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सर्वाइकल कैंसर: कारण, लक्षण और उपचार

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सर्वाइकल कैंसर: कारण, लक्षण और उपचार

Obstetrics and Gynaecology | Posted on 01/18/2024 by Dr. Tripti Dadhich



"मुझे सर्वाइकल कैंसर है।" यह वाक्य किसी भी महिला के जीवन का सबसे दर्दनाक वाक्य है। लेकिन आपको यहां हिम्मत हारने की ज़रूरत नहीं है। चलिए इस रोग के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं, जैसे इसके कारण, लक्षण, और उपचार। इसके साथ-साथ हम जानेंगे कि सर्वाइकल कैंसर की पहचान कैसे होती है और इसके कितने स्टेज हैं।

इस ब्लॉग में लिखी गई जानकारी एक सामान्य चिकित्सा जानकारी है। यदि आपको सर्वाइकल कैंसर की शिकायत है, तो हम आपको सलाह देंगे कि आप हमारे कैंसर या फिर स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। 

भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति

सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मृत्यु की संख्या भारत में काफी अधिक है। भारत की महिलाओं में होने वाले कैंसरों में चौथा सबसे आम कैंसर है, सर्वाइकल कैंसर। हर वर्ष लगभग 1.2 लाख महिलाएं इस कैंसर का शिकार होती हैं। चलिए सबसे पहले जानते हैं कि सर्वाइकल कैंसर क्या है? 

सर्वाइकल कैंसर, या गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा की सतह पर शुरू होता है। यह तब होता है जब आपके गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएं असाधारण कोशिकाओं में बदलने लगती हैं। इस स्थिति का सबसे उत्तम इलाज है, उन कोशिकाओं को ढूंढना और उनके बदलने से पहले उन प्रभावित कोशिकाओं का इलाज करना। इलाज के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ या कर्क रोग विशेषज्ञ से मिलने की सलाह दी जाती है।

सर्वाइकल कैंसर क्यों होता है?

अधिकांश सर्वाइकल कैंसर एचपीवी वायरस के कारण होता है, जो एक यौन संचारित संक्रमण है। यह वायरस यौन संपर्क में आने से फैलता है और कभी-कभी कैंसर का कारण बन सकता है। अधिकांश महिलाओं को पता ही नहीं चलता है कि वह एचपीवी के संक्रमण से प्रभावित हो गई है, क्योंकि उनका शरीर इस संक्रमण से लड़ने में सक्षम होता है। कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि उनका शरीर संक्रमण से नहीं लड़ पाता है, जिसके कारण गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं का कैंसर हो जाता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी 100 से अधिक प्रकार के होते हैं। उन्हीं में से लगभग एक दर्जन को कैंसर का कारण माना गया है। यदि समय पर उन सभी प्रकारों के बारे में पता न चले, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। इससे बचने के लिए एक अनुभवी और श्रेष्ठ स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ नियमित जांच कराएं।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरणों में लक्षण नहीं दिखते हैं, जिसके कारण इस स्थिति के शुरुआत में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण को पहचान पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। जांच के दौरान असामान्य कोशिकाओं का पता लगाना सर्वाइकल कैंसर से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। हालांकि स्टेज 1 सर्वाइकल में कुछ लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं जैसे -

  • यौनी से रक्त या फिर तरल पदार्थ निकलना, जिससे दुर्गंध आए। 
  • यौन संबंध स्थापित करने के बाद, मासिक धर्म के बीच या मेनोपॉज के बाद योनि से रक्त हानि।
  • पीरियड्स के दौरान असामान्य मासिक धर्म

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य लक्षण भी होते हैं, जो तब उत्पन्न होते हैं, जब यह कैंसर अन्य अंगों तक फैल जाता है। उस स्थिति के लक्षण इस प्रकार हैं -

  • पेशाब करने में कठिनाई या दर्द
  • पेशाब में खून आना (बहुत कम मामलों में)
  • दस्त, या मल त्यागते समय मलाशय में दर्द या रक्त हानि
  • थकान, वजन और भूख न लगना
  • सेहत ठीक न लगना
  • पैरों में हल्का पीठ दर्द या सूजन
  • पेल्विक या पेट दर्द

यदि आप असामान्य रक्त हानि, योनि से तरल पदार्थ या किसी अन्य अस्पष्ट लक्षण का अनुभव करते हैं, तो आपको सबसे पहले एक अनुभवी और श्रेष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

सर्वाइकल कैंसर के स्टेज

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए चरण का पता लगाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे व्यक्ति को उपचार का सबसे प्रभावी प्रकार तय करने में मदद मिलती है। कैंसर के स्टेज का पता लगाने के पीछे एक और उद्देश्य होता है और वह है कि पता लगाना कि कैंसर कितनी दूर तक फैला है और क्या इससे गर्भाशय ग्रीवा के आस-पास के अंग प्रभावित हुए है।

