
जब यह समस्या बढ़ती है, तो शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
क्या आप भी उन लाखों महिलाओं में शामिल हैं, जो सफेद पानी और कमर दर्द जैसी समस्याओं को 'आम बात' समझकर नजरअंदाज कर रही हैं? या शायद शर्मिंदगी के कारण डॉक्टर के पास जाने से कतरा रही हैं?
भारतीय महिलाओं में लिकोरिया या सफेद पानी की समस्या बहुत ही सामान्य है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में लगभग 30% से अधिक महिलाएं अपने जीवन में कभी न कभी इस संक्रमण का सामना करती हैं। लेकिन, इसे नजरअंदाज करना आपके प्रजनन स्वास्थ्य के लिए गंभीर हो सकता है। यह केवल एक स्राव नहीं है, बल्कि आपके शरीर द्वारा दिया जा रहा एक संकेत है कि 'सब कुछ ठीक नहीं है'।
सही जानकारी और सही समय पर इलाज ही इसका एकमात्र समाधान है। इस ब्लॉग में, हम आपको लिकोरिया के कारण, लक्षण और लिकोरिया का घरेलू उपाय व इलाज के बारे में विस्तार से बताएंगे। इसके अतिरिक्त आप इस स्थिति के इलाज में हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं।
लिकोरिया या ल्यूकेरिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें महिला की योनि से सफेद पानी निकलना शुरू हो जाता है। यह स्राव सफ़ेद, पीला, हल्का नीला या कभी-कभी लाल रंग का चिपचिपा तरल पदार्थ हो सकता है।
यूं तो यह शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, जो योनि को साफ़ और संक्रमण मुक्त रखने में मदद करती है, लेकिन जब इसका रंग, गंध या मात्रा बदलने लगे, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। लिकोरिया के कारण महिला के शरीर में गंभीर इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। अधिकतर मामलों में यह शादी-शुदा महिलाओं में देखने को मिलता है, हालांकि, यह किसी भी उम्र की महिलाओं में हो सकता है। आमतौर पर लिकोरिया पीरियड्स से पहले या बाद में 1-2 दिनों तक रहता है।
लिकोरिया का सबसे बड़ा और स्पष्ट लक्षण है, योनि से सफेद पानी निकलना, जो बदबूदार, पीला या मटमैला हो सकता है। इसके अतिरिक्त, सफेद पानी और कमर दर्द का गहरा संबंध है। लिकोरिया होने पर एक महिला खुद में अनेक लक्षणों को अनुभव कर सकती है जैसे कि -
नोट: अगर आप खुद में इन लक्षणों को अनुभव करती हैं, तो आपको जल्द से जल्द CMRI (कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) के स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श करना चाहिए।
महिलाओं में लिकोरिया क्यों होता है, इसके अनेक कारण हो सकते हैं। मुख्य रूप से यह योनि की स्वच्छता का ख्याल नहीं रखने से होता है। इसके अतिरिक्त अन्य प्रमुख कारण निम्न हैं -
अगर एक महिला ऊपर दिए गए कारणों पर ध्यान देकर कुछ सावधानियां बरतती है, तो उसे लिकोरिया होने का खतरा कम या ख़त्म हो सकता है।
लिकोरिया को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
अक्सर महिलाएं पूछती हैं कि क्या गर्भावस्था में डिस्चार्ज होना सामान्य है? जी हां, गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे योनि से स्राव (Discharge) बढ़ सकता है। यह आमतौर पर गाढ़ा और दूधिया होता है और इसे सामान्य माना जाता है।
हालांकि, अगर इस स्राव में बहुत तेज गंध हो, रंग हरा या पीला हो, और साथ में योनि में खुजली या जलन हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है।
सही इलाज के लिए सही जांच जरूरी है। लिकोरिया का निदान करने के लिए डॉक्टर रोगाणुओं और डब्ल्यूबीसी (WBC) की गिनती करने के लिए योनि से डिस्चार्ज होने वाले तरल पदार्थ का सैंपल लेते हैं। माइक्रोस्कोप के तहत 10 से अधिक डब्ल्यूबीसी संक्रमण की पुष्टि करते हैं। इसके अतिरिक्त डॉक्टर शारीरिक परीक्षण (Physical Exam) भी करते हैं, जिसमें वह सफेद पानी और कमर दर्द जैसे लक्षणों की गंभीरता को जांचते हैं।
लिकोरिया का इलाज क्या है? यह पूरी तरह से इसके कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर आमतौर पर एंटीबायोटिक्स या एंटीफंगल दवाएं (वेजाइनल सपोजिटरी या गोलियां) देते हैं। लेकिन, दवाओं के साथ-साथ कुछ लिकोरिया का घरेलू उपाय भी आपको राहत दिला सकते हैं।
कई बार महिलाएं सफेद पानी का रामबाण इलाज घर पर ही खोजती हैं। यह उपाय सहायक हो सकते हैं -
कृपया ध्यान दें कि घरेलू उपाय केवल सहायता के लिए हैं। संक्रमण को जड़ से खत्म करने के लिए चिकित्सीय सलाह और सही इलाज अनिवार्य है।
हम आपको लिकोरिया की समस्या महिलाओं में काफी आम है, लेकिन सही समय पर देखभाल और खानपान में बदलाव से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। यहां कुछ आसान घरेलू उपाय दिए गए हैं, जो आपके शरीर को अंदर से मजबूती देंगे -
सिर्फ नुस्खे ही काफी नहीं हैं, अपनी आदतों में यह बदलाव लाना भी बहुत जरूरी है -
