अल्सरेटिव कोलाइटिस: लक्षण, कारण और उपचार
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अल्सरेटिव कोलाइटिस: लक्षण, कारण और उपचार

Gastro Science | by Dr. B D Soni on 21/12/2025 | Last Updated : 21/01/2026

Table of Contents

Summary

अल्सरेटिव कोलाइटिस बड़ी आंत की सूजन संबंधी बीमारी है, जो दस्त, खून, पेट दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण पैदा करती है। सही उपचार, डाइट और जीवनशैली बदलावों से इसके लक्षणों को नियंत्रित कर लंबे समय तक राहत पाई जा सकती है।

कई बार जिंदगी की दौड़ में हम अपने शरीर द्वारा दिए गए संकेतों को अनदेखा कर देते हैं। हल्का पेट दर्द, गैस, या बार-बार दस्त आना हमें सामान्य लगते हैं, लेकिन यह सामान्य बिल्कुल नहीं होते है। लेकिन जब मल में खून दिखने लगे, रात में कई बार उठकर बाथरूम जाना पड़े, या लगातार कमजोरी रहने लगे, तो हम कह सकते हैं कि आपका शरीर कोई संकेत देना चाहता है। 

यह सारे लक्षण अक्सर अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) जिसे हिंदी में बड़ी आंत की सूजन या रक्तातिसार जैसे रोग की ओर इशारा करते हैं। भारत में IBD (Inflammatory Bowel Disease) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। Indian Journal of Gastroenterology के हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में 14–16 लाख लोग IBD से प्रभावित हैं, जिनमें अल्सरेटिव कोलाइटिस का बड़ा प्रतिशत शामिल है। विशेषज्ञों की मानी जाए तो समय पर निदान और सही उपचार न मिलने पर मरीजों की जीवन गुणवत्ता तेजी से गिर सकती है।

लेकिन अच्छी बात यह है कि आज के समय में अल्सरेटिव कोलाइटिस का प्रभावी प्रबंधन, आधुनिक जांच तकनीकों और व्यक्तिगत डाइट प्लान की मदद से लंबे समय तक बिना लक्षणों वाला जीवन संभव है। इससे निजात पाने के लिए तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें। 

अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या है? - Ulcerative Colitis Meaning in Hindi

अल्सरेटिव कोलाइटिस एक पुरानी (chronic) सूजन संबंधी बीमारी है, जो केवल बड़ी आंत (कोलन) और रेक्टम को प्रभावित करती है। इसमें आंत की भीतरी परत में सूजन और छोटे-छोटे घाव (ulcers) बन जाते हैं। इसी सूजन के कारण मरीज को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि - 

  • खून वाले दस्त
  • आंत में ऐंठन
  • कमजोरी
  • पेट दर्द
  • अचानक शौच की इच्छा

यह रोग आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और कई बार मरीज को समझ ही नहीं आता कि यह समस्या कब गंभीर रूप ले चुकी है। अल्सरेटिव कोलाइटिस हमेशा रेक्टम से शुरू होता है, लेकिन समय के साथ यह पूरी कोलन तक फैल सकता है। इसी आधार पर इसके कई प्रकार निर्धारित किए जाते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के प्रकार

इसे प्रभावित क्षेत्र के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में बांटा गया है। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं - 

  • अल्सरेटिव प्रोक्टाइटिस: इस प्रकार में सूजन केवल रेक्टम तक सीमित रहती है। इसके मुख्य लक्षण रेक्टल ब्लीडिंग, और स्टूल में म्यूकस आता है।
  • प्रोक्टोसिग्मोडिटिस: इसमें रेक्टम और सिगमोइड कोलन प्रभावित होते हैं। इस स्थिति में कुछ और लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे कि पेट दर्द, दस्त में रक्त आना, और टेनेज़मस (बार-बार मल त्याग की इच्छा पर भी मल न आना)।
  • बाईं ओर का कोलाइटिस (Left-side Colitis): इस प्रकार के कोलाइटिस में सूजन रेक्टम से बाईं ओर के कोलन तक फैलती है। इस स्थिति में कुछ अलग प्रकार के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं जैसे कि - 

बाईं तरफ पेट दर्द, खून वाला दस्त, और वजन कम होना इत्यादि।

  • पैनकोलाइटिस (Pancolitis): इसमें पूरी कोलन में सूजन हो जाती है। यह सबसे गंभीर रूप माना जाता है और इसमें तेज दर्द, एनीमिया व डिहाइड्रेशन शामिल हो सकते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण - Ulcerative Colitis Symptoms in Hindi

इस बीमारी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन बढ़ते हुए यह जटिल हो सकते हैं। चलिए इस स्थिति के कुछ प्रारंभिक लक्षणों को समझते हैं - 

