विटामिन ई की कमी, कारण और बचाव के उपाय
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विटामिन ई की कमी, कारण और बचाव के उपाय

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Summary

  • क्या आप थकान, कमजोर इम्यूनिटी या त्वचा एवं बालों की समस्याओं से जूझ रहे हैं और इसका मूल कारण समझना चाहते हैं?
  • यह विटामिन ई की कमी के संकेत हैं, जिसे हमने इस ब्लॉग में समझाया है।
  • विटामिन ई केवल एक 'ब्यूटी विटामिन' (या सौंदर्य बढ़ाने वाला विटामिन) नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक शक्तिशाली 'एंटीऑक्सीडेंट कवच' है। इसकी कमी आपके नर्वस सिस्टम और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
  • सही आहार (नट्स और सीड्स) और सही समय पर डॉक्टरी सहायता से विटामिन ई की कमी को न केवल रोका जा सकता है, बल्कि पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है।

बिना कारण थकान महसूस करना, त्वचा की चमक का खो जाना या मांसपेशियों में कमजोरी कुछ ऐसे लक्षण है, जो बताते हैं कि शरीर में कुछ आवश्यक विटामिन की कमजोरी है। अक्सर लोग विटामिन सी और डी पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन विटामिन ई जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व को नजरअंदाज कर देते हैं। शरीर में विटामिन ई की कमी होना किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है, क्योंकि यह विटामिन हमारे शरीर की कोशिकाओं को 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' से बचाने वाला सबसे प्रमुख सुरक्षा कवच है।

विटामिन ई के फायदे केवल आपकी सुंदरता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आपके हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी अनिवार्य है। समय रहते विटामिन ई की कमी के लक्षण पहचानना और विटामिन ई की कमी को कैसे दूर करें, यह समझना आपकी जीवनशैली को पूरी तरह बदल सकता है। यदि आप किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहे हैं, और आपको समझ नहीं आ रहा है कि इसके पीछे का कारण क्या है, तो बिना देर किए हमारे इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर से परामर्श लें।

विटामिन ई क्या है और शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

विटामिन ई (Alpha-tocopherol) एक फैट में घुलने वाला (fat-soluble) विटामिन है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। हमारे शरीर में अरबों कोशिकाएं हैं, और जो हर पल मुक्त कणों (free radicals) से लड़ती हैं। विटामिन ई इन कोशिकाओं की बाहरी परत को सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे हमारा शरीर रोग से मुक्त रहे।

विटामिन ई हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण क्यों है?

इसके निम्न कारण हो सकते हैं जैसे कि - 

  • इम्युनिटी बूस्टर: यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
  • कोशिका की रिपेयर: विटामिन ई का उपयोग क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ठीक करने और नई कोशिकाओं के निर्माण में होता है।
  • हृदय स्वास्थ्य: यह रक्त वाहिकाओं को चौड़ा रखने में मदद करता है और रक्त के थक्के जमने से रोकता है।
  • त्वचा और बाल: इसे 'ब्यूटी विटामिन' भी कहा जाता है, क्योंकि यह ऑक्सीडेटिव डैमेज को रोककर उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करता है, जिससे शरीर के सौंदर्य में बढ़ोतरी होती है।

विटामिन ई की कमी के मुख्य कारण

आमतौर पर स्वस्थ लोगों में इसकी कमी कम देखी जाती है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियां विटामिन ई की कमी का कारण बनती हैं जैसे कि - 

  • फैट मालअब्जॉर्प्शन (फैट अवशोषण में दिक्कत): चूंकि विटामिन ई को अवशोषित होने के लिए फैट की आवश्यकता होती है, इसलिए जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कि क्रोहन रोग (Crohn’s disease) या सिस्टिक फाइब्रोसिस है, उसमें इसकी कमी होने की संभावना अधिक होती है।
  • असंतुलित आहार: आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और प्राकृतिक तेलों, ड्राई फ्रूट्स व हरी सब्जियों की कमी इसका प्रमुख कारण है।
  • आनुवंशिक कारण: कुछ दुर्लभ मामलों में, शरीर में ऐसे प्रोटीन की कमी होती है, जो विटामिन ई को रक्त में ले जाने का काम करते हैं।
  • समय से पहले जन्म: समय से पहले जन्मे बच्चों में अक्सर विटामिन ई का स्तर कम होता है, क्योंकि उनका पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता।

विटामिन ई की कमी के लक्षण कैसे पहचाने?

