
ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर्स से अक्सर बच्चे यह बहाना मारते हैं कि 'सर/मैडम, यह अभी याद था, लेकिन अब भूल गया। पहले लोग इसे बहाना ही मानते थे, लेकिन जब आप धीरे-धीरे बड़े होते हैं और कुछ भी याद रखने में समस्या हो, या फिर आप कोई चीज भूल जाएं, तो ये कोई सामान्य बात नहीं होती है। लेकिन जब यही भूलना, यही मानसिक खालीपन और यही धीमापन रोज की जिंदगी का हिस्सा बन जाए, तो यह ब्रेन फॉग (Brain Fog) का संकेत हो सकता है।
भारत में बढ़ती स्क्रीन-लाइफ, काम का दबाव, नींद से समझौता और खान-पान की अनदेखी ने ब्रेन फॉग को एक नई "शहरी बीमारी" की तरह आम बना दिया है। खासकर 20 से 40 साल की उम्र के लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
अगर आप भी इनमें से कोई तकलीफ महसूस कर रहे हैं, तो सीके बिरला अस्पताल, जयपुर RBH के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों से आज ही परामर्श लें। सही दिशा में एक कदम आपके दिमाग को वापस उसकी पुरानी रफ्तार पर ला सकता है।
ब्रेन फॉग कोई मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है। यह कई लक्षणों का एक समूह है, जो आपकी संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Ability) यानी सोचने, समझने, याद करने और ध्यान लगाने की शक्ति को प्रभावित करता है।
चलिए इसे सरल भाषा में समझते हैं। एक कमरे में खिड़कियां बंद हों, रोशनी कम हो और हवा रुकी हुई हो, तो उस कमरे में बैठकर ठीक से काम कर पाना मुश्किल हो जाएगा। ब्रेन फॉग में आपका दिमाग ठीक उसी बंद कमरे जैसा महसूस करता है, जहां सब कुछ है, लेकिन कुछ काम का नहीं लग रहा।
कई प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों के अनुसार ब्रेन फॉग एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को रोजमर्रा के काम जैसे कि बातचीत, निर्देश समझना या किसी काम के चरण याद रखना भी मुश्किल लगने लगता है।
जो लोग इससे गुजरते हैं, वे अक्सर निम्न बातें कहते हैं -
यह एहसास परेशान करने वाला है और सबसे दुखद बात यह है कि इसे अक्सर "आलस" या "मूड खराब होना" कहकर टाल दिया जाता है, जबकि यह एक असली समस्या है जिसे ध्यान और इलाज की जरूरत है।
ब्रेन फॉग के लक्षण बड़े नाटकीय नहीं होते; वे धीरे-धीरे जीवन में घुसते हैं। इसलिए इन्हें पहचानना जरूरी है -
अगर इनमें से पांच या उससे ज्यादा लक्षण दो हफ्ते से लगातार हैं, तो यह जरूरी है कि आप किसी विशेषज्ञ से एक बार बात करें।
ब्रेन फॉग का कोई एक कारण नहीं होता। यह कई परिस्थितियों और स्वास्थ्य स्थितियों का संयुक्त नतीजा होता है -
ब्रेन फॉग ट्रीटमेंट का पहला और सबसे जरूरी कदम कारण ढूंढना है। बिना कारण जाने इलाज करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है।
एक अच्छा न्यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन (General Physician) सबसे पहले आपकी जीवनशैली, नींद की आदतें, खान-पान और मानसिक स्थिति के बारे में पूछेगा। जरूरत के मुताबिक ये जांचें हो सकती हैं -
इसके बाद इलाज की तरफ अग्रसर होना होता है। अगर पोषण की कमी है, तो सप्लीमेंट्स और डाइट में बदलाव बड़ा फर्क लाते हैं। थायराइड की गड़बड़ी हो तो दवाएं दी जाती हैं। डिप्रेशन या एंग्जाइटी हो तो थेरेपी (Therapy) और जरूरत पर दवाएं काम आती हैं। नींद की समस्या हो तो स्लीप थेरेपी और जीवनशैली के बदलाव की सलाह मिलती है। कोविड के कारण ब्रेन फॉग हो तो रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम की जरूरत पड़ सकती है।
ब्रेन फॉग कैसे ठीक करें, इसका जवाब अक्सर हमारी रोज की आदतों में छुपा होता है। यहां कुछ ऐसे कदम हैं, जो सच में फर्क डालते हैं -
ब्रेन फॉग एक ऐसी चुप्पी की समस्या की तरह है, जिसे न हम खुद मानते हैं, न दूसरों को बताते हैं। लेकिन जब यह दिनचर्या का हिस्सा बन जाए और आपकी कार्यक्षमता, रिश्ते और आत्मविश्वास पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
सही जानकारी, थोड़ी जागरूकता और जरूरत पड़ने पर सही इलाज से ब्रेन फॉग से पूरी तरह बाहर निकला जा सकता है। अपनी नींद, खानपान और मानसिक सेहत का ख्याल रखना किसी और के लिए नहीं, अपने लिए करें।
अगर लक्षण बने रहें या गंभीर लगें, तो सीके बिरला अस्पताल, RBH के विशेषज्ञों से मिलें। एक बातचीत से फर्क पड़ता है।
बिल्कुल, ब्रेन फॉग में ध्यान लगाना, नई चीजें सीखना और निर्णय लेना मुश्किल हो जाते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रोफेशनल्स की प्रोडक्टिविटी दोनों प्रभावित होती हैं। समय पर पहचान और इलाज से यह सुधरता है।
हां, विटामिन B12 और विटामिन D की कमी दिमाग की नसों और मूड दोनों को प्रभावित करती है। इससे भूलना, थकान और ध्यान की कमी जैसे लक्षण आते हैं। साधारण ब्लड टेस्ट से इसकी पहचान होती है।
हां, गहरा संबंध है। डिप्रेशन में दिमाग की कार्यक्षमता कम होती है, जो ब्रेन फॉग जैसे लक्षण देती है। दोनों मिलकर एक-दूसरे को और गंभीर बनाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है।
जरूर, घंटों स्क्रीन पर रहना दिमाग को लगातार उत्तेजित रखता है, नींद की गुणवत्ता खराब होती है और एकाग्रता टूटती है। यह सब ब्रेन फॉग की जड़ें मजबूत करता है।
हां, बढ़ता स्क्रीन टाइम, परीक्षा का दबाव, अनियमित नींद और जंक फूड की आदत से बच्चों और किशोरों में ब्रेन फॉग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
अखरोट, अलसी, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, दही, हल्दी वाला दूध और पर्याप्त पानी दिमाग के लिए बेहतरीन है। प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी और मैदा से परहेज करें।
नहीं, ज्यादातर मामलों में यह इलाज योग्य है। सही कारण पहचानकर, जीवन शैली सुधारकर और जरूरत पर इलाज लेकर लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Nishtha Jain is a Consultant Neurologist with over 10 years of experience in managing a wide range of neurological conditions.
Similar Neurosciences Blogs
Book Your Appointment TODAY
© 2024 RBH Jaipur. All Rights Reserved.