
गले का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज से इसे हराया जा सकता है। इस ब्लॉग में जानें गले के कैंसर के शुरुआती लक्षण, कारण और सीके बिरला हॉस्पिटल, जयपुर (RBH) में उपलब्ध एडवांस इलाज के विकल्पों के बारे में समझें।
क्या आपको पिछले कुछ हफ्तों से गले में लगातार खराश महसूस हो रही है? या शायद आवाज में ऐसा बदलाव आया है, जो ठीक नहीं हो रहा है? अक्सर हम इसे सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कभी-कभी यह गले का कैंसर जैसे गंभीर रोग की दस्तक भी हो सकती है।
कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर आना स्वाभाविक है, लेकिन याद रखें, जानकारी ही बचाव की कुंजी है। 2020 में छपी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सिर और गले के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन अच्छी खबर यह है कि शुरुआती स्टेज में पहचान होने पर इसका इलाज पूरी तरह संभव है। सीके बिरला हॉस्पिटल, जयपुर (RBH) में हम न केवल अत्याधुनिक तकनीक से इलाज करते हैं, बल्कि इस मुश्किल सफर में एक परिवार की तरह आपके साथ खड़े भी रहते हैं। इसके लिए आपको
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि गले का कैंसर कैसे होता है, इसके लक्षण क्या है और इसका सफल इलाज कैसे किया जा सकता है।
गले का कैंसर एक व्यापक शब्द है, जो गले (Pharynx), वॉयस बॉक्स (Larynx/स्वरयंत्र), या टॉन्सिल में विकसित होने वाले ट्यूमर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जब इन हिस्सों की कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, तो यह कैंसर का रूप ले लेती है।
हमारा गला मांसपेशियों की एक ट्यूब जैसा होता है, जो नाक के पीछे से शुरू होकर गर्दन तक जाता है। यह हमें बोलने, सांस लेने और खाना निगलने में मदद करता है। जब कैंसर इन कार्यों में बाधा डालता है, तो जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
अक्सर मरीज पूछते हैं कि गले में कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं? इसे समय रहते पहचानने के लिए शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है। चलिए गले के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को समझते हैं -
लगातार गले में खराश: दवा लेने के बाद भी खराश या दर्द का ठीक न होना।
आवाज में बदलाव: आवाज का भारी होना या बैठ जाना (Hoarseness)।
निगलने में हल्की तकलीफ: ऐसा महसूस होना कि गले में कुछ अटक रहा है।
कुछ एडवांस लक्षण हैं जो आपको परेशान कर सकते हैं जैसे कि -
गले का कैंसर कितना खतरनाक होता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि लक्षण कितने पुराने हैं। एडवांस स्टेज में कानों में तेज दर्द हो सकता है।
सांस लेने में तकलीफ होना।
गले या गर्दन में बाहर की तरफ गांठ या सूजन दिखाई देना।
तेजी से और बिना कारण वजन घटना।
खांसी में खून आना।
गले का कैंसर होने के मुख्य कारण हमारी जीवनशैली और कुछ बाहरी कारकों से जुड़े हैं। यह जानना जरूरी है कि जोखिम कहां सबसे ज्यादा है -
तंबाकू का उपयोग: भारत में यह सबसे बड़ा कारण है। बीड़ी, सिगरेट या गुटखा खाने से गले की कोशिकाओं में हानिकारक रसायन जमा होते हैं जो कैंसर का कारण बनते हैं।
शराब का सेवन: लंबे समय तक और अत्यधिक शराब पीने से गले की परत को नुकसान पहुंचता है।
एचपीवी संक्रमण (HPV): ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV), जो एक यौन संचारित वायरस है, ओरल और गले के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
पोषक तत्वों की कमी: फलों और सब्जियों की कमी वाला आहार भी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है।
उम्र और लिंग: यह कैंसर पुरुषों में अधिक देखा जाता है, और बढ़ती उम्र के साथ इसका खतरा भी बढ़ता है, हालांकि अब युवाओं में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं।
गले का कैंसर किस हिस्से में है, उसके आधार पर इसके कई प्रकार हो सकते हैं -
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma): यह गले के कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है, जो गले की परत वाली पतली कोशिकाओं में होता है।
एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma): यह गले के ग्लैंड में होता है, लेकिन यह दुर्लभ है।
सारकोमा और लिम्फोमा: यह गले की मांसपेशियों या लिम्फ नोड्स को प्रभावित करते हैं।
सही इलाज के लिए सही जांच जरूरी है। RBH में हम सटीकता के लिए निम्नलिखित टेस्ट करते हैं -
