
हम समझते हैं कि किसी भी बच्चे का बीमार होना, उनके परिवार पर किस प्रकार का प्रभाव डालता है। यदि आपका बच्चा किसी भी प्रकार के दर्द का सामना कर रहा है, तो हम समझते हैं कि यह समय आपके लिए सबसे मुश्किल घड़ियों में से एक होगी। कल्पना कीजिए, आपका बच्चा सुबह उठता है और उसके कान के नीचे के हिस्से में तेज दर्द और सूजन है, उसे निगलने में तकलीफ हो रही है और तेज बुखार है। यह केवल एक साधारण सूजन नहीं, बल्कि मम्प्स वायरस का संकेत हो सकता है, जिसे हिंदी में कण्ठमाला रोग भी कहा जाता है।
यदि आप या आपका कोई प्रियजन गालों में सूजन या चेहरे पर असामान्य दर्द महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सही समय पर सही जानकारी और विशेषज्ञ परामर्श ही इस संक्रमण की चेन को तोड़ सकता है। सीके बिरला अस्पताल (CMRI), कोलकाता में हमारे विशेषज्ञ इस रोग से लड़ने और आपके परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक चिकित्सा और प्रभावी टीकाकरण प्रदान करते हैं। इसलिए तुरंत अभी अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें।
मम्प्स एक संक्रामक रोग है, जो 'पैरामिक्सोवायरस' (Paramyxovirus) परिवार के एक वायरस के कारण होता है। यह मुख्य रूप से लार ग्लैंड (Salivary Glands) को प्रभावित करता है, जिन्हें पैरोटिड ग्रंथियां (Parotid Glands) कहा जाता है। यह ग्लैंड्स हमारे कान और जबड़े के बीच स्थित होती हैं।
जब कोई व्यक्ति इस वायरस की चपेट में आता है, तो उसकी इन ग्लैंड में सूजन आ जाती है, जिससे चेहरा एक तरफ से या दोनों तरफ से फूला हुआ दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि ग्रामीण और आम बोलचाल की भाषा में इसे कण्ठमाला रोग के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह बीमारी बच्चों में अधिक आम है, लेकिन यह उन वयस्कों को भी संक्रमित कर सकती है, जिन्होंने बचपन में एमएमआर टीके (MMR Vaccine) नहीं लगवाए हैं।
मम्प्स के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। वायरस के संपर्क में आने के लगभग 14 से 25 दिनों के बाद इसके लक्षण उभरना शुरू होते हैं। इस अवधि को 'इन्क्यूबेशन पीरियड' कहा जाता है। इस स्थिति में निम्न लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं -
यदि आपको या आपके बच्चे को इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। कंठमाला रोग क्या है और इसके खतरे क्या हो सकते हैं, यह जानकर आप समय रहते उपचार शुरू कर सकते हैं।
अक्सर लोग पूछते हैं कि मम्प्स बीमारी कैसे फैलती है? दरअसल, यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी से ट्रांसफर होता है। यह एक 'रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन' (श्वसन संक्रमण) की तरह व्यवहार करता है। यह निम्न तरीकों से फैल सकता है -
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, मम्प्स के मामले उन क्षेत्रों में अधिक देखे जाते हैं जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है और एमएमआर वैक्सीन का कवरेज कम है।
ज्यादातर मामलों में मम्प्स आराम और सही देखभाल से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है जैसे कि -
इसीलिए, मम्प्स को केवल एक साधारण गाल की सूजन की बीमारी मानकर छोड़ देना खतरनाक हो सकता है।
आज के दौर में चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धि टीकाकरण है। यह तीन बीमारियों - खसरा (Measles), मम्प्स (Mumps) और रूबेला (Rubella) से सुरक्षा प्रदान करने वाला एक संयुक्त टीका है।
एमएमआर वैक्सीन के दो डोज जीवनभर के लिए 88% से 97% तक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
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खुराक (Dose) |
सही आयु (Recommended Age) |
सुरक्षा दर |
