
क्या आपके साथ भी ऐसा हो रहा है कि आप डाइट पर नियंत्रण रख रहे हैं, जिम में पसीना बहा रहे हैं, लेकिन फिर भी जब आप वजन नापने वाली मशीन पर खड़े होते हैं, तो सुई नीचे जाने के बजाय ऊपर ही चढ़ती दिखती है? यह स्थिति न केवल निराशाजनक होती है, बल्कि मन में कई सवाल भी पैदा करती है। अगर बिना किसी ठोस कारण के आपका वजन बढ़ना जारी है, तो मुमकिन है कि इसका दोष आपकी कैलोरी पर नहीं, बल्कि आपकी गर्दन में छिपी एक छोटी सी तितली के आकार की ग्लैंड पर हो।
जी हां, हम बात कर रहे हैं थायरॉइड ग्लैंड की। मेडिकल साइंस की दुनिया में, वजन और हार्मोन का रिश्ता बहुत गहरा है। अक्सर लोग इसे केवल एक 'मोटापे की बीमारी' समझ लेते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं अधिक जटिल है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि कैसे थायरॉइड रोग आपके शरीर की पूरी कार्यप्रणाली को बदल देता है और अचानक वजन बढ़ने का कारण बन जाता है। यदि आप थायरॉइड रोग से परेशान है, जा आपकी रिपोर्ट्स आपको डरा रहे हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी थायरॉइड विशेषज्ञों से मिलें और इलाज ले।
थायरॉइड एक एंडोक्राइन ग्लैंड है, जो हमारी गर्दन के निचले भाग में स्थित होती है। इसका मुख्य काम दो महत्वपूर्ण हार्मोन को बनाना है और वह है - T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरोक्सिन)। इन हार्मोनों को हमारे शरीर का 'रिमोट कंट्रोल' माना जा सकता है क्योंकि ये हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी मैनेज करते हैं।
मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए हमारा शरीर खाने को ऊर्जा में बदलता है। जब थायरॉइड ग्लैंड सही मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो शरीर की यह ऊर्जा बनाने की फैक्ट्री धीमी पड़ जाती है। इसे ही हम हाइपोथायरॉइडिज़्म कहते हैं। जब मेटाबॉलिज्म सुस्त होता है, तो आप जो भी खाते हैं, शरीर उसे जलाने की जगह स्टोर करने लगता है, जिसका सीधा असर आपके वजन पर पड़ता है।
यह बहुत ज्यादा पूछे जाने वाला प्रश्न है - क्या थायराइड से वजन बढ़ता है? जवाब है, हाँ, लेकिन वजन में वृद्धि रातों-रात नहीं होती। अधिकांश मामलों में, थायरॉइड रोग के कारण होने वाला वजन बढ़ना धीरे-धीरे होता है। हालांकि, कुछ लोगों को यह 'अचानक' महसूस हो सकता है, क्योंकि वे अपने शरीर में हो रहे अन्य छोटे-छोटे बदलावों को नोटिस नहीं कर पाते।
रिसर्च और मेडिकल आंकड़ों (जैसे कि सीके बिरला अस्पताल, CMRI के डेटाबेस) के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित व्यक्ति का वजन आमतौर पर 5 से 10 किलो तक बढ़ सकता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरा वजन 'चर्बी' (Fat) नहीं होता। इसमें एक बड़ा हिस्सा शरीर में जमा पानी और नमक (वॉटर रिटेंशन) का होता है। इसलिए, अगर आपको लग रहा है कि आपके चेहरे पर सूजन है या पैरों में भारीपन है, तो यह थायरॉइड के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।
सिर्फ वजन बढ़ना ही एकमात्र संकेत नहीं है। शरीर अक्सर हमें कई और इशारे भी देता है। थायराइड होने के लक्षण व्यक्ति दर व्यक्ति अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं -

अगर आप अचानक से वजन बढ़ना के साथ इनमें से दो या तीन लक्षणों का भी सामना कर रहे हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
हमारे शरीर की हर टिश्यू (ऊतक) थायरॉइड हार्मोन पर निर्भर करता है। जब T3 और T4 का स्तर गिरता है, तो बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कम हो जाता है। BMR वह ऊर्जा है, जो हमारा शरीर आराम करते समय (जैसे सोते समय या सांस लेते समय) खर्च करता है।
थायराइड में वजन क्यों बढ़ता है, इसके पीछे का विज्ञान यह है कि कम BMR के कारण शरीर कम ऑक्सीजन का उपयोग करता है और कम कैलोरी जलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि थायरॉइड हार्मोन लेप्टिन (Leptin) और इंसुलिन जैसे अन्य हार्मोनों के साथ भी तालमेल बिठाते हैं। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर 'भूख' के संकेतों को गलत समझने लगता है, जिससे व्यक्ति को शुगर और कार्बोहाइड्रेट की क्रेविंग अधिक होती है।
