करता है, जिससे ओव्यूलेशन रुक सकता है और पीरियड साइकिल अनियमित हो सकती है।

क्या भविष्य में कम पीरियड होने से कोई समस्या हो सकती है?

हां, लंबे समय तक कम पीरियड्स रहना फर्टिलिटी (माँ बनने की क्षमता) और हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसे गंभीरता से लेना आवश्यक है।

क्या PCOS/PCOD के कारण पीरियड्स कम होते हैं?

हां, पीसीओएस में हार्मोनल गड़बड़ी के कारण ओव्यूलेशन नहीं होता, जिससे पीरियड्स बहुत कम, देरी से या रुक-रुक कर आते हैं।

अनियमित पीरियड्स के लिए कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?

यदि आपके पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, तो डॉक्टर आमतौर पर ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं:

  • हार्मोनल प्रोफाइल: इसमें TSH (थायराइड), प्रोलैक्टिन, और PCOS की जांच के लिए LH और FSH टेस्ट शामिल हैं।
  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (USG): गर्भाशय या अंडाशय में सिस्ट या किसी अन्य समस्या का पता लगाने के लिए।
  • हीमोग्लोबिन टेस्ट: शरीर में खून की कमी की जांच के लिए।

क्या अनियमित पीरियड्स का मतलब बांझपन (Infertility) है?

नहीं, इसका मतलब केवल यह है कि हार्मोन्स संतुलित नहीं है। सही डाइट, लाइफस्टाइल और डॉक्टरी इलाज से इसे ठीक कर गर्भधारण की संभावना को सामान्य किया जा सकता है।

क्या खान-पान में बदलाव से पीरियड्स नियमित किए जा सकते हैं?

हां, जंक फूड छोड़कर आयरन, विटामिन-सी और फाइबर युक्त संतुलित आहार लेने से शरीर का इंसुलिन और हार्मोन लेवल सुधरता है, जिससे पीरियड्स नियमित होते हैं।

Written and Verified by:

Dr. Manjari Chatterjee

Dr. Manjari Chatterjee

Consultant Exp: 27 Yr

Obstetrics and Gynaecology

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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.

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