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लिकोरिया का कारण, लक्षण और इलाज (Leucorrhoea)

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लिकोरिया का कारण, लक्षण और इलाज (Leucorrhoea)

Obstetrics and Gynaecology | by Dr. Parnamita Bhattacharya | Published on 17/02/2023



यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में लापरवाही बरतने पर महिलाओं को कई तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लिकोरिया भी उन्हीं में से एक है। आइए, लिकोरिया के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

लिकोरिया क्या है?

लिकोरिया या ल्यूकेरिया की स्थिति में महिला की योनि से सफ़ेद, पीला या हल्का नीला या लाल रंग का चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता है। लिकोरिया के कारण महिला के शरीर में इंफेक्शन होने का खतरा होता है। अधिकतर मामलों में यह शादी-शुदा महिलाओं में देखने को मिलता है।

हालांकि, यह किसी भी उम्र की महिलाओं में हो सकता है। आमतौर पर लिकोरिया पीरियड्स से पहले या बाद में 1-2 दिनों तक रहता है। लिकोरिया के दौरान निकलने वाले तरल पदार्थ का रंग, उसकी मात्रा, स्थिति और अवधि हर महिला में अलग-अलग हो सकती है।

सफेद पानी के लक्षण क्या है?

लिकोरिया का सबसे बड़ा लक्षण है योनि से सफ़ेद, पीला या हल्का नीला या लाल रंग का चिपचिपा और बदबूदार तरल पदार्थ का निकलना। इसके अलावा, लिकोरिया होने पर एक महिला खुद में अनेक लक्षणों को अनुभव कर सकती है जैसे कि - 

  • योनि में खुजली और जलन होना
  • शरीर में भारीपन महसूस करना
  • भूख न लगना और चक्कर आना
  • हाथ, पैर, कमर और पेडू में दर्द होना
  • पिंडलियों यानी काल्व्स में खिंचाव होना
  • जी मिचलाना और कभी-कभी उल्टी होना
  • बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता होना
  • शौच साफ़ नहीं होना और पेट में भारीपन होना
  • मन उदास होना और चिड़चिड़ापन महसूस करना
  • कमजोरी महसूस करना और आँखों के सामने अँधेरा छाना

अगर आप खुद में निम्न लक्षणों को अनुभव करती हैं, तो आपको जल्द से जल्द स्त्री विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

महिलाओं में लिकोरिया क्यों होता है?

लिकोरिया अनेक कारणों से होता है, जिसमें मुख्य रूप से योनि की स्वच्छता का ख्याल नहीं रखना, शरीर में खून की कमी होना, अत्याधिक हस्तमैथुन करना, गलत तरह से शारीरिक संबंध बनाना, अत्यधिक उपवास रखना, अत्यधिक शारीरिक काम करना, रोगग्रस्त पुरुष के साथ यौन संबंध बनाना, योनि में बैक्टीरिया की मौजूदगी होना, योनि या गर्भाशय के मुंह पर छाले आना या बार-बार गर्भपात होना या करना आदि।

इन सबके अलावा, अन्य कारणों से भी महिला को लिकोरिया की समस्या का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि - 

अगर एक महिला ऊपर दिए गए कारणों पर ध्यान देकर कुछ सावधानियां बरतती हैं, तो उसे लिकोरिया होने का खतरा कम या ख़त्म हो सकता है।

लिकोरिया कितने प्रकार का होता है?

लिकोरिया मुख्य रूप से दो प्रकार के हैं जैसे - 

  • फिजिकल लिकोरिया: यह एक सामान्य स्थिति है, जिसमें हर महिला की योनि से तरल पदार्थ निकलता है। यह पदार्थ शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा भी करता है। इसका कार्य योनि के तंत्र में रासायनिक संतुलन और योनि के ऊतकों के लचीलेपन को बनाए रखना है। 
  • सूजन संबंधी लिकोरिया: यह योनि की सूजन या योनि में म्यूकोसा के जमाव के कारण होता है। इस स्थिति का इलाज अनिवार्य होता है, जिसके बारे में हम इस ब्लॉग में बात कर रहे हैं। सूजन संबंधी लिकोरिया में पीले रंग का दुर्गंध युक्त तरल पदार्थ निकलता है। इस प्रकार के लिकोरिया में यौन संचारित रोग के कारण होने वाला योनि से डिस्चार्ज और प्रसव के बाद डिस्चार्ज भी शामिल है।