सांख्यिकीय रूप से देखें तो भारत में लगभग 10% वयस्क आबादी थायरॉइड रोग का सामना कर रहे हैं, जिनमें से महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है। यही कारण है कि महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण मोटापा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि थायराइड का मोटापा कैसे कम करें? कई लोग हार मान लेते हैं कि अब वजन कभी कम नहीं होगा, लेकिन यह सच नहीं है। सही रणनीति के साथ आप अपना पुराना शेप वापस पा सकते हैं। चलिए आपके लिए एक सही प्लान बनाते हैं -
सबसे पहले, अपने एंडोक्रिनोलॉजिस्ट द्वारा सुझाई गई दवा (जैसे लेवोथायरोक्सिन) को नियमित रूप से लें। इसे खाली पेट लेना सबसे अच्छा होता है। जब आपके हार्मोन का स्तर संतुलित होगा, तो वजन कम करना आसान हो जाएगा।
आपको अपने आहार में किसी क्रांतिकारी बदलाव की जरूरत नहीं है, बल्कि कुछ छोटे और समझदारी भरे बदलाव करके आप मनचाहा परिणाम पा सकते हैं, जैसे कि -
सिर्फ कार्डियो (दौड़ना या साइकिल चलाना) काफी नहीं है। थायरॉइड के मरीजों के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या वेट ट्रेनिंग बहुत फायदेमंद और आवश्यक होते हैं। यह मांसपेशियों का निर्माण करती है, जो आराम करते समय भी अधिक कैलोरी जलाती हैं।
दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि वॉटर रिटेंशन कम हो सके। साथ ही, 7-8 घंटे की गहरी नींद लें क्योंकि नींद के दौरान ही शरीर हार्मोन को रीसेट करता है।
अक्सर लोग वजन बढ़ने को उम्र बढ़ने या खराब जीवनशैली का हिस्सा मान लेते हैं। लेकिन आपको टेस्ट कब कराना चाहिए?
डॉक्टर आमतौर पर TSH (Thyroid Stimulating Hormone), फ्री T3 और फ्री T4 टेस्ट की सलाह देते हैं। सीके बिरला अस्पताल, CMRI जैसे संस्थानों में अत्याधुनिक लैब सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां इन टेस्ट्स के सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, जो सही इलाज की दिशा में पहला कदम है।
थायरॉइड और वजन का संबंध गहरा जरूर है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। यह समझना जरूरी है कि वजन बढ़ना आपकी गलती नहीं है, बल्कि एक हार्मोनल असंतुलन है। धैर्य और सही मेडिकल गाइडेंस के साथ आप इस स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं। याद रखें, शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को अनदेखा करना भविष्य की बड़ी समस्याओं को आमंत्रण देना है।
अगर आप भी वजन और थकान के चक्रव्यूह में फंसे हैं, तो आज ही अपना थायरॉइड टेस्ट करवाएं और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं। यदि थायरॉइड की समस्या लगातार मेहनत के बाद भी मैनेज नहीं होती है, तो आपको एक सही सारथी की आवश्यकता है। अभी हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें और इलाज लें।
हाइपोथायरॉइडिज़्म (Hypothyroidism) मुख्य रूप से वजन बढ़ने का कारण बनता है। इसमें थायरॉइड ग्लैंड पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर में फैट व पानी जमा होने लगता है।
जी हाँ, सही दवा और जीवनशैली से जब TSH लेवल सामान्य हो जाता है, तो वजन कम करना संभव है। दवा शरीर के मेटाबॉलिज्म को फिर से सक्रिय कर देती है, जिससे मेहनत का असर दिखने लगता है।
सिर्फ डाइट पर्याप्त नहीं है। चूंकि यह एक हार्मोनल समस्या है, इसलिए दवा के साथ डाइट और एक्सरसाइज का तालमेल जरूरी है। केवल कैलोरी कम करने से मेटाबॉलिज्म और भी धीमा हो सकता है, जिससे शरीर स्टार्वेशन मोड में चला जाता है।
हाइपोथायरॉइडिज्म में पूरे शरीर पर चर्बी बढ़ती है, लेकिन वॉटर रिटेंशन और पाचन धीमा होने के कारण पेट के आसपास सूजन (Bloating) ज्यादा महसूस हो सकती है, जो पेट की चर्बी जैसा दिखता है।
बिल्कुल! एक्सरसाइज, विशेष रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाती है। यह थकान दूर करने और मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करती है, जो थायरॉइड रोगियों के लिए बहुत जरूरी है।
घरेलू उपाय जैसे धनिया का पानी या कुछ खास बीज सहायक हो सकते हैं, लेकिन ये मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं हैं। दवा और डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण है।
Written and Verified by:

Dr. Ankur Gahlot is Additional Director of the Diabetes & Endocrinology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 16 years of experience. He treats diabetes, thyroid, pituitary, adrenal disorders, osteoporosis, PCOS, and infertility related to hormonal issues
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