
पेशाब में खून और बाजू में दर्द किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण है, जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। भारत में यह रोग बढ़ रहा है और अक्सर देर से पता चलता है। सर्जरी, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी से इसका प्रभावी इलाज संभव है। समय पर विशेषज्ञ परामर्श जीवन बचा सकता है।
वर्तमान में, जब स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं, तो शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना जीवन बचाने वाला कदम साबित हो सकता है। आपके मिलने वाले संकेत बताते हैं कि आपको किस प्रकार की समस्या है। आज हम ऐसे ही एक गंभीर समस्या के बारे में बात करने वाले हैं, जो है - किडनी कैंसर या गुर्दे का कैंसर। किडनी कैंसर एक ऐसी गंभीर चुनौती है, जो चुपके से शुरू होती है, लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए, तो इसका सफल इलाज संभव है, अन्यथा यह व्यक्ति की जान भी ले सकती है।
ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी (GLOBOCAN) के अनुमानों के अनुसार, 2022 में भारत में लगभग 17,480 नए किडनी कैंसर के मामले सामने आए थे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में यह रोग अक्सर कम उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है और इसका निदान भी एडवांस स्टेज में होता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है, जो इस स्थिति को और भी ज्यादा गंभीर बनाता है।
यदि आप अपने शरीर में कोई भी असामान्यता महसूस करते हैं, तो उसे नजरअंदाज न करें। एक तत्काल जांच आपको और आपके परिवार को मानसिक शांति और बेहतर इलाज का मौका दे सकती है। इसके लिए अभी हमारे विशेषज्ञों से जांच कराएं।
किडनी कैंसर वह स्थिति है, जहाँ गुर्दे/किडनी की कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, जिससे ट्यूमर बन जाता है। गुर्दे का मुख्य काम रक्त को छानना, अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को हटाना और मूत्र बनाना है।
जब इन कोशिकाओं में कैंसर विकसित होता है, तो यह अक्सर रीनल सेल कार्सिनोमा के रूप में होता है, जो वयस्कों में सबसे आम प्रकार है, जिसे हम किडनी कैंसर भी कह सकते हैं।
किडनी कैंसर के मुख्य प्रकार:
हालांकि, किडनी कैंसर का सटीक कारण हमेशा ज्ञात नहीं होता है, लेकिन कुछ कारक ऐसे हैं, जो किसी व्यक्ति में इस बीमारी के विकसित होने के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं जैसे कि -
किडनी कैंसर को अक्सर "साइलेंट किलर" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि शुरुआती चरणों में यह आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता है। इसलिए, जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसका मतलब हो सकता है कि ट्यूमर बड़ा हो गया है या फैलना शुरू हो गया है। चलिए किडनी कैंसर के मुख्य एवं शुरुआती लक्षणों को समझते हैं -
यदि आप या आपके प्रियजन इनमें से कोई भी किडनी में कैंसर होने के लक्षण अनुभव करते हैं, तो हम आपको सलाह देंगे कि आप तत्काल इलाज के लिए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।
किडनी कैंसर का निदान अक्सर तब होता है, जब रोगी किसी अन्य कारण से पेट का स्कैन करवाते हैं। जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो सटीक निदान के लिए कई परीक्षणों का उपयोग किया जाता है जैसे कि -
किडनी कैंसर के उपचार की योजना कैंसर के चरण, प्रकार और रोगी के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। हम इलाज के लिए सबसे आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं। चलिए किडनी कैंसर के इलाज के सभी विकल्पों को जानते हैं -
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प्रकार |
विवरण |
उपयोग |
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पार्शियल नेफ्रेक्टोमी |
इस सर्जरी के बाद केवल ट्यूमर और उसके चारों ओर के कुछ स्वस्थ ऊतक को हटाया जाता है। |
छोटे ट्यूमर (स्टेज 1) के लिए और गुर्दे को बचाने के लिए इस प्रक्रिया का सुझाव दिया जाता है। |
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रेडिकल नेफ्रेक्टोमी |
पूरे गुर्दे पर इस सर्जरी की जाती है और इसमें एड्रेनल ग्लैंड और कभी-कभी लिम्फ नोड्स को भी हटाया जाता है। |
बड़े ट्यूमर (स्टेज 2 और 3) के लिए इस टेस्ट का सुझाव दिया जाता है। |
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रोबोटिक/लेप्रोस्कोपिक |
छोटे चीरों के माध्यम से मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया के तहत इस सर्जरी को किया जाता है। |
बेहतर परिणाम, कम दर्द, और तेज रिकवरी के लिए इस टेस्ट को कराया जाता है। |
जीवनशैली और देखभाल से हम इस स्थिति को उत्पन्न ही नहीं होने दे सकते हैं। चलिए समझते हैं कैसे -
किडनी कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यह जानना आवश्यक है कि शुरुआती पहचान और चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण इसके उपचार और ठीक होने की दर में जबरदस्त सुधार हुआ है। सीएमआरआई (CMRI) में, हमारी मल्टीडिसीप्लिनरी टीम रोबोटिक सर्जरी और नवीन इम्यूनोथेरेपी सहित अत्याधुनिक उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। रोकथाम और जागरूकता ही सबसे शक्तिशाली हथियार है, इसलिए अभी परामर्श लें।
हां, बिल्कुल संभव है। यदि इसका पता पहले चरण में चल जाए, तो सर्जरी और उन्नत उपचारों जैसे कि रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से पूर्ण रूप से ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है।
मुख्य इलाज सर्जरी है जैसे कि आंशिक या रेडिकल नेफ्रेक्टोमी। एडवांस चरणों में इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, और कभी-कभी रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है।
सबसे आम लक्षण हैं, पेशाब में खून आना (Hematuria), बाजू या पीठ में लगातार दर्द, और पेट या बाजू में गांठ महसूस होना।
यह तब होता है, जब गुर्दे की कोशिकाओं के DNA में बदलाव होता है। धूम्रपान, मोटापा, उच्च रक्तचाप और आनुवंशिक कारक इसके प्रमुख जोखिम हैं।
हां, उच्च रक्तचाप एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। अनियंत्रित हाई बीपी गुर्दे पर दबाव डालता है, जिससे गुर्दे का कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
Written and Verified by:

Dr. Subrata Saha is a Consultant Oncologist in Clinical Oncology at CMRI, Kolkata with over 41 years of experience. He specializes in comprehensive cancer care, combining medical oncology and advanced fellowship training to manage and treat a wide range of malignancies.
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