यदि आपके शरीर में विटामिन ई की कमी हो रही है, तो हमें निम्न संकेत देखने को मिल सकते हैं - 

  • मांसपेशियों में कमजोरी: विटामिन ई सेंट्रल नर्वस सिस्टम के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी महसूस होती है।
  • समन्वय में कठिनाई (Coordination Problems): चलने-फिरने में लड़खड़ाहट या शरीर के संतुलन में दिक्कत आना विटामिन ई की कमी के लक्षण हो सकते हैं।
  • दृष्टि दोष (Vision Problems): रेटिना में प्रकाश रिसेप्टर्स समय के साथ कमजोर होने लगते हैं, जिससे दृष्टि धुंधली हो सकती है।
  • सुन्नता और झुनझुनी: नसों के डैमेज होने के कारण हाथों और पैरों में 'चीटियां चलने' जैसा महसूस हो सकता है।
  • कमजोर इम्यूनिटी: बार-बार बीमार पड़ना या घाव भरने में देरी होना भी इस कमी के मुख्य लक्षणों में से एक है।

विटामिन ई की कमी से होने वाले रोग

यदि लंबे समय तक इस पर ध्यान न दिया जाए, तो विटामिन ई की कमी से रोग गंभीर रूप ले सकते हैं - 

  • एटाक्सिया (Ataxia): यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें व्यक्ति का अपनी गतिविधियों पर नियंत्रण कम हो जाता है।
  • रेटिनोपैथी: आंखों की रोशनी का धीरे-धीरे कम होना या अंधेपन का खतरा भी इस समस्या का मुख्य जोखिम या फिर रोग है।
  • पेरिफेरल न्यूरोपैथी: विटामिन ई की गंभीर कमी के कारण पेरिफेरल नसें प्रभावित होती हैं, जिसके कारण हाथों और पैरों की नसें का डैमेज हो जाती हैं।
  • एनीमिया: विशेषकर बच्चों में लाल रक्त कोशिकाएं टूटने (Hemolytic Anemia) लगती है, वह भी इसी की कमी के कारण होता है।

विटामिन ई की कमी को पूरा करने के आहार स्रोत

अच्छी खबर यह है कि आप अपने खानपान में बदलाव करके आसानी से इस कमी को पूरा कर सकते हैं। विटामिन ई खाद्य पदार्थ न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि सेहत से भरपूर भी होते हैं। चलिए इस टेबल की मदद से समझने का प्रयास करते हैं कि आपको क्या और क्यों खाना चाहिए - 

खाद्य पदार्थ

क्यों खाएं?

बादाम और सूरजमुखी के बीज

यह विटामिन ई के स्रोत में सबसे ऊपर आते हैं। बस एक मुट्ठी बादाम आपकी दैनिक जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा कर सकते हैं। इसलिए इसे अपने आहार में हमेशा शामिल करें।

पालक और ब्रोकोली

हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन के साथ-साथ विटामिन ई का भी खजाना है। रोजाना दिन में एक बार इसका सेवन करें।

वनस्पति तेल

सूरजमुखी का तेल, गेहूं के बीज का तेल (Wheat germ oil) और जैतून का तेल (ऑलिव ऑयल) बेहतरीन विकल्प हैं।

एवोकाडो

इसमें स्वस्थ फैट होते हैं, जो विटामिन ई के अवशोषण में मदद करते हैं।

मूंगफली

यह एक किफायती और प्रभावी विटामिन ई के खाद्य पदार्थ हैं।

आपको समझ आ गया होगा कि विटामिन ई की कमी में क्या खाना चाहिए? इस बात का खास ध्यान रखें कि आप अपनी डाइट में रोजाना भीगे हुए बादाम, अखरोट और कद्दू के बीजों को शामिल ज़रूर करें। खाना पकाने के लिए रिफाइंड तेल की जगह कच्ची घानी या कोल्ड-प्रेस्ड तेलों का इस्तेमाल भी आप कर सकते हैं।

विटामिन ई कैप्सूल खाने के फायदे और नुकसान

बाजार में विटामिन ई का उपयोग सप्लीमेंट के तौर पर बहुत लोकप्रिय है, लेकिन क्या यह हमेशा सुरक्षित है? चलिए इस कैप्सूल को खाने के फायदे और नुकसान दोनों को सरल भाषा में समझते हैं - 

फायदे

  • त्वचा में निखार और बालों की मजबूती के लिए फायदेमंद।
  • पुरानी बीमारियों से लड़ने में सहायक।

नुकसान

  • बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेने से 'हाइपरविटामिनोसिस ई' हो सकता है।
  • यह रक्त को अत्यधिक पतला कर सकता है, जिससे रक्तस्राव (bleeding) का खतरा बढ़ जाता है।
  • मतली, दस्त या पेट में ऐंठन की समस्या हो सकती है।

