बवासीर के प्रकार, लक्षण, कारण और प्रभावी उपचार
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बवासीर के प्रकार, लक्षण, कारण और प्रभावी उपचार

Gastro Science | by Dr. B D Soni on 16/01/2025 | Last Updated : 20/08/2026

Summary

बवासीर (पाइल्स) गुदा और मलाशय के आसपास की नसों में सूजन के कारण होने वाली एक बेहद आम समस्या है। भारत में 50 वर्ष से अधिक उम्र के करीब आधे लोगों में इसके लक्षण किसी न किसी समय ज़रूर दिखते हैं। लंबे समय की कब्ज, मल त्याग के दौरान अधिक ज़ोर लगाना, गर्भावस्था और गतिहीन जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं। सही खानपान, जीवनशैली में बदलाव और ज़रूरत पड़ने पर मेडिकल इलाज से बवासीर को पूरी तरह नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है। लक्षण दिखते ही किसी प्रोक्टोलॉजिस्ट या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना सबसे अच्छा कदम है।

वर्तमान में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारी बवासीर है, जो अलग-अलग उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। यदि आप पहले से ही बवासीर से पीड़ित हैं या अपनी समझ को बवासीर के लक्षण के बारे में बढ़ाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। इस लेख में हमने बवासीर के प्रकार, लक्षण, कारण और उपचारों को मुख्य रूप से शामिल करने वाले हैं। यदि आप या आपके परिवार के किसी सदस्य को भी ऐसे ही लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो कृपया हमारे प्रोक्टोलॉजिस्ट विशेषज्ञ से परामर्श लें । 

बवासीर क्या है?

बवासीर, जिसे पाइल्स या हेमोरॉयड्स भी कहा जाता है, गुदा और निचले मलाशय की नसों में सूजन की स्थिति है। यह गुदा के अंदर (आंतरिक) या बाहर (बाहरी) - दोनों जगह हो सकता है और इसकी वजह से दर्द, खुजली, सूजन और मल त्याग के दौरान खून आने जैसी समस्याएं होती हैं।

गुदा क्षेत्र पर बार-बार पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव - जैसे कब्ज के दौरान ज़ोर लगाना - इन नसों में सूजन ला देता है, जिससे गांठ बन जाती है। यह समस्या हल्की और अपने-आप ठीक होने वाली भी हो सकती है, या गंभीर होकर मेडिकल इलाज की मांग कर सकती है।

बवासीर के स्टेज

गंभीरता के आधार पर आंतरिक बवासीर को 4 स्टेज (ग्रेड) में बांटा जाता है:

ग्रेड स्थिति
Grade 1 हल्की सूजन, गुदा के बाहर नहीं आती
Grade 2 मल त्याग के दौरान बाहर आती है, पर अपने-आप वापस चली जाती है
Grade 3 बाहर आने पर हाथ से वापस अंदर करनी पड़ती है
Grade 4 हमेशा बाहर रहती है, वापस अंदर नहीं जाती - इसे अक्सर "बादी बवासीर" भी कहा जाता है

बवासीर के लक्षण

जब आप बवासीर के लक्षणों को पहचान लेते हैं, तो आप इस रोग का इलाज बेहतर तरीके से कर सकते हैं और दर्द और असहजता से दूरी बना सकते हैं। बवासीर की स्थिति में निम्न लक्षण उत्पन्न होते हैं - 

  • दर्द या असहजता: बवासीर दर्द या असहजता का कारण बन सकता है, खासकर अगर वह गुदा के बाहर हो। यह दर्द मल का गुदामार्ग से गुजरते समय या लम्बे समय तक बैठे रहने के दौरान बढ़ सकता है।
  • खुजली: बवासीर गुदा क्षेत्र में खुजली का कारण बन सकता है, जो कि अक्सर स्थायी ही होता है। लेकिन इससे राहत पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
  • खून बहना: मल त्याग करने के दौरान या बाद में खून का बहना। खून टॉयलेट पेपर पर या टॉयलेट सीट पर भी दिखाई दे सकता है।
  • गांठ या सूजन: गुदामार्ग के आसपास एक गांठ या सूजन महसूस हो सकती है। मल त्याग के बाद पेशेंट इसे नोटिस कर सकते हैं। 

