किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण: इन्हें न करें नज़रअंदाज़
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किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण: इन्हें न करें नज़रअंदाज़

Oncology | by Dr. Subrata Saha on 20/11/2025

Summary

पेशाब में खून और बाजू में दर्द किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण है, जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। भारत में यह रोग बढ़ रहा है और अक्सर देर से पता चलता है। सर्जरी, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी से इसका प्रभावी इलाज संभव है। समय पर विशेषज्ञ परामर्श जीवन बचा सकता है।

वर्तमान में, जब स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं, तो शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना जीवन बचाने वाला कदम साबित हो सकता है। आपके मिलने वाले संकेत बताते हैं कि आपको किस प्रकार की समस्या है। आज हम ऐसे ही एक गंभीर समस्या के बारे में बात करने वाले हैं, जो है - किडनी कैंसर या गुर्दे का कैंसर। किडनी कैंसर एक ऐसी गंभीर चुनौती है, जो चुपके से शुरू होती है, लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो इसका सफल इलाज संभव है, अन्यथा यह व्यक्ति की जान भी ले सकती है। 

ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी (GLOBOCAN) के अनुमानों के अनुसार, 2022 में भारत में लगभग 17,480 नए किडनी कैंसर के मामले सामने आए थे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में यह रोग अक्सर कम उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है और इसका निदान भी एडवांस स्टेज में होता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है, जो इस स्थिति को और भी ज्यादा गंभीर बनाता है।

यदि आप अपने शरीर में कोई भी असामान्यता महसूस करते हैं, तो उसे नजरअंदाज न करें। एक तत्काल जांच आपको और आपके परिवार को मानसिक शांति और बेहतर इलाज का मौका दे सकती है। इसके लिए अभी हमारे विशेषज्ञों से जांच कराएं।

किडनी कैंसर क्या है?

किडनी कैंसर वह स्थिति है, जहाँ गुर्दे/किडनी की कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, जिससे ट्यूमर बन जाता है। गुर्दे का मुख्य काम रक्त को छानना, अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को हटाना और मूत्र बनाना है।

जब इन कोशिकाओं में कैंसर विकसित होता है, तो यह अक्सर रीनल सेल कार्सिनोमा के रूप में होता है, जो वयस्कों में सबसे आम प्रकार है, जिसे हम किडनी कैंसर भी कह सकते हैं।

किडनी कैंसर के मुख्य प्रकार:

  • रीनल सेल कार्सिनोमा (RCC): यह वयस्कों में सबसे आम (90-95%), जो गुर्दे की छोटी नलिकाओं की परत बनाने वाली कोशिकाओं में शुरू होता है।
  • ट्रांजिशनल सेल कार्सिनोमा (TCC): यह कैंसर गुर्दे के पेल्विस (वह क्षेत्र जहाँ मूत्र इकट्ठा होता है) में शुरू होता है।
  • विल्म्स ट्यूमर (Wilms' Tumor): यह मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाने वाला किडनी का कैंसर है।

कारण और जोखिम कारक

हालांकि, किडनी कैंसर का सटीक कारण हमेशा ज्ञात नहीं होता है, लेकिन कुछ कारक ऐसे हैं, जो किसी व्यक्ति में इस बीमारी के विकसित होने के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं जैसे कि - 

परिवर्तनीय जोखिम कारक:

  • धूम्रपान: यह गुर्दे का कैंसर होने का सबसे प्रमुख जोखिम कारक है। धूम्रपान करने वालों में यह खतरा, धूम्रपान न करने वालों की तुलना में लगभग दोगुना होता है।
  • मोटापा: अधिक वजन शरीर में हार्मोनल बदलाव और क्रोनिक सूजन पैदा करता है, जिससे किडनी में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): अनियंत्रित उच्च रक्तचाप किडनी कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। 
  • हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आना: कैडमियम, एस्बेस्टोस, और कुछ औद्योगिक रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों में जोखिम बढ़ जाता है।

अपरिवर्तनीय (Non-Modifiable) जोखिम कारक

  • उम्र (Age): आमतौर पर यह समस्या 50 से 70 वर्ष की आयु के लोगों में अधिक देखी जाती है। हालांकि अब यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन उम्र एक बहुत अहम योगदान देता है।
  • लिंग (Gender): पुरुषों में गुर्दे का कैंसर होने की संभावना महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना होती है।
  • फैमिली मेडिकल हिस्ट्री और जेनेटिक सिंड्रोम: जैसे वॉन हिप्पेल-लिंडौ सिंड्रोम (VHL), जो इस खतरे को काफी बढ़ा देते हैं।
  • क्रोनिक किडनी डिजीज और डायलिसिस: लंबे समय तक डायलिसिस पर रहने वाले लोगों में खतरा अधिक होता है।

किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण: इन्हें न करें नजरअंदाज

किडनी कैंसर को अक्सर "साइलेंट किलर" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि शुरुआती चरणों में यह आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता है। इसलिए, जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसका मतलब हो सकता है कि ट्यूमर बड़ा हो गया है या फैलना शुरू हो गया है। चलिए किडनी कैंसर के मुख्य एवं शुरुआती लक्षणों को समझते हैं - 

