एक्टोपिक प्रेगनेंसी: समय पर पहचान क्यों है ज़रूरी?
Home >Blogs >एक्टोपिक प्रेगनेंसी: समय पर पहचान क्यों है ज़रूरी?

एक्टोपिक प्रेगनेंसी: समय पर पहचान क्यों है ज़रूरी?

Summary

  • मॉर्निंग सिकनेस (NVP) प्रेगनेंसी में होने वाली सामान्य मतली और उल्टी है, जिसका सामना 70%–80% महिलाएं करती है।
  • नाम के विपरीत, यह दिन-रात कभी भी हो सकती है। यह अक्सर गर्भावस्था के 6वें हफ्ते से शुरू होकर 14 वें हफ्ते तक कम हो जाती है।
  • इसका मुख्य कारण hCG और GDF15 जैसे हार्मोन का बढ़ना, धीमा पाचन और सूंघने की शक्ति का तेज होना है।
  • सामान्य मॉर्निंग सिकनेस से बच्चे को कोई खतरा नहीं होता है, वह बस मां के शरीर से जरूरी पोषण ले लेते हैं।
  • राहत के लिए अदरक, विटामिन B6, और थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना सबसे असरदार है।
  • सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले सादा बिस्किट या टोस्ट खाने से ब्लड शुगर स्थिर रहता है और मतली कम होती है।
  • जब उल्टी बहुत ज्यादा हो और पानी भी न पचे, तो इसे 'हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम' कहते हैं, जिसमें डॉक्टरी इलाज जरूरी है।
  • 24 घंटे तक कुछ न पचना, 2 किलो से ज्यादा वजन घटना या पेशाब कम आना खतरे के संकेत हैं।

प्रेग्नेंसी टेस्ट किट में दो लाइन का दिखना आप यह समझ सकते हैं कि अब एक नई जिंदगी को जन्म देने वाले हैं। लेकिन कई महिलाओं के लिए यह खुशी तब फीकी पड़ने लगती है, जब पेट में हर वक्त अजीब सी हलचल और बेचैनी रहने लगती है। सुबह-सुबह बाथरूम की तरफ भागना, मुंह का स्वाद बिगड़ जाना या अपनी पसंदीदा परफ्यूम की खुशबू से भी चिढ़ होना, यही है मॉर्निंग सिकनेस और इसके लक्षण।

इसे अक्सर प्रेग्नेंसी का एक हिस्सा मानकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन असल में यह आपको थका देने वाली एक रोज की लड़ाई जैसी लग सकती है। कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI), कोलकाता में हम समझते हैं कि भले ही यह "नॉर्मल" हो, लेकिन आपकी तकलीफ बड़ी है। हम यहां सिर्फ "सब ठीक हो जाएगा" कहने के लिए नहीं, बल्कि आपकी इस मुश्किल को कम करने और आपको फिर से बेहतर महसूस कराने में मदद करने के लिए हैं। इसलिए यदि यह समस्या आपको ज्यादा परेशान करने लगे, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें। 

क्या है मॉर्निंग सिकनेस और यह कब शुरू होती है?

मॉर्निंग सिकनेस, जिसे डॉक्टर NVP (Nausea and Vomiting of Pregnancy) कहते हैं, एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रेगनेंसी के दौरान जी मिचलाता है और उल्टियां होती हैं। करीब 80% गर्भवती महिलाएं इसका सामना करती हैं।

नाम भले ही 'मॉर्निंग' सिकनेस हो, लेकिन यह दिन या रात के किसी भी समय हो सकती है। यदि यह इतनी ज्यादा बढ़ जाए कि आप पानी भी न पचा पाएं, तो इसे 'हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम' कहते हैं, जिसमें डॉक्टर की सलाह और इलाज बहुत जरूरी हो जाता है।

आमतौर पर यह प्रेगनेंसी के छठे हफ्ते से शुरू होती है। लेकिन नौवें और बारहवें सप्ताह के बीच यह समस्या सामान्य होने लगती है। हालांकि, 10% महिलाओं को यह आगे भी परेशान कर सकती है।

