कैंसर की रोकथाम में वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं? किन टीकों से कम हो सकता है खतरा
Home >Blogs >कैंसर की रोकथाम में वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं? किन टीकों से कम हो सकता है खतरा

कैंसर की रोकथाम में वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं? किन टीकों से कम हो सकता है खतरा

Summary

  • कैंसर वैक्सीन दो तरह की होती हैं: प्रिवेंटिव जैसे कि HPV, हेपेटाइटिस B और थेरेप्यूटिक (पहले से मौजूद कैंसर के इलाज में मदद करने वाली)।
  • HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से 90% से ज्यादा सुरक्षा देती है।
  • भारत में हर साल लगभग 1.2 लाख नए सर्वाइकल कैंसर मामले सामने आते हैं।
  • हेपेटाइटिस B वैक्सीन को दुनिया की पहली 'एंटी-कैंसर' वैक्सीन कहा जाता है, यह लिवर कैंसर का खतरा करीब 70% तक घटा सकती है।
  • कोई भी वैक्सीन सभी तरह के कैंसर को नहीं रोक सकती, यह सिर्फ वायरस से जुड़े कैंसर पर असरदार है।
  • वैक्सीन के साथ नियमित स्क्रीनिंग, सेहतमंद जीवनशैली और समय पर जांच कैंसर से बचाव को पूरा बनाते हैं।

किसी अपने को कैंसर की खबर सुनना शायद सबसे भारी पलों में से एक होता है। यही वह डर होता है, जो पूरे परिवार को हिला देता है। लेकिन क्या हो अगर कैंसर के कुछ सबसे जानलेवा प्रकारों को आने से पहले ही रोका जा सके, सिर्फ एक टीके की मदद से? 

यह बात सुनने में जितनी उम्मीद जगाती है, उतनी ही वैज्ञानिक रूप से सच भी है। पिछले कुछ सालों में मेडिकल साइंस ने यह साबित किया है कि कैंसर की रोकथाम अब सिर्फ जांच और इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि वैक्सीन इसमें एक मजबूत हथियार बनकर उभरी है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि कैंसर वैक्सीन असल में काम कैसे करती है, किन टीकों से किस तरह के कैंसर का खतरा घटता है, और इनकी सीमाएं क्या हैं। यदि आप या आपके परिवार में कोई कैंसर से बचाव के सही तरीके जानना चाहता है, तो देर न करें, CMRI कोलकाता के अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें।

क्या वैक्सीन से कैंसर की रोकथाम संभव है?

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उलझन पैदा करता है, क्योंकि आम धारणा यही है कि वैक्सीन सिर्फ फ्लू या पोलियो जैसी बीमारियों के लिए होती है। सच यह है कि कैंसर वैक्सीन दो तरह की होती हैं, प्रिवेंटिव (रोकथाम वाली) और थेरेप्यूटिक (इलाज में मदद करने वाली)। 

रोकथाम वाली वैक्सीन उन वायरस से बचाव करती है, जो शरीर में लंबे समय तक रहकर कोशिकाओं को असामान्य बना देते हैं और आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेते हैं। यानी यह सीधे कैंसर को नहीं रोकती, बल्कि उस वायरल संक्रमण को रोकती है, जो कैंसर की जड़ बनता है या उसे ट्रिगर करता है। 

दूसरी तरफ थेरेप्यूटिक वैक्सीन उन मरीजों के लिए बनाई जाती हैं, जिन्हें पहले से कैंसर है और यह वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर नष्ट करने के लिए ट्रेन करती है। मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर जैसे बड़े संस्थानों के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसरब्लैडर कैंसर और मेलानोमा के लिए ऐसी कुछ थेरेप्यूटिक वैक्सीन को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि पैनक्रिएटिक और फेफड़ों के कैंसर के लिए mRNA आधारित वैक्सीन पर अभी रिसर्च चल रही है।

कौन-सी वैक्सीन कैंसर का खतरा कम कर सकती है या इसका इलाज कर सकती है?