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पहली खुराक |
12 से 15 महीने |
~93% |
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दूसरी खुराक |
4 से 6 वर्ष |
~97% |
हम पीडियाट्रिक केयर में टीकाकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। हमारे विशेषज्ञों का मानना है कि एमएमआर टीके न केवल आपके बच्चे को बचाते हैं, बल्कि समाज में 'हर्ड इम्युनिटी' पैदा करने में भी मदद करते हैं।
टीकाकरण के अतिरिक्त, अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी आप इस संक्रमण से बच सकते हैं जैसे कि -
यदि संक्रमण हो जाए, तो घबराने के बजाय धैर्य से काम लें और निम्नलिखित बातों का ध्यान दें -
मम्प्स वायरस एक ऐसी बीमारी है, जिसे जानकारी और सही समय पर टीकाकरण के माध्यम से पूरी तरह रोका जा सकता है। यह केवल एक बचपन की बीमारी नहीं है; इसकी जटिलताएं भविष्य में गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए, अपने बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच करें और यदि कोई डोज छूट गया है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आपकी सुरक्षा और स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी है। सीके बिरला अस्पताल (CMRI) में हम विश्व स्तरीय नैदानिक सुविधाएं और आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञों डॉक्टरों की टीम के साथ आपकी सेवा के लिए तत्पर हैं। याद रखें, बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है।
हां, मम्प्स ऐतिहासिक रूप से 2 से 12 वर्ष के बच्चों में सबसे आम रहा है। हालांकि, टीकाकरण न होने की स्थिति में यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। किशोरों और वयस्कों में इसके लक्षण और जटिलताएं अधिक गंभीर हो सकती हैं।
वैक्सीन 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, लेकिन यह जोखिम को 90% से अधिक कम कर देती है। यदि टीका लगवाने के बाद भी मम्प्स होता है, तो उसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं और जटिलताओं का खतरा न के बराबर होता है।
आमतौर पर, मम्प्स के लक्षण 7 से 10 दिनों तक रहते हैं। सूजन अक्सर 1 से 3 दिनों में चरम पर होती है और अगले एक सप्ताह में धीरे-धीरे कम हो जाती है। पूर्ण रिकवरी में दो सप्ताह लग सकते हैं।
जी हाँ, यदि किसी वयस्क ने बचपन में मम्प्स नहीं झेला है या उसने एमएमआर वैक्सीन नहीं ली है, तो उसे संक्रमण होने का पूरा खतरा रहता है। वयस्कों में 'ऑर्काइटिस' जैसी जटिलताएं होने की संभावना अधिक होती है।
निश्चित रूप से, मम्प्स अत्यधिक संक्रामक है। सूजन शुरू होने के कम से कम 5 दिन बाद तक मरीज को आइसोलेशन में रहना चाहिए ताकि स्कूल या कार्यालय में अन्य लोग इसकी चपेट में न आएं।
भारत में टीकाकरण चार्ट के अनुसार, पहला डोज 9-12 महीने (अक्सर एमआर के रूप में) और फिर 15 महीने पर एमएमआर का बूस्टर दिया जाता है। दूसरा मुख्य डोज 4 से 6 साल की उम्र के बीच दिया जाता है।
नहीं, मम्प्स एक वायरल संक्रमण है, इसलिए इस पर एंटीबायोटिक्स काम नहीं करतीं। इसका उपचार केवल लक्षणों (दर्द और बुखार) को कम करने और सहायक देखभाल (तरल पदार्थ और आराम) पर आधारित होता है।
घरेलू उपाय जैसे नमक के पानी से गरारे करना या गर्म सिकाई केवल लक्षणों में आराम देते हैं। यह वायरस को खत्म नहीं करते। उचित चिकित्सा परामर्श और निगरानी आवश्यक है ताकि जटिलताओं से बचा जा सके।
Written and Verified by:
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Dr. Suman Mitra has experience of 10 years of which he was into a 1-year Rotary Internship from Calcutta National Medical College and Hospital and 3 years of PGTship at Calcutta Medical College.
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