
माइक्रोनीडलिंग सिर्फ झुर्रियों और निशानों का इलाज नहीं है, बल्कि यह त्वचा के संपूर्ण कायाकल्प (rejuvenation) की प्रक्रिया है। यह कोलेजन बूस्ट कर एक्ने स्कार्स, पिग्मेंटेशन और ओपन पोर्स जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करता है। साथ ही, यह स्ट्रेच मार्क्स को कम करने और त्वचा के लचीलेपन को बढ़ाने में भी सक्षम है, जिससे आपको मिलती है एक टाइट, स्मूथ और रेडिएंट स्किन।
क्या आप भी सुबह आईने में अपना चेहरा देखते समय त्वचा पर पड़े मुंहासों के पुराने जिद्दी दाग, बढ़ती उम्र की झुर्रियां या बेजान त्वचा को देखकर निराश महसूस करते हैं? यकीन मानिए, आप इस कतार में अकेले नहीं हैं। हम सभी चाहते हैं कि हमारी त्वचा हमेशा चमकदार और जवां दिखे, लेकिन प्रदूषण, तनाव और उम्र का असर इसे छीन लेता है।
अनगिनत क्रीम और घरेलू नुस्खे आजमाने के बाद भी जब मनचाहा रिजल्ट नहीं दिखता, तो मन उदास होना स्वाभाविक है। लेकिन क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि त्वचा की अपनी ही 'हीलिंग पावर' को जगाकर उसे दोबारा नया जैसा बनाया जा सकता है? जी हां, माइक्रोनीडलिंग आज के दौर का वह स्किन ट्रीटमेंट हैं, जिसने दुनिया भर में लाखों लोगों को उनका खोया हुआ आत्मविश्वास वापस दिया है। इस ब्लॉग में, हम इस प्रक्रिया की हर परत को खोलेंगे और जानेंगे कि यह आपके लिए कैसे वरदान साबित हो सकता है।
माइक्रोनीडलिंग, जिसे मेडिकल भाषा में 'कोलेजन इंडक्शन थेरेपी' (Collagen Induction Therapy - CIT) भी कहा जाता है, एक डर्मेटोलॉजिकल प्रक्रिया है। आसान शब्दों में कहा जाए तो यह त्वचा को 'धोखा' देकर उसे खुद को ठीक करने के लिए मजबूर करने का एक तरीका है।
इस प्रक्रिया में एक विशेष डिवाइस (जैसे डर्मापेन या डर्मा रोलर) का उपयोग किया जाता है, जिसमें बहुत ही बारीक और छोटी सुइयां (needles) होती हैं। ये सुइयां आपकी त्वचा की ऊपरी परत पर नियंत्रित रूप से बहुत छोटे-छोटे छेद करती हैं। सुनने में यह थोड़ा डरावना लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रित होता है। रिसर्च में पाया गया है कि एक माइक्रोनीडलिंग सत्र के बाद कोलेजन उत्पादन में 400% तक की वृद्धि हो सकती है, जो इसकी प्रभावी क्षमता को दर्शाता है।
जब त्वचा पर यह छोटे-छोटे घाव बनते हैं, तो हमारे शरीर का प्राकृतिक रक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है। शरीर को लगता है कि उसे चोट लगी है, और वह उसे ठीक करने के लिए तुरंत काम पर लग जाता है। इस 'रिपेयर मोड' के दौरान, शरीर भारी मात्रा में कोलेजन (Collagen) और इलास्टिन (Elastin) का उत्पादन करता है, जिसका जिक्र हम पहले कर चुके हैं।
जैसे-जैसे नई त्वचा बनती है, वह पुरानी त्वचा की तुलना में अधिक मोटी, मजबूत और समान रंगत वाली होती है। यही कारण है कि माइक्रोनीडलिंग फायदे में सबसे ऊपर स्किन रेजुवेनेशन या स्किन रिपेयर आता है।
माइक्रोनीडलिंग के लाभ केवल एक समस्या तक सीमित नहीं हैं। यह एक 'ऑल-इन-वन' समाधान की तरह काम करता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह किन प्रमुख समस्याओं पर कैसे असर करता है -
यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि क्या यह ट्रीटमेंट आपके लिए सही है? अच्छी खबर यह है कि माइक्रोनीडलिंग स्किन ट्रीटमेंट लेजर ट्रीटमेंट की तरह त्वचा के रंग पर निर्भर नहीं करता। यह डार्क और लाइट, दोनों तरह की स्किन टोन के लिए सुरक्षित है।
यदि आपकी उम्र 20 से 30 साल की है और आपको एक्ने स्कार्स या बड़े रोमछिद्रों की समस्या है, तो आप इस प्रक्रिया करा सकते हैं। वहीं 30 से 50 साल के लोगों के लिए यह प्रक्रिया एंटी-एजिंग, स्किन टाइटनिंग और झुर्रियों को कम करने के लिए प्रभावी साबित हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ यह प्रक्रिया तैलीय (Oily), ड्राई और सामान्य त्वचा वाले सभी लोगों के लिए उपयुक्त है। हालांकि, यदि आपकी त्वचा ज्यादा संवेदनशील है, तो पहले पैच टेस्ट जरूरी है।