vaccines which can reduce the risk of cancer

क्या कोई ऐसी वैक्सीन है जो कैंसर को रोक सके?" हमारी ओपीडी (OPD) में अक्सर मरीज यह सवाल पूछते हैं। राहत की बात यह है कि विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि आज हमारे पास कैंसर से बचाने वाली और कैंसर का इलाज करने वाली, दोनों तरह की वैक्सीन मौजूद हैं।

आइए इसे आसान और सही भाषा में समझते हैं:

प्रिवेंटिव वैक्सीन (कैंसर से बचाने वाली वैक्सीन)

ये वैक्सीन किसी व्यक्ति को कैंसर पैदा करने वाले वायरस से संक्रमित होने से पहले दी जाती हैं, ताकि भविष्य में कैंसर का खतरा टाला जा सके।

  • एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine) -सर्वाइकल कैंसर से बचाव: सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन आज सबसे भरोसेमंद नाम है। HPV एक बेहद आम वायरस है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने पर सर्वाइकल कैंसर के अलावा गले, मुंह और अन्य अंगों के कैंसर का कारण बन सकता है। भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के करीब 1.2 लाख नए मामले सामने आते हैं और लगभग 80,000 महिलाओं की इससे मौत हो जाती है।

नोट: 9 से 14 साल की उम्र में (संक्रमण के खतरे से पहले) लगने वाली यह वैक्सीन HPV टाइप 16 और 18 के खिलाफ 90% से ज़्यादा असरदार है। 

  • हेपेटाइटिस B वैक्सीन (Hepatitis B) - लिवर कैंसर से बचाव: इसे अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दुनिया की पहली 'एंटी-कैंसर' वैक्सीन का दर्जा दिया है। हेपेटाइटिस B वायरस लिवर में लंबे समय तक रहकर सिरोसिस और अंततः लिवर कैंसर की वजह बनता है। एक बड़े रिसर्च के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद यह वैक्सीन लगवाने वाले बच्चों में आगे चलकर लिवर कैंसर का खतरा 70% तक कम हो जाता है, और यह सुरक्षा दशकों तक बनी रहती है।

थेराप्यूटिक वैक्सीन (कैंसर का इलाज करने वाली वैक्सीन)

ये वैक्सीन उन लोगों को दी जाती हैं, जिन्हें पहले से कैंसर है। यह कोई आम वैक्सीन नहीं है; यह मरीज के इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को ट्रेनिंग देती है ताकि वह कैंसर सेल्स को पहचान कर उन्हें नष्ट किया जा सके।

  • बीसीजी वैक्सीन (BCG - Bacillus Calmette-Guérin): वैसे तो यह टीबी (TB) से बचाव की जानी-मानी वैक्सीन है, लेकिन इसका इस्तेमाल शुरुआती स्टेज के ब्लैडर कैंसर (Bladder Cancer) के इलाज में बेहद सफलतापूर्वक किया जाता है। 
  • सिप्युलेसेल-टी (Sipuleucel-T / Provenge): यह एडवांस प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन है। इसे मरीज के खुद के ब्लड सेल्स (White blood cells) को निकालकर लैब में मॉडिफाई करके बनाया जाता है, और फिर वापस मरीज के शरीर में चढ़ाया जाता है ताकि शरीर प्रोस्टेट कैंसर सेल्स से लड़ सके।
  • टी-वेक (T-VEC / Imlygic): यह मेलानोमा (एक प्रकार का गंभीर स्किन कैंसर) के इलाज के लिए है। यह वैक्सीन एक मॉडिफाइड हर्पीस वायरस से बनती है, जिसे सीधे ट्यूमर के अंदर इंजेक्ट किया जाता है। यह कैंसर सेल्स को फाड़कर नष्ट कर देती है।

कैंसर से बचाव में वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं और उनकी क्या सीमाएं हैं?

