मम्प्स वायरस क्या है? लक्षण, फैलने का तरीका और MMR वैक्सीन से बचाव
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मम्प्स वायरस क्या है? लक्षण, फैलने का तरीका और MMR वैक्सीन से बचाव

Table of Contents

Summary

  • मम्प्स केवल गाल की सूजन नहीं, बल्कि एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो अंगों को प्रभावित कर सकता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या लार के संपर्क से यह तेजी से फैलता है।
  • MMR वैक्सीन (एमएमआर टीके) ही इस बीमारी से बचने का एकमात्र और सबसे प्रभावी तरीका है।
  • समय पर पहचान और चिकित्सकीय परामर्श जटिलताओं जैसे सुनने की शक्ति खोना या मस्तिष्क शोथ (Meningitis) से बचा सकता है।

हम समझते हैं कि किसी भी बच्चे का बीमार होना, उनके परिवार पर किस प्रकार का प्रभाव डालता है। यदि आपका बच्चा किसी भी प्रकार के दर्द का सामना कर रहा है, तो हम समझते हैं कि यह समय आपके लिए सबसे मुश्किल घड़ियों में से एक होगी। कल्पना कीजिए, आपका बच्चा सुबह उठता है और उसके कान के नीचे के हिस्से में तेज दर्द और सूजन है, उसे निगलने में तकलीफ हो रही है और तेज बुखार है। यह केवल एक साधारण सूजन नहीं, बल्कि मम्प्स वायरस का संकेत हो सकता है, जिसे हिंदी में कण्ठमाला रोग भी कहा जाता है। 

यदि आप या आपका कोई प्रियजन गालों में सूजन या चेहरे पर असामान्य दर्द महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सही समय पर सही जानकारी और विशेषज्ञ परामर्श ही इस संक्रमण की चेन को तोड़ सकता है। सीके बिरला अस्पताल (CMRI), कोलकाता में हमारे विशेषज्ञ इस रोग से लड़ने और आपके परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक चिकित्सा और प्रभावी टीकाकरण प्रदान करते हैं। इसलिए तुरंत अभी अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें।

मम्प्स वायरस क्या होता है?

मम्प्स एक संक्रामक रोग है, जो 'पैरामिक्सोवायरस' (Paramyxovirus) परिवार के एक वायरस के कारण होता है। यह मुख्य रूप से लार ग्लैंड (Salivary Glands) को प्रभावित करता है, जिन्हें पैरोटिड ग्रंथियां (Parotid Glands) कहा जाता है। यह ग्लैंड्स हमारे कान और जबड़े के बीच स्थित होती हैं।

जब कोई व्यक्ति इस वायरस की चपेट में आता है, तो उसकी इन ग्लैंड में सूजन आ जाती है, जिससे चेहरा एक तरफ से या दोनों तरफ से फूला हुआ दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि ग्रामीण और आम बोलचाल की भाषा में इसे कण्ठमाला रोग के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह बीमारी बच्चों में अधिक आम है, लेकिन यह उन वयस्कों को भी संक्रमित कर सकती है, जिन्होंने बचपन में एमएमआर टीके (MMR Vaccine) नहीं लगवाए हैं।

मम्प्स के शुरुआती लक्षण

मम्प्स के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। वायरस के संपर्क में आने के लगभग 14 से 25 दिनों के बाद इसके लक्षण उभरना शुरू होते हैं। इस अवधि को 'इन्क्यूबेशन पीरियड' कहा जाता है। इस स्थिति में निम्न लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं - 

  • चेहरे और जबड़े में सूजन: यह इस बीमारी की सबसे बड़ी पहचान है। कान के नीचे की पैरोटिड ग्लैंड सूज जाती है, जिससे गाल बाहर की तरफ निकल आता है।
  • चबाने और निगलने में दर्द: सूजन के कारण कुछ भी खाना या पीना, यहां तक कि पानी पीना भी दर्दनाक हो सकता है।
  • तेज बुखार और सिरदर्द: संक्रमण की शुरुआत अक्सर बुखार, थकान और मांसपेशियों में दर्द के साथ होती है।
  • मुंह का सूखना: लार ग्रंथियों के प्रभावित होने से लार कम बनती है।
  • भूख की कमी: दर्द और अस्वस्थता के कारण मरीज भोजन से कतराने लगता है।

यदि आपको या आपके बच्चे को इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। कंठमाला रोग क्या है और इसके खतरे क्या हो सकते हैं, यह जानकर आप समय रहते उपचार शुरू कर सकते हैं।

मम्प्स वायरस कैसे फैलता है?

