
सर्दियों में हाथ-पैर ठंडे होना आम बात है, लेकिन यदि सही यह जल्दी ठीक न हो, तो यह एनीमिया, रेनॉड्स या खराब ब्लड सर्कुलेशन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का इशारा हो सकता है। इसके लिए परामर्श और इलाज आवश्यक है।
अभी तक आप समझ ही गए होंगे कि आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने वाले हैं। जब भी कड़ाके की ठंड पड़ रही होती है और मोटे-मोटे मोजे और ग्लव्स भी आपके पैरों को गर्म नहीं कर पाए और बर्फीला सुन्नपन (numbness) जाने का नाम न ले रहा हो, तो हो सकता है कि यह सिर्फ ठंड नहीं है। हो सकता है आपका ब्लड सर्कुलेशन ठीक न हो या आपके शरीर के अंदर कोई दूसरी समस्या आपको परेशान कर रही हो। सीके बिरला अस्पताल, जयपुर में हम मानते हैं कि एक सामान्य सर्दी और मेडिकल इमरजेंसी के बीच का अंतर समझना आपकी सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है। यदि आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्चरों से मिलें और इलाज के सभी विकल्पों पर विचार करें।
जब तापमान गिरता है, तो शरीर का यह प्राकृतिक नियम है कि वह आपके दिल और फेफड़ों को गर्म रखने को प्राथमिकता देता है। आपके दिल और फेफडे आपके शरीर के वह महत्वपूर्ण अंग है, जिन्हें हम हमारे शरीर के कोर अंगों में गिनते हैं। जब इन कोर अंगों तक रक्त प्रवाह अधिक होता है, तो हाथ और पैरों की नसों में सिकुड़न आ जाती है और वहां ब्लड फ्लो कम हो जाता है। लेकिन अगर यह बहुत ज़्यादा हो रहा है, तो इसके पीछे ये 4 बड़े कारण हो सकते हैं -
यह उंगलियों के सुन्न पड़ने या जमने का सबसे आम कारण है। इसमें ठंड या तनाव के कारण त्वचा को खून पहुंचाने वाली छोटी धमनियां बहुत ज्यादा सिकुड़ जाती हैं। आपकी उंगलियां पहले सफेद, फिर नीली और खून का प्रवाह लौटने पर लाल हो सकती हैं। कई लोग मानते हैं कि यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज़्यादा पाया जाता है, लेकिन यह सभी में आम है।
लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells) आपके शरीर की 'कुरियर सर्विस' हैं, जो ऑक्सीजन को शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाती हैं। यदि आपको एनीमिया है, तो आपके हाथ-पैरों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे वे जल्दी ठंडे हो जाते हैं।
अपने थायराइड को शरीर का 'हीटर' या 'भट्टी' समझें। यदि यह कम काम कर रहा है (Hypothyroidism), तो यह आपके मेटाबॉलिज्म को सही से नहीं चला पाएगा। नतीजा? आपके शरीर का हीटर धीमा हो जाता है और हल्की ठंड में भी आप कांपने लगते हैं।
डायबिटीज के मरीजों में यह शिकायत बहुत आम है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ शुगर लेवल धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और नसों को भी कमज़ोर कर देता है। यह दोहरी मार है: ख़राब सर्कुलेशन से पैर ठंडे रहते हैं और नसों की खराबी के कारण आपको ठंडक महसूस भी नहीं होती, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
जी हां, बिल्कुल। सर्कुलेशन वह 'हाईवे' है, जो आपके शरीर में गर्मी पहुंचाता है। अगर उस हाईवे पर 'ट्रैफिक जाम' (रुकावट) हो, तो हाथ और पैर सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
मेडिकल भाषा में इसे पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) से जोड़ा जाता है। इसमें नसों के अंदर प्लाक (plaque) जमने से नसें संकरी हो जाती हैं और पैरों तक खून नहीं पहुंच पाता। ध्यान रखें कि, अगर ठंडे पैरों के साथ चलने पर पिंडलियों (calves) में दर्द होता है या एक पैर दूसरे से ज़्यादा ठंडा रहता है, तो यह ख़राब सर्कुलेशन का पक्का सबूत है।
सीके बिरला अस्पताल में हमारे वैस्कुलर स्पेशलिस्ट अक्सर ऐसे मरीज देखते हैं, जिन्होंने सालों तक इसे नज़रअंदाज़ किया। याद रखें, एक साधारण डॉपलर टेस्ट से समय रहते इसका पता लगाया जा सकता है।
हर ठंड लगने की स्थिति में डॉक्टर की ज़रूरत नहीं है, लेकिन शरीर के इन इशारों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए -
सिर्फ रजाई में छिपना हल नहीं है, आपको अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने होंगे जैसे कि -
सर्दियों में हाथ-पैर ठंडे होना सिर्फ़ एक मौसम की मार नहीं, बल्कि आपकी हार्ट हेल्थ और मेटाबॉलिज्म का आईना भी हो सकता है। चाहे वह विटामिन की कमी हो या नसों की रुकावट, अपने शरीर की आवाज़ सुनना बेहद ज़रूरी है।
यदि आप लगातार सुन्नपन, त्वचा के रंग में बदलाव या दर्द महसूस कर रहे हैं, तो यह चेकअप कराने का सही समय है। सीके बिरला अस्पताल, जयपुर की विशेषज्ञ टीम अत्याधुनिक तकनीक और जांच के साथ आपकी वैस्कुलर हेल्थ का ख्याल रखने के लिए तैयार है। हमारे पास वह सारे आधुनिक मशीनें और सर्वश्रेष्ठ लैब्स हैं, जिससे आपका इलाज संभव हो सकता है। इस सर्दी, सिर्फ़ गर्म न रहें, बल्कि स्वस्थ भी रहें!
हां, शरीर में आयरन और विटामिन B12 की कमी इसके मुख्य कारण हैं। इनकी कमी से शरीर पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता, जिससे हाथ-पैरों तक ऑक्सीजन और गर्मी नहीं पहुंच पाती।
हां, यह संभव है। यदि यह समस्या लगातार है, तो यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) या हृदय की पंपिंग क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है, जो आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मसल्स मास कम होता है, जो शरीर में गर्मी पैदा करता है। साथ ही, महिलाओं का शरीर उसके कोर अंगों को बचाने के लिए हाथ-पैरों की नसों को जल्दी सिकोड़ लेता है।
बिल्कुल, तनाव के दौरान शरीर एड्रेनालाईन (adrenaline) रिलीज़ करता है, जिससे नसें सिकुड़ जाती हैं। यही कारण है कि घबराहट या गुस्से में हाथ-पैर बर्फीले ठंडे हो सकते हैं।
हां, हो सकता है। लो ब्लड प्रेशर का मतलब है कि नसों में खून को धक्का देने वाली ताकत कम है, जिससे शरीर के दूर के हिस्सों (उंगलियों और अंगूठे) तक पर्याप्त खून पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
Written and Verified by:

Dr Rahul Mathur has undergone International Training in Internal Medicine from the United Kingdom. He previously worked with Mahatma Gandhi Hospital, Apex Hospitals and Metro Hospital Jaipur and conducted several free medical camps. With eight years of experience, he always chooses to reflect liability, empathy, and hard work as his foremost principles for excellence. Dr Mathur has worked on various topics in medicine and published numerous research papers at National & International conferences. He acknowledges that the medical field is constantly evolving with new technologies & practices. Therefore, he keeps himself associated with some prestigious organisation & attend regular healthcare workshops.
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