Seasonal Affective Disorder: ठंड में उदासी क्यों बढ़ जाती है?
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Seasonal Affective Disorder: ठंड में उदासी क्यों बढ़ जाती है?

Neurosciences | by Dr. Nishtha Jain on 26/12/2025 | Last Updated : 30/12/2025

Summary

Seasonal Affective Disorder (SAD) सर्दियों में होने वाला एक तरह का डिप्रेशन है। ऐसा धूप कम मिलने और सर्केडियन रिदम में असंतुलन (Circadian Rhythm Imbalance) या बायोलॉजिकल क्लॉक में बाधा उत्पन्न होने से होता है। इसमें बेवजह उदासी, थकान और बहुत ज्यादा नींद आने जैसे लक्षण दिखते हैं। सही लाइफस्टाइल, लाइट थेरेपी और डॉक्टरी सलाह से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।

 

सर्दियों का मौसम अपने साथ एक अलग ही सुकून लेकर आता है। सर्दियों का अर्थ है गर्माहट भरी रजाई, अदरक वाली चाय और ठंडी हवाएं। लेकिन, क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे-जैसे दिन छोटे होते हैं और धूप कम पड़ने लगती है, आपके मन में एक अजीब सी उदासी घर करने लगती है? वह मौसम जो कभी अच्छा लगता था, अचानक भारी-भारी सा लगने लगता है और सुबह बिस्तर से उठने की हिम्मत नहीं होती। 

अगर आप भी खुद को बिना किसी ठोस वजह के उदास या थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो घबराइए नहीं, आप अकेले नहीं हैं। यह सिर्फ आपके 'मूड स्विंग' या 'आलस' का मामला नहीं है। मेडिकल भाषा में इसे Seasonal Affective Disorder (SAD) या मौसमी डिप्रेशन कहते हैं। हम अक्सर इसे "विंटर ब्लूज़" कहकर टाल देते हैं, लेकिन यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक वास्तविक स्थिति है। इस ब्लॉग में हम बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे कि ठंड में यह उदासी क्यों आती है और आप अपनी खोई हुई ऊर्जा और मुस्कान वापस कैसे पा सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ समझ न आने की स्थिति में डॉक्टरी सलाह लें।

Seasonal Affective Disorder (SAD) आखिर है क्या?

आसान शब्दों में कहें तो SAD एक ऐसा डिप्रेशन है, जो मौसम के कैलेंडर के साथ चलता है। यह आमतौर पर पतझड़ के खत्म होने या सर्दियों की शुरुआत में दस्तक देता है और जैसे ही वसंत ऋतु या पतझड़ की धूप खिलती है, यह अपने आप ठीक होने लगता है। हालांकि कुछ लोगों को यह गर्मियों में भी होता है, लेकिन सर्दियों वाला डिप्रेशन सबसे आम है।

अब सवाल यह है कि ठंड में ही मूड खराब क्यों होता है? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि सीधा-सा विज्ञान है। हमारा शरीर धूप और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलता है। जब यह तालमेल बिगड़ता है, तो दिक्कतें शुरू होती हैं - 

  1. शरीर की बायोलॉजिकल घड़ी का बिगड़ना: हमारे शरीर में सर्केडियन रिदम लगातार बनी रहती है, जो तय करती है कि कब सोना है और कब जागना है। सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होने से इस रिदम ब्लॉकेज आ जाती है, जिससे डिप्रेशन के लक्षण आने लगते हैं।
  2. सेरोटोनिन (Serotonin) की कमी: इसे हम 'हैप्पी केमिकल' भी कह सकते हैं। धूप की कमी से दिमाग में सेरोटोनिन का लेवल गिर जाता है। यही वह केमिकल है जो हमें खुश रखता है। जब यह कम होता है, तो उदासी अपने आप हावी होने लगती है।
  3. मेलाटोनिन (Melatonin) का बढ़ना: यह वह हार्मोन है जो हमें सुलाता है। अंधेरे में शरीर इसे ज्यादा बनाता है। सर्दियों में रोशनी कम होती है, इसलिए शरीर को लगता है कि सोने का समय है। नतीजा? आप दिन भर सुस्ती और नींद महसूस करते हैं।

सर्दियों में SAD के लक्षण: यह सामान्य उदासी से कैसे अलग है और कैसे पहचानें?

कभी-कभी उदास होना सामान्य है, लेकिन अगर यह एक पैटर्न बन जाए, तो सतर्क हो जाएं। SAD के लक्षण सामान्य डिप्रेशन जैसे ही होते हैं, लेकिन ये सिर्फ़ सर्दियों में ज्यादा परेशान करते हैं:

  • लगातार मन भारी रहना: दिन भर उदासी छाई रहना, कभी-कभी बिना बात के रोने का मन करना या खालीपन महसूस होना।
  • ऊर्जा पूरी तरह खत्म होना (Low Energy): पूरी रात सोने के बाद भी थकान न जाना। हाथ-पैर इतने भारी लगना जैसे उनमें जान ही न हो।
  • नींद का पैटर्न बदलना: सर्दियों वाले SAD में इंसान को बहुत ज्यादा नींद आती है। सुबह रजाई से निकलना किसी जंग से कम नहीं लगता।
  • खाने की अजीब तलब (Cravings): मीठा, ब्रेड, पास्ता या भारी खाना खाने का बहुत मन करना। इससे अक्सर सर्दियों में वजन बढ़ जाता है।
  • ध्यान न लगना: काम या पढ़ाई में फोकस करने में दिक्कत होना।
  • लोगों से कट जाना: दोस्तों या परिवार से मिलने का मन न करना और खुद को कमरे में बंद कर लेना।

अगर आप इनमें से कई लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह आपकी गलती नहीं है, यह एक मेडिकल कंडीशन है।

इसकी जांच कैसे होती है?