  1. पेशाब में खून आना (Hematuria): यह किडनी कैंसर का सबसे आम और शुरुआती संकेत है। इसमें मूत्र का रंग हल्का गुलाबी, लाल, या भूरा (जैसे कोका-कोला) दिखाई दे सकता है। कभी-कभी, रक्त इतना कम होता है कि वह केवल माइक्रोस्कोप से ही पता चल पाता है, जिसे मेडिकल भाषा में माइक्रोस्कोपिक हेमाट्यूरिया कहा जाता है। पेशाब में खून आना UTI या किडनी स्टोन का भी लक्षण हो सकता है, लेकिन इसे हल्के में न लें और तुरंत विशेषज्ञ से मिलें।
  2. पीठ या बाजू में लगातार दर्द (Persistent Flank or Back Pain): पेट के बाजू वाले हिस्से (Flank) या पीठ के निचले भाग में, जो दर्द लगातार बना रहता है और किसी चोट से संबंधित नहीं है। यह दर्द अक्सर उस तरफ होता है, जहां कैंसर होता है और यह बढ़ते ट्यूमर के दबाव के कारण हो सकता है।
  3. पेट या बगल में गांठ या द्रव्यमान (Lump or Mass): कभी-कभी, खासकर दुबले-पतले लोगों में पेट के बाजू या बगल में छूने पर एक गांठ महसूस हो सकती है। यह ट्यूमर का शारीरिक रूप से बड़ा हो जाना दर्शाता है।

अन्य संभावित लक्षण

  • बिना कारण वजन घटना: यदि बिना किसी डाइट या प्रयास के आपका वजन अचानक कम हो रहा है।
  • लगातार थकान और एनीमिया (खून की कमी): गुर्दे के कैंसर से क्रोनिक रक्त हानि या हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे गंभीर थकान महसूस होती है।
  • बार-बार बुखार आना: ऐसा बुखार जो किसी स्पष्ट संक्रमण से जुड़ा न हो और जो बना रहता हो।
  • टखनों और पैरों में सूजन (Edema): यदि ट्यूमर प्रमुख रक्त वाहिकाओं (वेना कावा) में दबाव डालता है।

यदि आप या आपके प्रियजन इनमें से कोई भी किडनी में कैंसर होने के लक्षण अनुभव करते हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि आप तत्काल इलाज के लिए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।

किडनी की समस्या के जांच के तरीके

किडनी कैंसर का निदान अक्सर तब होता है, जब रोगी किसी अन्य कारण से पेट का स्कैन करवाते हैं। जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो सटीक निदान के लिए कई परीक्षणों का उपयोग किया जाता है जैसे कि - 

  • शारीरिक परीक्षण और मेडिकल हिस्ट्री की जांच
  • मूत्र परीक्षण में सैंपल में रक्त और असामान्य कोशिकाओं की जांच की जाती है।
  • गुर्दे के कार्य (क्रिएटिनिन) और एनीमिया की जांच के लिए ब्लड टेस्ट की आवश्यकता पड़ती है।
  • सीटी स्कैन सबसे आम और विस्तृत इमेजिंग टेस्ट है। यह ट्यूमर के आकार, स्थान और फैलाव (मेटास्टेसिस) की सीमा को स्पष्ट रूप से दिखाता है। वहीं अल्ट्रासाउंड की मदद से पहचाना जाता है कि जमाव ठोस है (ट्यूमर) या तरल से भरा है (सिस्ट)। इसके अतिरिक्त एमआरआई (MRI) का उपयोग अधिक विस्तृत चित्र प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
  • कैंसर के प्रकार की निश्चित पहचान के लिए ट्यूमर से ऊतक का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है, यह अक्सर इमेजिंग मार्गदर्शन के तहत किया जाता है। इस टेस्ट को बायोप्सी कहा जाता है।

उपचार के विकल्प

किडनी कैंसर के उपचार की योजना कैंसर के चरण, प्रकार और रोगी के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। हम इलाज के लिए सबसे आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं। चलिए किडनी कैंसर के इलाज के सभी विकल्पों को जानते हैं - 

  • सर्जरी (Surgery) - प्राथमिक उपचार: सर्जरी कैंसर को हटाने का सबसे आम और प्रभावी तरीका है। किडनी के कैंसर के इलाज के लिए अलग-अलग प्रकार की सर्जरी होती है, जिसे इस टेबल की मदद से समझाने का प्रयास किया गया है - 

प्रकार

विवरण

उपयोग

पार्शियल नेफ्रेक्टोमी

इस सर्जरी के बाद केवल ट्यूमर और उसके चारों ओर के कुछ स्वस्थ ऊतक को हटाया जाता है।

छोटे ट्यूमर (स्टेज 1) के लिए और गुर्दे को बचाने के लिए इस प्रक्रिया का सुझाव दिया जाता है।

रेडिकल नेफ्रेक्टोमी

पूरे गुर्दे पर इस सर्जरी की जाती है और इसमें एड्रेनल ग्लैंड और कभी-कभी लिम्फ नोड्स को भी हटाया जाता है।