कई लोगों को कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या बहुत हल्के लक्षण दिखते हैं, जो कुछ दिनों के बाद गायब भी हो जाते हैं। अन्य लोगों के लिए यह स्थिति अधिक दर्दनाक हो सकती है, इसलिए इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत एक गुदा रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज लें। 

बवासीर के कारण

कई कारणों से बवासीर की समस्या एक व्यक्ति को परेशान कर सकती है। इसके पीछे का मुख्य कारण है, गुदा पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव, जिसकी वजह से सूजन आ जाती है। बवासीर की समस्या निम्न कारणों से एक व्यक्ति को परेशान कर सकती है - 

  • लंबे समय से कब्ज की समस्या होना: लंबे समय से कब्ज की समस्या गुदा क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव बनाता है, जिससे गुदा के आस-पास की नसों में सूजन आ जाती है। आहार में फाइबर के कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है।
  • डायरिया: बार-बार मल त्याग करने से भी बवासीर की समस्या हो सकती है। डायरिया में मल त्याग थोड़ा अलग होता है, जिससे इस समस्या की संभावना अधिक रहती है।
  • शौचालय में अधिक समय तक बैठना: कुछ लोगों को शौच के दौरान फोन चलाने या लंबे समय तक बैठने की आदत होती है। यदि आप भी उन्हीं में से एक है, तो इसके कारण बवासीर की समस्या आपको परेशान कर सकती है। इसके अतिरिक्त मल त्याग के दौरान अधिक जोर लगाना भी बवासीर का मुख्य कारण है। 
  • अस्थायी जीवन शैली: अस्थायी जीवन शैली वाले अधिकतर लोगों को बवासीर की समस्या का सामना करना पड़ता है। यदि आप स्थाई जीवन शैली को अपनाते हैं, तो इससे मोपाटा भी नहीं होता है, जिससे बवासीर की समस्या भी नहीं होती है।
  • गर्भावस्था: प्रेगनेंसी के कारण गुदा क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है, जिससे गुदा के आस-पास की नसें सूज जाती हैं और बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। 

बवासीर के प्रकार

यहां हम बवासीर के प्रकारों के बारे में बात करेंगे। बवासीर को उसकी गंभीरता और अन्य कारकों के आधार पर दो प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। 

वे दो प्रमुख प्रकार हैं - खूनी बवासीर व बादी बवासीर

  1. खूनी बवासीर

ब्लीडिंग या खूनी बवासीर एक गुदा रोग है जो गुदा में मौजूद सूजी हुई नसों के कटने या फटने के कारण उत्पन्न होती है। यदि कोई बवासीर के बाद भी बार-बार मल त्यागने जाता है तो बवासीर की नसें फट जाती हैं। 

खूनी बवासीर में परहेज

खूनी बवासीर में परहेज करना ज़रूरी है। खूनी बवासीर से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां अपनानी चाहिए - 

  • प्रतिदिन पानी पिएं और खुद को हाइड्रेटेड रखें
  • फाइबर युक्त आहार लें
  • मल त्याग करते समय अधिक जोर न लगाएं
  • नियमित व्यायाम करें
  • लंबे समय तक एक ही स्थान पर न बैठे 

खूनी बवासीर का रामबाण इलाज

ब्लीडिंग हेमोरॉयड के उपचार की विधि समस्या की गंभीरता पर निर्भर करती है। हल्के मामलों में, दवाइयों और क्रीम का उपयोग करके सूजन को कम किया जा सकता है। अधिक गंभीर मामलों में सर्जरी के लिए डॉक्टर से परामर्श बहुत ज़रूरी है। 

