घुटने में हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन: फायदे, असर और जोखिम
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घुटने में हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन: फायदे, असर और जोखिम

Summary

  • हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन घुटने के गठिया में दर्द और अकड़न से अस्थायी राहत दे सकता है, इलाज नहीं करता।
  • असर आम तौर पर कुछ हफ्तों में दिखता है और लगभग छह महीने तक रह सकता है, पर हर मरीज में अलग होता है।
  • हल्के से मध्यम गठिया में संभावना बेहतर है, एडवांस गठिया में कम।
  • रिसर्च और दिशानिर्देश मिले-जुले हैं, इसलिए चुनाव विशेषज्ञ की सलाह से करें।
  • तेज दर्द, लाली, गर्माहट या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

सीढ़ियां चढ़ते समय दर्द, सुबह की जकड़न और दवाओं का बेअसर होना घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) के आम लक्षण हैं। ऐसे में डॉक्टर कई बार हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन (विस्कोसप्लिमेंटेशन) की सलाह देते हैं। आपने भी कभी न कभी इस शब्द के बारे में सुना ही होगा। 

यह इंजेक्शन कुछ मरीजों को कुछ हफ्तों या महीनों के लिए दर्द और जकड़न से राहत दे सकता है। हालांकि, यह घिसी हुई कार्टिलेज को वापस नहीं बनाता और हर किसी पर समान रूप से प्रभावी नहीं होता। इसलिए, यह उपचार आपके लिए सही है या नहीं, इसका फैसला ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की जाँच और सलाह के बाद ही करें। चलिए समझते हैं कि हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन क्या है और क्या ये आपके लिए है।

घुटने के दर्द की समस्या कितनी आम है?

भारत में 60 साल से ऊपर के लोगों पर हुए रिसर्च के एक मेटा-विश्लेषण में घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस का औसत प्रसार लगभग 20% पाया गया। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2019 के भारतीय विश्लेषण के अनुसार देश में ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीज 1990 के करीब 2.35 करोड़ से बढ़कर 2019 में लगभग 6.2 करोड़ हो गए, और घुटना इसका सबसे आम शिकार रहा। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से ज़्यादा दर्ज की गई है।

हायलूरोनिक एसिड क्या है और यह घुटने में कैसे काम करता है?

हायलूरोनिक एसिड (HA) हमारे शरीर में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक पदार्थ है। घुटने के जोड़ में भरा synovial fluid इसी की वजह से गाढ़ा और चिकना रहता है। यह दरवाजे के कब्जे में लगे तेल की तरह हड्डियों को आपस में रगड़ने से बचाता है और झटके को सोखता है।

उम्र बढ़ने और ऑस्टियोआर्थराइटिस में यह द्रव पतला पड़ जाता है। इंजेक्शन से जोड़ में शुद्ध HA पहुंचाया जाता है, ताकि द्रव कुछ समय के लिए गाढ़ा हो, चलने में रगड़ कम लगे और सूजन थोड़ी शांत हो। यही वजह है कि लोग इसे घुटने में चिकनाई बढ़ाने वाला इंजेक्शन कहते हैं।

एक बात ध्यान रखने की है: यह तरीका लक्षणों को सँभालता है, घिसी कार्टिलेज को दोबारा नहीं बनाता।

घुटने में इंजेक्शन कब लगवाना चाहिए?

आमतौर पर डॉक्टर इस पर तब विचार करते हैं जब - 

  • घुटने के एक्स-रे में हल्का से मध्यम ऑस्टियोआर्थराइटिस दिखे।
  • वजन घटाने, व्यायाम और फिजियोथेरेपी के बाद भी दर्द बना रहता है।
  • दर्द की गोलियां (NSAIDs) पेट, किडनी या दिल की वजह से लंबे समय तक सुरक्षित न हो।
  • दर्द दैनिक कार्यों, नींद अथवा चलने-फिरने में बाधा उत्पन्न करने लगे।।

यानी यह पहला कदम नहीं, बल्कि बुनियादी उपायों के बाद का विकल्प है।

किसके लिए यह उपयुक्त हो सकता है और किसके लिए नहीं?

