
उम्र बढ़ने, मोटापा, खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता गठिया के जोखिम को बढ़ाते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित आहार, नियमित हल्की कसरत, पर्याप्त नींद, और तनाव कम करना दर्द व सूजन में राहत देता है। इसके अतिरिक्त तली-भुनी और ठंडी चीजें खाने से बचें, और व्यक्तिगत परहेज अपनाएं।
हर सुबह जब आप बिस्तर से उठते हैं और पहला कदम दर्द, सूजन या अकड़न के साथ रखते हैं, तो यह सिर्फ एक शारीरिक तकलीफ नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संघर्ष भी होता है। गठिया से जूझना मतलब हर दिन अपने शरीर से लड़ना, अपनी सीमाओं को पहचानना और फिर भी उम्मीद बनाए रखना। यदि आप भी हर दिन इस दर्द से जूझते हैं और हर बार इस दर्द के लिए एक नया उपचार खोजते हैं, तो सही मायने में यह ब्लॉग आपके लिए है। इस विश्व गठिया दिवस पर यह जानकारी आपकी सेहत के लिए नया रास्ता खोल सकती है। विश्व गठिया दिवस 12 अक्टूबर को आता है और इस दिन को पूरे विश्व में गठिया के संबंध में जानकारी देने के लिए उपयोग में लाया जाता है।
यदि आपको दर्द ज्यादा है या फिर आपको संदेह है कि आप इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो अभी हमारे गठिया विशेषज्ञों से जुड़ें और पहला कदम राहत की ओर बढ़ाएं।
गठिया (Arthritis) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न होती है। यह एक गंभीर रोग है और ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अनुमानित 180 मिलियन भारतीय गठिया की समस्या का सामना कर रहे हैं। यह 100 से अधिक प्रकारों में पाई जाती है, जिसके प्रमुख रूप हैं: ऑस्टियोआर्थराइटिस, रुमेटॉइड आर्थराइटिस,गाउट।
ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड आर्थराइटिस दोनों ही जोड़ों को प्रभावित करती हैं, लेकिन इसके कारण, लक्षण और प्रभावित होने वाली आबादी अलग होती है। बुजुर्गों में ऑस्टियोआर्थराइटिस, युवा महिलाओं में रुमेटॉइड आर्थराइटिस तेजी से बढ़ रही है। नीचे दोनों स्थितियों को एक टेबल की मदद से समझाने का प्रयास किया गया है -
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विशेषता |
ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA) |
रुमेटॉइड आर्थराइटिस (RA) |
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कारण |
बढ़ती उम्र, जोड़ों का घिसना-टूटना, चोट, अधिक वजन |
ऑटोइम्यून बीमारी, प्रतिरक्षा प्रणाली का जोड़ों पर हमला |
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प्रभावित आबादी |
मुख्यतः बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष दोनों |
अधिकतर 20-40 वर्ष की महिलाएं |
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प्रभावित जोड़ |
घुटने, कूल्हे, रीढ़, और हाथ |
हाथ-पैर के छोटे जोड़, शरीर के दोनों तरफ एक साथ दर्द होना |
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लक्षण |
जोड़ में दर्द, कठोरता, सूजन, चलने में कठिनाई |
जोड़ में दर्द, सुबह की कठोरता, थकान, हल्का बुखार, और सूजन होना। |
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लक्षणों की शुरुआत |
धीरे-धीरे और कई वर्षों में यह समस्या होती है। |
अचानक या कुछ हफ्तों में इस समस्या के लक्षण दिखते हैं। |
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बीमारी का असर |
सिर्फ जोड़ों को प्रभावित करते हैं। |
पूरे शरीर (सिस्टमेटिक असर) |
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प्रगति |
धीरे-धीरे |
तुरंत या उतार-चढ़ाव के साथ |
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इलाज |
जीवन शैली संशोधन, दर्द/सूजन कम करने वाली दवाएं, व्यायाम |
इम्यूनो-सप्रेसिव दवाएं, DMARDs, फिजियोथेरेपी |
गठिया में खानपान का सही चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। चलिए सबसे पहले समझते हैं कि गठिया में क्या खाना चाहिए -
चलिए सबसे पहले समझते हैं कि गठिया में क्या नहीं खाना चाहिए -
गठिया की स्थिति में परहेज बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। अपनी डाइट डॉक्टर से मिलकर बनाएं या उनसे मिलने के बाद ही बदलें। कई बार टमाटर या आलू से दर्द बढ़ता है तो कुछ को नहीं इसलिए इन उपायों के पालन से पहले एक बार डॉक्टर से ज़रूर मिलना चाहिए।
जीवनशैली और रोजमर्रा की आदतें ही हैं, जो आपको गठिया जैसी गंभीर समस्या से बचने में मदद कर सकता है। कुछ आवश्यक उपाय इस प्रकार हैं -
गठिया के लिए एक्सरसाइज (गठिया में व्यायाम) बहुत ज़रूरी है। आप अपनी जीवनशैली में निम्न व्यायाम के विकल्पों को शामिल कर सकते हैं -
गठिया से बचाव और दर्द कम करने में निम्न उपाय आपकी मदद कर सकते हैं -
इस गठिया दिवस हमें यह प्रण लेना चाहिए कि हम अच्छी आदतों को अपनाएं और एक स्वस्थ जीवनशैली जीएंगे, जिससे गठिया क्या, हर प्रकार की समस्या से हम दूर रह पाएंगे। इस विश्व गठिया दिवस पर हम आप चाहते हैं कि आप सभी तक एक बात पहुंचे कि आप अपनी हड्डियों का ख्याल रखें और यदि आपकी उम्र ज्यादा है तो समय-समय पर अपनी हड्डियों की जांच कराते रहें। इसके अतिरिक्त नियमित जांच से भी आपको मदद मिल सकती है। हड्डियों की समस्या में एक अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं।
गठिया किसी भी उम्र में हो सकता है। भारत में युवा महिलाओं में रुमेटॉइड आर्थराइटिस की दर बढ़ रही है।
गर्म सिकाई, हल्की मालिश, हल्दी-दूध, अदरक-लहसुन, फाइबर युक्त संतुलित आहार और विटामिन D सप्लीमेंट्स मदद कर सकते हैं।
ठंडी चीजें (जैसे आइसक्रीम, छाछ) से दर्द बढ़ सकता है; गर्म, सूजनरोधी भोजन (हल्दी, अदरक, सूप) लाभकारी है।
प्राकृतिक तरीके जैसे योग, मालिश, ताई ची, हल्दी और अदरक के सेवन से गठिया के दर्द में राहत मिलती है, लेकिन पूरी तरह दर्द खत्म होना व्यक्तिगत रूप से भिन्न हो सकता है।
गठिया में विटामिन D, कैल्शियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन C और मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स लाभकारी हो सकते हैं, जो सूजन कम करने और जोड़ों को मजबूती देने में मदद करते हैं।
गठिया मरीजों को आराम के लिए सही मुद्रा अपनानी चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए, तनाव कम रखना चाहिए और सोते समय जोड़ों को सहारा देने वाले गद्दे का उपयोग करना चाहिए।
Written and Verified by:

Dr. Aashish K. Sharma is the Director of Orthopaedics & Joint Replacement Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with nearly 30 years of experience. He is a leading specialist in joint replacement, arthroscopy and sports medicine, particularly hip & knee surgeries and ACL reconstructions.
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