खूनी बवासीर के उपचार के कुछ विकल्पों में निम्नलिखित शामिल हैं - 

  • सिट्ज़ बाथ: सिट्ज बाथ एक प्रकार का स्नान है, जिसमें आप अपने पेरिनियल क्षेत्र में दर्द
    को कम करने के लिए एक गरम पानी के टब में बैठते हैं। गर्म पानी में गुदा क्षेत्र को भिगोने से एनल स्फिंक्टर की मांसपेशियों को ढीला करने में मदद मिलती है, जो गुदा के ऊतकों में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में मदद करता है। इससे विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के कारण होने वाले दर्द, खुजली और इरिटेशन में आराम भी मिलता है।
  • टॉपिकल क्रीम और दवा: इसमें दवाओं और क्रीम का उपयोग करके सूजन और खुजली को कम करने में भी मदद मिलती है। 
  • हेमोरॉयड बैंडिंग: इसमें सूजन युक्त नसों को बैंड द्वारा बांधा जाता है, जिससे सूजन कम होती है और ब्लीडिंग भी कम होने लगती है। 
  • इंजेक्शन: इसमें एक इंजेक्शन द्वारा सूजन युक्त नसों को इंजेक्ट किया जाता है, जिससे सूजन को कम करने में मदद मिलती है। बवासीर की दवा इलाज में कारगर होता है।
  1. बादी बवासीर

बादी बवासीर एक गंभीर मलाशय संबंधी समस्या होती है, जिसमें मलाशय की नसें सूज जाती हैं और मलाशय से बाहर लटकती हैं। अंग्रेजी में यह "Grade 3 or Grade 4 hemorrhoids" के रूप में भी जानी जाती है।

बादी बवासीर के लक्षण 

बादी बवासीर के लक्षणों में खून आना, खुजली, सूजन और दर्द शामिल है। इसके साथ ही, मल त्याग के समय भी बादी बवासीर के रोगी को बहुत दर्द होता है और मलाशय में खुजली हो सकती है। बादी बवासीर के लक्षणों को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए और समय रहते उपचार की जानकारी के लिए एक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

बवासीर के लिए महत्वपूर्ण उपचार

बवासीर का इलाज स्थिति के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। सामान्य मामलों में उच्च फाइबर आहार लेना, शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखना और नियमित व्यायाम करना जैसी जीवनशैली में परिवर्तन करने से हल किया जा सकता है। खुजली और असहजता जैसे सामान्य लक्षणों का इलाज क्रीम और उबटनों के इस्तेमाल से किया जा सकता है। गंभीर स्थितियों में चिकित्सा उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

कुछ चिकित्सा उपचारों में शामिल हैं - 

  • ओवर-काउंटर दवाएं: हाइड्रोकोर्टिसोन, विच हेजल या लिडोकेन वाली क्रीम, उबटन और सपोजिटरी की ओवर-काउंटर दवाएं, बवासीर के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है।
  • प्रिस्क्रिप्शन दवाएं: अगर ओवर-काउंटर दवाओं से परिणाम नहीं मिलते हैं, तो प्रिस्क्रिप्शन-स्ट्रेंथ क्रीम या सपोजिटरी जैसी दवाओं की सलाह दी जा सकती है।
  • फाइबर सप्लीमेंट: प्सिलियम हस्क जैसे फाइबर सप्लीमेंट मल को मुलायम बनाने और बार-बार मल त्याग करने में कमी करने में मदद कर सकते हैं, जो बवासीर के लक्षणों को दूर कर सकता है।
  • सिट्ज बाथ: सिट्ज बाथ में अंडकोष क्षेत्र को गर्म पानी में 10-15 मिनट के लिए कुछ बार दिन में भिगोना शामिल होता है, जो बवासीर की सूजन को कम करने और इसके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।
  • मिनिमल इनवेसिव तकनीक: यदि बवासीर गंभीर है, तो आपके डॉक्टर रबर बैंड लिगेशन, स्क्लेरोथेरेपी या इन्फ्रारेड कोगुलेशन जैसी मिनिमल इनवेसिव तकनीक की प्रक्रियाओं का सुझाव दे सकते हैं, जो बवासीर को कम करने या हेमोरॉयड्स को हटाने के लिए होते हैं या हेमरॉयडेक्टमी जैसी सर्जरी का भी सुझाव डॉक्टर दे सकते हैं।

