सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट क्या है और कब कराया जाता है?
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सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट क्या है और कब कराया जाता है?

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Summary

  • पेट और मलाशय (Rectum) से जुड़ी गंभीर समस्याओं, जैसे कि कैंसर और कोलाइटिस का शुरुआती स्तर पर पता इस टेस्ट से चलता है।
  • यह एक मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया है, जो केवल 15-20 मिनट में पूरी हो जाती है।
  • सटीक परिणामों के लिए आंतों की सफाई अनिवार्य है।
  • अनुभवी डॉक्टरों और आधुनिक तकनीक (जैसे कि RBH अस्पताल) की मदद से यह टेस्ट पूरी तरह सुरक्षित और दर्द रहित बनाया जा सकता है।

पेट में लगातार रहने वाला दर्द, पाचन में गड़बड़ी या मल त्याग के समय खून आना, यह कुछ ऐसी स्थितियां हैं, जिन्हें अक्सर हम 'आम' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के यह छोटे-छोटे संकेत किसी बड़ी अंदरूनी समस्या की आहट हो सकते हैं? 

जब स्वास्थ्य की बात आती है, तो देर करने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर होता है।आपके पाचन तंत्र के निचले हिस्से की बारीकी से जांच करने के लिए सिग्मोइडोस्कोपी एक ऐसा टेस्ट है, जो सबसे सटीक परिणाम देता है। यदि आप या आपका कोई अपना पेट की समस्याओं का सामना कर रहा है, तो सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट के बारे में सही जानकारी होना न केवल आपके डर को कम करेगा, बल्कि आपको समय पर सही इलाज दिलाने में भी मदद करेगा। इसके अतिरिक्त हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श से आपकी बहुत मदद हो सकती है। 

सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट क्या होता है?

सरल शब्दों में कहा जाए तो सिग्मोइडोस्कोपी एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर एक पतली, लचीली ट्यूब (जिसे सिग्मोइडोस्कोप कहा जाता है) का उपयोग करके आपकी बड़ी आंत के निचले भाग, यानी सिग्मोइड कोलन और मलाशय की जांच करते हैं। इस ट्यूब के सिरे पर एक छोटा सा कैमरा और लाइट लगी होती है, जो आंतों के अंदर की लाइव तस्वीरें डॉक्टर को स्क्रीन पर दिखाते हैं।

अक्सर लोग इसे कोलोनोस्कोपी समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है। जहां कोलोनोस्कोपी पूरी बड़ी आंत की जांच करती है, वहीं सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट केवल निचले हिस्से, जो लगभग 20 इंच का होता है, उसी भाग पर केंद्रित होती है। विश्व स्तर पर, पेट के निचले भाग और मलाशय के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर के लगभग 60% से अधिक मामले आंत के इसी निचले भाग में पाए जाते हैं, जिसका निदान सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट के द्वारा होता है।

सिग्मोइडोस्कोपी क्यों और कब कराई जाती है?

डॉक्टर आपको सिग्मोइडोस्कोपी प्रक्रिया की सलाह तब देते हैं, जब उन्हें आपके पाचन तंत्र के निचले भाग में किसी गड़बड़ी का संदेह होता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं - 

  • मल में रक्त आना: यदि मल त्याग के दौरान लाल या गहरे रंग का खून आता है, तो यह बवासीर (Piles) के अलावा कोलाइटिस या ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है।
  • लगातार दस्त या कब्ज: यदि आपकी मल त्याग की प्रक्रिया में अचानक बदलाव आया है और यह कई हफ्तों से बना हुआ है।
  • पेट के निचले भाग में दर्द: बिना किसी स्पष्ट कारण के पेट के निचले भाग में मरोड़ या लगातार दर्द होता है।
  • अचानक वजन कम होना: बिना किसी प्रयास के वजन का तेजी से गिरना पाचन तंत्र की किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • कैंसर स्क्रीनिंग: 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद, भले ही कोई लक्षण न हों, प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप के तौर पर इसकी सलाह दी जाती है।

सिग्मोइडोस्कोपी से किन बीमारियों का पता चलता है?

