Breast Cancer Awareness Month 2025: स्वयं जाँच से स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान
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Breast Cancer Awareness Month 2025: स्वयं जाँच से स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान

Medical Oncology | by Dr. Anukriti Sood on 15/10/2025 | Last Updated : 29/10/2025

Summary

ब्रेस्ट कैंसर Awareness Month में स्वयं जांच के महत्व को समझना बेहद आवश्यक है। नियमित जांच से समय पर ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण पहचाने जा सकते हैं, जिससे कैंसर जैसे जानलेवा स्थिति को भी आसानी से टाला जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और बदलाव दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है, खासकर Breast Cancer Awareness Month के अवसर पर हम लोगों की जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। यही वह अवसर है, जब हमें ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर समस्या के संबंध में अधिक जागरुक्ता देखने को मिलती है। 

क्या आप जानते हैं कि सही तरीके से की गई स्वयं जांच (Self-Examination) ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में कितनी मददगार हो सकती है? इससे न सिर्फ समय पर इलाज संभव होता है, बल्कि जानलेवा बीमारी से बचने का एक सशक्त मौका भी बनता है। इसके अतिरिक्त हम भी आपको सलाह देंगे कि ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखने पर बिना देर किए एक अच्छे ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलें और इलाज के विकल्पों के बारे में उनसे बात करें।

ब्रेस्ट कैंसर क्या है? - What is Breast Cancer?

ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसा रोग है, जिसमें स्तन की कोशिकाएं असामान्य तरीके से तेजी से बढ़ने लगती हैं और इसके कारण स्तन में ही गांठ बन जाते हैं। यदि इस गांठ का इलाज समय पर नहीं होता है, तो यह कुछ समय में कैंसर की कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाते हैं। यह कैंसर महिलाओं के बीच सबसे सामान्य कैंसर है, और इसका खतरा उम्र बढ़ने के साथ अधिक होता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लगभग हर 8 में से 1 महिला को उनके जीवनकाल में ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना होती है। इसलिए इस स्थिति को पहचानना और स्थिति को पहचान कर तुरंत इलाज लेना बहुत ज्यादा मायने रखता है।

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों को समझना स्वयं जांच (Self-Examination) का एक स्पष्ट तरीका है। यदि आप लक्षणों को समझ लेते हैं, तो आप समय रहते स्थिति का आकलन कर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से खुद को बचा सकती है। ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं - 

  • ब्रेस्ट में गांठ या सूजन महसूस होना (ब्रेस्ट कैंसर गांठ की पहचान)
  • छाती के आकार या रंग में बदलाव होना।
  • त्वचा पर गड्ढे या खिंचाव होना।
  • निप्पल का स्राव या उसमें खून आना
  • निप्पल या आस-पास की त्वचा का रंग या बनावट बदलना

यदि इन लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

स्वयं जाँच (Self-Examination) क्यों जरूरी है?

ब्रेस्ट कैंसर की स्वयं जांच वह भी शुरुआती चरण में इसे पहचानने का सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है। कई लोग सोचते हैं कि केवल महंगे टेस्ट ही सही कैंसर की पुष्टि हो सकती है, लेकिन नियमित रूप से स्वयं जांच करने से कई बार शुरुआती बदलावों को पकड़ा जा सकता है।

इसके अलावा, स्वयं जांच से महिलाओं को अपने शरीर की बेहतर समझ होती है, जिससे वह किसी भी असामान्य बदलाव को जल्दी पहचान पाती हैं।

ब्रेस्ट कैंसर की सही तरीके से स्वयं जांच कैसे करें?

ब्रेस्ट कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्वयं जांच बेहद जरूरी है। इसे सही तरीके से करना जानना हर महिला के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वह किसी भी असामान्य बदलाव को जल्द पहचान सकें। नीचे दिए गए चरण सरल हैं, जिन्हें आप आसानी से घर पर कर सकते हैं - 

