
अल्सरेटिव कोलाइटिस बड़ी आंत की सूजन संबंधी बीमारी है, जो दस्त, खून, पेट दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण पैदा करती है। सही उपचार, डाइट और जीवनशैली बदलावों से इसके लक्षणों को नियंत्रित कर लंबे समय तक राहत पाई जा सकती है।
कई बार जिंदगी की दौड़ में हम अपने शरीर द्वारा दिए गए संकेतों को अनदेखा कर देते हैं। हल्का पेट दर्द, गैस, या बार-बार दस्त आना हमें सामान्य लगते हैं, लेकिन यह सामान्य बिल्कुल नहीं होते है। लेकिन जब मल में खून दिखने लगे, रात में कई बार उठकर बाथरूम जाना पड़े, या लगातार कमजोरी रहने लगे, तो हम कह सकते हैं कि आपका शरीर कोई संकेत देना चाहता है।
यह सारे लक्षण अक्सर अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) जिसे हिंदी में बड़ी आंत की सूजन या रक्तातिसार जैसे रोग की ओर इशारा करते हैं। भारत में IBD (Inflammatory Bowel Disease) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। Indian Journal of Gastroenterology के हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में 14–16 लाख लोग IBD से प्रभावित हैं, जिनमें अल्सरेटिव कोलाइटिस का बड़ा प्रतिशत शामिल है। विशेषज्ञों की मानी जाए तो समय पर निदान और सही उपचार न मिलने पर मरीजों की जीवन गुणवत्ता तेजी से गिर सकती है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि आज के समय में अल्सरेटिव कोलाइटिस का प्रभावी प्रबंधन, आधुनिक जांच तकनीकों और व्यक्तिगत डाइट प्लान की मदद से लंबे समय तक बिना लक्षणों वाला जीवन संभव है। इससे निजात पाने के लिए तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।
अल्सरेटिव कोलाइटिस एक पुरानी (chronic) सूजन संबंधी बीमारी है, जो केवल बड़ी आंत (कोलन) और रेक्टम को प्रभावित करती है। इसमें आंत की भीतरी परत में सूजन और छोटे-छोटे घाव (ulcers) बन जाते हैं। इसी सूजन के कारण मरीज को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि -
यह रोग आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और कई बार मरीज को समझ ही नहीं आता कि यह समस्या कब गंभीर रूप ले चुकी है। अल्सरेटिव कोलाइटिस हमेशा रेक्टम से शुरू होता है, लेकिन समय के साथ यह पूरी कोलन तक फैल सकता है। इसी आधार पर इसके कई प्रकार निर्धारित किए जाते हैं।
इसे प्रभावित क्षेत्र के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में बांटा गया है। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं -
बाईं तरफ पेट दर्द, खून वाला दस्त, और वजन कम होना इत्यादि।
इस बीमारी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन बढ़ते हुए यह जटिल हो सकते हैं। चलिए इस स्थिति के कुछ प्रारंभिक लक्षणों को समझते हैं -
यदि यह लक्षण 2–3 हफ्तों से अधिक बने रहें, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना महत्वपूर्ण है।
अल्सरेटिव कोलाइटिस के सटीक कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके कुछ मजबूत संभावित कारक पहचान लिए हैं जैसे कि -
कारण कुछ भी हो सकते हैं, लेकिन आपका इलाज व्यक्तिगत होना चाहिए, जिसके लिए आपको हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलने की सलाह दी जाती है।
अल्सरेटिव कोलाइटिस का निदान करने से पहले डॉक्टर के लिए जरूरी है कि वह बच्चों, किशोरों और व्यस्कों में मौजूद सभी संभावित समस्याओं का आकलन करें। इसके लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करते हैं, जिसके बाद वह निम्नलिखित टेस्ट का सुझाव देते हैं -
इलाज का उद्देश्य सूजन कम करना, लक्षण नियंत्रित करना और लंबे समय तक स्थिति को सामान्य करना है। इस स्थिति के इलाज के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है जैसे कि -
डाइट इस रोग को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चलिए समझते हैं कि आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं -
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खाद्य पदार्थ |
क्या खाएं (Recommended Foods) |
क्या न खाएं (Foods to Avoid) |
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अनाज |
नरम चावल, खिचड़ी, दलिया, ओट्स, पोहा |