SAD की पहचान करना कभी-कभी पेचीदा हो सकता है क्योंकि इसके लक्षण अन्य मानसिक समस्याओं जैसे लगते हैं। एक अनुभवी डॉक्टर या मनोचिकित्सक ही इसकी सही पुष्टि कर सकते हैं। वे मुख्य रूप से ये देखते हैं:

  • क्या पिछले दो सालों से आपको ठीक इसी मौसम में ये दिक्कतें हो रही हैं?
  • क्या मौसम बदलते ही आप पूरी तरह ठीक हो जाते हैं?
  • कहीं इसका कारण कोई और तनाव (जैसे नौकरी या निजी समस्या) तो नहीं?

कभी-कभी डॉक्टर ब्लड टेस्ट (जैसे थायराइड या विटामिन डी) भी करा सकते हैं ताकि थकान की दूसरी वजहों को खारिज किया जा सके।

SAD को मैनेज करने के प्रभावी और आसान उपाय

अच्छी खबर यह है कि Seasonal Affective Disorder लाइलाज नहीं है। थोड़ी सी जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव से आप सर्दियों का भी पूरा मजा ले सकते हैं।

  1. धूप से दोस्ती करें (Sunlight): नेचुरल धूप का कोई तोड़ नहीं है। सर्दियों में जब भी मौका मिले, बाहर निकलें।
  2. लाइट थेरेपी (Light Therapy): यह SAD के लिए बहुत असरदार मानी जाती है। इसमें आपको सुबह उठते ही एक खास 'लाइट बॉक्स' के सामने 20-30 मिनट बैठना होता है। यह बॉक्स सूरज जैसी नकली रोशनी देता है, जो दिमाग के केमिकल्स को बैलेंस करने में मदद करती है। (इसे डॉक्टर की सलाह पर ही शुरू करें)।
  3. विटामिन डी (Vitamin D) का ध्यान रखें: सर्दियों में धूप कम मिलने से विटामिन डी घट सकता है, जिसका सीधा असर मूड पर पड़ता है। अपने डॉक्टर से पूछकर सप्लीमेंट्स लें।
  4. शरीर को एक्टिव रखें: हिलने-डुलने का मन नहीं करता, हम जानते हैं। लेकिन कसरत करने से शरीर में 'एंडोर्फिन' निकलते हैं जो नेचुरल पेनकिलर और मूड बूस्टर का काम करते हैं। रोज 30 मिनट की वॉक या योग भी कमाल कर सकता है।
  5. लोगों से मिलें-जुलें: अकेलापन डिप्रेशन को खाद-पानी देता है। रजाई में दुबक कर रहने के बजाय किसी दोस्त को फोन करें या परिवार के साथ बैठें। बातें साझा करने से मन हल्का होता है।
  6. सही खान-पान: अपने आहार में ओमेगा-3 जैसे कि अखरोट, अलसी या मछली, डार्क चॉकलेट और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को जोड़ें। इससे मूड अच्छा रहता है।

निष्कर्ष

सर्दियों का मौसम उदासी का पर्याय नहीं बनना चाहिए। Seasonal Affective Disorder एक वास्तविक समस्या है और इसके लिए मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। अगर आपको या आपके घर में किसी को यह लक्षण दिख रहे हैं और इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो कृपया इसे अनदेखा न करें। सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर (RBH) में हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर्स और मनोवैज्ञानिक आपकी मदद के लिए हमेशा मौजूद हैं। सही गाइडेंस और थोड़ी सी देखभाल से आप इन "सर्द हवाओं" में भी अपनी मुस्कान बरकरार रख सकते हैं। याद रखें, हर लंबी रात के बाद एक चमकदार सुबह जरूर आती है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या Seasonal Affective Disorder और आम डिप्रेशन अलग-अलग हैं?

हां, SAD का सीधा संबंध मौसम बदलने (खासकर सर्दियों) से है और यह हर साल एक ही समय होता है, जबकि आम डिप्रेशन कभी भी हो सकता है।

क्या सच में धूप कम मिलने से मूड खराब होता है?

बिल्कुल, धूप कम मिलने से हमारे दिमाग में 'हैप्पी हार्मोन' (सेरोटोनिन) कम हो जाता है और बॉडी क्लॉक बिगड़ जाती है, जिससे उदासी बढ़ती है।

क्या विटामिन D की कमी से SAD बढ़ सकता है?

जी हां, विटामिन D मूड को ठीक रखने में मदद करता है। इसकी कमी डिप्रेशन के लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है या उन्हें और गंभीर बना सकती है।

क्या मैं घर पर लाइट थेरेपी कर सकता हूँ?

यह सुरक्षित है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर सिरदर्द या आंखों में थकान हो सकती है।

क्या यह हर साल दोबारा हो सकता है?

हां, SAD की प्रकृति ही ऐसी है कि यह बार-बार लौटता है। अगर इसका सही मैनेजमेंट न किया जाए, तो यह हर सर्दी में परेशान कर सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Nishtha Jain

Dr. Nishtha Jain

Consultant Exp: 10 Yr

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Dr. Nishtha Jain is a Consultant Neurologist with over 10 years of experience in managing a wide range of neurological conditions.

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