
पेट में लगातार रहने वाला दर्द, पाचन में गड़बड़ी या मल त्याग के समय खून आना, यह कुछ ऐसी स्थितियां हैं, जिन्हें अक्सर हम 'आम' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के यह छोटे-छोटे संकेत किसी बड़ी अंदरूनी समस्या की आहट हो सकते हैं?
जब स्वास्थ्य की बात आती है, तो देर करने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर होता है।आपके पाचन तंत्र के निचले हिस्से की बारीकी से जांच करने के लिए सिग्मोइडोस्कोपी एक ऐसा टेस्ट है, जो सबसे सटीक परिणाम देता है। यदि आप या आपका कोई अपना पेट की समस्याओं का सामना कर रहा है, तो सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट के बारे में सही जानकारी होना न केवल आपके डर को कम करेगा, बल्कि आपको समय पर सही इलाज दिलाने में भी मदद करेगा। इसके अतिरिक्त हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श से आपकी बहुत मदद हो सकती है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो सिग्मोइडोस्कोपी एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर एक पतली, लचीली ट्यूब (जिसे सिग्मोइडोस्कोप कहा जाता है) का उपयोग करके आपकी बड़ी आंत के निचले भाग, यानी सिग्मोइड कोलन और मलाशय की जांच करते हैं। इस ट्यूब के सिरे पर एक छोटा सा कैमरा और लाइट लगी होती है, जो आंतों के अंदर की लाइव तस्वीरें डॉक्टर को स्क्रीन पर दिखाते हैं।
अक्सर लोग इसे कोलोनोस्कोपी समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है। जहां कोलोनोस्कोपी पूरी बड़ी आंत की जांच करती है, वहीं सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट केवल निचले हिस्से, जो लगभग 20 इंच का होता है, उसी भाग पर केंद्रित होती है। विश्व स्तर पर, पेट के निचले भाग और मलाशय के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर के लगभग 60% से अधिक मामले आंत के इसी निचले भाग में पाए जाते हैं, जिसका निदान सिग्मोइडोस्कोपी टेस्ट के द्वारा होता है।
डॉक्टर आपको सिग्मोइडोस्कोपी प्रक्रिया की सलाह तब देते हैं, जब उन्हें आपके पाचन तंत्र के निचले भाग में किसी गड़बड़ी का संदेह होता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं -
इस टेस्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल बीमारी का पता ही नहीं लगाता, बल्कि कई बार बीमारी को बढ़ने से पहले ही रोक देता है। सिग्मोइडोस्कोपी के फायदे में सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए डॉक्टर निम्नलिखित स्थितियों की पहचान कर सकते हैं -
किसी भी मेडिकल टेस्ट की सफलता उसकी तैयारी पर निर्भर करती है। सिग्मोइडोस्कोपी की तैयारी का मुख्य उद्देश्य आपकी आंतों को पूरी तरह साफ करना है, ताकि डॉक्टर को स्पष्ट तस्वीर मिल सकें।
जब आप अस्पताल पहुंचते हैं, तो मेडिकल टीम आपकी सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखती है। सिग्मोइडोस्कोपी प्रक्रिया आमतौर पर इस तरह होती है -
यह पूरी प्रक्रिया मात्र 15 से 20 मिनट लेती है, लेकिन यह आपके स्वास्थ्य के लिए वर्षों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। इसलिए इस स्थिति में हम आपको सलाह देंगे कि बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें।
सिग्मोइडोस्कोपी के फायदे इसे एक लोकप्रिय डायग्नोस्टिक टूल बनाते हैं -
भारत में मेडिकल साइंस में बहुत तरक्की है, और हमारे विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग से कैंसर से होने वाली मौतों को 40% से 50% तक कम किया जा सकता है। RBH अस्पताल जैसे सेंटर पर उपलब्ध एडवांस एंडोस्कोपिक तकनीक इस प्रक्रिया को और भी सुरक्षित बनाती हैं।
टेस्ट के बाद आपको रिकवरी रूम में थोड़ी देर आराम करने दिया जाता है। इसके बाद कुछ ध्यान रखने योग्य बातें भी होती हैं जैसे कि -
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना ही खुशहाल जीवन की कुंजी है। सिग्मोइडोस्कोपी केवल एक टेस्ट नहीं है, बल्कि आपके शरीर की आंतरिक स्थिति को समझने का एक वैज्ञानिक जरिया है। डर और झिझक को छोड़कर, यदि आपके डॉक्टर ने इसकी सलाह दी है, तो इसे प्राथमिकता दें। सीके बिरला अस्पताल, जयपुर (RBH) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की देखरेख में यह प्रक्रिया अत्यंत सुगमता से की जाती है। याद रखें कि, 'जल्दी पता चलना ही सबसे अच्छा इलाज है'।
सिग्मोइडोस्कोपी केवल आंत के निचले भाग (सिग्मोइड कोलन) की जांच करती है, जबकि कोलोनोस्कोपी में पूरी बड़ी आंत की जांच की जाती है। सिग्मोइडोस्कोपी कम समय में पूरी हो जाती है।
हां, टेस्ट से एक दिन पहले ठोस भोजन बंद करना होता है। केवल पारदर्शी तरल पदार्थ (जैसे कि पानी, जूस) की अनुमति होती है। टेस्ट से कुछ घंटे पहले पूरी तरह खाली पेट रहना अनिवार्य है।
यह एक त्वरित प्रक्रिया है। आमतौर पर जांच में केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता है। हालांकि, तैयारी और रिकवरी को मिलाकर आप अस्पताल में 1-2 घंटे बिता सकते हैं।
ज्यादातर मामलों में एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह प्रक्रिया सहन करने योग्य होती है। हालांकि, मरीज की बेचैनी कम करने के लिए हल्का सिडेशन या लोकल एनेस्थीसिया दिया जा सकता है।
जी हां, यह टेस्ट मलाशय और निचले कोलन के कैंसर या कैंसर-पूर्व गांठों (पॉलीप्स) का पता लगाने में बेहद कारगर है। समय पर जांच से कैंसर बढ़ने से रोका जा सकता है।
यदि आपको सिडेशन नहीं दिया गया है, तो आप प्रक्रिया के तुरंत बाद अपने सामान्य काम पर लौट सकते हैं। यदि सिडेशन दिया गया है, तो उस दिन आराम करने की सलाह दी जाती है।
Written and Verified by:

Dr. Abhinav Sharma is the Director of Gastroenterology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur with over 16 years of experience. He specializes in advanced therapeutic GI endoscopic procedures and the treatment of complex gastrointestinal disorders.
Similar Gastro Science Blogs
Book Your Appointment TODAY
© 2024 RBH Jaipur. All Rights Reserved.