
जब एक नवजात बच्चा रोते-रोते अचानक नीला पड़ जाए, तो उस पल माता-पिता के दिल पर जो गुजरती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कुछ पल के लिए पूरी दुनिया थम-सी जाती है। यही वह क्षण है जब बहुत से परिवार पहली बार "टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट" नाम सुनते हैं, एक ऐसी जन्मजात स्थिति, जो सुनने में डरावनी लग सकती है, लेकिन आज के मेडिकल साइंस की मदद से इसे सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है।
पिछले दो दशकों में पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी ने इतनी तरक्की कर ली है कि टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट अब एक "जानलेवा खतरा" नहीं, बल्कि "समय पर पहचाना और ठीक किया जा सकने वाला" हृदय रोग बन चुका है। इस ब्लॉग में हम इस स्थिति को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि आप बिना घबराए सही समय पर सही फैसला ले सकें। अगर आपके बच्चे में इससे जुड़े कोई भी लक्षण दिख रहे हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही सलाह पाएं।
टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट एक जन्मजात हृदय रोग है, यानी यह समस्या बच्चे के जन्म से पहले, गर्भ में हृदय के विकास के दौरान ही बन जाती है। "टेट्रा" का मतलब चार होता है, और इस स्थिति में दिल की चार अलग-अलग संरचनाएं असामान्य तरीके से बनती हैं। यह जन्मजात हृदय रोग का सबसे आम "सायनोटिक" यानी नीलापन लाने वाला प्रकार माना जाता है। चिकित्सा जगत के आंकड़ों के अनुसार यह हर करीब 2,000 में से 1 बच्चे में पाया जाता है, और सभी जन्मजात हृदय रोगों में इसकी हिस्सेदारी लगभग 5 से 7 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। भारत में अस्पताल आधारित अध्ययनों में भी जन्मजात हृदय रोग के मामलों में टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट एक प्रमुख कारण के रूप में सामने आता रहा है।

इस स्थिति में मुख्य रूप से चार समस्याएं एक साथ पाई जाती हैं -
इन चारों वजहों से बिना ऑक्सीजन वाला खून सीधे शरीर में मिलने लगता है, जिससे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और नीलापन जैसी परेशानी सामने आती है।
बच्चों में टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट के लक्षण जन्म के तुरंत बाद या कुछ हफ्तों में सामने आ सकते हैं। सबसे आम और चिंताजनक लक्षण है होंठ, नाखून या त्वचा का नीला पड़ना, खासकर रोते समय, दूध पीते समय या मल त्याग के दौरान। इसके अलावा माता-पिता को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए -
हमारे सेंटर में ऐसे मामलों की सटीक जांच (Diagnosis) और उन्नत इलाज उपलब्ध हैं।
गंभीर लक्षणों या टेट स्पेल्स वाले बच्चों में जल्द सर्जरी आवश्यक होती है। आमतौर पर 3 महीने से 1 साल की उम्र के बीच पूर्ण सुधारात्मक सर्जरी (Complete Repair) की सलाह दी जाती है। अति-गंभीर नवजात मामलों में पहले स्थिति को स्थिर करने के लिए एक अस्थायी "शंट सर्जरी" की जाती है।
टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट की सर्जरी को "कंप्लीट इंट्राकार्डियक रिपेयर" कहा जाता है। इस सर्जरी में हार्ट-लंग मशीन (कार्डियोपल्मोनरी बायपास) की मदद से दिल को अस्थायी रूप से रोका जाता है, ताकि सर्जन बारीकी से सुधार कर सकें। इस दौरान मुख्य रूप से यह किया जाता है -
यह एक जटिल पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी है, इसलिए इसे अनुभवी बाल हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जिकल टीम की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। आज के समय में सफलता दर काफी ऊंची है, और अनुभवी सेंटरों में सर्जरी के अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।
सर्जरी का फैसला लेने से पहले डॉक्टर कई जांचों के जरिए बच्चे के दिल की पूरी स्थिति समझते हैं -
ये सभी जांचें मिलकर सर्जिकल टीम को सबसे सुरक्षित और सटीक योजना बनाने में मदद करती हैं।
सर्जरी के बाद कुछ दिन बच्चे को आईसीयू में निगरानी में रखा जाता है, जहां हृदय गति, ऑक्सीजन स्तर और घाव की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। घर लौटने के बाद माता-पिता को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए -
सही देखभाल और नियमित जांच के साथ, सर्जरी करा चुके अधिकतर बच्चे आगे चलकर पढ़ाई, खेलकूद और सामान्य जीवन की हर गतिविधि में बाकी बच्चों की तरह हिस्सा ले पाते हैं।
टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट सुनने में जरूर एक गंभीर जन्मजात हृदय रोग लगता है, लेकिन समय पर पहचान, सही जांच और अनुभवी टीम की देखरेख में की गई सर्जरी से बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। अगर आपके बच्चे में नीलापन, सांस फूलना या दूध पीने में परेशानी जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। कोलकाता स्थित सीके बिरला अस्पताल (बीएम बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर) में हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ऐसे मामलों में सटीक निदान और सुरक्षित सर्जरी के लिए जानी जाती है। समय पर सही कदम आपके बच्चे को एक सामान्य और खुशहाल भविष्य दे सकता है, आज ही हमारे विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने बच्चे के दिल की सेहत को लेकर निश्चिंत रहें।
Written and Verified by:

Dr. Satarupa Mukherjee is an Consultant in Pediatric Cardiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata with over 13 years of experience. She specializes in post-op care after neonatal & pediatric cardiac surgery, extracorporeal life support, and pediatric cardiac transplantation.
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