एंडोस्कोपी (Endoscopy): एक पतली ट्यूब या दूरबीन और कैमरे की मदद से गले के अंदरूनी हिस्से की जांच।
बायोप्सी (Biopsy): संदिग्ध जगह से छोटा सा मांस का टुकड़ा लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच करना। यह कैंसर की पुष्टि करता है।
इमेजिंग टेस्ट: ट्यूमर कितना फैला है, यह देखने के लिए CT स्कैन, MRI या PET स्कैन किया जाता है।
मरीजों का सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या गले के कैंसर का इलाज संभव है? जवाब है - हां। आज मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। इलाज के मुख्य तरीके इस प्रकार हैं -
सर्जरी: शुरुआती चरण में ट्यूमर या प्रभावित हिस्से (जैसे वोकल कॉर्ड या लिम्फ नोड्स) को ऑपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी: इसमें उच्च-ऊर्जा वाली किरणों का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
कीमोथेरेपी: इसमें दवाओं के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को मारा जाता है। इसका उपयोग अक्सर रेडिएशन के साथ किया जाता है।
टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी: यह नई तकनीक है, जो विशेष रूप से कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाती है।
पुनर्वास: इलाज के बाद बोलने और खाने में मदद के लिए स्पीच थेरेपी बहुत महत्वपूर्ण है।
गले के कैंसर से बचाव करना आसान है। यदि आप इलाज से बचना चाहते हैं तो प्रयास करें कि आप बचाव की तरफ अपना कदम बढ़ाएं। निम्न उपायों या अच्छी आदतों को अपने जीवन में अपनाएं -
तंबाकू और धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें।
शराब का सेवन सीमित करें या बंद कर दें।
पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें।
दांतों और मुंह की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
गले का कैंसर एक चुनौती जरूर है, लेकिन यह अंत नहीं है। अपने शरीर में हो रहे बदलावों, जैसे कि लगातार खराश या आवाज बदलने को नजरअंदाज न करें। गले का कैंसर कैसे ठीक होता है, इसकी चिंता आप हम पर छोड़ दें। आपको बस अपना कंसल्टेशन सेशन बुक करना है और हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलना है।
यदि आपको या आपके किसी अपना को ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देर न करें। आज ही RBH में अपॉइंटमेंट बुक करें और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
यह कैंसर की आक्रामकता और स्टेज पर निर्भर करता है। लापरवाही बरतने पर यह कुछ ही महीनों में लिम्फ नोड्स के जरिए शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता है।
नरम, ठंडे और निगलने में आसान भोजन जैसे कि खिचड़ी, दलिया, कस्टर्ड, सूप और मैश किए हुए फल लें। बहुत गर्म, तीखे और अम्लीय (Acidic) भोजन से परहेज करें।
जी हां, यदि पहली या दूसरी स्टेज में इसका पता चल जाए, तो सही इलाज (सर्जरी/रेडिएशन) से मरीज के पूरी तरह कैंसर-मुक्त होने की संभावना बहुत अधिक होती है।
यदि आपकी आवाज 2 हफ्ते से ज्यादा बैठी हुई है, गले में कोई गांठ महसूस हो रही है या थूक में खून आ रहा है, तो इसे घर पर न जांचें, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
हां, यदि सामान्य उपचार के बाद भी 14-15 दिनों तक खराश ठीक न हो और साथ में कान दर्द या निगलने में दिक्कत हो, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।
गले के कैंसर के लगभग 80-85% मामले सीधे तौर पर तंबाकू और धूम्रपान से जुड़े होते हैं। यह सबसे बड़ा और प्रमुख जोखिम कारक है।
हां, शुरुआती चरणों में अक्सर दर्द नहीं होता है। केवल आवाज में बदलाव या गले में कुछ अटके होने का अहसास होता है। दर्द आमतौर पर बाद की स्टेज में होता है।
बिल्कुल, आधुनिक तकनीकों जैसे कि रोबोटिक सर्जरी और सटीक रेडिएशन थेरेपी ने ठीक होने की दर (Survival Rate) को काफी बढ़ा दिया है, खासकर जब इलाज समय पर शुरू हो।
आमतौर पर यह 50 से 60 वर्ष की उम्र के बाद अधिक होता है, लेकिन तंबाकू की लत के कारण अब 30-40 वर्ष के युवाओं में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं।
Written and Verified by:

Dr. Umesh Khandelwal is Additional Director of Medical Oncology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 13 years in heme-oncology. He treats all types of cancers, with a special focus on leukemia and pediatric oncology, and uses therapies like chemotherapy, immunotherapy, and targeted treatments.
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