
सीढ़ियां चढ़ते समय दर्द, सुबह की जकड़न और दवाओं का बेअसर होना घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) के आम लक्षण हैं। ऐसे में डॉक्टर कई बार हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन (विस्कोसप्लिमेंटेशन) की सलाह देते हैं। आपने भी कभी न कभी इस शब्द के बारे में सुना ही होगा।
यह इंजेक्शन कुछ मरीजों को कुछ हफ्तों या महीनों के लिए दर्द और जकड़न से राहत दे सकता है। हालांकि, यह घिसी हुई कार्टिलेज को वापस नहीं बनाता और हर किसी पर समान रूप से प्रभावी नहीं होता। इसलिए, यह उपचार आपके लिए सही है या नहीं, इसका फैसला ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की जाँच और सलाह के बाद ही करें। चलिए समझते हैं कि हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन क्या है और क्या ये आपके लिए है।
भारत में 60 साल से ऊपर के लोगों पर हुए रिसर्च के एक मेटा-विश्लेषण में घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस का औसत प्रसार लगभग 20% पाया गया। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2019 के भारतीय विश्लेषण के अनुसार देश में ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीज 1990 के करीब 2.35 करोड़ से बढ़कर 2019 में लगभग 6.2 करोड़ हो गए, और घुटना इसका सबसे आम शिकार रहा। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से ज़्यादा दर्ज की गई है।
हायलूरोनिक एसिड (HA) हमारे शरीर में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक पदार्थ है। घुटने के जोड़ में भरा synovial fluid इसी की वजह से गाढ़ा और चिकना रहता है। यह दरवाजे के कब्जे में लगे तेल की तरह हड्डियों को आपस में रगड़ने से बचाता है और झटके को सोखता है।
उम्र बढ़ने और ऑस्टियोआर्थराइटिस में यह द्रव पतला पड़ जाता है। इंजेक्शन से जोड़ में शुद्ध HA पहुंचाया जाता है, ताकि द्रव कुछ समय के लिए गाढ़ा हो, चलने में रगड़ कम लगे और सूजन थोड़ी शांत हो। यही वजह है कि लोग इसे घुटने में चिकनाई बढ़ाने वाला इंजेक्शन कहते हैं।
एक बात ध्यान रखने की है: यह तरीका लक्षणों को सँभालता है, घिसी कार्टिलेज को दोबारा नहीं बनाता।
आमतौर पर डॉक्टर इस पर तब विचार करते हैं जब -
यानी यह पहला कदम नहीं, बल्कि बुनियादी उपायों के बाद का विकल्प है।
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स्थिति |
क्या संभावना है |
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हल्के से मध्यम घुटने का गठिया |
राहत की संभावना अपेक्षाकृत बेहतर |
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बहुत एडवांस गठिया ("हड्डी पर हड्डी") |
एडवांस गठिया में यह इंजेक्शन अप्रभावी माना जाता है, अक्सर सर्जरी पर चर्चा होती है |
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अत्यधिक वजन या 65 से ऊपर उम्र |
कुछ रिसर्च में असर कम दिखा है क्योंकि इस स्थिति में कार्टिलेज अधिक घिसता है। |
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घुटने या आसपास की त्वचा में संक्रमण |
इंजेक्शन नहीं लगाया जाता |
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इंजेक्शन के किसी तत्व से एलर्जी |
नहीं लगाया जाता |
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खून पतला करने की दवा या ब्लीडिंग की समस्या |
डॉक्टर से पहले बताना ज़रूरी, सावधानी चाहिए |
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लिगामेंट या मेनिस्कस की चोट, गाउट, हिप या कमर से आने वाला दर्द |
कारण अलग है, इंजेक्शन सही इलाज नहीं हो सकता |
एक व्यावहारिक बात: कुछ HA उत्पाद मुर्गे के कलगी (cockscomb) से बनते हैं और कुछ प्रयोगशाला में। अगर आपकी आहार संबंधी या एलर्जी संबंधी चिंता है, तो उत्पाद के बारे में डॉक्टर से पहले पूछ लें।
घुटने में हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन के फायदे हर मरीज़ में एक जैसे नहीं होते, लेकिन जिन्हें असर मिलता है, उन्हें आम तौर पर ये लाभ दिखते हैं -
घुटने के दर्द का इलाज हमेशा एक ही चीज पर नहीं टिकता। इंजेक्शन से पहले और साथ में ये उपाय ज़्यादा मज़बूत आधार रखते हैं -