इस टेस्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल बीमारी का पता ही नहीं लगाता, बल्कि कई बार बीमारी को बढ़ने से पहले ही रोक देता है। सिग्मोइडोस्कोपी के फायदे में सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए डॉक्टर निम्नलिखित स्थितियों की पहचान कर सकते हैं - 

  • पॉलीप्स (Polyps): यह आंत की दीवार पर छोटी गांठ होती हैं। हालांकि यह हमेशा कैंसर नहीं होती, लेकिन भविष्य में इनके कैंसर बनने की संभावना रहती है, इसलिए इसका इलाज बहुत आवश्यक है। टेस्ट के दौरान इन्हें हटाया भी जा सकता है।
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis): आंतों में होने वाली सूजन और घाव की जांच इस टेस्ट से होती है।
  • डायवर्टिकलोसिस (Diverticulosis): आंत की दीवार में छोटे पाउच का बन जाने का निदान इस टेस्ट से होता है।
  • कोलोरेक्टल कैंसर: मलाशय या सिग्मोइड कोलन में कैंसर कोशिकाओं की मौजूदगी इससे टेस्ट से होती है।
  • क्रोहन रोग (Crohn’s Disease): एक प्रकार की इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जिसका निदान इस टेस्ट से होता है।

सिग्मोइडोस्कोपी की तैयारी कैसे करें?

किसी भी मेडिकल टेस्ट की सफलता उसकी तैयारी पर निर्भर करती है। सिग्मोइडोस्कोपी की तैयारी का मुख्य उद्देश्य आपकी आंतों को पूरी तरह साफ करना है, ताकि डॉक्टर को स्पष्ट तस्वीर मिल सकें।

  • आहार में बदलाव: टेस्ट से एक-दो दिन पहले आपको हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है। टेस्ट से 24 घंटे पहले केवल तरल पदार्थ जैसे कि पानी, बिना दूध वाली चाय, या नारियल पानी का सेवन आप कर सकते हैं।
  • जुलाब (Laxatives): डॉक्टर आपको कुछ दवाएं या एनिमा (Enema) दे सकते हैं, ताकि आंतें पूरी तरह खाली हो जाएं और टेस्ट में कोई समस्या नहीं आती है।
  • दवाओं की जानकारी: यदि आप खून पतला करने वाली दवाएं या मधुमेह (Diabetes) की दवाएं ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को पहले ही बता दें।
  • मानसिक तैयारी: यह प्रक्रिया बहुत दर्दनाक नहीं होती, लेकिन हल्का दबाव महसूस हो सकता है। इसमें खुद को शांत रखना बहुत जरूरी है।

सिग्मोइडोस्कोपी प्रक्रिया के दौरान क्या होता है?

जब आप अस्पताल पहुंचते हैं, तो मेडिकल टीम आपकी सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखती है। सिग्मोइडोस्कोपी प्रक्रिया आमतौर पर इस तरह होती है - 

  • आपको बाईं करवट लेटने के लिए कहा जाता है और घुटनों को छाती की ओर मोड़ा जाता है।
  • ज्यादातर मामलों में बेहोश करने (Sedation) की जरूरत नहीं होती, लेकिन यदि मरीज बहुत घबराया हुआ हो, तो हल्का सिडेशन दिया जा सकता है।
  • डॉक्टर लुब्रिकेटेड सिग्मोइडोस्कोप (उपकरण का नाम) को धीरे से मलाशय के रास्ते अंदर डालते हैं।
  • आंतों को फैलाने के लिए थोड़ी हवा अंदर डाली जाती है, जिससे बेहतर दृश्य मिल सके। इस दौरान आपको पेट फूला हुआ महसूस हो सकता है।
  • यदि डॉक्टर को कोई संदिग्ध हिस्सा दिखता है, तो वह छोटा सा टिश्यू ले सकते हैं या पॉलीप को हटा सकते हैं।

यह पूरी प्रक्रिया मात्र 15 से 20 मिनट लेती है, लेकिन यह आपके स्वास्थ्य के लिए वर्षों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। इसलिए इस स्थिति में हम आपको सलाह देंगे कि बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें।

सिग्मोइडोस्कोपी के फायदे: सुरक्षा और सटीकता

सिग्मोइडोस्कोपी के फायदे इसे एक लोकप्रिय डायग्नोस्टिक टूल बनाते हैं - 

  • इसमें पूरे शरीर को बेहोश करने की जरूरत अक्सर नहीं पड़ती है, जिससे रिकवरी जल्दी होती है।
  • यह कम खर्चीला है और कोलोनोस्कोपी की तुलना में कम समय लेता है।
  • शुरुआती दौर में कैंसर की पहचान करने में यह अत्यंत सटीक है।

