
पीरियड कम आना (Hypomenorrhea) यानी सामान्य से बहुत हल्की ब्लीडिंग या केवल 1-2 दिन का फ्लो, हार्मोनल असंतुलन, तनाव, PCOS, थायराइड विकार, वजन में बदलाव या अत्यधिक व्यायाम के कारण हो सकता है। ज्यादातर मामलों में यह जीवनशैली में बदलाव और सही इलाज से ठीक हो जाता है, लेकिन बार-बार होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच जरूरी है।
क्या आपके पीरियड्स पहले की तुलना में बहुत कम या हल्के आने लगे हैं? आप अकेली नहीं हैं - भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं हार्मोनल असंतुलन या PCOS के कारण इस स्थिति का सामना करती हैं। यह लेख आपको पीरियड कम आने के 7 मुख्य कारण, पहचान के लक्षण, घरेलू उपाय और डॉक्टर से कब मिलना चाहिए - सब कुछ एक जगह बताएगा।
सामान्य पीरियड साइकिल 21 से 35 दिनों के बीच होती है, और ब्लीडिंग औसतन 3 से 7 दिनों तक रहती है। जब ब्लीडिंग इससे काफी कम हो - केवल 1-2 दिन चले, हल्के धब्बे (spotting) जैसी हो, या फ्लो पिछले महीनों की तुलना में अचानक बहुत घट जाए - तो इसे मेडिकल भाषा में हाइपोमेनोरिया (Hypomenorrhea) कहा जाता है।
हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए "नॉर्मल" की सीमा भी हर किसी के लिए थोड़ी अलग होती है। असली सवाल यह नहीं कि आपका फ्लो किसी और से कम है या ज्यादा - असली सवाल यह है कि आपके अपने सामान्य पैटर्न से यह कितना अलग है। यही वजह है कि अपने साइकिल को ट्रैक करना इतना जरूरी हो जाता है।
चलिए इस फर्क को आसानी से एक तालिका की सहायता से समझने का प्रयास करते हैं -
|
पैमाना |
नॉर्मल पीरियड |
लाइट पीरियड (हाइपोमेनोरिया) |
|
ब्लीडिंग की अवधि |
3–7 दिन |
1–2 दिन या केवल स्पॉटिंग |
|
फ्लो |
नियमित पैड/टैम्पोन बदलने लायक |
बहुत हल्का, कभी-कभी सिर्फ धब्बे |
|
साइकिल गैप |
21–35 दिन |
अक्सर सामान्य, या अनियमित |
|
कब सामान्य है |
- |
मेनोपॉज नजदीक होने पर या गर्भनिरोधक गोली के उपयोग में |
|
कब चिंता का विषय है |
- |
अचानक शुरू हो, प्रेगनेंसी प्लान कर रही हो, या साथ में दर्द/थकान हो |
पीरियड्स रुकने के कारण बहुत सारे होते हैं जैसे कि - खराब जीवनशैली, अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति, इत्यादि। मुख्य रूप से पीरियड्स में अनियमितता के निम्न कारण हो सकते हैं -
यह सारे लाइट पीरियड्स के कारण हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त भी दूसरे स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं, जो इस स्थिति का मुख्य कारण बन सकती हैं। पीरियड्स कम आना हाइपोमेनोरिया (Hypomenorrhea) की स्थिति होती है, जिसकी पुष्टि निम्न स्थितियों में की जा सकती है -
हर महिला का शरीर अलग-अलग होता है, इसलिए पीरियड्स का अनुभव भी उन्हें अलग-अलग ही होता है। यही कारण है कि इस स्थिति में सामान्य पीरियड साइकिल की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करना थोड़ा मुश्किल ही होता है। हालांकि कुछ लक्षण हैं, जिससे इस स्थिति की पुष्टि आसानी से हो सकती है जैसे कि -
ट्रैक कैसे करें: पीरियड के पहले दिन से अगले पीरियड के पहले दिन तक कैलेंडर या पीरियड-ट्रैकिंग ऐप पर नोट करें। सिर्फ 2-3 महीने का डेटा भी डॉक्टर के लिए बहुत काम की जानकारी बन जाता है - कई बार पेशेंट कहती हैं "मुझे बस लगा कि कम आ रहा है", लेकिन जब तारीखें और दिन गिनकर बताती हैं, तो सही कारण पकड़ना कहीं आसान हो जाता है। हमारे पीरियड कैलकुलेटर से आप अपना अगला संभावित साइकिल आसानी से ट्रैक कर सकती हैं।
पीरियड्स मुख्य रूप से दो हार्मोन्स (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) के संतुलन पर निर्भर करते हैं, जो गर्भाशय की परत बनाने और उसे बाहर निकालने का काम करते हैं।
यदि हार्मोनल कारण संदिग्ध लगे, तो सबसे पहला कदम है हार्मोनल प्रोफाइल टेस्ट और विशेषज्ञ की सलाह।