  • सबसे पहले, शीशे के सामने सीधे खड़े हो: इसमें शीशे के सामने सीधे खड़े होकर अपने दोनों हाथों को कमर पर रखें। इस स्थिति में, अपने स्तनों की आकृति, रंग और निप्पल की स्थिति को ध्यान से देखें। त्वचा में गड्डेदारपन, सूजन, या कोई असामान्य बदलाव जैसे कि निप्पल का अंदर की ओर खींचना ध्यान देने योग्य होते हैं। यह संकेत अक्सर सामान्य नहीं होते और इनके देखने पर सतर्क होना जरूरी है।
  • स्तन का निरीक्षण: इसके बाद, हाथ ऊपर उठाकर स्तनों का निरीक्षण करें। दोनों हाथों को ऊपर उठा कर फिर से देखें कि कहीं कोई असामान्य बदलाव तो नहीं, जैसे कि त्वचा पर कोई खिंचाव या रंग बदलाव तो नहीं हुआ है। निप्पल से किसी प्रकार का स्राव या तरल पदार्थ निकलना भी जांचें। यह तरीका उन परिवर्तनों को दिखाने में मदद करता है, जो स्थिर स्थिति में आसानी से नजर नहीं आते हैं।
  • अब, सामान्य से शुरुआत करें: अपने स्तनों की जांच उंगलियों की मदद से करें, जो गोलाकार या तिरछे पैटर्न में होनी चाहिए। जांच करते वक्त अपनी तीन मध्यमा उंगलियों के पैड का इस्तेमाल करें, क्योंकि यह संवेदनशीलता के साथ पूरी सतह को महसूस करने में सक्षम होती हैं। धीरे-धीरे हल्का, मध्यम और फिर ज्यादा दबाव डालते हुए स्तन के हर हिस्से, खासकर उपटलों या उभार के आसपास भी जांच करें क्योंकि यह क्षेत्र कैंसर की गांठ बनने का संभावित स्थान होते हैं।
  • अगला कदम है लीटकर जांच करना: एक कंधे के नीचे तकिया रखकर उस के विपरीत तरफ के स्तन की जांच करें। सीधे खड़े होकर जांच से यह तरीका अलग होता है, क्योंकि कई गांठें लेटने की स्थिति में अधिक आसानी से महसूस हो पाती है। पूरे स्तन को अच्छी तरह से छुएं और किसी भी असामान्य गांठ, कठोरता या सूजन पर गौर करें और यदि कहीं पर गांठ महसूस होती है, तो इसके बारे में अपने डॉक्टर को बताएं।
  • पीरियड्स खत्म होने के 3-4 दिन में स्वयं जांच करें: मासिक धर्म के अंत के 3-4 दिन बाद का समय सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि तब स्तन सामान्य से कम सूजे हुए और संवेदनशील होते हैं। यदि मासिक धर्म अनियमित है, तो महीने में एक ही दिन को चयन करें और नियमित रूप से उसी दिन जांच करते रहें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वयं जांच के दौरान यदि किसी भी प्रकार की गांठ या असामान्य क्षेत्र महसूस हो या स्तनों की त्वचा पर रंग, बनावट में परिवर्तन दिखाई दे, जैसे कि लालिमा, डिंपलिंग या गड्ढे पड़ना, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। निप्पल से रक्त हानि होना भी अलर्ट का संकेत है।

यह नियमित स्वयं जांच न केवल ब्रेस्ट कैंसर गांठ की पहचान बेहतर बनाती है, बल्कि किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी भी देती है। इस प्रकार की जागरूकता से समय पर डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू करना संभव होता है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर के लेटेस्ट इलाज की सफलता दर बढ़ती है।

स्वयं जांच द्वारा स्तनों की नियमित निगरानी जीवन रक्षक साबित हो सकती है, इसलिए इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

आपको निम्न परिस्थितियों में डॉक्टरी सलाह लेने की आवश्यकता है - 

  • ब्रेस्ट में गांठ महसूस होना
  • स्तनों के आकार, रंग, या बनावट में बदलाव दिखे
  • निप्पल से असामान्य तरल पदार्थ का निकलना, खासकर खून आना।
  • सूजन, दर्द या अंदर खिंचाव के लक्षण हों।
  • परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की फैमिली मेडिकल हिस्ट्री होना।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना और उपयुक्त टेस्ट कराना ज़रूरी है, ताकि ब्रेस्ट कैंसर के लिए टेस्ट समय पर हो सके और सही निदान हो।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के उपाय और जीवनशैली टिप्स

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के उपाय और जीवनशैली टिप्स बहुत सरल और प्रभावी है। चलिए कुछ प्रभावी उपायों को जानते हैं - 

  • स्वस्थ, संतुलित आहार लें जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियां और फल शामिल हों।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें और शारीरिक सक्रियता बनाए रखें।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन कम या बंद करें।
  • यदि संभव हो तो स्तनपान करवाएं, क्योंकि इससे ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।
  • नियमित जांच और स्क्रीनिंग कराएं विशेषकर जिनके परिवाप में फैमिली मेडिकल हिस्ट्री कैंसर की है।

निष्कर्ष

अक्टूबर को हम breast cancer awareness month के रूप में मनाते हैं। हम जानते हैं और समझते भी हैं कि ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर समस्या है, जिससे बहुत सारी महिलाएं परेशान होती हैं। इसलिए हमारा लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस बीमारी के बारे में जागरूक करना ताकि वह इस बीमारी से बच सकें। इसके अतिरिक्त यदि किसी को यह समस्या हो भी जाती है, तो ब्रेस्ट कैंसर ट्रीटमेंट के लिए हमारे अनुभवी विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ब्रेस्ट कैंसर केवल बड़े उम्र की महिलाओं में होता है?

नहीं, ब्रेस्ट कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 50 वर्ष से ऊपर की महिलाओं में अधिक पाया जाता है।

क्या पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है?

हां, पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर संक्रमण हो सकता है, जिसे चेस्ट कैंसर के नाम से भी बोला जाता है, हालांकि इसकी संभावना बहुत कम होती है।

क्या स्वयं जांच करने से कैंसर का जोखिम कम होता है?

स्वयं जांच सीधे जोखिम कम नहीं करती, लेकिन समय पर पहचान कर इलाज प्रारंभ करना कैंसर के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है। 

ब्रेस्ट कैंसर का पता लगने पर तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक टेस्ट करवाएं और उपचार प्रारंभ करें। जल्दी इलाज सफलता की संभावना बढ़ाता है।

क्या परिवार में इतिहास होने पर स्वयं जाँच अधिक जरूरी है?

हां, परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो तो समय-समय पर स्वयं जांच और डॉक्टर से नियमित परीक्षण करना आवश्यक होता है।

Written and Verified by:

Dr. Anukriti Sood

Dr. Anukriti Sood

Consultant Exp: 6 Yr

Breast & Endocrine Surgeon

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Dr. Anukriti Sood is a Consultant Breast & Endocrine Surgeon at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 6 years of experience. She specializes in breast surgery (benign and malignant), thyroid and parathyroid disorders, and women's health awareness.

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