लिकोरिया को नियंत्रित करने में आपकी डाइट बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। नीचे दी गई टेबल से समझें कि आपको क्या बदलाव करने चाहिए -
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क्या खाएं (Do's) |
क्या न खाएं (Don'ts) |
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हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फल |
अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन |
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दही (प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत) |
जंक फूड्स (पिज्जा, बर्गर आदि) |
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लहसुन (नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल) |
अत्यधिक चीनी या मीठी चीजें |
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भरपूर पानी और नारियल पानी |
कॉफी, चाय और कैफीन युक्त पेय |
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विटामिन सी युक्त फल (संतरा, आंवला) |
शराब और सिगरेट |
कहते हैं इलाज से बेहतर बचाव होता है। अपनी जीवनशैली में ये छोटे बदलाव करके आप इस समस्या से बच सकती हैं। चलिए समझते हैं कि किन उपायों से आपको लाभ मिल सकता है -
घरेलू नुस्खे सामान्य स्थिति में बहुत काम आते हैं, लेकिन अगर डिस्चार्ज का रंग गहरा पीला या हरा हो रहा हो, उसमें से तेज बदबू आ रही हो या आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द रहता हो, तो देर न करें। यह किसी गंभीर इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है, इसलिए ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी डॉक्टर (Gynecologist) से सलाह जरूर लें।
लिकोरिया को जड़ से खत्म करने के लिए आप अपनी डाइट और जीवनशैली में बदलाव ला सकती हैं। अपनी डाइट में सब्जियों और फलों को शामिल करें, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखें, नियमित रूप से व्यायाम और मेडिटेशन करें और इसका लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। इसके अतिरिक्त दवाओं का सेवन सही समय पर करते रहें।
हां, यदि लिकोरिया किसी बैक्टीरिया, फंगस या एसटीडी (STD) के कारण हुआ है, तो यह असुरक्षित यौन संबंधों के जरिए पार्टनर में फैल सकता है।
गर्भावस्था में बढ़ा हुआ एस्ट्रोजन स्तर अधिक डिस्चार्ज का कारण बनता है, जो सामान्य है। लेकिन, यदि इसमें दुर्गंध या खुजली हो, तो यह संक्रमण हो सकता है।
यह किसी एक पोषक तत्व की कमी से नहीं, बल्कि संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन, या शरीर में अच्छे बैक्टीरिया की कमी और कमजोर इम्युनिटी के कारण होता है।
हां, संक्रमण की स्थिति में संबंध बनाने से दर्द (Dyspareunia) हो सकता है और पार्टनर को भी संक्रमण लगने का खतरा रहता है।
सही इलाज और परहेज के साथ, सामान्य संक्रमण 7 से 14 दिनों में ठीक हो सकता है। हालांकि, क्रॉनिक मामलों में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
लिकोरिया होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर महिला को अपनी डाइट में अधिक से अधिक हरी पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों को शामिल करने का सुझाव देते हैं। साथ ही, इस स्थिति में अत्याधिक तैलीय और मसालेदार चीजों के सेवन से भी बचना चाहिए। जंक फूड्स, कोल्ड ड्रिंक, शराब या सिगरेट का सेवन लिकोरिया के लक्षणों को गंभीर बना सकता है, इसलिए इन सबसे भी बचने का सुझाव दिया जाता है।
आपको यह समझना होगा कि सफेद पानी किसी एक पोषक तत्व की कमी से नहीं होता है। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, संक्रमण, या अन्य स्वास्थ्य स्थिति में शामिल है।
लिकोरिया की स्थिति में निम्न खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह नहीं दी जाती है -
सफेद पानी आने से महिलाओं को कोई खास नुकसान नहीं होता है, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक अनुपचारित रह जाती है तो इसके कारण संक्रमण, योनि में जलन, और यौन संबंध के दौरान दर्द होता है।
लिकोरिया की जांच के लिए निम्न परीक्षणों की आवश्यकता पड़ती है -
इसके अतिरिक्त कुछ प्रकार के ब्लड टेस्ट भी होते हैं जिन्हें इस ब्लॉग में बताया गया है।
Written and Verified by:
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Dr. Parnamita Bhattacharya is a Senior Consultant in Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 20 years of experience. She specializes in high-risk pregnancy care, gynae laparoscopy, urogynecology, fertility management, and treatment of endometriosis & uterine fibroids.
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