तले हुए पराठे, भारी गेहूँ के उत्पाद, मसालेदार स्नैक्स |
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फल |
पपीता, केला, खरबूजा |
गंभीर मामलों (Flare-up cases) में अमरूद (बीज सहित), अनानास (कठोर फाइबर), संतरा |
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सब्जियां |
उबली सब्जियां: लौकी, तोरई, गाजर |
पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली (गैस बढ़ाने वाली) |
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डेयरी (Dairy) |
दही या छाछ (यदि सहन हो) |
अत्यधिक दूध, क्रीम, पनीर |
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प्रोटीन (Protein Sources) |
अंडे, नरम पचने वाला प्रोटीन, छनी हुई दाल |
राजमा, चना, छोले (गैस बनाते हैं), रेड मीट |
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पेय (Fluids) |
नारियल पानी, सामान्य पानी, हल्के सूप |
सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स, अत्यधिक कैफीन, शराब |
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अन्य (Others) |
प्रोबायोटिक्स, हल्का भोजन |
तले-भुने भोजन, मिर्च और तेज मसाले |
इसके अतिरिक्त भी कुछ और बातें हैं, जिनका पालन आपको करना चाहिए जैसे कि -
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भोजन के नियम |
व्याख्या |
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छोटे लेकिन बार-बार भोजन |
पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ता है। |
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खूब पानी पिएं |
डिहाइड्रेशन और दस्त से होने वाली कमजोरी रोकता है। |
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भोजन हल्का रखें |
सूजन और ऐंठन कम होती है। |
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प्रोबायोटिक्स शामिल करें |
आंत की सूजन कम करने में मदद करता है। |
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Flare-up में फाइबर कम करें |
फाइबर flare में लक्षण बढ़ा सकता है। |
अल्सरेटिव कोलाइटिस भले ही एक दीर्घकालिक बीमारी है, लेकिन यह जीवन को थाम देने वाली समस्या नहीं है। सही इलाज, संतुलित डाइट और समय-समय पर डॉक्टर की निगरानी से मरीज बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकता है। यदि आप लगातार पेट दर्द, खून वाले दस्त या कमजोरी महसूस कर रहे हैं—तो अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। समय पर कदम उठाना ही सबसे महत्वपूर्ण उपचार है। हम आपको सलाह देंगे कि आप बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लें और इसके लिए अभी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) से परामर्श बुक करें।
क्रोहन पूरे पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जबकि अल्सरेटिव कोलाइटिस केवल कोलन और रेक्टम की भीतरी परत को प्रभावित करता है।
हां, दस्त, भूख कम होना और पोषक तत्वों की कमी के कारण वजन तेजी से घट सकता है। इसलिए इस समस्या का इलाज जल्द से जल्द करा लेना चाहिए।
यदि आपको दही सहन हो रही है, तो इससे अच्छा खाद्य पदार्थ आपके लिए कुछ नहीं है। दूध कुछ मरीजों में लक्षण बढ़ा सकता है, इसलिए इसे सावधानी से लें।
हां, तनाव flare-up को ट्रिगर कर सकता है और सूजन बढ़ा सकता है। इसलिए प्रयास करें कि आप खुद को तनाव से दूर रखें।
फ्लेयर की स्थिति में समय फाइबर कम करें लेकिन यदि स्थिति फ्लेयर अप नहीं है, तो प्रयास करें कि फाइबर की मात्रा को अपने आहार में शामिल करें लेकिन सीमित मात्रा में।
यदि रोग नियंत्रित है, तो गर्भावस्था सामान्य रहती है। flare-up की स्थिति होने पर जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
Written and Verified by:

Dr. B D Soni is a Consultant in Gastrointestinal Surgery at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 7 years of experience. He specializes in GI oncology, laparoscopic ventral hernia surgery, thoracoscopic esophageal surgery, and pancreaticobiliary procedures.
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