आखिर ऐसा होता क्यों है? इसके पीछे का विज्ञान

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बड़े बदलाव होते हैं, जो इसका मुख्य कारण बनते हैं - 

  • हार्मोन में बदलाव: शुरुआती दिनों में hCG हार्मोन बहुत तेजी से बढ़ता है, जो जी मिचलाने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
  • धीमा पाचन: हार्मोनल बदलावों की वजह से पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है, जिससे पेट में भारीपन और एसिडिटी महसूस होती है।
  • तेज सूंघने की शक्ति: इस दौरान आपकी नाक बहुत संवेदनशील हो जाती है। खाने या साबुन की हल्की सी महक भी उल्टी की वजह बन सकती है।
  • शुगर लेवल गिरना: मेटाबॉलिज्म बदलने से ब्लड शुगर कम हो सकता है, जिससे चक्कर और कमजोरी महसूस होती है।

क्या इससे बच्चे को खतरा है?

मां के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि "क्या मेरी उल्टियों से बच्चे को नुकसान होगा?" चलिए इस समस्या के जड़ को समझते हैं और इससे आपके बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है। 

राहत की बात यह है कि आपका बच्चा सुरक्षित है। भले ही आप ठीक से न खा पा रही हो, बच्चा आपके शरीर में पहले से मौजूद पोषण से अपनी जरूरतें पूरी कर लेता है। रिसर्च कहती है कि हल्की-फुल्की मॉर्निंग सिकनेस से बच्चे के विकास पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

बच्चे के लिए तो यह ठीक है, लेकिन मां के लिए यह काफी थकान भरा हो सकता है। लगातार उल्टी से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है और कई बार कमजोरी की वजह से मानसिक तनाव भी महसूस होता है।

मॉर्निंग सिकनेस से बचने के आसान घरेलू उपाय

दवाओं से पहले, आप इन आसान लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाकर काफी राहत पा सकती हैं - 

  • थोड़ा-थोड़ा खाएं: एक बार में पेट भरकर खाने के बजाय, दिन में 5-6 बार छोटा-छोटा मील लें। खाली पेट रहने से मतली ज्यादा हो सकती है।
  • बिस्तर छोड़ने से पहले बिस्किट: सुबह उठते ही सबसे पहले सादे बिस्किट या टोस्ट का एक टुकड़ा खाएं। इससे खाली पेट एसिड नहीं बनेगा।
  • अदरक: अदरक मतली को रोकने में बहुत कारगर है। आप अदरक की चाय या अदरक के टुकड़े का सेवन कर सकते हैं। 
  • पानी पीने का सही तरीका: खाना खाते समय पानी न पिएं। खाने के आधे घंटे पहले या बाद में घूँट-घूँट करके पानी पिएं।
  • विटामिन B6: केला और चने जैसे विटामिन B6 वाले फूड्स मतली कम करने में मदद करते हैं।
  • ताजी खुशबू का साथ: अपने पास नींबू या पुदीने का तेल रखें। जब भी जी मिचलाए, इसे सूंघने से तुरंत आराम मिलता है। हो सकता है कि यह इतना प्रभावी न हो, लेकिन कई लोगों को इससे फायदा मिला है।
  • प्रोटीन डाइट: रात को सोने से पहले थोड़ा पनीर या मुट्ठी भर बादाम खाएं। इससे सुबह शुगर लेवल कम नहीं होगा।
  • ढीले और आरामदायक कपड़े: कमर पर तंग कपड़े पहनने से पेट पर दबाव पड़ता है, जिससे मतली बढ़ सकती है। हमेशा ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • उचित आराम: बहुत ज्यादा थकान भी मतली का कारण बनती है। दिन में छोटी झपकी लें और रात को पूरी नींद लेने की कोशिश करें।
  • ताजी हवा: बंद कमरों में घुटन महसूस हो सकती है। खिड़कियां खुली रखें या कुछ देर खुली हवा में टहलें, इससे दिमाग और पेट दोनों को राहत मिलती है।
  • ठंडा खाना आज़माएं: गरम खाने से अक्सर तेज महक आती है जो जी मिचला सकती है। इसकी जगह सैंडविच, सलाद या फल जैसे ठंडे खाद्य पदार्थ खाना आसान होता है।
  • मुंह की सफाई: उल्टी या कड़वे स्वाद के बाद तुरंत कुल्ला करें या ब्रश करें। पुदीने वाले टूथपेस्ट से मुंह का स्वाद सुधरता है और दोबारा मतली होने का डर कम होता है।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

