कुशिंग सिंड्रोम: हार्मोन असंतुलन के लक्षण और इलाज
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कुशिंग सिंड्रोम: हार्मोन असंतुलन के लक्षण और इलाज

Endocrinology | by Dr. Sujit Bhattacharya on 17/02/2026 | Last Updated : 16/02/2026

Table of Contents

Summary

  • कुशिंग सिंड्रोम शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन की अत्यधिक मात्रा के कारण होने वाला एक गंभीर हार्मोनल विकार है।
  • अचानक वजन बढ़ना, मून फेस, बफ़ेलो हम्प और पेट पर बैंगनी रंग के खिंचाव के निशान (Striae) इसके प्राथमिक संकेत हैं।
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग या पिट्यूटरी/एड्रेनल ग्लैंड में ट्यूमर होना इसके मुख्य कारण माने जाते हैं।
  • 24-घंटे यूरिन टेस्ट, लार परीक्षण और इमेजिंग (MRI/CT) के जरिए इसका सटीक पता लगाया जाता है।
  • सर्जरी, रेडिएशन और कोर्टिसोल-ब्लॉकिंग दवाओं के माध्यम से इसका प्रभावी इलाज संभव है।
  • अनुपचारित कुशिंग सिंड्रोम से हड्डियां कमजोर (Osteoporosis), उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज को ट्रिगर करता है।
  • इलाज के बाद जीवनशैली में सुधार और कैल्शियम युक्त आहार रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • समय पर जांच के लिए कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ और CMRI जैसे एडवांस अस्पतालों का परामर्श लेना आवश्यक है।

क्या आपने कभी आईने में खुद को देखा है और महसूस किया है कि सामने खड़ा व्यक्ति आप नहीं हैं? चेहरे का अचानक गोल हो जाना, कंधों के बीच एक अजीब सा उभार (हम्प), और पेट पर गहरे लाल-बैंगनी रंग के स्ट्रेच मार्क्स, यह केवल उम्र बढ़ने या खराब डाइट के संकेत नहीं हैं। कभी-कभी हमारा शरीर अंदरूनी उथल-पुथल का संकेत दे रहा होता है। तनाव का मुकाबला करने वाला हमारा अपना 'कोर्टिसोल' हार्मोन जब अपनी सीमाएं लांघ जाता है, तो वह दोस्त से दुश्मन बन जाता है। इसी स्थिति को हम कुशिंग सिंड्रोम कहते हैं। यदि आप या आपका कोई प्रियजन इन बदलावों से जूझ रहा है और समझ नहीं पा रहा कि क्या किया जाए, तो यह ब्लॉग उनके लिए है।

यहां हम न केवल बीमारी को समझेंगे, बल्कि रिकवरी की राह भी दिखाएंगे। विशेषज्ञ परामर्श के लिए आप कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं ताकि समय रहते इस अदृश्य शत्रु पर जीत हासिल की जा सके।

कुशिंग सिंड्रोम क्या है और यह हार्मोन असंतुलन कैसे पैदा करता है?

कुशिंग सिंड्रोम क्या है, इसे समझने के लिए हमें सबसे पहले 'कोर्टिसोल' (Cortisol) हार्मोन को समझना होगा। कोर्टिसोल को 'स्ट्रेस हार्मोन' कहा जाता है। यह हमारे एड्रिनल ग्लैंड्स (अधिवृक्क ग्रंथियों) द्वारा बनाया जाता है और शरीर के लगभग हर भाग के कामकाज में मदद करता है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और हमारे शरीर को भोजन से ऊर्जा बनाने (Metabolism) में मदद करता है।

हालांकि, जब शरीर में कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बहुत अधिक बना रहता है, तो यह शरीर के पूरे सिस्टम को बिगाड़ देता है। कुशिंग सिंड्रोम क्या होता है, इसे सरल भाषा में कहें तो यह 'हाइपरकोर्टिसोलिज्म' की स्थिति है। यह असंतुलन तब होता है जब या तो आपके ग्लेंड बहुत अधिक हार्मोन बनाने लगते हैं या आप लंबे समय से स्टेरॉयड दवाओं का सेवन कर रहे होते हैं।

यह हार्मोन असंतुलन केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि चयापचय (Metabolism) और मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, कुशिंग सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है, जो हर साल प्रति मिलियन लगभग 40 से 70 लोगों को प्रभावित करती है। यह शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को बदल देता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है और मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है।

कुशिंग सिंड्रोम के मुख्य लक्षण

जब हम कुशिंग सिंड्रोम के लक्षण की बात करते हैं, तो वह काफी स्पष्ट हो सकते हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें सामान्य मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके मुख्य लक्षणों को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है - 

