एडिसन डिजीज क्या है? इसके लक्षण और खतरे
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एडिसन डिजीज क्या है? इसके लक्षण और खतरे

Summary

एडिसन डिजीज वह स्थिति है, जिसमें एड्रेनल ग्लैंड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। इसके मुख्य लक्षणों में थकान, लो बीपी और त्वचा का काला पड़ना शामिल है। सही समय पर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और डॉक्टरी सलाह से एड्रेनल क्राइसिस जैसे खतरों से बचकर सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

क्या आपको अक्सर लगता है कि आप बिना कारण अत्यधिक थकान का अनुभव कर रहे हैं? क्या आपकी त्वचा का रंग बिना धूप में जाए गहरा होता जा रहा है? यदि आपका जवाब हां है तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। यह एडिसन डिजीज़ के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। यह एक ऐसी दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है जो आपके शरीर के 'स्ट्रेस रिस्पांस' सिस्टम को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती है। 

यदि सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा 'एड्रेनल क्राइसिस' का रूप ले सकती है। सीएमआरआई, कोलकाता के विशेषज्ञ बताते हैं कि जागरूकता और सही हार्मोनल रिप्लेसमेंट के साथ इस बीमारी के मरीज एक पूरी तरह से सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। इसलिए इस ब्लॉग में बताए गए लक्षणों के दिखने पर तुरंत विशेषज्ञों से परामर्श लें।

एडिसन डिजीज क्या है?

एडिसन डिजीज या एडिसन रोग या 'प्राइमरी एड्रिनल इंसफिशिएंसी,’ एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आपकी एड्रेनल ग्लैंड (Adrenal Glands) पर्याप्त मात्रा में आवश्यक हार्मोन नहीं बना पाते हैं। यह छोटे ग्लैंड आपकी किडनी के ठीक ऊपर स्थित होती हैं। मुख्य रूप से, यह बीमारी दो महत्वपूर्ण हार्मोन की कमी का कारण बनती है जैसे कि - 

  • कोर्टिसोल (Cortisol): इसे सामान्य भाषा में 'स्ट्रेस हार्मोन' भी कहा जाता है। यह शरीर को तनाव से लड़ने, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने और भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है।
  • एल्डोस्टेरोन (Aldosterone): यह शरीर में नमक और पानी के संतुलन को बनाए रखता है, जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है।

जब यह हार्मोन कम हो जाते हैं, तो शरीर की बुनियादी कार्यप्रणाली बिगड़ने लगती है। एडिसन बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन यह महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है, जिसके कारण महिलाओं को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होती है।

एडिसन रोग के मुख्य लक्षण

एडिसन रोग के लक्षण अक्सर बहुत धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिससे कई बार मरीज इन्हें सामान्य थकान या तनाव समझ लेते हैं। लेकिन समय के साथ यह लक्षण गंभीर हो जाते हैं जैसे कि - 

  • अत्यधिक थकान और कमजोरी होना: थोड़ा सा काम करने पर भी बहुत ज्यादा थक जाना।
  • हाइपरपिग्मेंटेशन (त्वचा का काला पड़ना): विशेष रूप से कोहनियों, घुटनों, जोड़ों के पोरों (Knuckles), और मसूड़ों पर त्वचा का रंग गहरा हो जाना।
  • वजन कम होना और भूख न लगना: बिना किसी प्रयास के वजन का तेजी से गिरना।
  • लो ब्लड प्रेशर: खड़े होने पर चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना।
  • नमक की तीव्र इच्छा: शरीर में सोडियम की कमी के कारण नमकीन चीजें खाने का मन करना।
  • पाचन संबंधी समस्याएं: मतली, उल्टी, दस्त या पेट में तेज दर्द
  • चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन: मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ना।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: शरीर के विभिन्न भागों में अकड़न और दर्द रहना।