इसलिए, हमेशा विटामिन ई कैप्सूल खाने के फायदे और नुकसान को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से परामर्श के बाद ही इसे शुरू करें।

विटामिन ई की कमी को कैसे दूर करें: व्यावहारिक सुझाव

अभी तक हमने उन सभी विकल्पों के बारे में बात कर ली है, जिनकी मदद से आप अपने शरीर में विटामिन ई की कमी को दूर कर सकते हैं। हालांकि कुछ व्यावहारिक सुझाव भी हैं, जिनका पालन कर आप अपने शरीर में विटामिन ई की कमी को ठीक कर सकते हैं, जैसे कि - 

  • संतुलित आहार: अपनी थाली में रंगों को शामिल करें (हरी सब्जियां, लाल फल, पीले बीज)।
  • स्वस्थ फैट का साथ: विटामिन ई फैट के साथ बेहतर अवशोषित होता है, इसलिए सलाद पर थोड़ा जैतून का तेल छिड़कना एक स्मार्ट तरीका है। इसके अतिरिक्त एवाकाडो, नट्स, बीज, और मछली (सैल्मन) जैसे मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
  • नियमित जांच: यदि आप थकान महसूस कर रहे हैं, तो अपने नजदीकी विश्वसनीय अस्पताल जैसे कि सीके बिरला अस्पताल, जयपुर में जाकर ब्लड टेस्ट करवाएं।
  • धूप और व्यायाम: हालांकि धूप से विटामिन डी मिलता है, लेकिन सक्रिय जीवन शैली आपके मेटाबॉलिज्म को सुधारती है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।

यह सभी अच्छी आदतें हैं, जिन्हें आप अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकते हैं, जिनसे आपको बहुत मदद मिलने वाली है।

निष्कर्ष

विटामिन ई की कमी को नजरअंदाज करना आपके भविष्य के स्वास्थ्य के साथ समझौता करने जैसा है। विटामिन ई की कमी को ठीक करने की कवायद आपके रसोई से ही शुरू हो सकती है। इसलिए यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो सप्लीमेंट लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें, क्योंकि हो सकता है कि आपको दवा की नहीं सही मार्गदर्शन की आवश्यकता हो। एक छोटा सा बदलाव आपकी उम्र और ऊर्जा दोनों को बढ़ा सकता है।

अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और आज ही अपनी डाइट में विटामिन ई के स्रोत शामिल करें। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें!

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

विटामिन ई की कमी से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?

विटामिन ई की गंभीर कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, चलने में संतुलन की कमी (एटैक्सिया), दृष्टि दोष (रेटिनोपैथी) और नसों में कमजोरी (पेरिफेरल न्यूरोपैथी) जैसी बीमारियां हो सकती हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर कर देता है।

क्या विटामिन ई की कमी से त्वचा और बाल प्रभावित होते हैं?

हां, बिल्कुल। विटामिन ई की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है, साथ ही समय से पहले झुर्रियां आ सकती हैं। बाल के झड़ने और स्कैल्प के स्वास्थ्य में गिरावट का एक मुख्य कारण विटामिन ई का निम्न स्तर होना है।

विटामिन ई किन खाद्य पदार्थों में पाया जाता है?

यह मुख्य रूप से बादाम, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, पालक, ब्रोकोली, एवोकाडो और वनस्पति तेलों (जैसे गेहूं के बीज का तेल) में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

क्या विटामिन ई सप्लीमेंट लेना जरूरी होता है?

ज्यादातर लोग संतुलित आहार से इसकी पूर्ति कर लेते हैं। हालांकि, जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट की आवश्यकता हो सकती है। बिना परामर्श के सप्लीमेंट लेना हानिकारक हो सकता है।

क्या बच्चों में भी विटामिन ई की कमी हो सकती है?

हां, विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (Premature) बच्चों में इसकी कमी देखी जाती है। बच्चों में इसकी कमी से 'हेमोलीटिक एनीमिया' हो सकता है, जिससे उनकी लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं।

विटामिन ई की कमी को दूर होने में कितना समय लगता है?

यह कमी की गंभीरता पर निर्भर करता है। सही आहार और सप्लीमेंटेशन के साथ आमतौर पर कुछ हफ्तों से लेकर 2-3 महीनों के भीतर लक्षणों में सुधार दिखने लगता है।

क्या गर्भावस्था में विटामिन ई लेना सुरक्षित है?

गर्भावस्था में विटामिन ई महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा जोखिम भरी हो सकती है। हमेशा अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही प्रसव पूर्व विटामिन का सेवन करें।

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