
एडिसन डिजीज वह स्थिति है, जिसमें एड्रेनल ग्लैंड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। इसके मुख्य लक्षणों में थकान, लो बीपी और त्वचा का काला पड़ना शामिल है। सही समय पर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और डॉक्टरी सलाह से एड्रेनल क्राइसिस जैसे खतरों से बचकर सामान्य जीवन जिया जा सकता है।
क्या आपको अक्सर लगता है कि आप बिना कारण अत्यधिक थकान का अनुभव कर रहे हैं? क्या आपकी त्वचा का रंग बिना धूप में जाए गहरा होता जा रहा है? यदि आपका जवाब हां है तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। यह एडिसन डिजीज़ के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। यह एक ऐसी दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है जो आपके शरीर के 'स्ट्रेस रिस्पांस' सिस्टम को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती है।
यदि सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा 'एड्रेनल क्राइसिस' का रूप ले सकती है। सीएमआरआई, कोलकाता के विशेषज्ञ बताते हैं कि जागरूकता और सही हार्मोनल रिप्लेसमेंट के साथ इस बीमारी के मरीज एक पूरी तरह से सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। इसलिए इस ब्लॉग में बताए गए लक्षणों के दिखने पर तुरंत विशेषज्ञों से परामर्श लें।
एडिसन डिजीज या एडिसन रोग या 'प्राइमरी एड्रिनल इंसफिशिएंसी,’ एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आपकी एड्रेनल ग्लैंड (Adrenal Glands) पर्याप्त मात्रा में आवश्यक हार्मोन नहीं बना पाते हैं। यह छोटे ग्लैंड आपकी किडनी के ठीक ऊपर स्थित होती हैं। मुख्य रूप से, यह बीमारी दो महत्वपूर्ण हार्मोन की कमी का कारण बनती है जैसे कि -
जब यह हार्मोन कम हो जाते हैं, तो शरीर की बुनियादी कार्यप्रणाली बिगड़ने लगती है। एडिसन बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन यह महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है, जिसके कारण महिलाओं को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
एडिसन रोग के लक्षण अक्सर बहुत धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिससे कई बार मरीज इन्हें सामान्य थकान या तनाव समझ लेते हैं। लेकिन समय के साथ यह लक्षण गंभीर हो जाते हैं जैसे कि -
एडिसन रोग किसके कारण होता है, यह समझना इसके इलाज के लिए जरूरी है। यह कई कारणों से एक व्यक्ति को परेशान कर सकता है, लेकिन मुख्य रूप से चार कारण हैं, जिनकी वजह से यह समस्या आपको परेशान कर सकती है -
यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो एंडोक्राइनोलॉजिस्ट निम्नलिखित टेस्ट की सलाह दे सकते हैं -
नए रिसर्च के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रति 10 लाख लोगों में से लगभग 279 लोग एड्रिनल इंसफिशिएंसी से प्रभावित होते हैं। भारत में एडिसन रोग के मरीजों पर की गई एक स्टडी (Endocrine Connections, 2025) से पता चला है कि -
यह आंकड़े बताते हैं कि आपको सही जानकारी के साथ-साथ सही समय पर सही इलाज की आवश्यकता है। सबसे पहले समझें कि यह हार्मोन की कमी की बीमारी है, इसलिए इसका प्राथमिक इलाज हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) है। इसके सभी इलाज के विकल्पों के बारे में समझते हैं -
इन दवाओं को कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करना चाहिए। दवाओं को अचानक छोड़ने से 'एड्रेनल क्राइसिस' हो सकता है। इसलिए इन दवाओं का सेवन या बंद करने से पहले डॉक्टरी सलाह ज़रूर लें।
यदि आपके शरीर पर अचानक शारीरिक तनाव जैसे कि दुर्घटना, सर्जरी या गंभीर संक्रमण पड़ता है, तो हार्मोन की मांग बढ़ जाती है। यदि दवा की खुराक नहीं बढ़ाई गई, तो एड्रेनल क्राइसिस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
यदि आपको निम्न समस्याएं उत्पन्न हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं -
एडिसन रोग किसे कहते हैं और इससे कैसे लड़ना है, यह अब आप बेहतर तरीके से समझ गए होंगे। हालांकि यह एक आजीवन चलने वाली स्थिति है, लेकिन सही चिकित्सकीय देखरेख और सही जीवनशैली के साथ आप एक सामान्य जीवन जी सकते हैं। यदि आपको लगातार थकान या त्वचा में बदलाव महसूस हो रहा है, तो आज ही सीएमआरआई (CMRI) के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें। सही समय पर लिया गया फैसला आपको भविष्य के खतरों से बचा सकता है।
यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें कोर्टिसोल का स्तर अचानक बहुत गिर जाता है। इसके लक्षणों में गंभीर कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी शामिल है, जिसके लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है।
हां, अधिकांश मामलों में एडिसन डिजीज एक क्रोनिक (दीर्घकालिक) बीमारी है। मरीजों को जीवन भर हार्मोन रिप्लेसमेंट दवाओं का सेवन करना पड़ता है, ताकि शरीर सुचारू रूप से कार्य कर सके।
हां, क्योंकि यह एक ऑटोइम्यून विकार है, इसलिए इसके साथ टाइप 1 डायबिटीज, विटिलिगो या थायराइड की समस्याएं होने का खतरा अधिक रहता है। इसे 'पॉलीग्लैंडुलर ऑटोइम्यून सिंड्रोम' भी कहा जाता है।
बिल्कुल, हार्मोन का संतुलन बनाए रखने के लिए रोजाना दवा लेना अनिवार्य है। एक भी खुराक छोड़ना शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है, विशेषकर तनाव की स्थिति में।
हां, शारीरिक या मानसिक तनाव के दौरान शरीर को अधिक कॉर्टिसोल की जरूरत होती है। ऐसे समय में डॉक्टर अक्सर दवा की खुराक बढ़ाने की सलाह देते हैं ताकि क्राइसिस से बचा जा सके।
Written and Verified by:
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Dr. Sujit Bhattacharya is a Senior Consultant in Endocrinology Dept. at CMRI, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in diabetes management, thyroid disorders, obesity, osteoporosis, and adrenal conditions.
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