  1. शारीरिक बनावट में बदलाव:
    • मून फेस (Moon Face): चेहरे का असामान्य रूप से गोल और लाल हो जाना।
    • बफेलो हंप (Buffalo Hump): कंधों के बीच फैट का जमाव होना।
    • सेंट्रल ओबेसिटी: हाथ-पैर पतले रहना लेकिन पेट के हिस्से में अत्यधिक वजन बढ़ना।
    • त्वचा के बदलाव: पेट, जांघों और बाहों पर बैंगनी या लाल रंग के चौड़े स्ट्रेच मार्क्स (Striae) आना। 
    • त्वचा का बहुत पतला हो जाना और मामूली चोट पर भी नीला पड़ना (Bruising)।
  2. मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी:
    • हड्डियों का कमजोर होना (Osteoporosis), जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
    • सीढ़ियां चढ़ने या बैठने-उठने में दिक्कत होना, खासकर कूल्हों और कंधों की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण ऐसा हो सकता है।
  3. हार्मोनल और प्रजनन संबंधी लक्षण:
    • महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना या पूरी तरह बंद हो जाना।
    • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों का उगना (Hirsutism)।
    • पुरुषों में कामेच्छा (Libido) में कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन।
  4. मानसिक और भावनात्मक प्रभाव:
    • अत्यधिक चिड़चिड़ापन, चिंता और गंभीर डिप्रेशन।
    • नींद न आना और लगातार थकान महसूस होना।

इन कुशिंग सिंड्रोम लक्षण को पहचानना इलाज की पहली सीढ़ी है। यदि आप इनमें से तीन या अधिक लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत जांच करानी आवश्यक है।

कुशिंग सिंड्रोम होने के कारण

इस बीमारी के पीछे के कारणों को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है - 

बाहरी कारण (Exogenous Causes)

यह सबसे आम कारण है। जब कोई व्यक्ति अस्थमा, रुमेटीइड गठिया या ल्यूपस जैसी बीमारियों के इलाज के लिए लंबे समय तक हाई-डोज ग्लूकोकोर्टिकोइड दवाओं (जैसे प्रेडनिसोन) का सेवन करता है, तो शरीर में कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ जाती है।

आंतरिक कारण (Endogenous Causes)

यहां शरीर खुद अधिक कोर्टिसोल बनाने लगता है। इसके कारण हो सकते हैं - 

  • पिट्यूटरी एडेनोमा (कुशिंग रोग): मस्तिष्क के आधार पर स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि में एक छोटा ट्यूमर (आमतौर पर कैंसर रहित) जो ACTH हार्मोन का अधिक उत्पादन करता है, जिससे एड्रिनल ग्लैंड्स को अधिक कोर्टिसोल बनाने का संकेत मिलता है।
  • एड्रिनल ट्यूमर: एड्रिनल ग्लैंड्स में ट्यूमर होने के कारण वह सीधे कोर्टिसोल का उत्पादन बढ़ा देते हैं।
  • एक्टोपिक ACTH ट्यूमर: कभी-कभी फेफड़ों, अग्न्याशय या थायराइड में ट्यूमर होने पर वे ACTH बनाने लगते हैं, जो शरीर में हार्मोन असंतुलन पैदा करता है।

हमारे पास जितने भी मामले आए हैं, उनके अनुसार हम भी बता सकते हैं कि 'कुशिंग रोग' (पिट्यूटरी ट्यूमर) महिलाओं में पुरुषों की तुलना में 5 गुना अधिक पाया जाता है।

कुशिंग सिंड्रोम की जांच कैसे की जाती है?

चूंकि इसके लक्षण अन्य बीमारियों (जैसे PCOS या मेटाबोलिक सिंड्रोम) से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए इसकी जांच काफी विस्तृत होती है। कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ आमतौर पर निम्नलिखित टेस्ट की सलाह देते हैं - 

  • 24-घंटे यूरिन फ्री कोर्टिसोल टेस्ट: इसमें 24 घंटे के मूत्र का सैंपल लिया जाता है, ताकि कोर्टिसोल के टोटल उत्पादन को मापा जा सके।
  • देर रात लार (Salivary) कोर्टिसोल टेस्ट: स्वस्थ लोगों में कोर्टिसोल रात में कम हो जाता है, लेकिन कुशिंग सिंड्रोम वाले रोगियों में यह उच्च बना रहता है।
  • डेक्सामेथासोन सप्रेशन टेस्ट (DST): रोगी को रात में डेक्सामेथासोन की एक गोली दी जाती है और अगली सुबह रक्त की जांच की जाती है। यह देखा जाता है कि दवा ने कोर्टिसोल के स्तर को कम किया या नहीं।
  • इमेजिंग टेस्ट: यदि शुरुआती टेस्ट में कोर्टिसोल बढ़ा हुआ आता है, तो ट्यूमर का पता लगाने के लिए MRI (पिट्यूटरी के लिए) या CT स्कैन (एड्रिनल ग्लैंड्स के लिए) किया जाता है।

सीके बिरला अस्पताल, कोलकाता (CMRI) जैसे अग्रणी संस्थानों में इन जांचों के लिए एडवांस तकनीक उपलब्ध है, जो सटीक निदान सुनिश्चित करते हैं, और हमारे अनुभवी डॉक्टरों को बताते हैं कि उन्हें अब क्या करना चाहिए और सही इलाज की क्या योजना होनी चाहिए।