  • बार-बार दस्त होना
  • अचानक मल त्याग की तीव्र इच्छा
  • पेट या आंत में हल्की ऐंठन
  • भूख कम हो जाना
  • वजन में धीरे-धीरे कमी
  • लगातार थकान
  • एनीमिया (खून की कमी)
  • गंभीर या आगे बढ़ चुके लक्षण
  • खून, पस या म्यूकस के साथ दस्त
  • तेज ऐंठन जो दैनिक कार्यों को प्रभावित करे
  • डिहाइड्रेशन
  • बुखार
  • जोड़ों में दर्द
  • मुंह में छाले
  • त्वचा पर दाने
  • आंखों में सूजन या लालिमा
  • बच्चों में ग्रोथ प्रभावित होना

यदि यह लक्षण 2–3 हफ्तों से अधिक बने रहें, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना महत्वपूर्ण है।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण और जोखिम कारक

अल्सरेटिव कोलाइटिस के सटीक कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके कुछ मजबूत संभावित कारक पहचान लिए हैं जैसे कि - 

  • प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया: शरीर का इम्यून सिस्टम किसी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ते समय गलती से अपनी ही आंत की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। यही प्रक्रिया IBD का मुख्य कारण मानी जाती है।
  • आनुवंशिक कारण (Genetic predisposition): यदि परिवार में किसी को IBD है, तो भविष्य में परिवार के और लोगों में यह जोखिम लगभग 3–5 गुना बढ़ जाता है।
  • पर्यावरणीय कारण: फैटी या प्रोसेस्ड भोजन, प्रदूषण, असंतुलित दिनचर्या, बार-बार संक्रमण, और आधुनिक जीवन शैली इसके कुछ संभावित पर्यावरणीय कारण है। 
  • अधिक जोखिम वाले लोग: 15–35 वर्ष के युवा, नॉन-स्मोकर या धूम्रपान छोड़ने के आसपास का समय, और ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोग भी इस रोग के जोखिम कारक होते हैं। 

कारण कुछ भी हो सकते हैं, लेकिन आपका इलाज व्यक्तिगत होना चाहिए, जिसके लिए आपको हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलने की सलाह दी जाती है।

अल्सरेटिव कोलाइटिस की जांच

अल्सरेटिव कोलाइटिस का निदान करने से पहले डॉक्टर के लिए जरूरी है कि वह बच्चों, किशोरों और व्यस्कों में मौजूद सभी संभावित समस्याओं का आकलन करें। इसके लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करते हैं, जिसके बाद वह निम्नलिखित टेस्ट का सुझाव देते हैं - 

  • रक्त परीक्षण: इस टेस्ट से डॉक्टर आपके रक्त में एनीमिया या संक्रमण के संकेत देखते हैं। यदि रक्त में संक्रमण का स्तर कम है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके कोलन या रेक्टम से खून बह रहा है।
  • स्टूल का सैंपल: स्टूल के सैंपल की जांच माइक्रोस्कोप के नीचे की जाती है, जिससे संक्रमण का पता चलता है।
  • इमेजिंग परीक्षण: आपके रेक्टम और कोलन को अंदर से देखने के लिए डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई जैसे टेस्ट सुझा सकते हैं। इनसे आंतों की असामान्यताओं का पता चलता है।
  • एंडोस्कोपिक परीक्षण: इस जांच में एक पतली और लचीली ट्यूब (एंडोस्कोप) का प्रयोग किया जाता है, जिसके सिरे पर एक कैमरा लगा होता है। डॉक्टर इसे गुदाद्वार (Anal) से अंदर डाल कर रेक्टम और कोलन को देखते हैं। कोलोनोस्कोपी और सिग्मोइडोस्कोपी दो मुख्य एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस उपचार

इलाज का उद्देश्य सूजन कम करना, लक्षण नियंत्रित करना और लंबे समय तक स्थिति को सामान्य करना है। इस स्थिति के इलाज के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है जैसे कि - 

  • दवाएं: कुछ दवाएं हैं जैसे कि - एमिनोसेलिसिलेट्स (5‑एएसए), जिसका उपयोग हल्के से मध्यम मामलों में होता है। वहीं दूसरी तरफ कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का उपयोग लक्षणों के अचानक बढ़ने पर होता है। इम्यूनोमॉडुलेटर्स का सुझाव डॉक्टर तब देते हैं, जब सामान्य दवाएं असर न करें। बायोलॉजिक्स वह दवाएं हैं, जिनका उपयोग गंभीर मामलों में होता है, जो बहुत तेजी से असर दिखाती है। दर्द कम करने वाली दवाएं भी दी जाती है।
  • पोषण और डाइट का मैनेजमेंट: डाइट सीधे तौर पर लक्षण नियंत्रित करने में मदद करती है। क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसका पता आपको अपने डॉक्टर से चलेगा। इसके लिए परामर्श ज़रूर करें। वर्तमान के लिए फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं और फैटी खाद्य पदार्थ से दूरी बनाएं। 
  • सर्जरी: जब दवाओं और डाइट से राहत न मिले या जटिलताएं बढ़ जाए, तब सर्जरी एक स्थायी समाधान हो सकता है। लेकिन सर्जरी के लिए हमेशा एक ऐसे अस्पताल में जाएं, जहां अनुभवी और सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर मौजूद हो।

अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या खाएं और क्या नहीं?

