ऑस्टियोपोरोसिस दिवस 2025: बोन डेंसिटी टेस्ट और समय रहते पहचान
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ऑस्टियोपोरोसिस दिवस 2025: बोन डेंसिटी टेस्ट और समय रहते पहचान

Orthopaedics & Joint Replacement | by Dr. Hitesh Joshi on 23/10/2025 | Last Updated : 07/11/2025

Table of Contents

Summary

हम सभी जानते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस कितनी गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और इस गंभीर समस्या का इलाज, सही जांच से होता है, जिसके लिए बोन डेंसिटी टेस्ट बहुत ज्यादा आवश्यक है। समय रहते पहचान से ही हड्डियों को भविष्य के लिए संरक्षित किया जा सकता है।

हर साल 20 अक्टूबर को पूरा विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाता है। इसे सिर्फ मनाने से हमारी हड्डियां मजबूत नहीं हो सकती हैं। इसके लिए हमें गंभीरता से विचार करना होगा। जब हम अपनी और अपने अपनों की हड्डियों की सेहत को लेकर गंभीरता से सोचेंगे, तभी हम और हमारा परिवार सुरक्षित और खुशहाल रह पाएगा। भारत समेत दुनिया भर में हड्डियां कमजोर होना आम बात हो गई है, खासकर महिलाओं और उम्रदराज लोगों के बीच यह बहुत ही ज्यादा आम है। यदि जल्दी पहचान और सही इलाज शुरू हो जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस से होने वाली ज़िंदगी की मुश्किलों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

यदि किसी को हड्डियों में कमजोरी महसूस होती है या बार-बार फ्रैक्चर हो रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपको बोन डेंसिटी टेस्ट की जरूरत है क्योंकि हड्डी कमजोर हो गई है। कितनी कमजोर हुई है, इसकी जानकारी आपको टेस्ट से मिलेगी। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना या समय रहते जांच करवाना बहुत जरूरी है, ताकि हड्डियों को मजबूत बनाया जा सके और स्वस्थ जिंदगी का आनंद लिया जा सके। हड्डियों की किसी भी समस्या के इलाज के लिए बिना देर किए एक हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज लें।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है और क्यों खतरनाक है?

ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) एक गंभीर हड्डी संबंधी रोग है, जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे पतली और कमजोर हो जाती हैं। उम्र बढ़ने, हार्मोनल बदलाव, पोषण की कमी (कैल्शियम, विटामिन D), और कुछ अन्य कारणों से हड्डियों का शारीरिक घनत्व (Bone volume) कम हो जाता है। इससे फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

ऑस्टियोपोरोसिस एक खतरनाक स्थिति है क्योंकि भारत में लगभग हर 5 में से 1 महिला को मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा होता है। यह समस्या सिर्फ महिलाओं को नहीं, पुरुषों को भी प्रभावित करती है। वर्तमान में यह समस्या अब पुरुषों में अधिक देखी जा रही है। अधिकतर लोगों को शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं, जिससे यह समस्या अधिक गंभीर हो जाती है। अक्सर पहला संकेत अचानक या मामूली चोट पर हड्डी टूटना हो सकता है। कमर या पीठ में निरंतर दर्द, लंबाई में कमी, या पोस्चर में बदलाव भी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

बोन डेंसिटी टेस्ट (डेक्सा स्कैन) क्या है?

बोन डेंसिटी टेस्ट, जिसे डेक्सा स्कैन (DXA/DEXA Scan) कहते हैं, वह हड्डियों की ताकत/घनत्व मापने का सबसे विश्वसनीय टेस्ट है। अक्सर डॉक्टर हड्डियों के कमजोर होने पर या छोटी चोट पर भी फ्रैक्चर होने पर ऑस्टियोपोरोसिस का अनुमान लगाते हैं। यह परीक्षण पूरी दुनिया में ऑस्टियोपोरोसिस पहचानने के लिए 'गोल्ड स्टैंडर्ड' टेस्ट माना जाता है। इसमें बेहद कम मात्रा की x-ray ऊर्जा इस्तेमाल होती है, जिससे हड्डी और सॉफ्ट टिश्यू को अलग-अलग मापना आसान हो जाता है। स्कैन आम तौर पर रीढ़ और कूल्हों पर होता है। कुछ मामलों में न्यूक्लियर बोन स्कैन का सुझाव दिया जाता है, जिसमें एक डाई का भी उपयोग होता है, जिसे इंजेक्शन के द्वारा शरीर में डाला जाता है। इस टेस्ट में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, क्योंकि इंजेक्शन लगाने के बाद पेशेंट को कुछ समय के लिए उसी क्लीनिक या फिर लैब में ही रहना होता है।

बोन डेंसिटी टेस्ट क्यों जरूरी है?