जिनके मुंहासे या पिंपल है, तो वह इसे न करें, क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है। इसके अतिरिक्त जिनके घाव बहुत देर में भरते हैं, वह भी इससे दूर रहें। एक्जिमा (Eczema) या सोरायसिस से पीड़ित लोगों को भी इस प्रक्रिया से दूर रहने की सलाह दी जाती है। यदि आपको इसके अतिरिक्त कोई और भी जानकारी चाहिए, तो आप हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं और उनसे अपने सवालों के जवाब मांग सकते हैं।
बहुत से लोग सुई का नाम सुनकर डर जाते हैं, लेकिन आधुनिक डर्मेटोलॉजी में इस प्रक्रिया में दर्द कम ही होता है। आइए जानते हैं क्लिनिक में यह प्रक्रिया कैसे होती है -
यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर 1 से 1.5 घंटे का समय लेती है, इसलिए धैर्य रखना भी बहुत ज़रूरी है।
बेहतर माइक्रोनीडलिंग रिजल्ट पाने के लिए प्रक्रिया के बाद की देखभाल उतनी ही जरूरी है, जितना कि खुद ट्रीटमेंट लेना। याद रखें, आपकी त्वचा अभी 'हीलिंग मोड' में है।
बाजार में मिलने वाले होम डर्मा रोलर्स और प्रोफेशनल माइक्रोनीडलिंग में जमीन-आसमान का फर्क होता है।
माइक्रोनीडलिंग (Microneedling) आधुनिक त्वचा विज्ञान का एक ऐसा उपहार है, जो बिना किसी सर्जरी या भारी-भरकम डाउनटाइम के आपकी त्वचा को नया जीवन दे सकता है। चाहे आपका लक्ष्य माइक्रोनीडलिंग से झुर्रियां हटाना हो, माइक्रोनीडलिंग से एक्ने के दाग का इलाज करना हो, या बस एक स्वस्थ चमक पाना हो, यह ट्रीटमेंट एक बेहतरीन विकल्प है। क्या आप अपनी त्वचा को रिकवर करने के लिए तैयार हैं? आज ही अपने नजदीकी डर्मेटोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और ग्लोइंग स्किन की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाएं!
माइक्रोनीडलिंग का असर तुरंत नहीं दिखता क्योंकि कोलेजन बनने में समय लगता है। आमतौर पर, पहले सेशन के 4-6 सप्ताह बाद आपको त्वचा में सुधार दिखना शुरू होता है। एक्ने के गहरे दागों या झुर्रियों के लिए, आपको 3 से 6 सिटिंग्स (सत्रों) की आवश्यकता हो सकती है।
जी नहीं, यह प्रक्रिया दर्दनाक नहीं होती है। उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर त्वचा पर एक नम्बिंग क्रीम लगाते हैं, जिससे त्वचा सुन्न हो जाती है।
हां, माइक्रोनीडलिंग संवेदनशील त्वचा के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि यह लेजर की तरह गर्मी का उपयोग नहीं करती।
बिल्कुल नहीं, माइक्रोनीडलिंग के बाद आपकी त्वचा के रोमछिद्र खुले होते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि कम से कम 24 से 48 घंटे तक मेकअप न करें।
प्रक्रिया के तुरंत बाद त्वचा पर हल्का लालपन (जैसे सनबर्न हुआ हो) और हल्की सूजन सामान्य है। यह आमतौर पर 24 से 48 घंटों में अपने आप ठीक हो जाता है। यदि आप धूप से बचाव नहीं करते हैं या गंदे हाथों से चेहरा छूते हैं, तो दाग या इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है।
प्रेगनेंसी के दौरान माइक्रोनीडलिंग कराने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि शरीर में कई हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं और त्वचा अधिक संवेदनशील हो सकती है। स्तनपान के दौरान यह सुरक्षित हो सकती है, लेकिन किसी भी एनेस्थेटिक क्रीम का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है।
Written and Verified by:

Dr. Asma Akhlaq is a Consultant in Dermatologist Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 7 years of experience. She specializes in treating acne, pigmentation, hair loss, eczema, and offers advanced cosmetic dermatology procedures.
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