टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट (TOF): बच्चों में लक्षण, सर्जरी और इलाज की पूरी जानकारी
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टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट (TOF): बच्चों में लक्षण, सर्जरी और इलाज की पूरी जानकारी

Summary

  • टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट (TOF) जन्मजात हृदय रोग है जिसमें दिल में चार तरह की संरचनात्मक खामियां एक साथ होती हैं।
  • सबसे पहचानी जाने वाली निशानी है बच्चे के होंठ, नाखून या त्वचा का नीला पड़ना, खासकर रोने या दूध पीते समय।
  • ज्यादातर मामलों में सर्जरी ही इसका स्थायी और भरोसेमंद इलाज है। 
  • आमतौर पर 3 महीने से 1 साल की उम्र के बीच इसका इलाज आसानी से हो सकता है।
  • समय पर जांच, सही सर्जिकल टीम और सर्जरी के बाद नियमित फॉलोअप से बच्चा पूरी तरह सामान्य जिंदगी जी सकता है।
  • अगर बच्चे में सांस फूलना, नीलापन या बार-बार बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज लें।

जब एक नवजात बच्चा रोते-रोते अचानक नीला पड़ जाए, तो उस पल माता-पिता के दिल पर जो गुजरती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कुछ पल के लिए पूरी दुनिया थम-सी जाती है। यही वह क्षण है जब बहुत से परिवार पहली बार "टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट" नाम सुनते हैं, एक ऐसी जन्मजात स्थिति, जो सुनने में डरावनी लग सकती है, लेकिन आज के मेडिकल साइंस की मदद से इसे सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है।

पिछले दो दशकों में पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी ने इतनी तरक्की कर ली है कि टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट अब एक "जानलेवा खतरा" नहीं, बल्कि "समय पर पहचाना और ठीक किया जा सकने वाला" हृदय रोग बन चुका है। इस ब्लॉग में हम इस स्थिति को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि आप बिना घबराए सही समय पर सही फैसला ले सकें। अगर आपके बच्चे में इससे जुड़े कोई भी लक्षण दिख रहे हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही सलाह पाएं।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट क्या है?

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट एक जन्मजात हृदय रोग है, यानी यह समस्या बच्चे के जन्म से पहले, गर्भ में हृदय के विकास के दौरान ही बन जाती है। "टेट्रा" का मतलब चार होता है, और इस स्थिति में दिल की चार अलग-अलग संरचनाएं असामान्य तरीके से बनती हैं। यह जन्मजात हृदय रोग का सबसे आम "सायनोटिक" यानी नीलापन लाने वाला प्रकार माना जाता है। चिकित्सा जगत के आंकड़ों के अनुसार यह हर करीब 2,000 में से 1 बच्चे में पाया जाता है, और सभी जन्मजात हृदय रोगों में इसकी हिस्सेदारी लगभग 5 से 7 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। भारत में अस्पताल आधारित अध्ययनों में भी जन्मजात हृदय रोग के मामलों में टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट एक प्रमुख कारण के रूप में सामने आता रहा है।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट में हृदय की कौन सी समस्याएं होती हैं?

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट में हृदय की कौन सी समस्याएं होती हैं?

इस स्थिति में मुख्य रूप से चार समस्याएं एक साथ पाई जाती हैं - 

  • वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट: दिल के दोनों निचले कक्षों (वेंट्रिकल) के बीच की दीवार में छेद होना।
  • पलमोनरी स्टेनोसिस: फेफड़ों तक खून ले जाने वाले रास्ते का संकरा होना।
  • ओवरराइडिंग एओर्टा: शरीर को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (एओर्टा) का असामान्य स्थान पर स्थित होना।
  • राइट वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी: दिल के दाहिने निचले कक्ष की दीवार का मोटा होना।

इन चारों वजहों से बिना ऑक्सीजन वाला खून सीधे शरीर में मिलने लगता है, जिससे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और नीलापन जैसी परेशानी सामने आती है।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट के लक्षण बच्चों में कैसे दिखाई देते हैं?

बच्चों में टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट के लक्षण जन्म के तुरंत बाद या कुछ हफ्तों में सामने आ सकते हैं। सबसे आम और चिंताजनक लक्षण है होंठ, नाखून या त्वचा का नीला पड़ना, खासकर रोते समय, दूध पीते समय या मल त्याग के दौरान। इसके अलावा माता-पिता को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए - 

  • सांस तेज या फूली-फूली सी चलना।
  • दूध पीते समय जल्दी थक जाना या बार-बार रुकना।
  • वजन ठीक से न बढ़ना।
  • अचानक "टेट स्पेल्स" होना, जिसमें नीलापन बढ़ने के साथ बच्चा तेज रोने लगता है या बेहोश हो जाता है।
  • हाथ और पैर की उंगलियों का आकार क्लब (ड्रमस्टिक) जैसा हो जाना। लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी के कारण यह लक्षण केवल बड़े बच्चों (6 महीने या उससे अधिक उम्र) में दिखाई देता है।