पीरियड्स साइकिल में अनियमितता आम है, लेकिन निम्न स्थितियों में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें -
पीरियड कम आना स्वयं एक लक्षण है लेकिन डॉक्टर इस स्थिति के कारण की पुष्टि के लिए निम्नलिखित टेस्ट का सुझाव दे सकते हैं -
कारण के अनुसार इलाज अलग हो सकता है:

इन सुरक्षित एवं प्रभावी घरेलू उपायों को आप अपनी जीवनशैली में जोड़ सकते हैं -
ऊपर बताए गए उपायों के साथ आपको अपने जीवन में निम्नलिखित बदलावों को भी अपनाना चाहिए -
क्या न करें:
कम पीरियड आने का मतलब सीधे बांझपन नहीं है, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि ओव्यूलेशन सही से नहीं हो रहा। बहुत सी महिलाएं यह सोचकर महीनों तक टालती रहती हैं कि "थोड़ा कम आ रहा है, ठीक हो जाएगा" - जबकि असल में यह वही समय होता है जब जांच सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है, खासकर अगर आप परिवार बढ़ाने की सोच रही हैं। यदि आप मां बनने की योजना बना रही हैं और फ्लो लगातार कम या अनियमित है, तो देर न करें - हमारे इनफर्टिलिटी विशेषज्ञों से मिलकर सही दिशा तय करें।
लगातार पीरियड न आना पीसीओएस (PCOS), थायराइड या समय से पहले मेनोपॉज का संकेत हो सकता है। इससे भविष्य में हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) और दिल की बीमारियां बढ़ सकती हैं।
सामान्यतः पीरियड 3 से 7 दिनों तक रहता है। यदि फ्लो केवल 1-2 दिन रहता है, तो इसे 'लाइट पीरियड' माना जाता है, जिसके लिए विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
पीरियड रेगुलर न आने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे -
पीरियड को रेगुलर करने के लिए निम्नलिखित उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है -
इसके अतिरिक्त यदि आप पीरियड्स में अनियमितता का सामना करते हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि डॉक्टर से परामर्श लें।
पीरियड को रेगुलर करने के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है -
इसके अतिरिक्त डॉक्टर डाइट चार्ट के द्वारा भी आपकी मदद कर सकते हैं।
सबसे पहले अपना स्ट्रेस लेवल कम करें और अपनी पीरियड साइकिल ट्रैक करें। यदि फ्लो लगातार कम है, तो किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर अपनी जांच करवाएं।
हां, शरीर में आयरन की कमी से गर्भाशय की परत (lining) ठीक से नहीं बन पाती, जिससे पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग बहुत कम या केवल स्पॉटिंग महसूस होती है।
यदि फ्लो अचानक कम हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह एंडोमेट्रियोसिस या हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है। सही जांच और पीरियड लाने का उपाय अपनाना जरूरी है।
सबसे पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करें। यदि रिपोर्ट नेगेटिव है, तो यह तनाव या पीसीओएस हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श लें।
हां, पीरियड में कम ब्लड आए तो कुछ उपायों को करने से स्थिति बेहतर हो सकती है जैसे कि -
जल्दी-जल्दी पीरियड्स आना हार्मोनल उतार-चढ़ाव, गर्भाशय में फाइब्रॉएड या अत्यधिक तनाव का संकेत हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए अल्ट्रासाउंड (USG) करवाना बेहतर रहता है।
बिल्कुल, तनाव से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो ओव्यूलेशन को रोक देता है। इससे पीरियड्स देरी से आ सकते हैं या पूरी तरह मिस हो सकते हैं।
हां, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी गर्भाशय की परत को पतला कर देती है, जिससे पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग काफी कम हो जाती है।
Written and Verified by:
-(1).webp&w=256&q=75)
Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.
Similar Obstetrics and Gynaecology Blogs
Book Your Appointment TODAY
© 2024 CMRI Kolkata. All Rights Reserved.