बड़े ट्यूमर (स्टेज 2 और 3) के लिए इस टेस्ट का सुझाव दिया जाता है।

रोबोटिक/लेप्रोस्कोपिक

छोटे चीरों के माध्यम से मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया के तहत इस सर्जरी को किया जाता है।

बेहतर परिणाम, कम दर्द, और तेज रिकवरी के लिए इस टेस्ट को कराया जाता है।

  • फोकल या एब्लेशन थेरेपी: यह उन रोगियों के लिए एक अच्छा विकल्प है, जो सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं हैं या जिनके ट्यूमर बहुत छोटे हैं। इसे दो तरीकों से किया जाता है - क्रायो एब्लेशन और रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA)। क्रायो एब्लेशन में अत्यधिक ठंडी गैसों का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को जमा कर नष्ट किया जाता है। वहीं रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) रेडियो तरंगों का उपयोग करके गर्मी उत्पन्न करके कैंसर की कोशिकाओं को मारा जाता है।
  • सिस्टेमिक ट्रीटमेंट: एडवांस कैंसर के लिए इस प्रकार के इलाज की आवश्यकता होती है। यह उपचार पूरे शरीर में काम करता है, जो स्टेज 4 या मेटास्टेटिक किडनी कैंसर के इलाज के लिए महत्वपूर्ण है। सबसे पहले टारगेटेड थेरेपी ऐसा ही एक उपचार है। इसमें दवाएं कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करने वाले विशिष्ट अणुओं को ब्लॉक करती हैं। गुर्दे का कैंसर अक्सर पारंपरिक कीमोथेरेपी के प्रति प्रतिरोधी होता है। वहीं दूसरी तरफ इम्यूनोथेरेपी/जैविक चिकित्सा जो रोगी की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रोत्साहित करता है। 
  • विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy): इसका उपयोग मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, खासकर जब कैंसर हड्डियों या मस्तिष्क में फैल गया हो।

जीवनशैली और देखभाल

जीवनशैली और देखभाल से हम इस स्थिति को उत्पन्न ही नहीं होने दे सकते हैं। चलिए समझते हैं कैसे - 

  • धूम्रपान छोड़ना: किडनी कैंसर के जोखिम को कम करने का यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है सिगरेट और शराब को छोड़ना।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखना: संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से मोटापे को नियंत्रित करें और किडनी के साथ-साथ लिवर की समस्या से भी बचें।
  • रक्तचाप और मधुमेह का प्रबंधन: अपने उच्च रक्तचाप और मधुमेह को डॉक्टर की सलाह से सख्ती से नियंत्रित रखें।
  • नियमित जांच और स्क्रीनिंग: यदि आपके परिवार में किडनी कैंसर का मेडिकल हिस्ट्री है, तो नियमित जांच के लिए यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट (यूरोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट) से मिलें। समय पर स्क्रीनिंग शुरुआती चरण में रोग का पता लगाने में मदद कर सकती है।

निष्कर्ष

किडनी कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यह जानना आवश्यक है कि शुरुआती पहचान और चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण इसके उपचार और ठीक होने की दर में जबरदस्त सुधार हुआ है। सीएमआरआई (CMRI) में, हमारी मल्टीडिसीप्लिनरी टीम रोबोटिक सर्जरी और नवीन इम्यूनोथेरेपी सहित अत्याधुनिक उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। रोकथाम और जागरूकता ही सबसे शक्तिशाली हथियार है, इसलिए अभी परामर्श लें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या किडनी कैंसर का इलाज संभव है?

हां, बिल्कुल संभव है। यदि इसका पता पहले चरण में चल जाए, तो सर्जरी और उन्नत उपचारों जैसे कि रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से पूर्ण रूप से ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

किडनी कैंसर का इलाज क्या है?

मुख्य इलाज सर्जरी है जैसे कि आंशिक या रेडिकल नेफ्रेक्टोमी। एडवांस चरणों में इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, और कभी-कभी रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है।

किडनी कैंसर के क्या लक्षण है?

सबसे आम लक्षण हैं, पेशाब में खून आना (Hematuria), बाजू या पीठ में लगातार दर्द, और पेट या बाजू में गांठ महसूस होना।

किडनी कैंसर कैसे होता है?

यह तब होता है, जब गुर्दे की कोशिकाओं के DNA में बदलाव होता है। धूम्रपान, मोटापा, उच्च रक्तचाप और आनुवंशिक कारक इसके प्रमुख जोखिम हैं।

क्या उच्च रक्तचाप से गुर्दे का कैंसर हो सकता है?

हां, उच्च रक्तचाप एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। अनियंत्रित हाई बीपी गुर्दे पर दबाव डालता है, जिससे गुर्दे का कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

Written and Verified by:

Dr. Subrata Saha

Dr. Subrata Saha

Consultant - Oncologist Exp: 42 Yr

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Dr. Subrata Saha is a Consultant Oncologist in Clinical Oncology at CMRI, Kolkata with over 41 years of experience. He specializes in comprehensive cancer care, combining medical oncology and advanced fellowship training to manage and treat a wide range of malignancies.

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