
बिना कारण थकान महसूस करना, त्वचा की चमक का खो जाना या मांसपेशियों में कमजोरी कुछ ऐसे लक्षण है, जो बताते हैं कि शरीर में कुछ आवश्यक विटामिन की कमजोरी है। अक्सर लोग विटामिन सी और डी पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन विटामिन ई जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व को नजरअंदाज कर देते हैं। शरीर में विटामिन ई की कमी होना किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है, क्योंकि यह विटामिन हमारे शरीर की कोशिकाओं को 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' से बचाने वाला सबसे प्रमुख सुरक्षा कवच है।
विटामिन ई के फायदे केवल आपकी सुंदरता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आपके हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी अनिवार्य है। समय रहते विटामिन ई की कमी के लक्षण पहचानना और विटामिन ई की कमी को कैसे दूर करें, यह समझना आपकी जीवनशैली को पूरी तरह बदल सकता है। यदि आप किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहे हैं, और आपको समझ नहीं आ रहा है कि इसके पीछे का कारण क्या है, तो बिना देर किए हमारे इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर से परामर्श लें।
विटामिन ई (Alpha-tocopherol) एक फैट में घुलने वाला (fat-soluble) विटामिन है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। हमारे शरीर में अरबों कोशिकाएं हैं, और जो हर पल मुक्त कणों (free radicals) से लड़ती हैं। विटामिन ई इन कोशिकाओं की बाहरी परत को सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे हमारा शरीर रोग से मुक्त रहे।
इसके निम्न कारण हो सकते हैं जैसे कि -
आमतौर पर स्वस्थ लोगों में इसकी कमी कम देखी जाती है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियां विटामिन ई की कमी का कारण बनती हैं जैसे कि -
यदि आपके शरीर में विटामिन ई की कमी हो रही है, तो हमें निम्न संकेत देखने को मिल सकते हैं -
यदि लंबे समय तक इस पर ध्यान न दिया जाए, तो विटामिन ई की कमी से रोग गंभीर रूप ले सकते हैं -
अच्छी खबर यह है कि आप अपने खानपान में बदलाव करके आसानी से इस कमी को पूरा कर सकते हैं। विटामिन ई खाद्य पदार्थ न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि सेहत से भरपूर भी होते हैं। चलिए इस टेबल की मदद से समझने का प्रयास करते हैं कि आपको क्या और क्यों खाना चाहिए -
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खाद्य पदार्थ |
क्यों खाएं? |
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बादाम और सूरजमुखी के बीज |
यह विटामिन ई के स्रोत में सबसे ऊपर आते हैं। बस एक मुट्ठी बादाम आपकी दैनिक जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा कर सकते हैं। इसलिए इसे अपने आहार में हमेशा शामिल करें। |
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पालक और ब्रोकोली |
हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन के साथ-साथ विटामिन ई का भी खजाना है। रोजाना दिन में एक बार इसका सेवन करें। |
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वनस्पति तेल |
सूरजमुखी का तेल, गेहूं के बीज का तेल (Wheat germ oil) और जैतून का तेल (ऑलिव ऑयल) बेहतरीन विकल्प हैं। |
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एवोकाडो |
इसमें स्वस्थ फैट होते हैं, जो विटामिन ई के अवशोषण में मदद करते हैं। |
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मूंगफली |
यह एक किफायती और प्रभावी विटामिन ई के खाद्य पदार्थ हैं। |
आपको समझ आ गया होगा कि विटामिन ई की कमी में क्या खाना चाहिए? इस बात का खास ध्यान रखें कि आप अपनी डाइट में रोजाना भीगे हुए बादाम, अखरोट और कद्दू के बीजों को शामिल ज़रूर करें। खाना पकाने के लिए रिफाइंड तेल की जगह कच्ची घानी या कोल्ड-प्रेस्ड तेलों का इस्तेमाल भी आप कर सकते हैं।
बाजार में विटामिन ई का उपयोग सप्लीमेंट के तौर पर बहुत लोकप्रिय है, लेकिन क्या यह हमेशा सुरक्षित है? चलिए इस कैप्सूल को खाने के फायदे और नुकसान दोनों को सरल भाषा में समझते हैं -
इसलिए, हमेशा विटामिन ई कैप्सूल खाने के फायदे और नुकसान को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से परामर्श के बाद ही इसे शुरू करें।
अभी तक हमने उन सभी विकल्पों के बारे में बात कर ली है, जिनकी मदद से आप अपने शरीर में विटामिन ई की कमी को दूर कर सकते हैं। हालांकि कुछ व्यावहारिक सुझाव भी हैं, जिनका पालन कर आप अपने शरीर में विटामिन ई की कमी को ठीक कर सकते हैं, जैसे कि -
यह सभी अच्छी आदतें हैं, जिन्हें आप अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकते हैं, जिनसे आपको बहुत मदद मिलने वाली है।
विटामिन ई की कमी को नजरअंदाज करना आपके भविष्य के स्वास्थ्य के साथ समझौता करने जैसा है। विटामिन ई की कमी को ठीक करने की कवायद आपके रसोई से ही शुरू हो सकती है। इसलिए यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो सप्लीमेंट लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें, क्योंकि हो सकता है कि आपको दवा की नहीं सही मार्गदर्शन की आवश्यकता हो। एक छोटा सा बदलाव आपकी उम्र और ऊर्जा दोनों को बढ़ा सकता है।
अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और आज ही अपनी डाइट में विटामिन ई के स्रोत शामिल करें। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें!
विटामिन ई की गंभीर कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, चलने में संतुलन की कमी (एटैक्सिया), दृष्टि दोष (रेटिनोपैथी) और नसों में कमजोरी (पेरिफेरल न्यूरोपैथी) जैसी बीमारियां हो सकती हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर कर देता है।
हां, बिल्कुल। विटामिन ई की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है, साथ ही समय से पहले झुर्रियां आ सकती हैं। बाल के झड़ने और स्कैल्प के स्वास्थ्य में गिरावट का एक मुख्य कारण विटामिन ई का निम्न स्तर होना है।
यह मुख्य रूप से बादाम, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, पालक, ब्रोकोली, एवोकाडो और वनस्पति तेलों (जैसे गेहूं के बीज का तेल) में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
ज्यादातर लोग संतुलित आहार से इसकी पूर्ति कर लेते हैं। हालांकि, जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट की आवश्यकता हो सकती है। बिना परामर्श के सप्लीमेंट लेना हानिकारक हो सकता है।
हां, विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (Premature) बच्चों में इसकी कमी देखी जाती है। बच्चों में इसकी कमी से 'हेमोलीटिक एनीमिया' हो सकता है, जिससे उनकी लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं।
यह कमी की गंभीरता पर निर्भर करता है। सही आहार और सप्लीमेंटेशन के साथ आमतौर पर कुछ हफ्तों से लेकर 2-3 महीनों के भीतर लक्षणों में सुधार दिखने लगता है।
गर्भावस्था में विटामिन ई महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा जोखिम भरी हो सकती है। हमेशा अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही प्रसव पूर्व विटामिन का सेवन करें।
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