
अनियमित पीरियड्स ऐसी स्थिति है, जब मासिक चक्र 21 दिनों से कम या 35 दिनों से अधिक हो, पीरियड्स रुक-रुककर आएं या ब्लीडिंग कम हो। इसके कारण तनाव, हार्मोनल असंतुलन, थायराइड विकार, पीसीओएस, वजन में बदलाव और अधिक व्यायाम हो सकते हैं।
क्या आप हर महीने कैलेंडर देखते हुए इस चिंता में रहती हैं कि आपके पीरियड्स खुलकर क्यों नहीं आए? आप अकेली नहीं हैं। एक शोध के अनुसार, भारत में लगभग 20% से अधिक महिलाएं हार्मोनल असंतुलन या PCOS के कारण अनियमित या कम पीरियड्स का सामना करती हैं। पीरियड का कम आना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह आपकी मानसिक शांति को भी प्रभावित करता है।
यदि आप पीरियड रुक रुक के आना क्या कारण है जैसे सवालों से जूझ रही हैं, तो CK Birla Hospital (CMRI) के विशेषज्ञ आपकी इस चिंता को दूर करने में आपकी मदद कर सकते हैं। सही समय पर सही सलाह और पीरियड लाने का उपाय अपनाकर आप फिर से स्वस्थ महसूस कर सकती हैं। अनियमित पीरियड्स के संबंध में आप हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं और इस स्थिति का उत्तम इलाज प्राप्त कर सकते हैं।
अनियमित पीरियड्स वह स्थिति है, जिसमें पीरियड साइकिल में बदलाव आता है। आमतौर पर, पीरियड्स साइकल 28 से 35 दिनों के बीच ही होते हैं और इसका समय 4-6 दिनों तक होता है। पीरियड्स में अनियमितता तब मानी जाती है जब -
पीरियड कम आने के नुकसान बहुत सारे हैं। अनियमित पीरियड्स की समस्या होने पर तुरंत परामर्श लें। परामर्श की सहायता से पीरियड्स में अनियमितता के कारण को निर्धारित करने में मदद मिल सकती है, जिसकी सहायता से इलाज के विभिन्न विकल्पों पर बात की जा सकती है।
पीरियड्स रुकने के कारण बहुत सारे होते हैं जैसे कि - खराब जीवनशैली, अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति, इत्यादि। मुख्य रूप से पीरियड्स में अनियमितता के निम्न कारण हो सकते हैं -
यह सारे लाइट पीरियड्स के कारण हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त भी दूसरे स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं, जो इस स्थिति का मुख्य कारण बन सकती हैं। पीरियड्स कम आना हाइपोमेनोरिया (Hypomenorrhea) की स्थिति होती है, जिसकी पुष्टि निम्न स्थितियों में की जा सकती है -
यह सामान्य कुछ स्थितियों में सामान्य माना जाता जब मेनोपॉज के करीब होने पर या गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल हो। यदि आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं या अचानक बिना किसी कारण फ्लो कम हो गया हो जाए, तो यह एक गंभीर स्थिति है।
हर महिला का शरीर अलग-अलग होता है, इसलिए पीरियड्स का अनुभव भी उन्हें अलग-अलग ही होता है। यही कारण है कि इस स्थिति में सामान्य पीरियड साइकिल की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करना थोड़ा मुश्किल ही होता है। हालांकि कुछ लक्षण है, जिससे इस स्थिति की पुष्टि आसानी से हो सकती है जैसे कि -
इस स्थिति में आपको अपना पीरियड्स साइकिल ट्रैक करना चाहिए। पीरियड्स साइकिल को ट्रैक करने का सबसे आसान तरीका है कैलेंडर या पीरियड ट्रैकिंग ऐप्लिकेशन का उपयोग। कैलेंडर में पीरियड के पहले दिन से शुरुआत करें और अगले पीरियड के पहले दिन तक निशान लगाएं। कुछ महीनों तक इसे करते रहने से आपको अपना संभावित पीरियड साइकिल मिल जाएगा।
हमारे शरीर में पीरियड्स का आना एक बहुत ही बारीक 'हार्मोनल मैसेजिंग' सिस्टम पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से दो हार्मोन्स होते हैं जैसे कि - एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)। गर्भाशय की परत (Uterine Lining) को बनाने और उसे बाहर निकालने का काम यह दोनों हार्मोन करते हैं। जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो उसका सीधा असर आपकी पीरियड्स ब्लीडिंग पर पड़ता है।
हार्मोनल असंतुलन पीरियड्स को निम्न प्रकार से प्रभावित करता है:
यदि आपको लगता है कि हार्मोन्स की वजह से आपकी साइकिल गड़बड़ा गई है, तो रेगुलर पीरियड आने के उपाय के तौर पर सबसे पहले हार्मोनल प्रोफाइल टेस्ट करवाना और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। सही पोषण और तनाव प्रबंधन हार्मोन्स को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पीरियड खुलकर या रेगुलर पीरियड नहीं आने का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। यहां इलाज के कुछ विकल्प दिए गए हैं, जिसके उपयोग से अनियमित पीरियड्स की समस्या को ठीक किया जा सकता है -
कुछ सुरक्षित उपाय होते हैं, जिन्हें आप बिना डर के कर सकती हैं जैसे कि -
जीवनशैली में बदलाव इलाज का एक महत्वपूर्ण कारक है। निम्न बदलावों को अपनाएं और खुद को सुरक्षित और स्वस्थ रखें -
हालांकि कुछ चीजें हैं जो महिलाओं को करने से बचना चाहिए जैसे कि -
