
प्रेग्नेंसी टेस्ट किट में दो लाइन का दिखना आप यह समझ सकते हैं कि अब एक नई जिंदगी को जन्म देने वाले हैं। लेकिन कई महिलाओं के लिए यह खुशी तब फीकी पड़ने लगती है, जब पेट में हर वक्त अजीब सी हलचल और बेचैनी रहने लगती है। सुबह-सुबह बाथरूम की तरफ भागना, मुंह का स्वाद बिगड़ जाना या अपनी पसंदीदा परफ्यूम की खुशबू से भी चिढ़ होना, यही है मॉर्निंग सिकनेस और इसके लक्षण।
इसे अक्सर प्रेग्नेंसी का एक हिस्सा मानकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन असल में यह आपको थका देने वाली एक रोज की लड़ाई जैसी लग सकती है। कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI), कोलकाता में हम समझते हैं कि भले ही यह "नॉर्मल" हो, लेकिन आपकी तकलीफ बड़ी है। हम यहां सिर्फ "सब ठीक हो जाएगा" कहने के लिए नहीं, बल्कि आपकी इस मुश्किल को कम करने और आपको फिर से बेहतर महसूस कराने में मदद करने के लिए हैं। इसलिए यदि यह समस्या आपको ज्यादा परेशान करने लगे, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें।
मॉर्निंग सिकनेस, जिसे डॉक्टर NVP (Nausea and Vomiting of Pregnancy) कहते हैं, एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रेगनेंसी के दौरान जी मिचलाता है और उल्टियां होती हैं। करीब 80% गर्भवती महिलाएं इसका सामना करती हैं।
नाम भले ही 'मॉर्निंग' सिकनेस हो, लेकिन यह दिन या रात के किसी भी समय हो सकती है। यदि यह इतनी ज्यादा बढ़ जाए कि आप पानी भी न पचा पाएं, तो इसे 'हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम' कहते हैं, जिसमें डॉक्टर की सलाह और इलाज बहुत जरूरी हो जाता है।
आमतौर पर यह प्रेगनेंसी के छठे हफ्ते से शुरू होती है। लेकिन नौवें और बारहवें सप्ताह के बीच यह समस्या सामान्य होने लगती है। हालांकि, 10% महिलाओं को यह आगे भी परेशान कर सकती है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बड़े बदलाव होते हैं, जो इसका मुख्य कारण बनते हैं -
मां के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि "क्या मेरी उल्टियों से बच्चे को नुकसान होगा?" चलिए इस समस्या के जड़ को समझते हैं और इससे आपके बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है।
राहत की बात यह है कि आपका बच्चा सुरक्षित है। भले ही आप ठीक से न खा पा रही हो, बच्चा आपके शरीर में पहले से मौजूद पोषण से अपनी जरूरतें पूरी कर लेता है। रिसर्च कहती है कि हल्की-फुल्की मॉर्निंग सिकनेस से बच्चे के विकास पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
बच्चे के लिए तो यह ठीक है, लेकिन मां के लिए यह काफी थकान भरा हो सकता है। लगातार उल्टी से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है और कई बार कमजोरी की वजह से मानसिक तनाव भी महसूस होता है।
दवाओं से पहले, आप इन आसान लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाकर काफी राहत पा सकती हैं -
अगर आपको यह लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI), कोलकाता के प्रसूति विशेषज्ञ से मिलें और उनसे अपनी स्थिति को समझाएं और इलाज लें -
मॉर्निंग सिकनेस मुश्किल जरूर है, लेकिन यह वक्त भी गुजर जाएगा। अपनी सेहत का ख्याल रखें और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट्स की मदद लेने में न हिचकें।
यह आमतौर पर 6 वें हफ्ते के आसपास शुरू होती है, 9 वें हफ्ते में सबसे ज्यादा होती है, और आमतौर पर 14वें हफ़्ते तक कम हो जाती है। हालांकि, कुछ महिलाओं को दूसरे या तीसरे तिमाही तक भी लक्षण महसूस होते हैं।
नहीं, नाम के बावजूद, यह दिन या रात में किसी भी समय हो सकती है। कई महिलाएं बताती हैं कि शाम को थकान होने पर उन्हें ज़्यादा बुरा लगता है।
कभी-कभी उल्टी होना प्रेगनेंसी का एक सामान्य हिस्सा माना जाता है। हालांकि, यदि आप 24 घंटे तक कोई भी खाना या पानी पेट में नहीं रख पा रही हैं, तो यह ज़्यादा गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
मसालेदार, चिकनाई वाला, फैटी, या बहुत ज़्यादा एसिडिक खाना खाने से बचें। बहुत ज्यादा मीठी चीजें और तेज़ गंध वाली चीज़ें (जैसे प्याज या तली हुई मछली) अक्सर मतली पैदा करती हैं और इससे बचना चाहिए।
ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जो इस संबंध को साबित करता हो। हालांकि कुछ पुरानी कहावतें कहती हैं कि ज़्यादा मतली का मतलब लड़की है, लेकिन मेडिकल स्टडीज़ में बीमारी और लिंग के बीच कोई लगातार संबंध नहीं दिखा है।
यह अलग-अलग होता है। कुछ महिलाओं को बाद की प्रेगनेंसी आसान लगती है, जबकि दूसरी महिलाओं को बड़े बच्चे की देखभाल करने के कारण ज्यादा थकान की वजह से ज़्यादा गंभीर लक्षण महसूस होते हैं। हर प्रेग्नेंसी अनोखी होती है।
Written and Verified by:

Dr. Swarnali Dutta is a Consultant in Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 10 years of experience. She specializes in managing all types of gynaecological and obstetrical disorders, with advanced skills in laparoscopy and robotic surgery.
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