एडिसन डिजीज होने के कारण

एडिसन रोग किसके कारण होता है, यह समझना इसके इलाज के लिए जरूरी है। यह कई कारणों से एक व्यक्ति को परेशान कर सकता है, लेकिन मुख्य रूप से चार कारण हैं, जिनकी वजह से यह समस्या आपको परेशान कर सकती है - 

  • ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया (Autoimmune Reaction): लगभग 75-80% मामलों में, शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से एड्रेनल ग्लैंड पर हमला कर देती है। भारत में हालिया रिसर्च के अनुसार, लगभग 25% रोगियों में ऑटोइम्यूनिटी ही मुख्य कारण पाई गई है।
  • संक्रमण: भारत जैसे देशों में ट्यूबरक्लोसिस (TB) एड्रेनल ग्लैंड को नुकसान पहुंचाने का एक बड़ा कारण है। इसके अतिरिक्त HIV या फंगल इन्फेक्शन भी इसका कारण बन सकते हैं।
  • कैंसर और ट्यूमर: यदि कैंसर की कोशिकाएं एड्रेनल ग्लैंड तक फैल जाएं, तो यह स्थिति आपके लिए दुखदायक हो सकती है।
  • एड्रिनल हेमरेज: ग्लैंड के भीतर अचानक रक्त हानि होना। 

एडिसन डिजीज़ का डायग्नोसिस कैसे होता है?

यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो एंडोक्राइनोलॉजिस्ट निम्नलिखित टेस्ट की सलाह दे सकते हैं - 

  • ब्लड टेस्ट: शरीर में सोडियम, पोटेशियम, कॉर्टिसोल और ACTH हार्मोन के स्तर की जांच के लिए इस टेस्ट का सुझाव दिया जा सकता है।
  • ACTH स्टिमुलेशन टेस्ट: यह एडिसन रोग की पहचान का सबसे सटीक तरीका है। इसमें देखा जाता है कि कृत्रिम ACTH यानी सिंथेटिक हार्मोन देने के बाद एड्रेनल ग्लैंड कॉर्टिसोल बनाती है या नहीं।
  • इमेजिंग टेस्ट: पेट का CT स्कैन या MRI कराया जाता है ताकि एड्रिनल ग्लैंड के आकार और उसमें किसी क्षति का पता लगाया जा सके।

इलाज और मैनेजमेंट के विकल्प

नए रिसर्च के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रति 10 लाख लोगों में से लगभग 279 लोग एड्रिनल इंसफिशिएंसी से प्रभावित होते हैं। भारत में एडिसन रोग के मरीजों पर की गई एक स्टडी (Endocrine Connections, 2025) से पता चला है कि - 

  • लगभग 42% मरीज पहली बार 'एड्रेनल क्राइसिस' की स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं।
  • भारतीय मरीजों में अधिवृक्क हिस्टोप्लास्मोसिस (45%) और टीबी (15%) इन्फेक्शन के कारण यह बीमारी होने की संभावना अधिक देखी गई है।

यह आंकड़े बताते हैं कि आपको सही जानकारी के साथ-साथ सही समय पर सही इलाज की आवश्यकता है। सबसे पहले समझें कि यह हार्मोन की कमी की बीमारी है, इसलिए इसका प्राथमिक इलाज हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) है। इसके सभी इलाज के विकल्पों के बारे में समझते हैं - 

  • ओरल कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स: कॉर्टिसोल की जगह हाइड्रोकोर्टिसोन, प्रेडनिसोन या डेक्सामेथासोन की गोलियां दी जाती हैं।
  • फ्लुड्रोकोर्टिसोन: एल्डोस्टेरोन हार्मोन की पूर्ति के लिए यह दवा दी जाती है, ताकि ब्लड प्रेशर और नमक का संतुलन बना रहे।
  • आहार में बदलाव: विशेष रूप से गर्मियों में या व्यायाम के दौरान नमक की मात्रा बढ़ाने की सलाह दी जा सकती है।

इन दवाओं को कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करना चाहिए। दवाओं को अचानक छोड़ने से 'एड्रेनल क्राइसिस' हो सकता है। इसलिए इन दवाओं का सेवन या बंद करने से पहले डॉक्टरी सलाह ज़रूर लें।

एड्रेनल क्राइसिस: कब है मेडिकल इमरजेंसी?