पीरियड्स साइकिल में अनियमितता आम है। कुछ स्थितियों में आपको इलाज का सहारा लेना पड़ता है जैसे कि -
जीवनशैली में बदलाव से लेकर चिकित्सा स्थितियों तक कई कारकों के कारण पीरियड में देरी हो सकती है। महिलाओं के लिए अपने शरीर को समझना, अपने पीरियड्स साइकिल पर नज़र रखना और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सलाह लेना आवश्यक है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि असंतुलित हार्मोन परिवर्तन के कारण पीरियड रेगुलर नहीं होते हैं। हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में कई चीजें आपकी मदद कर सकती हैं जैसे -
कम पीरियड आने का सीधा मतलब बांझपन नहीं है, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में ओवुलेशन (अंडा बनना) सही से नहीं हो रहा है। यदि आप मां बनने की योजना बना रही हैं और आपके पीरियड्स कम या अनियमित हैं, तो यह कंसीव करने में बाधा डाल सकता है। इसलिए आपको ऐसे लक्षण दिखते हैं तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिले और उनसे समझें कि आपकी आगे की योजना क्या होगी।
लगातार पीरियड न आना पीसीओएस (PCOS), थायराइड या समय से पहले मेनोपॉज का संकेत हो सकता है। इससे भविष्य में हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) और दिल की बीमारियां बढ़ सकती हैं।
सामान्यतः पीरियड 3 से 7 दिनों तक रहता है। यदि फ्लो केवल 1-2 दिन रहता है, तो इसे 'लाइट पीरियड' माना जाता है, जिसके लिए विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
पीरियड रेगुलर न आने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे -
पीरियड को रेगुलर करने के लिए निम्नलिखित उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है -
इसके अतिरिक्त यदि आप पीरियड्स में अनियमितता का सामना करते हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि डॉक्टर से परामर्श लें।
पीरियड को रेगुलर करने के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है -
इसके अतिरिक्त डॉक्टर डाइट चार्ट के द्वारा भी आपकी मदद कर सकते हैं।
सबसे पहले अपना स्ट्रेस लेवल कम करें और अपनी पीरियड साइकिल ट्रैक करें। यदि फ्लो लगातार कम है, तो किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर अपनी जांच करवाएं।
हां, शरीर में आयरन की कमी से गर्भाशय की परत (lining) ठीक से नहीं बन पाती, जिससे पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग बहुत कम या केवल स्पॉटिंग महसूस होती है।
यदि फ्लो अचानक कम हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह एंडोमेट्रियोसिस या हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है। सही जांच और पीरियड लाने का उपाय अपनाना जरूरी है।
सबसे पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करें। यदि रिपोर्ट नेगेटिव है, तो यह तनाव या पीसीओएस हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श लें।
हां, पीरियड में कम ब्लड आए तो कुछ उपायों को करने से स्थिति बेहतर हो सकती है जैसे कि -
जल्दी-जल्दी पीरियड्स आना हार्मोनल उतार-चढ़ाव, गर्भाशय में फाइब्रॉएड या अत्यधिक तनाव का संकेत हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए अल्ट्रासाउंड (USG) करवाना बेहतर रहता है।
बिल्कुल, तनाव से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो ओव्यूलेशन को रोक देता है। इससे पीरियड्स देरी से आ सकते हैं या पूरी तरह मिस हो सकते हैं।
हां, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी गर्भाशय की परत को पतला कर देती है, जिससे पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग काफी कम हो जाती है।
हां, वजन में अचानक बदलाव शरीर के फैट सेल्स और हार्मोन्स को प्रभावित करता है, जिससे ओव्यूलेशन रुक सकता है और पीरियड साइकिल अनियमित हो सकती है।
हां, लंबे समय तक कम पीरियड्स रहना फर्टिलिटी (माँ बनने की क्षमता) और हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसे गंभीरता से लेना आवश्यक है।
हां, पीसीओएस में हार्मोनल गड़बड़ी के कारण ओव्यूलेशन नहीं होता, जिससे पीरियड्स बहुत कम, देरी से या रुक-रुक कर आते हैं।
यदि आपके पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, तो डॉक्टर आमतौर पर ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं:
नहीं, इसका मतलब केवल यह है कि हार्मोन्स संतुलित नहीं है। सही डाइट, लाइफस्टाइल और डॉक्टरी इलाज से इसे ठीक कर गर्भधारण की संभावना को सामान्य किया जा सकता है।
हां, जंक फूड छोड़कर आयरन, विटामिन-सी और फाइबर युक्त संतुलित आहार लेने से शरीर का इंसुलिन और हार्मोन लेवल सुधरता है, जिससे पीरियड्स नियमित होते हैं।
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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.
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