हमारे सेंटर में ऐसे मामलों की सटीक जांच (Diagnosis) और उन्नत इलाज उपलब्ध हैं।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट की सर्जरी: समय और प्रक्रिया

गंभीर लक्षणों या टेट स्पेल्स वाले बच्चों में जल्द सर्जरी आवश्यक होती है। आमतौर पर 3 महीने से 1 साल की उम्र के बीच पूर्ण सुधारात्मक सर्जरी (Complete Repair) की सलाह दी जाती है। अति-गंभीर नवजात मामलों में पहले स्थिति को स्थिर करने के लिए एक अस्थायी "शंट सर्जरी" की जाती है।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट की सर्जरी को "कंप्लीट इंट्राकार्डियक रिपेयर" कहा जाता है। इस सर्जरी में हार्ट-लंग मशीन (कार्डियोपल्मोनरी बायपास) की मदद से दिल को अस्थायी रूप से रोका जाता है, ताकि सर्जन बारीकी से सुधार कर सकें। इस दौरान मुख्य रूप से यह किया जाता है - 

  • वेंट्रिकल्स के बीच के छेद को पैच लगाकर बंद किया जाता है।
  • फेफड़ों तक खून ले जाने वाले संकरे रास्ते को चौड़ा किया जाता है।
  • जरूरत पड़ने पर को ठीक किया जाता है।

यह एक जटिल पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी है, इसलिए इसे अनुभवी बाल हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जिकल टीम की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। आज के समय में सफलता दर काफी ऊंची है, और अनुभवी सेंटरों में सर्जरी के अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट की सर्जरी से पहले कौन-कौन सी जांच होती हैं?

सर्जरी का फैसला लेने से पहले डॉक्टर कई जांचों के जरिए बच्चे के दिल की पूरी स्थिति समझते हैं - 

  • दिल की संरचना और खून के बहाव को देखने के लिए इकोकार्डियोग्राफी की जाती है।
  • दिल की धड़कन और लय की जांच के लिए ईसीजी कराई जाती है।
  • दिल के आकार का आकलन करने के लिए छाती का एक्स-रे ज़रूरी है।
  • खून में ऑक्सीजन का स्तर मापने के लिए पल्स ऑक्सीमेट्री से जांच की जाती है।
  • जटिल मामलों में रक्त वाहिनियों की बनावट को और गहराई से समझने के लिए कार्डियक कैथेटराइजेशन कराया जाता है।

ये सभी जांचें मिलकर सर्जिकल टीम को सबसे सुरक्षित और सटीक योजना बनाने में मदद करती हैं।

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट की सर्जरी के बाद बच्चे की देखभाल कैसे करें?

सर्जरी के बाद कुछ दिन बच्चे को आईसीयू में निगरानी में रखा जाता है, जहां हृदय गति, ऑक्सीजन स्तर और घाव की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। घर लौटने के बाद माता-पिता को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए - 

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाएं समय पर देना।
  • नियमित फॉलो-अप और इकोकार्डियोग्राफी जांच करवाते रहना।
  • बच्चे के वजन, भूख और गतिविधि पर नजर रखना।
  • संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई और टीकाकरण पूरा रखना।
  • किसी भी असामान्य लक्षण, जैसे तेज बुखार, सूजन या सांस फूलने, पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना।

सही देखभाल और नियमित जांच के साथ, सर्जरी करा चुके अधिकतर बच्चे आगे चलकर पढ़ाई, खेलकूद और सामान्य जीवन की हर गतिविधि में बाकी बच्चों की तरह हिस्सा ले पाते हैं।

निष्कर्ष

टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट सुनने में जरूर एक गंभीर जन्मजात हृदय रोग लगता है, लेकिन समय पर पहचान, सही जांच और अनुभवी टीम की देखरेख में की गई सर्जरी से बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। अगर आपके बच्चे में नीलापन, सांस फूलना या दूध पीने में परेशानी जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। कोलकाता स्थित सीके बिरला अस्पताल (बीएम बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर) में हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ऐसे मामलों में सटीक निदान और सुरक्षित सर्जरी के लिए जानी जाती है। समय पर सही कदम आपके बच्चे को एक सामान्य और खुशहाल भविष्य दे सकता है, आज ही हमारे विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने बच्चे के दिल की सेहत को लेकर निश्चिंत रहें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

Written and Verified by:

Dr. Satarupa Mukherjee

Dr. Satarupa Mukherjee

Consultant Exp: 13 Yr

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Dr. Satarupa Mukherjee is an Consultant in Pediatric Cardiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata with over 13 years of experience. She specializes in post-op care after neonatal & pediatric cardiac surgery, extracorporeal life support, and pediatric cardiac transplantation.

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