अक्सर लोग पूछते हैं कि मम्प्स बीमारी कैसे फैलती है? दरअसल, यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी से ट्रांसफर होता है। यह एक 'रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन' (श्वसन संक्रमण) की तरह व्यवहार करता है। यह निम्न तरीकों से फैल सकता है - 

  • ड्रॉपलेट्स के माध्यम से: जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस के सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं। स्वस्थ व्यक्ति जब उसी हवा में सांस लेता है, तो वह संक्रमित हो जाता है।
  • लार का सीधा संपर्क: जूठा खाना खाने, एक ही बोतल से पानी पीने या बर्तन साझा करने से मम्प्स संक्रमण फैलता है और इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है।
  • दूषित सतह: यदि संक्रमित व्यक्ति ने अपनी नाक या मुंह छूने के बाद किसी सतह (जैसे मेज, दरवाजे का हैंडल) को छुआ है और दूसरा व्यक्ति उसे छूकर अपनी नाक या मुंह पर हाथ लगाता है, तो संक्रमण फैल सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, मम्प्स के मामले उन क्षेत्रों में अधिक देखे जाते हैं जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है और एमएमआर वैक्सीन का कवरेज कम है।

मम्प्स से होने वाली संभावित जटिलताएं

ज्यादातर मामलों में मम्प्स आराम और सही देखभाल से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है जैसे कि - 

  • ऑर्काइटिस (Orchitis): किशोरावस्था या वयस्क पुरुषों में यह अंडकोष की सूजन का कारण बन सकता है, जिससे दुर्लभ मामलों में प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • मेनिनजाइटिस (Meningitis): वायरस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की सुरक्षात्मक झिल्ली तक पहुंच सकता है, जिससे सूजन आ सकती है।
  • बहरापन: मम्प्स वायरस कभी-कभी कान की 'कोक्लिया' (Cochlea) को नुकसान पहुंचाता है, जिससे सुनने की शक्ति स्थायी रूप से जा सकती है।
  • पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis): पैंक्रियास में सूजन, जिससे पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द होता है।

इसीलिए, मम्प्स को केवल एक साधारण गाल की सूजन की बीमारी मानकर छोड़ देना खतरनाक हो सकता है।

MMR वैक्सीन क्या है और यह कैसे बचाव करती है?

आज के दौर में चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धि टीकाकरण है। यह तीन बीमारियों - खसरा (Measles), मम्प्स (Mumps) और रूबेला (Rubella) से सुरक्षा प्रदान करने वाला एक संयुक्त टीका है।

एमएमआर वैक्सीन के दो डोज जीवनभर के लिए 88% से 97% तक सुरक्षा प्रदान करते हैं।

खुराक (Dose)

सही आयु (Recommended Age)

सुरक्षा दर

पहली खुराक

12 से 15 महीने

~93%

दूसरी खुराक

4 से 6 वर्ष

~97%

हम पीडियाट्रिक केयर में टीकाकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। हमारे विशेषज्ञों का मानना है कि एमएमआर टीके न केवल आपके बच्चे को बचाते हैं, बल्कि समाज में 'हर्ड इम्युनिटी' पैदा करने में भी मदद करते हैं। 

मम्प्स से बचाव के अन्य तरीके

टीकाकरण के अतिरिक्त, अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी आप इस संक्रमण से बच सकते हैं जैसे कि - 

  • स्वच्छता का ध्यान: नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं।
  • दूरी बनाए रखें: यदि आपके आस-पास कोई संक्रमित है, तो कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
  • बर्तन साझा न करें: घर में या स्कूल में बच्चों को अपना खाना या पानी दूसरों के साथ साझा न करने की सलाह दें, खासकर संक्रमण के मौसम में।
  • आइसोलेशन: यदि किसी को मम्प्स हो गया है, तो उसे कम से कम 5-7 दिनों तक अलग कमरे में रहना चाहिए ताकि घर के अन्य सदस्य सुरक्षित रहें।

मम्प्स के दौरान देखभाल और आहार

यदि संक्रमण हो जाए, तो घबराने के बजाय धैर्य से काम लें और निम्नलिखित बातों का ध्यान दें - 