आपको यहां समझना होगा कि सिर्फ रंग के आधार पर लिकोरिया जैसी स्थिति की जांच संभव नहीं है। ऊपर बताए गए लक्षणों की पुष्टि होने पर तुरंत एक अच्छे डॉक्टर से मिलें और इलाज लें। वह स्थिति की पुष्टि के लिए कुछ जांच कर सकते हैं। 

लिकोरिया की जांच

लिकोरिया का निदान करने के लिए लिए डॉक्टर रोगाणुओं और डब्ल्यूबीसी यानी व्हाइट ब्लड काउंट करने के लिए योनि से डिस्चार्ज होने वाले तरल पदार्थ की जांच करते हैं। माइक्रोस्कोप के तहत 10 से अधिक डब्ल्यूबीसी उसी के निदान में सहायता करते हैं। इसके अतिरिक्त डॉक्टर शारीरिक परीक्षण भी करते हैं जिसमें वह सफेद पानी और कमर दर्द जैसे लक्षणों की पुष्टि भी करते हैं। 

लिकोरिया का इलाज

लिकोरिया के दौरान योनि से डिस्चार्ज होने वाले तरल पदार्थ का प्रकार, रंग, अवधि, गंभीरता और कारण को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर इसके इलाज के माध्यम का चयन करते हैं। आमतौर पर लिकोरिया के शुरुआती इलाज के तौर पर डॉक्टर महिला को जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का सुखाव देते हैं। लेकिन जब इन सबसे कोई फायदा नहीं होता है तो कुछ ख़ास सप्लीमेंट्स और दवाएं निर्धारित करते हैं।

क्या ल्यूकोरिया को रोका जा सकता है?

कुछ बातों पर ध्यान देकर लिकोरिया से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हो सकते हैं - 

  • स्वस्थ आहार लेना
  • यौन और प्रजनन स्वास्थ्य का ख्याल रखना
  • गर्भ निरोधकों का उपयोग करते समय सावधानी बरतना।

अगर आप योनि के डिस्चार्ज में कोई बदलाव आता है, तो जितनी जल्दी हो सके अपने डॉक्टर से परामर्श करें। ल्यूकोरिया एक सामान्य स्थिति है, लेकिन अगर इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह असुविधाजनक होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए, जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर या चिकित्सक से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


लिकोरिया जड़ से खत्म कैसे करें?

लिकोरिया को जड़ से खत्म करने के लिए आप अपनी डाइट और जीवनशैली में बदलाव ला सकती हैं। अपनी डाइट में सब्जियों और फलों को शामिल करें, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखें, नियमित रूप से व्यायाम और मेडिटेशन करें और इसका लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

लिकोरिया में खानपान कैसा होना चाहिए?

लिकोरिया होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर महिला को अपनी डाइट में अधिक से अधिक हरी पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों को शामिल करने का सुझाव देते हैं। साथ ही, इस स्थिति में अत्याधिक तैलीय और मसालेदार चीजों के सेवन से भी बचना चाहिए। जंक फूड्स, कोल्ड ड्रिंक, शराब या सिगरेट का सेवन लिकोरिया के लक्षणों को गंभीर बना सकता है, इसलिए इन सबसे भी बचने का सुझाव दिया जाता है।

सफेद पानी किसकी कमी से होता है?

आपको यह समझना होगा कि सफेद पानी किसी एक पोषक तत्व की कमी से नहीं होता है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, संक्रमण, या अन्य स्वास्थ्य स्थिति में शामिल है।

लिकोरिया में क्या नहीं खाना चाहिए?

लिकोरिया की स्थिति में निम्न खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह नहीं दी जाती है - 

  • मीठे और मसालेदार भोजन
  • कैफीन युक्त पेय पदार्थ
  • शराब
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक

सफेद पानी आने से क्या नुकसान होता है?

सफेद पानी आने से महिलाओं को कोई खास नुकसान नहीं होता है, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक अनुपचारित रह जाती है तो इसके कारण संक्रमण, योनि में जलन, और यौन संबंध के दौरान दर्द होता है।

लिकोरिया की जांच कैसे होती है?

लिकोरिया की जांच के लिए निम्न परीक्षणों की आवश्यकता पड़ती है - 

  • शारीरिक जांच
  • योनि डिस्चार्ज का सैंपल

इसके अतिरिक्त कुछ प्रकार के ब्लड टेस्ट भी होते हैं जिन्हें इस ब्लॉग में बताया गया है।

लिकोरिया को जड़ से खत्म कैसे करें?

इस स्थिति का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। इसमें डॉक्टर दवाएं, एंटीबायोटिक्स, या अन्य उपचार का विकल्प का सुझाव दे सकते हैं। इसमें जीवनशैली में बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।