जब डॉक्टर को लगता है कि उनके पेशेंट की हड्डियां कमजोर हो गई है या फिर बिना कारण छोटी सी चोट के कारण हड्डी फ्रैक्चर हो जा रही है, तो डॉक्टर बोन डेंसिटी टेस्ट का सुझाव देते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस रोग की शुरुआती पहचान करने और फ्रैक्चर का खतरा समझने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। इससे डॉक्टर यह अनुमान लगा सकते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना कितनी है और इसके लिए किस प्रकार के इलाज की आवश्यकता है। सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि इस टेस्ट के परिणाम के आधार पर ही ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या के लिए इलाज की योजना बनाई जाती है। यदि ऑस्टियोपोरोसिस के कारण किसी हड्डी ने अपना आकार खो दिया है, तो भी उसे बदलने का निर्णय टेस्ट के परिणाम के आधार पर ही लिया जाता है।

बोन डेंसिटी टेस्ट किसे और क्यों करवाना चाहिए?

बोन डेंसिटी टेस्ट कोई ऐसा टेस्ट नहीं है, जिसे आपको हर वर्ष कराना चाहिए। निम्न लोगों को बोन डेंसिटी टेस्ट कराने के लिए कहा जाता है - 

  • महिलाएं (65 वर्ष या अधिक उम्र)
  • पुरुष (70 वर्ष या अधिक उम्र)
  • 50 वर्ष से ऊपर के वे लोग जिन्होंने मामूली चोट पर फ्रैक्चर हो जाए।

किसी भी उम्र के लोग, यदि ऑस्टियोपोरोसिस की फैमिली हिस्ट्री, कम BMI, धूम्रपान, अधिक शराब, स्टेरॉइड या हार्मोन दवाएं चल रही हों, या विटामिन D की कमी है तो भी आपको यह टेस्ट कराना चाहिए। भारत में 60 वर्ष से ऊपर वाले हर पांचवें व्यक्ति में ऑस्टियोपोरोसिस रोग होने का खतरा देखा गया है, जिसके कारण अब टेस्ट की महत्वता और भी ज्यादा बढ़ गई है।

बोन डेंसिटी टेस्ट की प्रक्रिया

डेक्सा स्कैन करवाते समय मरीज को किसी खास तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है। बस 24 घंटे पहले कैल्शियम सप्लीमेंट नहीं लेना होता है और टेस्ट के दौरान हल्के और ढीले कपड़े पहनने होते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आप किसी दूसरी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो उनके बारे में अपने डॉक्टर को जानकारी अवश्य दें। इसके अतिरिक्त प्रक्रिया को निम्न तरीकों से पूरा किया जाता है - 

  • मरीज को एक सपाट और आरामदायक टेबल पर लिटाया जाता है; आमतौर पर पीठ के बल लेटना होता है।
  • स्कैन के लिए रीढ़ (स्पाइन), कूल्हा (हिप) या कभी-कभी कलाई जैसे हिस्सों को चुना जाता है, जहां हड्डियों की डेंसिटी का मुख्य रूप से मूल्यांकन किया जाता है।
  • एक बड़ी स्कैनिंग आर्म या एक्स-रे मशीन बॉडी के ऊपर से धीर-धीरे गुज़रती है, जो एक्स-रे किरणों की मदद से हड्डी और सॉफ्ट टिश्यू का मूल्यांकन करती है।
  • पूरी प्रक्रिया अधिकतर 10-30 मिनट में पूरी हो जाती है। इस दौरान बिल्कुल दर्द या असुविधा नहीं होती; टेस्ट के दौरान शरीर को बिल्कुल स्थिर रखना पड़ता है।
  • यह टेस्ट बहुत कम रेडिएशन डोज में पूरा हो जाता है, जो सामान्य एक्स-रे या रोजमर्रा के वातावरण से भी कम होता है।
  • टेस्ट से पहले प्रेगनेंसी की संभावना हो तो डॉक्टर को जरूर सूचना दें।

बोन डेंसिटी टेस्ट की रिपोर्ट और सामान्य रेंज

परीक्षण टेस्ट की रिपोर्ट में T-score और Z-score मिलते हैं। चलिए रिपोर्ट में मौजूद सभी कारकों को समझने का प्रयास करते हैं - 