अगर आपको यह लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI), कोलकाता के प्रसूति विशेषज्ञ से मिलें और उनसे अपनी स्थिति को समझाएं और इलाज लें - 

  • यदि आप 24 घंटे से कुछ भी खा-पी नहीं पा रही हैं।
  • यदि वजन लगातार गिर रहा हो।
  • यदि पेशाब बहुत कम आ रहा हो या उसका रंग गहरा हो।
  • यदि बहुत ज्यादा चक्कर आएं या आप बेहोश महसूस करें।

मॉर्निंग सिकनेस मुश्किल जरूर है, लेकिन यह वक्त भी गुजर जाएगा। अपनी सेहत का ख्याल रखें और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट्स की मदद लेने में न हिचकें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

मॉर्निंग सिकनेस कितने हफ्ते तक रहती है? 

यह आमतौर पर 6 वें हफ्ते के आसपास शुरू होती है, 9 वें हफ्ते में सबसे ज्यादा होती है, और आमतौर पर 14वें हफ़्ते तक कम हो जाती है। हालांकि, कुछ महिलाओं को दूसरे या तीसरे तिमाही तक भी लक्षण महसूस होते हैं।

क्या मॉर्निंग सिकनेस सिर्फ सुबह ही होती है? 

नहीं, नाम के बावजूद, यह दिन या रात में किसी भी समय हो सकती है। कई महिलाएं बताती हैं कि शाम को थकान होने पर उन्हें ज़्यादा बुरा लगता है।

क्या मॉर्निंग सिकनेस के दौरान उल्टी होना सामान्य है या नहीं? 

कभी-कभी उल्टी होना प्रेगनेंसी का एक सामान्य हिस्सा माना जाता है। हालांकि, यदि आप 24 घंटे तक कोई भी खाना या पानी पेट में नहीं रख पा रही हैं, तो यह ज़्यादा गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।

मॉर्निंग सिकनेस के दौरान किन चीज़ों से बचना चाहिए? 

मसालेदार, चिकनाई वाला, फैटी, या बहुत ज़्यादा एसिडिक खाना खाने से बचें। बहुत ज्यादा मीठी चीजें और तेज़ गंध वाली चीज़ें (जैसे प्याज या तली हुई मछली) अक्सर मतली पैदा करती हैं और इससे बचना चाहिए।

क्या मॉर्निंग सिकनेस बच्चे के लिंग से जुड़ी है? 

ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जो इस संबंध को साबित करता हो। हालांकि कुछ पुरानी कहावतें कहती हैं कि ज़्यादा मतली का मतलब लड़की है, लेकिन मेडिकल स्टडीज़ में बीमारी और लिंग के बीच कोई लगातार संबंध नहीं दिखा है।

क्या दूसरी प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस ज़्यादा या कम गंभीर होती है? 

यह अलग-अलग होता है। कुछ महिलाओं को बाद की प्रेगनेंसी आसान लगती है, जबकि दूसरी महिलाओं को बड़े बच्चे की देखभाल करने के कारण ज्यादा थकान की वजह से ज़्यादा गंभीर लक्षण महसूस होते हैं। हर प्रेग्नेंसी अनोखी होती है।

Written and Verified by:

Dr. Swarnali Dutta

Dr. Swarnali Dutta

Consultant – Gynaecology Exp: 16 Yr

Obstetrics and Gynaecology

Book an Appointment

Dr. Swarnali Dutta is a Consultant in Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 10 years of experience. She specializes in managing all types of gynaecological and obstetrical disorders, with advanced skills in laparoscopy and robotic surgery.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

Obstetrics and Gynaecology Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now