
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या गैस की समस्या को अनदेखा न करें। जानें गॉलब्लैडर (पित्ताशय) की बीमारी के लक्षण, कारण, और इलाज के बारे में। सही समय पर सही कदम उठाएं और जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित होने से बचाएं।
क्या आप जानते हैं कि पेट के ऊपरी दाहिने भाग में होने वाला हल्का सा दर्द, जिसे आप अक्सर 'सिर्फ गैस' समझ कर टाल देते हैं, वह वास्तव में आपके शरीर की एक गंभीर चेतावनी हो सकती है?
हम अक्सर अपने दिल या लिवर की सेहत पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन हमारे पाचन तंत्र का एक छोटा सा अंग - गॉलब्लैडर (पित्ताशय) अक्सर अनदेखा रह जाता है। जब तक यह 'खामोश' अंग अपनी मौजूदगी का अहसास कराता है, तब तक बात काफी बढ़ चुकी होती है।
एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए शरीर के हर संकेत को समझना जरूरी है। इस ब्लॉग में, हम पित्ताशय से जुड़े उन 'साइलेंट सिग्नल्स' (Silent Signals) या मूक संकेतों के बारे में जानेंगे, जिन्हें अगर समय रहते पकड़ लिया जाए, तो आप बड़ी सर्जरी या जटिलताओं से बच सकते हैं, लेकिन उसके लिए परामर्श लेना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
पित्ताशय हमारे शरीर में नाशपाती के आकार का एक छोटा सा अंग है, जो लिवर (यकृत) के ठीक नीचे स्थित होता है। इसका मुख्य काम लिवर द्वारा बनाए गए पित्त (Bile) को जमा करना और उसे गाढ़ा करना है।
जब आप वसायुक्त या अधिक फैटी भोजन करते हैं, तो पित्ताशय सिकुड़ता है और पित्त को छोटी आंत में छोड़ता है। यह पित्त फैट को पचाने में मदद करता है। यदि गॉलब्लैडर का स्वास्थ्य बिगड़ जाए, तो न केवल पाचन क्रिया प्रभावित होती है, बल्कि यह गंभीर दर्द और संक्रमण का कारण भी बन सकता है।
पित्ताशय के दर्द को कैसे पहचानें? आइए उन लक्षणों को समझते हैं जिनसे आप पित्ताशय में समस्या का पता लगा सकते हैं। ज्यादातर मामलों में पित्ताशय का स्वास्थ्य बिगड़ने पर शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जब समस्या बढ़ती है, तो शरीर कुछ खास संकेत देता है:
कई बार लोग इन लक्षणों को 'गैस्ट्रिक समस्या' समझ कर एंटासिड लेते रहते हैं। यदि दवा लेने के बाद भी राहत न मिले, तो यह गॉलब्लैडर समस्याओं के संकेत हो सकते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेना भी आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
पित्त की थैली के लक्षण जानने के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि ये समस्याएं क्यों होती हैं। इसके मुख्य कारण निम्न हैं -
क्या आप जानते हैं? हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में विशेष रूप से उत्तर भारत में गॉलब्लैडर स्टोन के मामले दक्षिण भारत की तुलना में अधिक देखे जाते हैं। इसका एक मुख्य कारण खानपान में अंतर हो सकता है।
यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर निम्नलिखित जांच की सलाह दे सकते हैं:
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है। चलिए समझते हैं कि किस स्थिति का इलाज कैसे होता है -
कुछ स्थितियां मेडिकल इमरजेंसी हो सकती हैं। अगर आपको निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए अस्पताल जाएं:
पित्ताशय का स्वास्थ्य आपकी समग्र पाचन शक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। अक्सर हम व्यस्त जीवनशैली में शरीर के छोटे-मोटे दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन गॉलब्लैडर की समस्या को लंबे समय तक टालना खतरनाक हो सकता है। स्वस्थ आहार अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में न लें।
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गैस का दर्द अक्सर पेट में घूमता रहता है और गैस पास होने पर राहत मिलती है। वहीं, पित्ताशय का दर्द एक जगह (ऊपरी दाहिने हिस्से में) स्थिर रहता है और भारी खाना खाने के बाद बढ़ता है। यह दर्द अक्सर पीठ या कंधे तक भी फैलता है, जो गैस में नहीं होता।
जी हां, इसे 'साइलेंट स्टोन्स' (Silent Stones) कहा जाता है। बहुत से लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें पथरी है क्योंकि उन्हें कोई दर्द नहीं होता।
बिल्कुल, इसे 'रेफरेड पेन' (Referred Pain) कहते हैं। गॉलब्लैडर का दर्द अक्सर दाहिने कंधे या दोनों कंधों के बीच पीठ में महसूस होता है।
हां, यदि पित्ताशय ठीक से काम नहीं कर रहा है या पित्त नली ब्लॉक है, तो पाचन क्रिया गड़बड़ा जाती है, जिससे लगातार मतली या उल्टी की शिकायत हो सकती है।
पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है। फाइबर से भरपूर आहार (फल, सब्जियां) लें और रिफाइंड कार्ब्स व अनहेल्दी फैट्स से बचें।
अचानक वजन घटना गॉलब्लैडर स्टोन का कारण बन सकता है। वहीं, दर्द के डर से खाना कम कर देने से बीमारी के दौरान वजन कम भी हो सकता है।
Written and Verified by:

Dr Rahul Mathur has undergone International Training in Internal Medicine from the United Kingdom. He previously worked with Mahatma Gandhi Hospital, Apex Hospitals and Metro Hospital Jaipur and conducted several free medical camps. With eight years of experience, he always chooses to reflect liability, empathy, and hard work as his foremost principles for excellence. Dr Mathur has worked on various topics in medicine and published numerous research papers at National & International conferences. He acknowledges that the medical field is constantly evolving with new technologies & practices. Therefore, he keeps himself associated with some prestigious organisation & attend regular healthcare workshops.
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