
कल्पना कीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं, जिसमें आपको बहुत आनंद आता है या फिर अपने परिवार के साथ एक हेप्पी टाइम बिता रहे हैं, और अचानक आपके गले में एक तीखी चुभन महसूस हो और आप बात न कर पाएं, तो आपको कैसा लगेगा।
गले की वह निरंतर "खिच-खिच" न केवल आपकी रातों की नींद हराम कर देती है, बल्कि आपके पूरे दिन की ऊर्जा को सोख लेती है। गले में दर्द और खांसी सिर्फ एक शारीरिक परेशानी नहीं है; यह आपके शरीर का एक संकेत है कि आपके गले को अब देखभाल की आवश्यकता है। जब यह समस्या बढ़ती है, तो हम अक्सर यह सोचकर परेशान रहते हैं कि गले की खराश के लिए क्या करें या इसे जड़ से कैसे खत्म करें। यदि आप भी इस दर्द और असुविधा का सामना कर रहे हैं, तो आपके लिए यह ब्लॉग एक रिकवरी गाइड बन कर आपके सामने आया है। हमारे अनुभवी ईएनटी विशेषज्ञ मानते हैं कि सही समय पर पहचान और उचित देखभाल न केवल गले को राहत देती है, बल्कि संक्रमण को फेफड़ों तक पहुंचने से भी रोकती है।
यह समझने के लिए कि खराश क्यों होती है, यह जानना जरूरी है कि संक्रमण गले के किस हिस्से को प्रभावित करता है। अक्सर संक्रमण ग्रसनी (Pharynx), स्वरयंत्र (Larynx) या टॉन्सिल्स को प्रभावित करता है, जिससे सूजन और दर्द महसूस होता है। चलिए सीधे समझते हैं कि यह समस्या आपको क्यों परेशान करती है।
बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ लेना आधे इलाज के बराबर है। यदि आप निम्नलिखित लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं और तुरंत एक अनुभवी डॉक्टर से मिलकर इलाज लें -
इन लक्षणों के दिखने पर अक्सर लोग पूछते हैं कि गले की खराश को कैसे ठीक करें? इसका उत्तर आपकी रसोई और सही चिकित्सा परामर्श दोनों में छिपा है।
यदि संक्रमण शुरुआती स्तर पर है, तो गले की खराश और खांसी के घरेलू उपाय जादू की तरह काम कर सकते हैं। यहां कुछ चुनिंदा तरीके दिए गए हैं, जिन्हें वर्षों से आजमाया जा रहा है और ये प्रभावी भी हैं -
एक बार ठीक होने के बाद, ऐसा नहीं है कि आप अश्वत्थामा बन गए हैं। आपको अपने गले की केयर हमेशा करनी चाहिए जैसे कि -
एक मूल मंत्र का ध्यान रखें - हर खांसी मामूली नहीं होती। सीके बिरला हॉस्पिटल (RBH) के पल्मोनोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि यदि आपको निम्नलिखित स्थितियां महसूस हो, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें -
यह लक्षण टीबी, निमोनिया या क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं, जिनके लिए आधुनिक जांच की आवश्यकता होती है।
गले की खराश और खांसी सुनने में भले ही सामान्य समस्याएं लगे, लेकिन यह आपकी जीवन की गुणवत्ता को गहराई से प्रभावित करती हैं। सही आहार, स्वच्छता और गले की खराश के घरेलू उपाय अपनाकर आप घर पर ही राहत पा सकते हैं। हालांकि, अपने शरीर की सीमाओं को समझना भी जरूरी है। स्वास्थ्य के प्रति आपकी एक छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए, जानकारी साझा करें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और जरूरत पड़ने पर हमेशा चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह लें। याद रखें, आपका गला आपकी पहचान (आवाज) का द्वार है, इसकी सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है। इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से सलाह लें।
हां, कुछ मामलों में थायराइड ग्लैंड में सूजन (थायरॉयडिटिस) के कारण गले में दबाव या खराश महसूस हो सकती है। यदि दर्द के साथ गर्दन के सामने वाले हिस्से में सूजन दिखे, तो एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से संपर्क करना उचित है।
आमतौर पर गले के बाहरी भाग पर गर्म सिकाई (Warm compress) रक्त संचार बढ़ाती है और मांसपेशियों के दर्द में राहत देती है। हालांकि, कुछ लोग गले की सूजन कम करने के लिए बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी करते हैं, लेकिन गर्म सिकाई अधिक आरामदायक होती है।
रात में खांसी बढ़ना अक्सर 'पोस्ट-नेजल ड्रिप' (नाक का बलगम गले में गिरना) या 'एसिड रिफ्लक्स' के कारण होता है। यह अस्थमा का भी शुरुआती लक्षण हो सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए ऊंचे तकिए का प्रयोग करें।
जी हां, यदि संक्रमण वायरल है, तो एंटीबायोटिक्स काम नहीं करेंगे। वायरल खराश पर्याप्त आराम, हाइड्रेशन और घरेलू उपायों से 5 से 7 दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए जरूरी हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के खुद को दवा देकर खुद डॉक्टर न बनें।
इसे 'लैरिंजाइटिस' कहते हैं। यह अक्सर वायरल संक्रमण के कारण होता है। हालांकि, यदि आवाज 2 हफ्ते से ज्यादा समय तक गायब रहे या भारी बनी रहे, तो यह वोकल कॉर्ड पर गांठ (Nodules) या अन्य गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच जरूरी है।
सामान्यतः, वायरल संक्रमण से होने वाली खराश 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाती है। यदि यह 10 दिनों से अधिक बनी रहे, आवाज पूरी तरह बैठ जाए या निगलने में असहनीय दर्द हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
ठंडी चीजें सीधे संक्रमण नहीं फैलातीं, लेकिन वे गले की संवेदनशील नसों में सिकुड़न पैदा कर सकती हैं और प्रतिरक्षा (immunity) को धीमा कर सकती हैं। इससे सूजन और दर्द बढ़ सकता है, इसलिए रिकवरी के दौरान इनसे बचना ही समझदारी है।
जी हां, गले की खराश के 80% से अधिक मामलों के पीछे 'राइनोवायरस' या 'इन्फ्लूएंजा' जैसे वायरस ही होते हैं। अच्छी बात यह है कि ये आमतौर पर बिना एंटीबायोटिक के, सिर्फ आराम और घरेलू उपचार से ठीक हो जाते हैं।
जब आप बार-बार खांसते हैं, तो गले के कोमल ऊतकों (tissues) में रगड़ और खिंचाव पैदा होता है। यह घर्षण गले की परत को छील देता है और सूजन (inflammation) बढ़ा देता है, जिससे हर खांसी के साथ चुभन महसूस होती है।
गुनगुना पानी सबसे बेहतरीन 'नेचुरल लुब्रिकेंट' है। इसके अलावा, अदरक-तुलसी का काढ़ा, शहद मिला हुआ गर्म पानी या मुलेठी वाली चाय पीने से गले की नसों को आराम मिलता है और बलगम ढीला होकर बाहर निकल जाता है।
बच्चों को हाइड्रेटेड रखें और गुनगुना तरल पदार्थ दें। 1 साल से बड़े बच्चों को शहद चटाना प्रभावी है। अगर बच्चा गरारे कर सकता है, तो नमक-पानी का उपयोग करें। बुखार या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
Written and Verified by:

Dr. Vijay Kumar Sharma is a Consultant in ENT-Otolaryngology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 5 years of experience. He specializes in cochlear implants, endoscopic ear surgery, head & neck surgery, and lateral skull base procedures.
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