  • नरम आहार दें: दलिया, सूप और खिचड़ी जैसे खाद्य पदार्थ खाएं जिन्हें चबाने की जरूरत न पड़े।
  • हाइड्रेशन: खूब सारा तरल पदार्थ पिएं, लेकिन खट्टे फलों के रस (जैसे संतरा या नींबू) से बचें क्योंकि ये लार ग्रंथियों में जलन पैदा कर सकते हैं।
  • सिकाई: सूजन वाले हिस्से पर ठंडी या गर्म सिकाई करने से दर्द में आराम मिलता है।

निष्कर्ष

मम्प्स वायरस एक ऐसी बीमारी है, जिसे जानकारी और सही समय पर टीकाकरण के माध्यम से पूरी तरह रोका जा सकता है। यह केवल एक बचपन की बीमारी नहीं है; इसकी जटिलताएं भविष्य में गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए, अपने बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच करें और यदि कोई डोज छूट गया है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

आपकी सुरक्षा और स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी है। सीके बिरला अस्पताल (CMRI) में हम विश्व स्तरीय नैदानिक सुविधाएं और आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञों डॉक्टरों की टीम के साथ आपकी सेवा के लिए तत्पर हैं। याद रखें, बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है।

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मम्प्स बच्चों में ज्यादा होता है?

हां, मम्प्स ऐतिहासिक रूप से 2 से 12 वर्ष के बच्चों में सबसे आम रहा है। हालांकि, टीकाकरण न होने की स्थिति में यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। किशोरों और वयस्कों में इसके लक्षण और जटिलताएं अधिक गंभीर हो सकती हैं।

क्या मम्प्स वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमण हो सकता है?

वैक्सीन 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, लेकिन यह जोखिम को 90% से अधिक कम कर देती है। यदि टीका लगवाने के बाद भी मम्प्स होता है, तो उसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं और जटिलताओं का खतरा न के बराबर होता है।

मम्प्स बीमारी कितने दिनों तक रहती है?

आमतौर पर, मम्प्स के लक्षण 7 से 10 दिनों तक रहते हैं। सूजन अक्सर 1 से 3 दिनों में चरम पर होती है और अगले एक सप्ताह में धीरे-धीरे कम हो जाती है। पूर्ण रिकवरी में दो सप्ताह लग सकते हैं।

क्या मम्प्स वयस्कों में भी हो सकता है?

जी हाँ, यदि किसी वयस्क ने बचपन में मम्प्स नहीं झेला है या उसने एमएमआर वैक्सीन नहीं ली है, तो उसे संक्रमण होने का पूरा खतरा रहता है। वयस्कों में 'ऑर्काइटिस' जैसी जटिलताएं होने की संभावना अधिक होती है।

क्या मम्प्स होने पर स्कूल या काम से छुट्टी लेनी चाहिए?

निश्चित रूप से, मम्प्स अत्यधिक संक्रामक है। सूजन शुरू होने के कम से कम 5 दिन बाद तक मरीज को आइसोलेशन में रहना चाहिए ताकि स्कूल या कार्यालय में अन्य लोग इसकी चपेट में न आएं।

MMR वैक्सीन बच्चों को कब दी जाती है?

भारत में टीकाकरण चार्ट के अनुसार, पहला डोज 9-12 महीने (अक्सर एमआर के रूप में) और फिर 15 महीने पर एमएमआर का बूस्टर दिया जाता है। दूसरा मुख्य डोज 4 से 6 साल की उम्र के बीच दिया जाता है।

क्या मम्प्स के लिए कोई विशेष एंटीबायोटिक है?

नहीं, मम्प्स एक वायरल संक्रमण है, इसलिए इस पर एंटीबायोटिक्स काम नहीं करतीं। इसका उपचार केवल लक्षणों (दर्द और बुखार) को कम करने और सहायक देखभाल (तरल पदार्थ और आराम) पर आधारित होता है।

क्या मम्प्स के घरेलू उपाय कारगर हैं?

घरेलू उपाय जैसे नमक के पानी से गरारे करना या गर्म सिकाई केवल लक्षणों में आराम देते हैं। यह वायरस को खत्म नहीं करते। उचित चिकित्सा परामर्श और निगरानी आवश्यक है ताकि जटिलताओं से बचा जा सके।

Written and Verified by:

Dr. Suman Mitra

Dr. Suman Mitra

Consultant Internal Medicine Exp: 17 Yr

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Dr. Suman Mitra has experience of 10 years of which he was into a 1-year Rotary Internship from Calcutta National Medical College and Hospital and 3 years of PGTship at Calcutta Medical College.

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