विश्व गठिया दिवस 2025: गठिया में राहत पाने के लिए खानपान और जीवनशैली सुझाव
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विश्व गठिया दिवस 2025: गठिया में राहत पाने के लिए खानपान और जीवनशैली सुझाव

Orthopaedics & Joint Replacement | by Dr. Aashish K. Sharma on 10/10/2025 | Last Updated : 13/10/2025

Table of Contents

Summary

उम्र बढ़ने, मोटापा, खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता गठिया के जोखिम को बढ़ाते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित आहार, नियमित हल्की कसरत, पर्याप्त नींद, और तनाव कम करना दर्द व सूजन में राहत देता है। इसके अतिरिक्त तली-भुनी और ठंडी चीजें खाने से बचें, और व्यक्तिगत परहेज अपनाएं।

हर सुबह जब आप बिस्तर से उठते हैं और पहला कदम दर्द, सूजन या अकड़न के साथ रखते हैं, तो यह सिर्फ एक शारीरिक तकलीफ नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संघर्ष भी होता है। गठिया से जूझना मतलब हर दिन अपने शरीर से लड़ना, अपनी सीमाओं को पहचानना और फिर भी उम्मीद बनाए रखना। यदि आप भी हर दिन इस दर्द से जूझते हैं और हर बार इस दर्द के लिए एक नया उपचार खोजते हैं, तो सही मायने में यह ब्लॉग आपके लिए है। इस विश्व गठिया दिवस पर यह जानकारी आपकी सेहत के लिए नया रास्ता खोल सकती है। विश्व गठिया दिवस 12 अक्टूबर को आता है और इस दिन को पूरे विश्व में गठिया के संबंध में जानकारी देने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

यदि आपको दर्द ज्यादा है या फिर आपको संदेह है कि आप इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो अभी हमारे गठिया विशेषज्ञों से जुड़ें और पहला कदम राहत की ओर बढ़ाएं।

गठिया क्या है और इसके प्रमुख लक्षण

गठिया (Arthritis) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न होती है। यह एक गंभीर रोग है और ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अनुमानित 180 मिलियन भारतीय गठिया की समस्या का सामना कर रहे हैं। यह 100 से अधिक प्रकारों में पाई जाती है, जिसके प्रमुख रूप हैं: ऑस्टियोआर्थराइटिसरुमेटॉइड आर्थराइटिस,गाउट

  • गठिया रोग की पहचान: इस रोग को पहचानना कोई बड़ा मुश्किल कार्य नहीं है। इसे पहचानने के लिए आपको कुछ लक्षणों की खोज अपने शरीर में करनी होगी जैसे कि - जोड़ो में लगातार दर्द, सुबह या लंबे समय तक बैठने के बाद जकड़न, सूजन, लालिमा, हल्की दरार, गतिशीलता में कमी, बार-बार थकान आना, बुखार या अचानक दर्द विशेषकर पैरों के अंगूठे में।
  • गठिया के लक्षण: गठिया की स्थिति में कुछ सामान्य लक्षणों उत्पन्न हो सकते हैं जैसे कि - जोड़ो में दर्द, सूजन, कठोरता, जोड़ों का गर्म होना, शरीर की चपलता में कमी।

ऑस्टियोआर्थराइटिस vs रूमेटॉयड

ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड आर्थराइटिस दोनों ही जोड़ों को प्रभावित करती हैं, लेकिन इसके कारण, लक्षण और प्रभावित होने वाली आबादी अलग होती है। बुजुर्गों में ऑस्टियोआर्थराइटिस, युवा महिलाओं में रुमेटॉइड आर्थराइटिस तेजी से बढ़ रही है। नीचे दोनों स्थितियों को एक टेबल की मदद से समझाने का प्रयास किया गया है - 

विशेषता

ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA)

रुमेटॉइड आर्थराइटिस (RA)

कारण

बढ़ती उम्र, जोड़ों का घिसना-टूटना, चोट, अधिक वजन

ऑटोइम्यून बीमारी, प्रतिरक्षा प्रणाली का जोड़ों पर हमला

प्रभावित आबादी

मुख्यतः बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष दोनों

अधिकतर 20-40 वर्ष की महिलाएं

प्रभावित जोड़

घुटने, कूल्हे, रीढ़, और हाथ

हाथ-पैर के छोटे जोड़, शरीर के दोनों तरफ एक साथ दर्द होना

लक्षण

जोड़ में दर्द, कठोरता, सूजन, चलने में कठिनाई

जोड़ में दर्द, सुबह की कठोरता, थकान, हल्का बुखार, और सूजन होना।

लक्षणों की शुरुआत

धीरे-धीरे और कई वर्षों में यह समस्या होती है।

अचानक या कुछ हफ्तों में इस समस्या के लक्षण दिखते हैं।

बीमारी का असर

सिर्फ जोड़ों को प्रभावित करते हैं।

पूरे शरीर (सिस्टमेटिक असर)

