
क्या आपने कभी आईने में खुद को देखा है और महसूस किया है कि सामने खड़ा व्यक्ति आप नहीं हैं? चेहरे का अचानक गोल हो जाना, कंधों के बीच एक अजीब सा उभार (हम्प), और पेट पर गहरे लाल-बैंगनी रंग के स्ट्रेच मार्क्स, यह केवल उम्र बढ़ने या खराब डाइट के संकेत नहीं हैं। कभी-कभी हमारा शरीर अंदरूनी उथल-पुथल का संकेत दे रहा होता है। तनाव का मुकाबला करने वाला हमारा अपना 'कोर्टिसोल' हार्मोन जब अपनी सीमाएं लांघ जाता है, तो वह दोस्त से दुश्मन बन जाता है। इसी स्थिति को हम कुशिंग सिंड्रोम कहते हैं। यदि आप या आपका कोई प्रियजन इन बदलावों से जूझ रहा है और समझ नहीं पा रहा कि क्या किया जाए, तो यह ब्लॉग उनके लिए है।
यहां हम न केवल बीमारी को समझेंगे, बल्कि रिकवरी की राह भी दिखाएंगे। विशेषज्ञ परामर्श के लिए आप कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं ताकि समय रहते इस अदृश्य शत्रु पर जीत हासिल की जा सके।
कुशिंग सिंड्रोम क्या है, इसे समझने के लिए हमें सबसे पहले 'कोर्टिसोल' (Cortisol) हार्मोन को समझना होगा। कोर्टिसोल को 'स्ट्रेस हार्मोन' कहा जाता है। यह हमारे एड्रिनल ग्लैंड्स (अधिवृक्क ग्रंथियों) द्वारा बनाया जाता है और शरीर के लगभग हर भाग के कामकाज में मदद करता है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा बनाने (Metabolism) में मदद करता है।
हालांकि, जब शरीर में कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बहुत अधिक बना रहता है, तो यह शरीर के पूरे सिस्टम को बिगाड़ देता है। कुशिंग सिंड्रोम क्या होता है, इसे सरल भाषा में कहें तो यह 'हाइपरकोर्टिसोलिज्म' की स्थिति है। यह असंतुलन तब होता है जब या तो आपके ग्लेंड बहुत अधिक हार्मोन बनाने लगते हैं या आप लंबे समय से स्टेरॉयड दवाओं का सेवन कर रहे होते हैं।
यह हार्मोन असंतुलन केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि चयापचय (Metabolism) और मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, कुशिंग सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है, जो हर साल प्रति मिलियन लगभग 40 से 70 लोगों को प्रभावित करती है। यह शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को बदल देता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है और मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है।
जब हम कुशिंग सिंड्रोम के लक्षण की बात करते हैं, तो वह काफी स्पष्ट हो सकते हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें सामान्य मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके मुख्य लक्षणों को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है -
इन कुशिंग सिंड्रोम लक्षण को पहचानना इलाज की पहली सीढ़ी है। यदि आप इनमें से तीन या अधिक लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत जांच करानी आवश्यक है।
इस बीमारी के पीछे के कारणों को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है -
यह सबसे आम कारण है। जब कोई व्यक्ति अस्थमा, रुमेटीइड गठिया या ल्यूपस जैसी बीमारियों के इलाज के लिए लंबे समय तक हाई-डोज ग्लूकोकोर्टिकोइड दवाओं (जैसे प्रेडनिसोन) का सेवन करता है, तो शरीर में कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ जाती है।
यहां शरीर खुद अधिक कोर्टिसोल बनाने लगता है। इसके कारण हो सकते हैं -
हमारे पास जितने भी मामले आए हैं, उनके अनुसार हम भी बता सकते हैं कि 'कुशिंग रोग' (पिट्यूटरी ट्यूमर) महिलाओं में पुरुषों की तुलना में 5 गुना अधिक पाया जाता है।
चूंकि इसके लक्षण अन्य बीमारियों (जैसे PCOS या मेटाबोलिक सिंड्रोम) से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए इसकी जांच काफी विस्तृत होती है। कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ आमतौर पर निम्नलिखित टेस्ट की सलाह देते हैं -
सीके बिरला अस्पताल, कोलकाता (CMRI) जैसे अग्रणी संस्थानों में इन जांचों के लिए एडवांस तकनीक उपलब्ध है, जो सटीक निदान सुनिश्चित करते हैं, और हमारे अनुभवी डॉक्टरों को बताते हैं कि उन्हें अब क्या करना चाहिए और सही इलाज की क्या योजना होनी चाहिए।
इलाज पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का कारण क्या है। हम मानते हैं कि मुख्य उद्देश्य शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को वापस सामान्य करना है, जिसके लिए हम नीचे बताए गए तरीकों का उपयोग करते हैं -
इलाज के दौरान इन जीवनशैली बदलावों से आपको बहुत मदद मिल सकती है और व्यक्ति की रिकवरी भी तेज होती है -
कुशिंग सिंड्रोम एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। सही समय पर सही निदान और कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ की देखरेख में उपचार लेने से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ जीवन में वापस लौट सकता है। याद रखें, आपका शरीर आपके साथ है, और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के पास हर जटिलता का समाधान है। यदि आप ऊपर बताए गए लक्षणों को अपने शरीर में महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें। कोलकाता स्थित CMRI (CK Birla Hospitals) में हमारी एंडोक्राइनोलॉजी टीम ऐसे जटिल मामलों को संवेदनशीलता और विशेषज्ञता के साथ संभालने के लिए प्रतिबद्ध है।
हां, अधिकांश मामलों में, विशेष रूप से जब कारण ट्यूमर होता है, सफल सर्जरी या सही चिकित्सा उपचार के बाद कोर्टिसोल स्तर सामान्य हो जाता है और लक्षण गायब हो जाते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पिट्यूटरी ट्यूमर के कारण होने वाला कुशिंग रोग महिलाओं में पुरुषों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक देखा जाता है, संभवत यह हार्मोनल अंतर के कारण होता है।
अत्यधिक कोर्टिसोल शरीर के चयापचय (Metabolism) को धीमा कर देता है और इंसुलिन प्रतिरोध पैदा करता है, जिससे फैट का जमाव बढ़ जाता है और वजन कम करना कठिन हो जाता है।
हां, हाई कोर्टिसोल रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है और रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज़ और उच्च रक्तचाप (Hypertension) का खतरा बढ़ जाता है।
कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर चेहरे और गर्दन के आसपास वसा (Fat) के असामान्य जमाव को बढ़ावा देता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'मून फेस' कहा जाता है।
हां, हालांकि यह बच्चों में अत्यंत दुर्लभ है। बच्चों में इसके मुख्य लक्षण वजन बढ़ना और विकास (Height) की दर का धीमा होना है।
Written and Verified by:
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Dr. Sujit Bhattacharya is a Senior Consultant in Endocrinology Dept. at CMRI, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in diabetes management, thyroid disorders, obesity, osteoporosis, and adrenal conditions.
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