सर्वाइकल कैंसर को 4 स्टेज में बांटा गया है। 

  • स्टेज 0: असामान्य कोशिकाओं का मौजूद होना।
  • स्टेज 1: इस स्टेज में कैंसर की कोशिकाएं गर्भाशय ग्रीवा के सतह पर होती हैं। संभवतः यह कोशिकाएं गर्भाशय और उसके आस-पास के लिम्फ नोड्स में विकसित होती है।
  • स्टेज 2: इस स्टेज में कैंसर गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय से आगे बढ़ जाता है। लेकिन इस स्टेज में कैंसर श्रोणि की दीवारों या योनि के निचले भाग तक नहीं पहुंचता है। यह आस-पास के लिम्फ नोड्स को भी प्रभावित कर सकता है।
  • स्टेज 3: कैंसर कोशिकाएं योनि के निचले भाग या श्रोणि की दीवारों में मौजूद होते हैं, और यह मूत्र प्रणाली को अवरुद्ध कर सकते हैं। इस चरण में आस-पास के लिम्फ नोड्स प्रभावित हो जाते हैं।
  • स्टेज 4: इस चरण में कैंसर मूत्राशय या मलाशय को प्रभावित करता है और कुछ मामलों में यह श्रोणि से बाहर भी आ सकता है। स्टेज 4 अंतिम चरण है, जिसमें कैंसर यकृत, हड्डियों, फेफड़ों और लिम्फ नोड्स सहित दूसरे अंगों में फैल जाता है। यह स्थिति जानलेवा स्थिति है।

किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर हम आपको सलाह देंगे कि आप जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें और इलाज कराएं।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए कई तरीके हैं। चलिए उनमें से मुख्य के बारे में बात करते हैं -

  • एचपीवी का टीकाकरण: यह टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। इस प्रकार के टीकाकरण 9 से 45 वर्ष के व्यक्तियों में होते हैं।
  • असुरक्षित यौन संबंध से बचें: असुरक्षित यौन संबंध से बचने से बहुत लाभ मिलेगा।
  • धूम्रपान न करें: यदि आपको कैंसर की पुष्टि हुई है, तो धूम्रपान छोड़ने की सलाह दी जाती है। यह स्थिति को और भी ज्यादा गंभीर कर सकता है।
  • संतुलित आहार खाएं और नियमित व्यायाम करें: इससे शरीर स्वस्थ रहता है और अन्य समस्याएं व्यक्ति को परेशान नहीं करती है। कैंसर की पुष्टि होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आहार एक अहम भूमिका निभाता है।

इसके साथ-साथ हम आपको सलाह देंगे कि आप हर कुछ समय में अपने स्वास्थ्य की जांच कराएं।

सर्वाइकल कैंसर का इलाज

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के कई विकल्प मौजूद है, जैसे -

  • सर्जरी: सर्जरी का सुझाव डॉक्टर तभी देते हैं, जब उन्हें पता है कि कैंसर से प्रभावित भाग के ऑपरेशन से स्थिति से राहत मिल सकती है। सर्जरी में गर्भाशय ग्रीवा के उस क्षेत्र को हटा दिया जाता है, जिसमें कैंसर की कोशिकाएं होती हैं। यदि स्थिति अधिक गंभीर है, तो सर्जरी में गर्भाशय ग्रीवा और अन्य अंगों को भी निकाला जाता है।
  • रेडिएशन थेरेपी: रेडियो फ्रीक्वेंसी का प्रयोग करके शरीर में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं को खत्म किया जाता है। इस थेरेपी का प्रयोग सर्जरी से पहले और बाद में किया जाता है।
  • कीमोथेरेपी: कीमोथेरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पूरे शरीर के कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का प्रयोग होता है। सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों में डॉक्टर इस प्रक्रिया का सुझाव देते हैं। सर्जरी के बाद भी कीमो का सुझाव डॉक्टर देते हैं। इस प्रक्रिया से पुष्टि की जाती है कि कैंसर कोशिकाएं पूर्ण रूप से खत्म हो जाएं।

सर्वाइकल कैंसर से संबंधित अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

 

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण और उपचार क्या है?

लक्षण

  • योनि से रक्त हानि
  • असामान्य तरल पदार्थ का निकलना
  • पीठ के निचले भाग में दर्द
  • बार-बार पेशाब आना
  • पेशाब करते समय दर्द या जलन

उपचार

  • सर्जरी
  • रेडिएशन थेरेपी
  • कीमोथेरेपी

सर्वाइकल कैंसर कैसे ठीक होता है?

सर्वाइकल कैंसर का इलाज कैंसर के चरण और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। शुरुआती चरण में सर्जरी अक्सर कैंसर को ठीक करने के लिए पर्याप्त होती है। 

सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक क्या है?

सर्वाइकल कैंसर के निम्नलिखित जोखिम कारक होते हैं - 

  • ह्यूमन पेपिलोमावायरस संक्रमण
  • कम उम्र में यौन संबंध
  • कई यौन साथी
  • गर्भावस्था
  • धूम्रपान

सर्वाइकल कैंसर से कैसे बचाव करें?

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं - 

  • एचपीवी टीकाकरण
  • नियमित पैप स्मियर और एचपीवी परीक्षण
  • असुरक्षित यौन संबंध से बचें
  • धूम्रपान से दूरी बनाएं

क्या सर्वाइकल कैंसर का कोई इलाज नहीं है?

सर्वाइकल कैंसर के लिए कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं हैं। उपचार के परिणाम कैंसर के चरण और अन्य कारकों पर निर्भर करते हैं। हमारे डॉक्टरों का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर का इलाज शुरुआती चरणों में संभव है। यदि कैंसर बढ़ जाता है, तो इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, जो कि एक जानलेवा स्थिति साबित हो सकती है।