भारत में मेडिकल साइंस में बहुत तरक्की है, और हमारे विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग से कैंसर से होने वाली मौतों को 40% से 50% तक कम किया जा सकता है। RBH अस्पताल जैसे सेंटर पर उपलब्ध एडवांस एंडोस्कोपिक तकनीक इस प्रक्रिया को और भी सुरक्षित बनाती हैं।

सिग्मोइडोस्कोपी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

टेस्ट के बाद आपको रिकवरी रूम में थोड़ी देर आराम करने दिया जाता है। इसके बाद कुछ ध्यान रखने योग्य बातें भी होती हैं जैसे कि - 

  • गैस का अनुभव: प्रक्रिया के दौरान डाली गई हवा के कारण आपको पेट में भारीपन या गैस महसूस हो सकती है। टहलने से इसमें आराम मिलता है। बिना डॉक्टरी परामर्श के एंटासिड न लें।
  • खान-पान: यदि डॉक्टर ने कोई विशेष निर्देश नहीं दिया है, तो आप सामान्य भोजन शुरू कर सकते हैं। खूब सारा पानी पिएं।
  • हल्की ब्लीडिंग: यदि बायोप्सी की गई है, तो अगले एक-दो दिन मल के साथ हल्का खून आ सकता है, जो सामान्य स्थिति है।
  • चेतावनी संकेत: यदि आपको तेज बुखार, असहनीय पेट दर्द या बहुत अधिक रक्त हानि हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

निष्कर्ष

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना ही खुशहाल जीवन की कुंजी है। सिग्मोइडोस्कोपी केवल एक टेस्ट नहीं है, बल्कि आपके शरीर की आंतरिक स्थिति को समझने का एक वैज्ञानिक जरिया है। डर और झिझक को छोड़कर, यदि आपके डॉक्टर ने इसकी सलाह दी है, तो इसे प्राथमिकता दें। सीके बिरला अस्पताल, जयपुर (RBH) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की देखरेख में यह प्रक्रिया अत्यंत सुगमता से की जाती है। याद रखें कि, 'जल्दी पता चलना ही सबसे अच्छा इलाज है'।

FAQs:

सिग्मोइडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी में क्या अंतर है?

सिग्मोइडोस्कोपी केवल आंत के निचले भाग (सिग्मोइड कोलन) की जांच करती है, जबकि कोलोनोस्कोपी में पूरी बड़ी आंत की जांच की जाती है। सिग्मोइडोस्कोपी कम समय में पूरी हो जाती है।

सिग्मोइडोस्कोपी से पहले क्या खाना-पीना बंद करना पड़ता है?

हां, टेस्ट से एक दिन पहले ठोस भोजन बंद करना होता है। केवल पारदर्शी तरल पदार्थ (जैसे कि पानी, जूस) की अनुमति होती है। टेस्ट से कुछ घंटे पहले पूरी तरह खाली पेट रहना अनिवार्य है।

सिग्मोइडोस्कोपी कराने में कितना समय लगता है?

यह एक त्वरित प्रक्रिया है। आमतौर पर जांच में केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता है। हालांकि, तैयारी और रिकवरी को मिलाकर आप अस्पताल में 1-2 घंटे बिता सकते हैं।

क्या सिग्मोइडोस्कोपी में बेहोश किया जाता है?

ज्यादातर मामलों में एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह प्रक्रिया सहन करने योग्य होती है। हालांकि, मरीज की बेचैनी कम करने के लिए हल्का सिडेशन या लोकल एनेस्थीसिया दिया जा सकता है।

क्या सिग्मोइडोस्कोपी से कैंसर का पता चलता है?

जी हां, यह टेस्ट मलाशय और निचले कोलन के कैंसर या कैंसर-पूर्व गांठों (पॉलीप्स) का पता लगाने में बेहद कारगर है। समय पर जांच से कैंसर बढ़ने से रोका जा सकता है।

क्या प्रक्रिया के बाद मैं काम पर जा सकता हूँ?

यदि आपको सिडेशन नहीं दिया गया है, तो आप प्रक्रिया के तुरंत बाद अपने सामान्य काम पर लौट सकते हैं। यदि सिडेशन दिया गया है, तो उस दिन आराम करने की सलाह दी जाती है।

Written and Verified by:

Dr. Abhinav Sharma

Dr. Abhinav Sharma

Director Exp: 19 Yr

Gastroenterology

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Dr. Abhinav Sharma is the Director of Gastroenterology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur with over 16 years of experience. He specializes in advanced therapeutic GI endoscopic procedures and the treatment of complex gastrointestinal disorders.

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