
मानसिक तनाव के कारण साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर नामक स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें सिरदर्द, हृदय रोग, पेट दर्द जैसे शारीरिक लक्षण उत्पन्न होते हैं। इलाज, व्यायाम और सलाह से इन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए प्रयास करें कि समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें और स्वस्थ रहें।
क्या आपके जीवन में लगातार तनाव बना रहता है और इसके कारण शरीर में अजीब-अजीब लक्षण महसूस होते हैं? कई बार हम अपने व्यवसाय, रिश्तों और व्यक्तिगत समस्याओं से गुजरते हुए मानसिक तनाव को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसे अनदेखा करना धीरे-धीरे हमारी शारीरिक सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। 2016 के राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार भारत में 13.7% लोगों ने कभी-ना-कभी अपने जीवन में मानसिक रोग का सामना किया है, इसलिए इस स्थिति के बारे में जानना बहुत ज्यादा आवश्यक है।
यदि आप सिरदर्द, थकान, या हार्टबीट बढ़ने जैसी समस्याओं से परेशान हैं, यह ब्लॉग आपके लिए है। यह जानना आपके लिए बहुत जरूरी है कि तनाव के शारीरिक लक्षण और सायकोसोमैटिक डिसऑर्डर क्या होते हैं, इनका आपस में क्या संबंध हैं, और कब आपको विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त इस ब्लॉग में कुछ लक्षण बताए जाएंगे, जिनका अनुभवी होने पर आपको बिना देरी करे एक अनुभवी डॉक्टर से मिलकर इलाज के सभी विकल्पों पर बात करनी चाहिए और इलाज लेना चाहिए।
साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मानसिक तनाव, चिंता या भावनात्मक असंतुलन का असर शरीर पर दिखाई देता है। यानी भावनात्मक या मानसिक समस्याएं शारीरिक लक्षणों के रूप में उभर सकती हैं या पहले से मौजूद बीमारी को बढ़ा सकती हैं। उदाहरण के लिए, लगातार तनाव में रहने से सिरदर्द, पेट दर्द, नींद की कमी, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
यह समझना जरूरी है कि साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर में लक्षण वास्तविक होते हैं, भले ही उनका मूल कारण मनोवैज्ञानिक हो। इसलिए इस स्थिति में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, दोनों का संतुलन बनाए रखना उपचार का मुख्य आधार होता है, जिस पर हमारे डॉक्टर भी मेहनत करते हैं।
साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर भी निम्न प्रकार के होते हैं -
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नैशनल हेल्थ सर्वे के अनुसार, भारत में 10.6% वयस्क मानसिक समस्याओं से पीड़ित हैं। ऐसे में तनाव के शारीरिक लक्षणों को समझना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। मानसिक तनाव की स्थिति में कुछ सामान्य शारीरिक लक्षण नजर आ सकते हैं जैसे कि -
ऊपर शारीरिक लक्षण थे, चलिए मानसिक तनाव के सामान्य लक्षणों को जानते और समझते हैं -
मानसिक तनाव एक व्यक्ति को निम्न कारणों से परेशान कर सकता है जैसे कि -
मानसिक तनाव से कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं जैसे कि -
तनाव को कम करने के लिए आप निम्न प्रभावी एवं सरल उपायों को अपनी जीवनशैली में अपना सकते हैं जैसे कि -
अगर लगातार तनाव के कारण शारीरिक लक्षण बढ़ते जा रहा है, जैसे कि हृदय की धड़कन अनियमित होना, सिरदर्द/माइग्रेन होना, पेट दर्द, रातों की नींद गायब हो जाना, या व्यवहार में बड़ा परिवर्तन होना, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। CK Birla Hospitals की विशेषज्ञ टीम आधुनिक थेरैपी, काउंसलिंग, और व्यक्तिगत देखभाल के लिए हर समय उपलब्ध है।
हां, यदि इसे अनदेखा किया जाए तो यह लंबे समय तक परेशानी करने वाली बीमारियों के उत्पन्न होने का कारण बन सकता है और रोगों को जटिल बना सकता है।
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), रेगुलर एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन सबसे असरदार मानी जाती है।
बिल्कुल, नियमित व्यायाम और योग शरीर एवं मन की शांति के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
मानसिक तनाव सिरदर्द एवं माइग्रेन के सामान्य कारणों में से एक है, क्योंकि शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है।
नहीं, अन्य मानसिक समस्याएं, पारिवारिक-आर्थिक दबाव, और सामाजिक परिस्थिति भी इस डिसऑर्डर का कारण बन सकती हैं।
हां, गंभीर नींद की कमी से तनाव के लक्षण तथा शारीरिक बीमारियाँ बढ़ जाती हैं।
Written and Verified by:

Dr. Shivi Kataria secured MD degree in Neuropsychiatry from TMU, Moradabad, following which she was associated with the prestigious IHBAS, New Delhi till 2021. She is credited with providing comprehensive care for some of the most challenging psychiatric conditions like schizophrenia, OCD, anxiety disorders, depression, etc. Dr. Shivi has also been providing state of the art de-addiction therapies for alcohol and other substance abuse conditions. She is highly experienced in providing psychological therapies like Cognitive behavioral therapy, exposure therapy, etc. for a wide spectrum of psychiatric issues. She has been actively associated in group and motivational therapies for employees of IT sector in the post COVID era.
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