स्थिति

क्या संभावना है

हल्के से मध्यम घुटने का गठिया

राहत की संभावना अपेक्षाकृत बेहतर

बहुत एडवांस गठिया ("हड्डी पर हड्डी")

एडवांस गठिया में यह इंजेक्शन अप्रभावी माना जाता है, अक्सर सर्जरी पर चर्चा होती है

अत्यधिक वजन या 65 से ऊपर उम्र

कुछ रिसर्च में असर कम दिखा है क्योंकि इस स्थिति में कार्टिलेज अधिक घिसता है।

घुटने या आसपास की त्वचा में संक्रमण

इंजेक्शन नहीं लगाया जाता

इंजेक्शन के किसी तत्व से एलर्जी

नहीं लगाया जाता

खून पतला करने की दवा या ब्लीडिंग की समस्या

डॉक्टर से पहले बताना ज़रूरी, सावधानी चाहिए

लिगामेंट या मेनिस्कस की चोट, गाउट, हिप या कमर से आने वाला दर्द

कारण अलग है, इंजेक्शन सही इलाज नहीं हो सकता

एक व्यावहारिक बात: कुछ HA उत्पाद मुर्गे के कलगी (cockscomb) से बनते हैं और कुछ प्रयोगशाला में। अगर आपकी आहार संबंधी या एलर्जी संबंधी चिंता है, तो उत्पाद के बारे में डॉक्टर से पहले पूछ लें।

हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन के फायदे

घुटने में हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन के फायदे हर मरीज़ में एक जैसे नहीं होते, लेकिन जिन्हें असर मिलता है, उन्हें आम तौर पर ये लाभ दिखते हैं - 

  • चलते समय और सीढ़ी चढ़ते-उतरते समय दर्द में कमी।
  • सुबह की अकड़न में सुधार।
  • जोड़ की चाल थोड़ी सहज होना।
  • गोलियों पर निर्भरता कम होना, जो खासकर बुज़ुर्गों में मायने रखता है।
  • कुछ मरीज़ों में घुटना बदलवाने की सर्जरी को टालने में मदद।

घुटने का दर्द ठीक करने के दूसरे विकल्प क्या हैं?

घुटने के दर्द का इलाज हमेशा एक ही चीज पर नहीं टिकता। इंजेक्शन से पहले और साथ में ये उपाय ज़्यादा मज़बूत आधार रखते हैं - 

घुटने का दर्द ठीक करने के दूसरे विकल्प

इंजेक्शन कैसे लगाया जाता है?

यह प्रक्रिया आम तौर पर OPD में हो जाती है।

  1. घुटने की त्वचा को अच्छी तरह साफ किया जाता है और जरूरत पड़ने पर सुन्न किया जाता है।
  2. अगर जोड़ में पानी भरा हो, तो डॉक्टर पहले उसे निकाल सकते हैं।
  3. सुई सही जगह पहुंचे, इसके लिए कई बार अल्ट्रासाउंड की मदद ली जाती है।
  4. उत्पाद के अनुसार एक इंजेक्शन या हफ्ते-हफ्ते के अंतर पर 3 से 5 इंजेक्शन की सीरीज दी जाती है।
  5. मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं। 

इंजेक्शन का असर और जोखिम

असर कब दिखता है? राहत अक्सर कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे आती है, तुरंत नहीं। जिन्हें फायदा होता है, उनमें यह आम तौर पर लगभग छह महीने तक रह सकता है। अवधि हर व्यक्ति में अलग होती है। इसके साथ-साथ ये याद रखें कि ये इंजेक्शन घुटने में दर्द का इलाज नहीं है। ये बस लक्षणों को मैनेज करने का एक सुरक्षित तरीका है।