यदि आपके शरीर पर अचानक शारीरिक तनाव जैसे कि दुर्घटना, सर्जरी या गंभीर संक्रमण पड़ता है, तो हार्मोन की मांग बढ़ जाती है। यदि दवा की खुराक नहीं बढ़ाई गई, तो एड्रेनल क्राइसिस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

यदि आपको निम्न समस्याएं उत्पन्न हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं - 

  • पेट, पीठ या पैरों में अचानक तेज दर्द हो।
  • गंभीर उल्टी और दस्त के कारण डिहाइड्रेशन हो जाए।
  • ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाए।
  • मानसिक भ्रम या बेहोशी छाने लगे।

निष्कर्ष

एडिसन रोग किसे कहते हैं और इससे कैसे लड़ना है, यह अब आप बेहतर तरीके से समझ गए होंगे। हालांकि यह एक आजीवन चलने वाली स्थिति है, लेकिन सही चिकित्सकीय देखरेख और सही जीवनशैली के साथ आप एक सामान्य जीवन जी सकते हैं। यदि आपको लगातार थकान या त्वचा में बदलाव महसूस हो रहा है, तो आज ही सीएमआरआई (CMRI) के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें। सही समय पर लिया गया फैसला आपको भविष्य के खतरों से बचा सकता है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडिसन डिजीज़ का अटैक (एड्रेनल क्राइसिस) क्या होता है?

यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें कोर्टिसोल का स्तर अचानक बहुत गिर जाता है। इसके लक्षणों में गंभीर कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी शामिल है, जिसके लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है।

क्या एडिसन डिजीज़ जीवन भर रहती है?

हां, अधिकांश मामलों में एडिसन डिजीज एक क्रोनिक (दीर्घकालिक) बीमारी है। मरीजों को जीवन भर हार्मोन रिप्लेसमेंट दवाओं का सेवन करना पड़ता है, ताकि शरीर सुचारू रूप से कार्य कर सके।

क्या एडिसन डिजीज़ थायराइड या ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़ी होती है?

हां, क्योंकि यह एक ऑटोइम्यून विकार है, इसलिए इसके साथ टाइप 1 डायबिटीज, विटिलिगो या थायराइड की समस्याएं होने का खतरा अधिक रहता है। इसे 'पॉलीग्लैंडुलर ऑटोइम्यून सिंड्रोम' भी कहा जाता है।

क्या एडिसन डिजीज़ में रोजाना दवाइयां लेना जरूरी होता है?

बिल्कुल, हार्मोन का संतुलन बनाए रखने के लिए रोजाना दवा लेना अनिवार्य है। एक भी खुराक छोड़ना शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है, विशेषकर तनाव की स्थिति में।

क्या तनाव, बुखार या सर्जरी एडिसन डिजीज़ को खराब कर सकते हैं?

हां, शारीरिक या मानसिक तनाव के दौरान शरीर को अधिक कॉर्टिसोल की जरूरत होती है। ऐसे समय में डॉक्टर अक्सर दवा की खुराक बढ़ाने की सलाह देते हैं ताकि क्राइसिस से बचा जा सके।

Written and Verified by:

Dr. Sujit Bhattacharya

Dr. Sujit Bhattacharya

Senior Consultant Endocrinologist Exp: 34 Yr

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Dr. Sujit Bhattacharya is a Senior Consultant in Endocrinology Dept. at CMRI, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in diabetes management, thyroid disorders, obesity, osteoporosis, and adrenal conditions.

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