कुशिंग सिंड्रोम का इलाज और जीवनशैली में बदलाव

इलाज पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का कारण क्या है। हम मानते हैं कि मुख्य उद्देश्य शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को वापस सामान्य करना है, जिसके लिए हम नीचे बताए गए तरीकों का उपयोग करते हैं - 

  • दवाओं का प्रबंधन: यदि कारण स्टेरॉयड दवाएं हैं, तो डॉक्टर धीरे-धीरे उनकी खुराक कम कर सकते हैं या कोई वैकल्पिक दवा लिख सकते हैं। सावधानी: कभी भी खुद से दवा बंद न करें।
  • सर्जरी: यदि ट्यूमर कारण है, तो उसे हटाना सबसे प्रभावी इलाज है। पिट्यूटरी ट्यूमर के लिए 'ट्रांसस्फेनोइडल सर्जरी' (नाक के माध्यम से की जाने वाली सर्जरी) की जाती है।
  • रेडिएशन थेरेपी: यदि सर्जरी के बाद भी ट्यूमर का कुछ हिस्सा रह जाता है, तो रेडिएशन का उपयोग किया जाता है।
  • कीमोथेरेपी या मेडिकेशन: कुछ दवाएं (जैसे कि केटोकोनाज़ोल या मेट्रैपोन) एड्रिनल ग्लैंड्स से कोर्टिसोल के उत्पादन को रोकने में मदद करती हैं।

जीवनशैली में बदलाव:

इलाज के दौरान इन जीवनशैली बदलावों से आपको बहुत मदद मिल सकती है और व्यक्ति की रिकवरी भी तेज होती है - 

  1. आहार: कम नमक और अधिक कैल्शियम व विटामिन-D वाला आहार लें, क्योंकि कुशिंग हड्डियों को कमजोर करता है।
  2. शारीरिक गतिविधि: हल्की एक्सरसाइज करें, लेकिन अपनी सीमाओं को पहचानें। मांसपेशियों को धीरे-धीरे मजबूत करें।
  3. मानसिक स्वास्थ्य: रिकवरी के दौरान अवसाद या चिंता होना सामान्य है। थेरेपिस्ट या सपोर्ट ग्रुप की मदद लें।

निष्कर्ष

कुशिंग सिंड्रोम एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। सही समय पर सही निदान और कुशिंग सिंड्रोम के विशेषज्ञ की देखरेख में उपचार लेने से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ जीवन में वापस लौट सकता है। याद रखें, आपका शरीर आपके साथ है, और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के पास हर जटिलता का समाधान है। यदि आप ऊपर बताए गए लक्षणों को अपने शरीर में महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें। कोलकाता स्थित CMRI (CK Birla Hospitals) में हमारी एंडोक्राइनोलॉजी टीम ऐसे जटिल मामलों को संवेदनशीलता और विशेषज्ञता के साथ संभालने के लिए प्रतिबद्ध है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुशिंग सिंड्रोम पूरी तरह ठीक हो सकता है?

हां, अधिकांश मामलों में, विशेष रूप से जब कारण ट्यूमर होता है, सफल सर्जरी या सही चिकित्सा उपचार के बाद कोर्टिसोल स्तर सामान्य हो जाता है और लक्षण गायब हो जाते हैं।

कुशिंग सिंड्रोम महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है?

आंकड़ों के अनुसार, पिट्यूटरी ट्यूमर के कारण होने वाला कुशिंग रोग महिलाओं में पुरुषों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक देखा जाता है, संभवत यह हार्मोनल अंतर के कारण होता है।

कुशिंग सिंड्रोम से वजन कम करना क्यों मुश्किल होता है?

अत्यधिक कोर्टिसोल शरीर के चयापचय (Metabolism) को धीमा कर देता है और इंसुलिन प्रतिरोध पैदा करता है, जिससे फैट का जमाव बढ़ जाता है और वजन कम करना कठिन हो जाता है।

क्या कुशिंग सिंड्रोम से डायबिटीज और हाई बीपी हो सकता है?

हां, हाई कोर्टिसोल रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है और रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज़ और उच्च रक्तचाप (Hypertension) का खतरा बढ़ जाता है।

कुशिंग सिंड्रोम में चेहरे पर सूजन और गोलापन क्यों आ जाता है?

कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर चेहरे और गर्दन के आसपास वसा (Fat) के असामान्य जमाव को बढ़ावा देता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'मून फेस' कहा जाता है।

क्या कुशिंग सिंड्रोम बच्चों में भी हो सकता है?

हां, हालांकि यह बच्चों में अत्यंत दुर्लभ है। बच्चों में इसके मुख्य लक्षण वजन बढ़ना और विकास (Height) की दर का धीमा होना है।

Written and Verified by:

Dr. Sujit Bhattacharya

Dr. Sujit Bhattacharya

Senior Consultant Endocrinologist Exp: 34 Yr

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Dr. Sujit Bhattacharya is a Senior Consultant in Endocrinology Dept. at CMRI, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in diabetes management, thyroid disorders, obesity, osteoporosis, and adrenal conditions.

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