प्रगति

धीरे-धीरे

तुरंत या उतार-चढ़ाव के साथ

इलाज

जीवन शैली संशोधन, दर्द/सूजन कम करने वाली दवाएं, व्यायाम

इम्यूनो-सप्रेसिव दवाएं, DMARDs, फिजियोथेरेपी

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस मुख्यतः उम्र बढ़ने के साथ आती है, जिसमें हड्डी के जोड़ की उपास्थि (cartilage) घिस जाती है।
  • रुमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही जोड़ की परत पर हमला करती है, जिससे सूजन व दर्द होता है।
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस में अकड़न आमतौर पर जोड़ों के इस्तेमाल के बाद बढ़ती है, जबकि RA में सुबह की कठोरता ज्यादा पाई जाती है।
  • रुमेटॉइड आर्थराइटिस में थकावट, हल्का बुखार और अन्य अंगों पर असर हो सकता है, जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस आमतौर पर सिर्फ जोड़ तक सीमित रहती है।
  • बुजुर्गों में ऑस्टियोआर्थराइटिस और युवा महिलाओं में रुमेटॉइड आर्थराइटिस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

खानपान से गठिया में राहत कैसे पाएं

गठिया में खानपान का सही चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। चलिए सबसे पहले समझते हैं कि गठिया में क्या खाना चाहिए - 

  • ओमेगा-3: इस पोषक तत्व के लिए आप वसायुक्त मछली (सैल्मन, टूना, सार्डिन), अखरोट, अलसी और चिया सीड्स का सेवन कर सकते हैं जो सूजन कम कर सकते हैं।
  • एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य: इसके लिए आप अपने आहार में गाजर, पालक, टमाटर, ब्रोकली, बेरीज, विटामिन C के स्रोत (नींबू, संतरा) को शामिल कर सकते हैं।
  • होल ग्रेन और फाइबर: ब्राउन राइस, ओट्स, दालें और हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें।
  • दूध एवं डेयरी: कैल्शियम और विटामिन D के लिए कम फैट वाला दूध, दही, और पनीर को शामिल करें।
  • मसाले: हल्दी, अदरक, लहसुन एक प्राकृतिक सूजनरोधी तत्व है, जिसे आपको अपने आहार में ज़रूर शामिल करना चाहिए।

चलिए सबसे पहले समझते हैं कि गठिया में क्या नहीं खाना चाहिए - 

  • रेड मीट, तला हुआ खाना, और जंक फूड का सेवन बंद करें क्योंकि इससे शरीर में सूजन बढ़ती है।
  • बहुत ज्यादा नमक और शुगर का सेवन करें। 
  • प्रोसेस्ड फूड, मिठाइयां, कैंडी, और बेक्ड चीजों का सेवन बंद करें।
  • प्यूरीन वाली चीज़ें और बीयर से दूरी बनाएं। फ्राइड चीज़ें, बियर, उड़द दाल, राजमा, आलू, टमाटर, ज्यादा दही भी आपके लिए हानिकारक है।
  • आइसक्रीम, ठंडी छाछ, फ्रिज की चीज़ें आपको परेशान कर सकती हैं। इससे कुछ लोगों में दर्द भी बढ़ सकता है।
  • अधिक मात्रा में ग्लूटेन के सेवन करने से सूजन बढ़ सकती है।

गठिया की स्थिति में परहेज बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। अपनी डाइट डॉक्टर से मिलकर बनाएं या उनसे मिलने के बाद ही बदलें। कई बार टमाटर या आलू से दर्द बढ़ता है तो कुछ को नहीं इसलिए इन उपायों के पालन से पहले एक बार डॉक्टर से ज़रूर मिलना चाहिए।

जीवनशैली और रोजमर्रा की आदतों का प्रभाव

जीवनशैली और रोजमर्रा की आदतें ही हैं, जो आपको गठिया जैसी गंभीर समस्या से बचने में मदद कर सकता है। कुछ आवश्यक उपाय इस प्रकार हैं - 

  • वजन नियंत्रित रखें: वजन घटाने से हड्डियों के जोड़ों पर दबाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है।
  • नींद और आराम: गठिया रोगी को पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) और जोड़ों को आराम देना आवश्यक है।
  • तनाव कम करें: मेडिटेशन, योग, प्राणायाम से मानसिक तनाव घटता है और ऑटोइम्यून गठिया में मदद मिलती है।
  • स्मोकिंग और शराब: यह गठिया में सूजन या दर्द को बढ़ा सकते हैं, इसलिए इससे परहेज करें।

व्यायाम और हल्की शारीरिक गतिविधियां

गठिया के लिए एक्सरसाइज (गठिया में व्यायाम) बहुत ज़रूरी है। आप अपनी जीवनशैली में निम्न व्यायाम के विकल्पों को शामिल कर सकते हैं - 