एचपीवी और हेपेटाइटिस B वैक्सीन जैसी रोकथाम वाली वैक्सीन की सफलता दर वाकई प्रभावशाली है, लेकिन इन्हें समझना ज़रूरी है। यह वैक्सीन सिर्फ उन कैंसर से बचाती हैं जो किसी वायरस के कारण होते हैं, यानी यह हर तरह के कैंसर की गारंटी नहीं देती। इसके अलावा वैक्सीन का असर सबसे ज्यादा तब होता है जब इसे संक्रमण होने से पहले, यानी कम उम्र में लगवाया जाए। जिन लोगों को पहले से HPV या हेपेटाइटिस B संक्रमण हो चुका है, उनमें वैक्सीन का फायदा सीमित रह जाता है। थेरेप्यूटिक वैक्सीन की भी अपनी चुनौतियां हैं, कैंसर कोशिकाएं कई बार इम्यून सिस्टम को चकमा देने के तरीके ढूंढ लेती हैं, जिससे वैक्सीन का असर कम हो जाता है, खासकर बड़े ट्यूमर के मामलों में। इसलिए डॉक्टर हमेशा वैक्सीन को बचाव की एक कड़ी मानते हैं, पूरा समाधान नहीं।

कैंसर का खतरा कम करने के लिए वैक्सीन के सानियमितथ कौन से अन्य बचाव के उपाय अपनाने चाहिए?

वैक्सीन अकेले पूरी सुरक्षा नहीं दे सकती, इसलिए जीवनशैली और जांच उतनी ही जरूरी हैं। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक सक्रियता और शराब का सीमित सेवन, ये आदतें कई तरह के कैंसर का खतरा घटाती हैं। महिलाओं के लिए नियमित पैप स्मीयर और HPV DNA टेस्ट सर्वाइकल कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ने में मदद करते हैं, भले ही वैक्सीन लग चुकी हो। इसी तरह लिवर की सेहत के लिए नियमित लिवर फंक्शन टेस्ट फायदेमंद है। 

निष्कर्ष

कैंसर की रोकथाम में वैक्सीन ने पिछले कुछ सालों में जो रास्ता खोला है, वह वाकई उम्मीद जगाने वाला है, खासकर HPV और हेपेटाइटिस B वैक्सीन ने लाखों जिंदगियां बचाई हैं। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि वैक्सीन एक मजबूत ढाल है, पूरा किला नहीं। वैज्ञानिक अब उन कैंसर के लिए भी वैक्सीन विकसित कर रहे हैं जो सीधे किसी वायरस से नहीं जुड़े हैं, जैसे कि पैंक्रियाज, फेफड़े, और कोलोरेक्टल कैंसर। इनमें मरीज के ट्यूमर के जेनेटिक्स के हिसाब से बनाई गई पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन (Personalized mRNA vaccines) शामिल हैं, जो अभी क्लिनिकल ट्रायल के दौर में काफी सकारात्मक नतीजे दे रही हैं।

CMRI कोलकाता में मरीजों को अक्सर हम एक कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ चेकअप की सलाह देते हैं, जिसमें हार्ट स्क्रीनिंग के साथ-साथ कैंसर से जुड़ी ज़रूरी जांचें भी शामिल होती हैं, ताकि एक ही विज़िट में पूरी तस्वीर सामने आ सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हां, HPV सिर्फ महिलाओं को नहीं बल्कि पुरुषों को भी गले, मुंह और जननांग से जुड़े कैंसर के खतरे में डालता है। लड़कों को वैक्सीन लगवाने से संक्रमण फैलने की चेन भी टूटती है, इसलिए डॉक्टर इसे दोनों के लिए सुझाते हैं।

Written and Verified by:

Dr. Chanchal Goswami

Dr. Chanchal Goswami

Consultant - Oncologist Exp: 43 Yr

Oncology

Book an Appointment

Dr. Chanchal Goswami is a Consultant in Oncology at CMRI Hospital, Kolkata with over 36 years of experience. He specializes in breast, thoracic, head & neck, and genitourinary cancers, with expertise in both radiation and radiotherapy care.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

Oncology Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now