
कभी सोचा है कि वो सीढ़ियां, जिन्हें आप पहले दौड़कर चढ़ जाते थे, अब अचानक 'पहाड़' जैसी क्यों लगने लगी हैं? या शाम की वो वॉक अब 'रिलैक्सेशन' के बजाय एक भारी काम (duty) क्यों बन गई है? अगर जवाब 'हाँ' है, तो ये सिर्फ उम्र का असर नहीं, आपके जोड़ों का एक अलर्ट सिग्नल है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस केवल हड्डियों की रगड़ नहीं है; यह आपकी जीवनशैली, आपकी स्वतंत्रता और आपके अपनों के साथ बिताए जाने वाले उन अनमोल पलों पर एक अदृश्य बेड़ी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सही जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय आपको इस दर्द के चक्रव्यूह से बाहर निकाल सकता है? यदि आप या आपका कोई प्रियजन इस दर्द से जूझ रहा है, तोहमारे विशेषज्ञ आपके इस सफर को आसान बनाने के लिए तैयार हैं। इस स्थिति में परामर्श बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अक्सर हमसे पूछा जाता है कि ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है? चलिए इसे सरल भाषा में 'जोड़ों का घिसना' कहा जा सकता है। हमारे जोड़ों के सिरों पर एक चिकना और लचीला ऊतक होता है, जिसे 'कार्टिलेज' कहते हैं। यह कार्टिलेज एक शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है, जो हड्डियों को आपस में टकराने से रोकता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस को समझने के लिए कल्पना करें कि एक मशीन के दो पुर्जों के बीच का ग्रीस खत्म हो गया है। इसे और भी आसानी से समझते हैं। जैसे पुरानी साइकिल की चेन सूखने पर आवाज करने लगती है, ठीक वैसे ही हमारे कार्टिलेज के घिसने पर हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं। इससे दर्द, सूजन और जोड़ों को हिलाने-डुलाने में कठिनाई होती है। यह दुनिया भर में जोड़ों की बीमारी का सबसे सामान्य रूप है। एक बड़े मीडिया प्रकाशन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, 1990 से 2020 के बीच वैश्विक स्तर पर ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामलों में लगभग 132% की वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि यह समस्या कितनी तेजी से पैर पसार रही है। यह आंकड़े बताते हैं कि हमें सही जानकारी और उत्तम इलाज की आवश्यकता क्यों है।
हर दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस नहीं होता, लेकिन हर दर्द को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। एक लंबी पैदल यात्रा के बाद घुटनों में होने वाला हल्का दर्द 'सामान्य थकान' हो सकता है, जो आराम करने से ठीक हो जाता है। लेकिन समस्या तब गंभीर हो जाती है जब -
यदि आप इन स्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि यह सामान्य थकान नहीं बल्कि ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण हैं। भारत में विशेष रूप से महिलाओं में, 50 वर्ष की आयु के बाद इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन आजकल खराब जीवनशैली के कारण युवाओं में भी इसके शुरुआती संकेत देखे जा रहे हैं।
शरीर हमेशा बड़े नुकसान से पहले छोटे संकेत देता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण (Osteoarthritis Symptoms) को पहचानना बचाव की पहली सीढ़ी है:
इन लक्षणों को अक्सर लोग "उम्र का तकाज़ा" कहकर टाल देते हैं, जो बाद में गंभीर विकलांगता का कारण बन सकता है। इसलिए लक्षणों के महसूस होते ही बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लें।
यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ कारक इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं जैसे कि -
आज के आधुनिक युग में ऑस्टियोआर्थराइटिस उपचार (Osteoarthritis Treatment) के कई विकल्प मौजूद हैं। इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द को कम करना और जोड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखना है। इसलिए इलाज के विकल्पों में निम्न विकल्प शामिल हैं -
जोड़ों का दर्द सिर्फ आपकी चाल नहीं रोकता, बल्कि वो आपकी मुस्कान और पोते-पोतियों के साथ खेलने की खुशी भी छीन लेता है। घुटने टेकने के बजाय, सही इलाज को अपनाएं। आखिर, आप दर्द सहने के लिए तो नहीं बने हैं! सही समय पर पहचाने गए ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण और सही ऑस्टियोआर्थराइटिस ट्रीटमेंट आपको फिर से सक्रिय बना सकते हैं। अपनी हड्डियों की सेहत को प्राथमिकता दें और आज ही हमारे अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।
सामान्य दर्द अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव या अधिक काम के कारण होता है और आराम से ठीक हो जाता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस एक क्रोनिक स्थिति है, जहां जोड़ों का कार्टिलेज घिस जाता है और दर्द लंबे समय तक बना रहता है।
हां, घुटनों में सूजन, विशेष रूप से गतिविधि के बाद या सुबह के समय, ऑस्टियोआर्थराइटिस का एक प्रमुख लक्षण है। यह जोड़ के अंदर तरल पदार्थ बढ़ने या कार्टिलेज के घिसने के कारण होने वाली जलन से होता है।
फिलहाल इसे पूरी तरह से "रिवर्स" करने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। सही जीवन शैली, फिजियोथेरेपी और आधुनिक उपचारों से आप दर्द-मुक्त जीवन जी सकते हैं।
जी हां, बिल्कुल। अतिरिक्त वजन जोड़ों, विशेषकर घुटनों और कूल्हों पर अधिक दबाव डालता है। केवल 5% वजन कम करने से भी जोड़ों के दर्द और कार्यक्षमता में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है।
कम प्रभाव वाले व्यायाम (Low-impact exercises) जैसे स्विमिंग, साइकिल चलाना और वॉकिंग सबसे अच्छे विकल्प हैं। इसके अतिरिक्त, जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले स्ट्रेंथ ट्रेनिंग व्यायाम भी बहुत मददगार होते हैं।
यह उम्र बढ़ने के साथ अधिक आम है, लेकिन यह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। चोट, मोटापा या आनुवंशिक कारणों से यह 30 या 40 की उम्र के लोगों में भी हो सकता है।
हाँ, कम तापमान जोड़ों के आसपास के ऊतकों या टिश्यू को सिकोड़ सकता है और तंत्रिकाओं की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है, जिससे दर्द और जकड़न का अनुभव अधिक होता है।
आधुनिक तकनीकों के साथ, मरीज अक्सर सर्जरी के 24 घंटे के भीतर चलने लगते हैं। पूर्ण रिकवरी में आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह का समय लगता है।
Written and Verified by:

Dr. Hitesh Joshi is a Consultant Orthopaedic & Joint Replacement Surgeon at CK Birla Hospital, Jaipur with over 6 years of post-PG experience. He specializes in trauma surgery, arthroscopy, and joint replacement.
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