  • हल्की सैर: रोज़ 15–30 मिनट टहलना जोड़ो की गतिशीलता बढ़ते हैं।
  • जोड़ों का स्ट्रेचिंग: प्रत्येक जोड़ों की रेंज बढ़ाने वाले योगासन जैसे कि वज्रासन, ताड़ासन, और बालासन करना चाहिए।
  • स्विमिंग: बिना दबाव के शरीर की कसरत करते रहें।
  • साइकलिंग व हल्के वर्कआउट्स: शरीर को गतिशील रखने में मदद करते हैं।
  • फिजियोथेरेपी व पेन मैनेजमेंट व्यायाम: डॉक्टर की सलाह से इसे शुरू करें। दर्द बढ़े तो व्यायाम रोक कर डॉक्टर से संपर्क करें और उन्हें अपनी पूरी परिस्थिति को समझाएं।

गठिया से बचाव और दर्द कम करने के आसान उपाय

गठिया से बचाव और दर्द कम करने में निम्न उपाय आपकी मदद कर सकते हैं - 

  • गर्म/ठंडी सिकाई: जोड़ पर हल्की गर्म या ठंडी सिकाई; सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
  • जोड़ों की सुरक्षा: भारी सामान उठाने से बचें और सोने के दौरान पहले कुशन या नी गार्ड का प्रयोग करें।
  • सप्लीमेंट्स/विटामिन्स: डॉक्टर से पूछकर ही विटामिन D, बी-12 और कैल्शियम का सेवन करें।
  • तेल मालिश: सरसों/नारियल तेल से हल्की मालिश त्वचा और जोड़ पर आराम देती है।
  • डॉक्टर की नियमित सलाह: इलाज में देर न करें, समय-समय पर जांच बहुत ज्यादा जरूरी है।

निष्कर्ष

इस गठिया दिवस हमें यह प्रण लेना चाहिए कि हम अच्छी आदतों को अपनाएं और एक स्वस्थ जीवनशैली जीएंगे, जिससे गठिया क्या, हर प्रकार की समस्या से हम दूर रह पाएंगे। इस विश्व गठिया दिवस पर हम आप चाहते हैं कि आप सभी तक एक बात पहुंचे कि आप अपनी हड्डियों का ख्याल रखें और यदि आपकी उम्र ज्यादा है तो समय-समय पर अपनी हड्डियों की जांच कराते रहें। इसके अतिरिक्त नियमित जांच से भी आपको मदद मिल सकती है। हड्डियों की समस्या में एक अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या गठिया केवल बुजुर्गों में होता है या युवा भी प्रभावित हो सकते हैं?

गठिया किसी भी उम्र में हो सकता है। भारत में युवा महिलाओं में रुमेटॉइड आर्थराइटिस की दर बढ़ रही है।

गठिया के दौरान सूजन और जकड़न को कम करने के लिए कौन-से घरेलू उपाय हैं?

गर्म सिकाई, हल्की मालिश, हल्दी-दूध, अदरक-लहसुन, फाइबर युक्त संतुलित आहार और विटामिन D सप्लीमेंट्स मदद कर सकते हैं।

क्या गठिया के मरीजों को ठंडी या गर्म चीजें खाने-पीने से फर्क पड़ता है?

ठंडी चीजें (जैसे आइसक्रीम, छाछ) से दर्द बढ़ सकता है; गर्म, सूजनरोधी भोजन (हल्दी, अदरक, सूप) लाभकारी है।

क्या गठिया का दर्द प्राकृतिक तरीकों से पूरी तरह कम किया जा सकता है?

प्राकृतिक तरीके जैसे योग, मालिश, ताई ची, हल्दी और अदरक के सेवन से गठिया के दर्द में राहत मिलती है, लेकिन पूरी तरह दर्द खत्म होना व्यक्तिगत रूप से भिन्न हो सकता है।

गठिया के मरीजों को कौन-से सप्लीमेंट्स या विटामिन लेना चाहिए?

गठिया में विटामिन D, कैल्शियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन C और मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स लाभकारी हो सकते हैं, जो सूजन कम करने और जोड़ों को मजबूती देने में मदद करते हैं।

गठिया से पीड़ित व्यक्ति को नींद और आराम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

गठिया मरीजों को आराम के लिए सही मुद्रा अपनानी चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए, तनाव कम रखना चाहिए और सोते समय जोड़ों को सहारा देने वाले गद्दे का उपयोग करना चाहिए।

Written and Verified by:

Dr. Aashish K. Sharma

Dr. Aashish K. Sharma

Director Exp: 30 Yr

Ortho & Joint replacement

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Dr. Aashish K. Sharma is the Director of Orthopaedics & Joint Replacement Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with nearly 30 years of experience. He is a leading specialist in joint replacement, arthroscopy and sports medicine, particularly hip & knee surgeries and ACL reconstructions.

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