बवासीर आज बहुत से लोगों की जिंदगी पर प्रभाव डालते हुए एक सामान्य समस्या बन गई है। हालांकि, सही आहार और जीवनशैली के चुनाव के साथ-साथ उचित उपचार विकल्पों के साथ, इस अनचाहे स्थिति का प्रबंधन करना संभव है और इसे एक अधिक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनने से रोका जा सकता है। बवासीर की गंभीरता और प्रकार अलग-अलग हो सकते है और कुछ मामलों में अधिक उन्नत उपचारों की आवश्यकता हो सकती है।

बवासीर की जांच कैसे होती है?

लक्षणों के आधार पर डॉक्टर आमतौर पर इनमें से एक या अधिक जांच की सलाह देते हैं:

  • डिजिटल रेक्टल एग्ज़ामिनेशन (DRE): डॉक्टर दस्ताने पहने उंगली से गुदा क्षेत्र की जांच करते हैं ताकि गांठ या सूजन का पता चल सके
  • एनोस्कोपी: एक छोटे ट्यूब जैसे उपकरण से गुदा नहर के अंदर की जांच
  • प्रोक्टोस्कोपी/सिग्मॉइडोस्कोपी: मलाशय के अंदरूनी हिस्से को देखने के लिए
  • कोलोनोस्कोपी: अगर लक्षण गंभीर हों या अन्य आंत्र रोग की आशंका हो, तो पूरी बड़ी आंत की जांच के लिए सुझाई जाती है

बार-बार खून आने पर डॉक्टर अन्य गंभीर कारणों (जैसे कोलोरेक्टल समस्याओं) को खारिज करने के लिए भी जांच करवा सकते हैं - इसलिए सिर्फ़ खुद अनुमान लगाकर इलाज शुरू करने की बजाय जांच ज़रूर कराएं।

बवासीर में क्या खाएं और क्या नहीं

  • क्या खाएं: फाइबर से भरपूर फल व सब्ज़ियां (गाजर, सेब, पपीता, अनार, पालक, ब्रोकली), साबुत अनाज, दालें और भरपूर पानी व नारियल पानी।
  • क्या न खाएं: तले हुए, मसालेदार और अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड स्नैक्स, और ऐसा भोजन जो कब्ज बढ़ा सकता हो।

बवासीर से बचाव के उपाय

  • रोज़ाना पर्याप्त पानी पिएं और फाइबर युक्त आहार लें
  • मल त्याग करते समय अधिक ज़ोर न लगाएं
  • शौच के दौरान फ़ोन इस्तेमाल करने या देर तक बैठे रहने से बचें
  • नियमित व्यायाम करें और लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से बचें
  • कब्ज या डायरिया की समस्या को अनदेखा न करें, समय पर इलाज कराएं

डॉक्टर से कब मिलें

अगर आपको मल त्याग के दौरान लगातार खून आ रहा है, दर्द असहनीय है, गांठ बाहर से वापस अंदर नहीं जा रही, या 1-2 हफ्तों के घरेलू उपायों के बाद भी आराम नहीं मिल रहा - तो देरी न करें। लगातार ब्लीडिंग से एनीमिया (खून की कमी) जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। RBH Jaipur के गैस्ट्रो साइंस विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

बवासीर कई कारणों से हो सकता है। कुछ मुख्य कारण में मल त्याग करते समय जोर लगाना, बैठने की लम्बी अवधि, कब्ज या दस्त का अधिक समय तक होना, ओबेसिटी, और गर्भावस्था शामिल है।

Written and Verified by:

Dr. B D Soni

Dr. B D Soni

Consultant Exp: 6 Yr

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Dr. B D Soni is a Consultant in Gastrointestinal Surgery at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 7 years of experience. He specializes in GI oncology, laparoscopic ventral hernia surgery, thoracoscopic esophageal surgery, and pancreaticobiliary procedures.

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