डाइट इस रोग को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चलिए समझते हैं कि आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं - 

खाद्य पदार्थ

क्या खाएं (Recommended Foods)

क्या न खाएं (Foods to Avoid)

अनाज

नरम चावल, खिचड़ी, दलिया, ओट्स, पोहा

तले हुए पराठे, भारी गेहूँ के उत्पाद, मसालेदार स्नैक्स

फल

पपीता, केला, खरबूजा

गंभीर मामलों (Flare-up cases) में अमरूद (बीज सहित), अनानास (कठोर फाइबर), संतरा

सब्जियां

उबली सब्जियां: लौकी, तोरई, गाजर

पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली (गैस बढ़ाने वाली)

डेयरी (Dairy)

दही या छाछ (यदि सहन हो)

अत्यधिक दूध, क्रीम, पनीर

प्रोटीन (Protein Sources)

अंडे, नरम पचने वाला प्रोटीन, छनी हुई दाल

राजमा, चना, छोले (गैस बनाते हैं), रेड मीट

पेय (Fluids)

नारियल पानी, सामान्य पानी, हल्के सूप

सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स, अत्यधिक कैफीन, शराब

अन्य (Others)

प्रोबायोटिक्स, हल्का भोजन

तले-भुने भोजन, मिर्च और तेज मसाले

इसके अतिरिक्त भी कुछ और बातें हैं, जिनका पालन आपको करना चाहिए जैसे कि - 

भोजन के नियम

व्याख्या

छोटे लेकिन बार-बार भोजन

पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ता है।

खूब पानी पिएं

डिहाइड्रेशन और दस्त से होने वाली कमजोरी रोकता है।

भोजन हल्का रखें

सूजन और ऐंठन कम होती है।

प्रोबायोटिक्स शामिल करें

आंत की सूजन कम करने में मदद करता है।

Flare-up में फाइबर कम करें

फाइबर flare में लक्षण बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष

अल्सरेटिव कोलाइटिस भले ही एक दीर्घकालिक बीमारी है, लेकिन यह जीवन को थाम देने वाली समस्या नहीं है। सही इलाज, संतुलित डाइट और समय-समय पर डॉक्टर की निगरानी से मरीज बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकता है। यदि आप लगातार पेट दर्द, खून वाले दस्त या कमजोरी महसूस कर रहे हैं—तो अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। समय पर कदम उठाना ही सबसे महत्वपूर्ण उपचार है। हम आपको सलाह देंगे कि आप बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लें और इसके लिए अभी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) से परामर्श बुक करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग में क्या अंतर है?

क्रोहन पूरे पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जबकि अल्सरेटिव कोलाइटिस केवल कोलन और रेक्टम की भीतरी परत को प्रभावित करता है।

क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस से वजन कम होता है?

हां, दस्त, भूख कम होना और पोषक तत्वों की कमी के कारण वजन तेजी से घट सकता है। इसलिए इस समस्या का इलाज जल्द से जल्द करा लेना चाहिए। 

क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस में दूध या दही लेना चाहिए?

यदि आपको दही सहन हो रही है, तो इससे अच्छा खाद्य पदार्थ आपके लिए कुछ नहीं है। दूध कुछ मरीजों में लक्षण बढ़ा सकता है, इसलिए इसे सावधानी से लें।

क्या तनाव अल्सरेटिव कोलाइटिस को बढ़ा सकता है?

हां, तनाव flare-up को ट्रिगर कर सकता है और सूजन बढ़ा सकता है। इसलिए प्रयास करें कि आप खुद को तनाव से दूर रखें। 

क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस में फाइबर लेना ठीक है?

फ्लेयर की स्थिति में समय फाइबर कम करें लेकिन यदि स्थिति फ्लेयर अप नहीं है, तो प्रयास करें कि फाइबर की मात्रा को अपने आहार में शामिल करें लेकिन सीमित मात्रा में।

क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस गर्भावस्था को प्रभावित करता है?

यदि रोग नियंत्रित है, तो गर्भावस्था सामान्य रहती है। flare-up की स्थिति होने पर जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

Written and Verified by:

Dr. B D Soni

Dr. B D Soni

Consultant Exp: 5 Yr

GastroIntestinal Surgery

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Dr. B D Soni is a Consultant in Gastrointestinal Surgery at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 7 years of experience. He specializes in GI oncology, laparoscopic ventral hernia surgery, thoracoscopic esophageal surgery, and pancreaticobiliary procedures.

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