यह प्रक्रिया आम तौर पर OPD में हो जाती है।
असर कब दिखता है? राहत अक्सर कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे आती है, तुरंत नहीं। जिन्हें फायदा होता है, उनमें यह आम तौर पर लगभग छह महीने तक रह सकता है। अवधि हर व्यक्ति में अलग होती है। इसके साथ-साथ ये याद रखें कि ये इंजेक्शन घुटने में दर्द का इलाज नहीं है। ये बस लक्षणों को मैनेज करने का एक सुरक्षित तरीका है।
संभावित साइड इफेक्ट
घुटने में तेज बढ़ता दर्द, लाली, बहुत गर्माहट, बुखार या सूजन 2-3 दिन में कम होने के बजाय बढ़ती जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

पहले कुछ दिन जोड़ को आराम देना चाहिए, पर बिस्तर पर पड़े रहना भी ज़रूरी नहीं है।
पहले 48 घंटों के दौरान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें -
उसके बाद, डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की अनुमति से इन कार्यों को करें -
हल्की, नियमित गतिविधि इंजेक्शन के असर को सहारा देती है। वजन को नियंत्रण में रखना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।
इन स्थितियों में जांच टालनी नहीं चाहिए -
सही इलाज तय करने के लिए पहले यह समझना ज़रूरी है कि दर्द का कारण गठिया ही है या कुछ और। सीके बिरला अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ जांच और एक्स-रे के आधार पर बता सकते हैं कि आपके लिए इंजेक्शन, फिजियोथेरेपी या कोई और विकल्प बेहतर रहेगा। जोड़ बदलवाने से जुड़ी जानकारी के लिए नी रिप्लेसमेंट सर्जन से मिलना आपके लिए एक बेहतर विकल्प होगा।
हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक सीमित, पर कुछ मरीज़ों के लिए काम का विकल्प है। यह सबसे पहले आज़माने वाला इलाज नहीं है और न ही गठिया की जड़ को ठीक करता है। वजन, व्यायाम और सही निदान इसकी बुनियाद हैं। अगर घुटने का दर्द आपकी रोज की ज़िंदगी में दखल दे रहा है, तो अपने विशेषज्ञ से मिलकर तय करें कि यह आपके लिए ठीक है या नहीं।
आम तौर पर राहत कुछ हफ्तों में शुरू होती है और लगभग तीन से छह महीने तक, कभी-कभी उससे ज़्यादा भी रह सकती है। अवधि मरीज़ के गठिया की स्थिति, वज़न और गतिविधि पर निर्भर करती है।
नहीं, यह दर्द से अस्थायी राहत देता है, पूरी तरह ठीक नहीं करता। घिसी कार्टिलेज वापस नहीं बनती। सबसे अच्छे नतीजे के लिए इसके साथ व्यायाम और वज़न नियंत्रण ज़रूरी हैं।
अभी तक इसका पक्का प्रमाण नहीं है। कुछ रिसर्च संकेत देते हैं, पर इसे बीमारी रोकने वाला इलाज नहीं माना जाता। इसका मुख्य काम लक्षणों में राहत देना है।
नहीं, हल्के से मध्यम गठिया में यह ज़्यादा उपयोगी हो सकता है। संक्रमण, एलर्जी, बहुत एडवांस गठिया या दर्द का दूसरा कारण होने पर यह उपयुक्त नहीं माना जाता। डॉक्टर जाँच करके तय करते हैं।
राहत मिलने पर इसे आम तौर पर लगभग छह महीने के अंतर पर दोहराया जा सकता है। कुल सीरीज़ और अंतराल उत्पाद तथा डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करते हैं।
थोड़ी बेचैनी हो सकती है, पर लगाने से पहले जगह को सुन्न किया जा सकता है। उसके बाद एक-दो दिन हल्का दर्द या सूजन रह सकती है, जो आम तौर पर अपने आप ठीक हो जाती है।
पहले 48 घंटे जोड़ को आराम दें और दौड़ना, भारी वज़न उठाना व लंबे समय तक खड़े रहना टालें। हल्का चलना ठीक रहता है। आगे की गतिविधि डॉक्टर की सलाह से शुरू करें।
स्टेरॉयड सूजन घटाकर तेज़ पर अल्पकालिक राहत देता है, जबकि हायलूरोनिक एसिड जोड़ की चिकनाई बढ़ाता है और असर धीरे आता है पर अपेक्षाकृत ज़्यादा टिक सकता है। कौन सा सही है, यह डॉक्टर तय करते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Lalit Modi is Director of Orthopaedics & Joint Replacement Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur with over 11 years of experience. He specializes in joint replacement, arthroscopy and sports-medicine-related shoulder, hip, and advanced reconstructive procedures.
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