
Seasonal Affective Disorder (SAD) सर्दियों में होने वाला एक तरह का डिप्रेशन है। ऐसा धूप कम मिलने और सर्केडियन रिदम में असंतुलन (Circadian Rhythm Imbalance) या बायोलॉजिकल क्लॉक में बाधा उत्पन्न होने से होता है। इसमें बेवजह उदासी, थकान और बहुत ज्यादा नींद आने जैसे लक्षण दिखते हैं। सही लाइफस्टाइल, लाइट थेरेपी और डॉक्टरी सलाह से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।
सर्दियों का मौसम अपने साथ एक अलग ही सुकून लेकर आता है। सर्दियों का अर्थ है गर्माहट भरी रजाई, अदरक वाली चाय और ठंडी हवाएं। लेकिन, क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे-जैसे दिन छोटे होते हैं और धूप कम पड़ने लगती है, आपके मन में एक अजीब सी उदासी घर करने लगती है? वह मौसम जो कभी अच्छा लगता था, अचानक भारी-भारी सा लगने लगता है और सुबह बिस्तर से उठने की हिम्मत नहीं होती।
अगर आप भी खुद को बिना किसी ठोस वजह के उदास या थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो घबराइए नहीं, आप अकेले नहीं हैं। यह सिर्फ आपके 'मूड स्विंग' या 'आलस' का मामला नहीं है। मेडिकल भाषा में इसे Seasonal Affective Disorder (SAD) या मौसमी डिप्रेशन कहते हैं। हम अक्सर इसे "विंटर ब्लूज़" कहकर टाल देते हैं, लेकिन यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक वास्तविक स्थिति है। इस ब्लॉग में हम बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे कि ठंड में यह उदासी क्यों आती है और आप अपनी खोई हुई ऊर्जा और मुस्कान वापस कैसे पा सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ समझ न आने की स्थिति में डॉक्टरी सलाह लें।
आसान शब्दों में कहें तो SAD एक ऐसा डिप्रेशन है, जो मौसम के कैलेंडर के साथ चलता है। यह आमतौर पर पतझड़ के खत्म होने या सर्दियों की शुरुआत में दस्तक देता है और जैसे ही वसंत ऋतु या पतझड़ की धूप खिलती है, यह अपने आप ठीक होने लगता है। हालांकि कुछ लोगों को यह गर्मियों में भी होता है, लेकिन सर्दियों वाला डिप्रेशन सबसे आम है।
अब सवाल यह है कि ठंड में ही मूड खराब क्यों होता है? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि सीधा-सा विज्ञान है। हमारा शरीर धूप और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलता है। जब यह तालमेल बिगड़ता है, तो दिक्कतें शुरू होती हैं -
कभी-कभी उदास होना सामान्य है, लेकिन अगर यह एक पैटर्न बन जाए, तो सतर्क हो जाएं। SAD के लक्षण सामान्य डिप्रेशन जैसे ही होते हैं, लेकिन ये सिर्फ़ सर्दियों में ज्यादा परेशान करते हैं:
अगर आप इनमें से कई लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह आपकी गलती नहीं है, यह एक मेडिकल कंडीशन है।
SAD की पहचान करना कभी-कभी पेचीदा हो सकता है क्योंकि इसके लक्षण अन्य मानसिक समस्याओं जैसे लगते हैं। एक अनुभवी डॉक्टर या मनोचिकित्सक ही इसकी सही पुष्टि कर सकते हैं। वे मुख्य रूप से ये देखते हैं:
कभी-कभी डॉक्टर ब्लड टेस्ट (जैसे थायराइड या विटामिन डी) भी करा सकते हैं ताकि थकान की दूसरी वजहों को खारिज किया जा सके।
अच्छी खबर यह है कि Seasonal Affective Disorder लाइलाज नहीं है। थोड़ी सी जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव से आप सर्दियों का भी पूरा मजा ले सकते हैं।
सर्दियों का मौसम उदासी का पर्याय नहीं बनना चाहिए। Seasonal Affective Disorder एक वास्तविक समस्या है और इसके लिए मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। अगर आपको या आपके घर में किसी को यह लक्षण दिख रहे हैं और इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो कृपया इसे अनदेखा न करें। सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर (RBH) में हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर्स और मनोवैज्ञानिक आपकी मदद के लिए हमेशा मौजूद हैं। सही गाइडेंस और थोड़ी सी देखभाल से आप इन "सर्द हवाओं" में भी अपनी मुस्कान बरकरार रख सकते हैं। याद रखें, हर लंबी रात के बाद एक चमकदार सुबह जरूर आती है।
हां, SAD का सीधा संबंध मौसम बदलने (खासकर सर्दियों) से है और यह हर साल एक ही समय होता है, जबकि आम डिप्रेशन कभी भी हो सकता है।
बिल्कुल, धूप कम मिलने से हमारे दिमाग में 'हैप्पी हार्मोन' (सेरोटोनिन) कम हो जाता है और बॉडी क्लॉक बिगड़ जाती है, जिससे उदासी बढ़ती है।
जी हां, विटामिन D मूड को ठीक रखने में मदद करता है। इसकी कमी डिप्रेशन के लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है या उन्हें और गंभीर बना सकती है।
यह सुरक्षित है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर सिरदर्द या आंखों में थकान हो सकती है।
हां, SAD की प्रकृति ही ऐसी है कि यह बार-बार लौटता है। अगर इसका सही मैनेजमेंट न किया जाए, तो यह हर सर्दी में परेशान कर सकता है।
Written and Verified by:

Dr. Nishtha Jain is a Consultant Neurologist with over 10 years of experience in managing a wide range of neurological conditions.
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