संभावित साइड इफेक्ट

  • इंजेक्शन की जगह पर दर्द, सूजन या गर्माहट, जो अक्सर एक-दो दिन में ठीक हो जाते हैं।
  • कुछ दिनों के लिए घुटने में अकड़न।
  • कभी-कभी इंजेक्शन के बाद घुटने में तेज़ सूजन और दर्द (flare), जो दूसरे या तीसरे इंजेक्शन के बाद ज़्यादा देखा गया है। लेकिन यदि ये सारे लक्षण पहले इंजेक्शन के बाद ही दिखे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
  • बहुत कम मामलों में संक्रमण होता है।

घुटने में तेज बढ़ता दर्द, लाली, बहुत गर्माहट, बुखार या सूजन 2-3 दिन में कम होने के बजाय बढ़ती जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

इंजेक्शन के बाद सावधानियाँ और व्यायाम

इंजेक्शन के बाद सावधानियाँ और व्यायाम

पहले कुछ दिन जोड़ को आराम देना चाहिए, पर बिस्तर पर पड़े रहना भी ज़रूरी नहीं है।

पहले 48 घंटों के दौरान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें - 

  • दौड़ना, भारी वज़न उठाना और ज़्यादा देर खड़े रहना टालें।
  • ज़्यादा सीढ़ियाँ चढ़ना और नीचे बैठकर उठना-बैठना कम रखें।
  • घर के काम हल्के रखें और घुटने को साफ-सूखा रखें।
  • इंजेक्शन के तुरंत बाद सूजन या दर्द होने पर बर्फ से सेक (Ice application) सबसे सुरक्षित और प्राथमिक उपाय होता है।

उसके बाद, डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की अनुमति से इन कार्यों को करें - 

  • सीधे लेटकर पैर ऊपर उठाना (straight leg raise)।
  • एड़ी को धीरे से पास खींचना (heel slides)।
  • स्थिर साइकिल पर हल्की साइकिलिंग और समतल जगह पर टहलना।
  • जांघ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले हल्के अभ्यास करें।

हल्की, नियमित गतिविधि इंजेक्शन के असर को सहारा देती है। वजन को नियंत्रण में रखना आपके लिए बहुत ज़रूरी है।

कब मिलें ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से?

इन स्थितियों में जांच टालनी नहीं चाहिए - 

  • दर्द दो से तीन हफ्तों से अधिक समय तक रहे या नींद में बाधा डाले।।
  • घुटना सूज जाए, मुड़े नहीं या अटक जाए।
  • चलते समय घुटना अचानक कमज़ोर पड़ जाए।
  • घुटना टेढ़ा दिखने लगे।

सही इलाज तय करने के लिए पहले यह समझना ज़रूरी है कि दर्द का कारण गठिया ही है या कुछ और। सीके बिरला अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ जांच और एक्स-रे के आधार पर बता सकते हैं कि आपके लिए इंजेक्शन, फिजियोथेरेपी या कोई और विकल्प बेहतर रहेगा। जोड़ बदलवाने से जुड़ी जानकारी के लिए नी रिप्लेसमेंट सर्जन से मिलना आपके लिए एक बेहतर विकल्प होगा।

निष्कर्ष

हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक सीमित, पर कुछ मरीज़ों के लिए काम का विकल्प है। यह सबसे पहले आज़माने वाला इलाज नहीं है और न ही गठिया की जड़ को ठीक करता है। वजन, व्यायाम और सही निदान इसकी बुनियाद हैं। अगर घुटने का दर्द आपकी रोज की ज़िंदगी में दखल दे रहा है, तो अपने विशेषज्ञ से मिलकर तय करें कि यह आपके लिए ठीक है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

आम तौर पर राहत कुछ हफ्तों में शुरू होती है और लगभग तीन से छह महीने तक, कभी-कभी उससे ज़्यादा भी रह सकती है। अवधि मरीज़ के गठिया की स्थिति, वज़न और गतिविधि पर निर्भर करती है।

Written and Verified by:

Dr. Lalit Modi

Dr. Lalit Modi

Director Exp: 15 Yr

Ortho & Joint replacement

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Dr. Lalit Modi is Director of Orthopaedics & Joint Replacement Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur with over 11 years of experience. He specializes in joint replacement, arthroscopy and sports-medicine-related shoulder, hip, and advanced reconstructive procedures. 

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