  • T-score: इसमें आपकी हड्डियों की मजबूती की तुलना एक स्वस्थ युवा व्यक्ति से की जाती है।
    • अगर T-score -1.0 या उससे ज्यादा है, तो हड्डियां सामान्य मानी जाती हैं।
    • अगर -1.0 से -2.5 के बीच है, तो हड्डियों में थोड़ी कमजोरी (ऑस्टियोपीनिया) होती है। यह ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती चरण हो सकता है।
    • अगर -2.5 या कम है, तो ऑस्टियोपोरोसिस की पुष्टि मानी जाती है.।
  • Z-score: इसमें आपकी हड्डियों की मजबूती का पता आपकी उम्र, लिंग और शरीर के आकार जैसे फैक्टर्स से तुलना करके चलता है। यह ज्यादा उपयोगी तब है, जब बच्चे, युवाओं या कम उम्र के वयस्कों में टेस्ट किया जा रहा हो।
  • FRAX Calculator: यह एक नई टेक्नोलॉजी है, जो DXA मशीनों में उपलब्ध हो सकती है और आपके फ्रैक्चर के जोखिम का अंदाजा देती है।

इस तरह, सरल T-score और Z-score की मदद से कोई भी व्यक्ति अपनी हड्डियों की सेहत को आसानी से समझ सकता है। लेकिन परिणाम क्या है और आपकी हड्डियां स्वस्थ हैं कि नहीं, इसकी पुष्टि डॉक्टर रिपोर्ट के बाद देते हैं।

समय रहते पहचान क्यों है जरूरी?

अगर ऑस्टियोपोरोसिस का पता समय रहते चल जाता है, तो फ्रैक्चर, दर्द, ऑपरेशन और विकलांगता जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। सही समय पर इलाज शुरू होने से जीवन की गुणवत्ता कई गुना बेहतर होती है। न सिर्फ वो लोग जिन्हें खतरा है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए समय से जांच महत्वपूर्ण है और इसी वजह से विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है, जिसके कारण लोगों में जागरूकता फैलती है।

यदि आप या फिर आपके परिवार में से कोई भी इस समस्या का सामना कर रहा है, तो तुरंत हमारे अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलें और उनसे इलाज के विकल्पों पर बात करें क्योंकि वह इस रोग का इलाज सर्वश्रेष्ठ सफलता दर के साथ कर सकते हैं।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोन डेंसिटी टेस्ट किस उम्र में करवाना चाहिए?

महिलाओं में 65 वर्ष की उम्र और पुरुषों में 70 वर्ष से ऊपर, या किसी भी उम्र में अगर हल्की चोट के कारण भी फ्रैक्चर का जोखिम है, तो उन्हें यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

क्या महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा होता है?

हां, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा रहता है।

बोन डेंसिटी टेस्ट से पहले क्या तैयारी करनी होती है?

टेस्ट से 24 घंटे पहले कैल्शियम सप्लीमेंट न लें, सामान्य कपड़े पहनें।

क्या बोन डेंसिटी टेस्ट दर्दनाक होता है?

नहीं, यह जांच पूरी तरह से दर्द रहित होती है और कुछ ही समय में पूरी भी हो जाती है।

क्या बोन डेंसिटी टेस्ट हर साल करवाना चाहिए?

यहडॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। आमतौर पर यह टेस्ट हर 1-2 साल में रिपीट किया जाता है, यदि इलाज चल रहा है या खतरा है।

क्या कैल्शियम और विटामिन D सप्लीमेंट्स लेने से बोन डेंसिटी बेहतर हो सकती है?

हां, लेकिन सप्लीमेंट्स भी डॉक्टर की सलाह से ही लें। यदि डॉक्टर मना करते हैं, तो सप्लीमेंट्स न लें। इसके अतिरिक्त सही मात्रा का पालन भी आवश्यक है।

बोन डेंसिटी कम होने पर फ्रैक्चर का खतरा कितना बढ़ जाता है?

बोन डेंसिटी कम होते ही मामूली चोट या गिरावट पर फ्रैक्चर का खतरा 3-5 गुना बढ़ जाता है।

Written and Verified by:

Dr. Hitesh Joshi

Dr. Hitesh Joshi

Consultant Exp: 10 Yr

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Dr. Hitesh Joshi is a Consultant Orthopaedic & Joint Replacement Surgeon at CK Birla Hospital, Jaipur with over 6 years of post-PG experience. He specializes in trauma surgery, arthroscopy, and joint replacement.

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