फाइब्रोमायल्जिया क्या है? शरीर में लंबे समय तक दर्द क्यों होता है
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फाइब्रोमायल्जिया क्या है? शरीर में लंबे समय तक दर्द क्यों होता है

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Summary

फाइब्रोमायल्जिया एक व्यापक मस्कुलोस्केलेटल दर्द विकार है जो मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की अति-संवेदनशीलता के कारण होता है। इस स्थिति में मस्तिष्क दर्द के संकेतों को असामान्य रूप से संसाधित करता है, जिसे सेंट्रल सेंसिटाइजेशन कहते हैं। इसके लक्षणों में दीर्घकालिक थकान, स्मृति दोष और नींद की समस्या शामिल है। आंकड़ों के अनुसार, यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जाती है। लगभग 75% से 90% पीड़ित महिलाएं होती हैं। यह बीमारी जानलेवा नहीं है, लेकिन यह जीवन जीने के तरीके को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है।

अक्सर महिलाएं सुबह उठते ही थकान और दर्द महसूस करती हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनकी नींद पूरी नहीं हुई है, भले ही वे पर्याप्त समय तक सोई हों। इसके अतिरिक्त, कभी गर्दन में दर्द, कभी कमर में, तो कभी कंधों में, तो ऐसा लगता है जैसे पूरा शरीर टूट रहा है। यदि रिपोर्ट्स में कुछ स्पष्ट नहीं आए तो डॉक्टर इस स्थिति को फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) कहते हैं। 

इस स्थिति से पुरुष और महिलाएं दोनों प्रभावित होती हैं, लेकिन हमने इस ब्लॉग की शुरुआत महिलाओं से करी है, क्योंकि महिलाएं इस स्थिति से अधिक प्रभावित होती हैं। यदि आप भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं या आपके घर में किसी को भी इस ब्लॉग में बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो बिना देर किए हमारे डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें।

फाइब्रोमायल्जिया क्या है?

सरल शब्दों में समझें तो, फाइब्रोमायल्जिया एक दीर्घकालिक (chronic) विकार है जो मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों और मांसपेशियों) में व्यापक दर्द, थकान, नींद की समस्याओं और याददाश्त या मूड से जुड़ी दिक्कतों का कारण बनता है।

लेकिन फाइब्रोमायल्जिया का अर्थ क्या है? विशेषज्ञों का मानना है कि फाइब्रोमायल्जिया में आपका मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी दर्द के संकेतों को संसाधित (Process) करने के तरीके को बदल देते हैं। इसे "सेंट्रल सेंसिटाइजेशन" (Central Sensitization) कहा जाता है। इसका मतलब है कि आपका नर्वस सिस्टम दर्द के प्रति अति-संवेदनशील हो जाता है। जो स्पर्श सामान्य व्यक्ति को सामान्य लगता है, वह फाइब्रोमायल्जिया के मरीज को दर्दनाक लग सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जाती है। लगभग 75% से 90% पीड़ित महिलाएं होती हैं। यह बीमारी जानलेवा नहीं है, लेकिन यह जीवन जीने के तरीके को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है।

फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण -

फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जो लगभग हर मरीज में देखे जाते हैं। अक्सर लोग इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि फाइब्रोमायल्जिया क्या है इन हिंदी, ताकि वे अपने शरीर में हो रहे बदलावों को अपनी भाषा में समझ सकें। यहाँ इसके प्रमुख लक्षण दिए गए हैं - 

  • व्यापक दर्द (Widespread Pain): यह हल्का लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द है जो शरीर के दोनों तरफ महसूस होता है।
  • अत्यधिक थकान (Fatigue): लंबे समय तक सोने के बावजूद मरीज खुद को थका हुआ महसूस करते हैं।
  • फाइब्रो फॉग (Fibro Fog): ध्यान केंद्रित करने या याद रखने में कठिनाई महसूस होना।
  • सुबह की जकड़न (Morning Stiffness): सोकर उठने पर मांसपेशियों में भारी खिंचाव महसूस होना।

शरीर में लंबे समय तक दर्द होने के आम कारण और फाइब्रोमायल्जिया के ट्रिगर्स

आखिर यह बीमारी होती क्यों है? चिकित्सा विज्ञान में फाइब्रोमायल्जिया का कोई एक स्पष्ट कारण अभी तक नहीं मिला है, लेकिन कई कारक मिलकर इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। CK Birla Hospitals के विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • आनुवंशिकी (Genetics): फाइब्रोमायल्जिया अक्सर परिवारों में चलता है। कुछ जेनेटिक म्यूटेशन आपको इस विकार के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।
  • संक्रमण (Infections): कुछ बीमारियां या वायरल इन्फेक्शन फाइब्रोमायल्जिया को ट्रिगर कर सकते हैं या लक्षणों को बदतर बना सकते हैं।
  • शारीरिक या भावनात्मक आघात (Trauma): एक कार दुर्घटना जैसा शारीरिक आघात या लंबे समय तक रहने वाला मनोवैज्ञानिक तनाव (PTSD) इस स्थिति को जन्म दे सकता है। तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे दर्द का अनुभव बढ़ जाता है।
  • नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी: जैसा कि पहले बताया गया है, मस्तिष्क में रसायनों (न्यूरोट्रांसमीटर) का असंतुलन दर्द के संकेतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि रुमेटीइड गठिया (Rheumatoid Arthritis) या ल्यूपस (Lupus) जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों वाले लोगों में फाइब्रोमायल्जिया विकसित होने की संभावना अधिक होती है।

फाइब्रोमायल्जिया का सही निदान कैसे किया जाता है? -

फाइब्रोमायल्जिया क्या है, यह जानने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसका निदान (Diagnosis) है। इसका पता लगाने के लिए कोई एक ब्लड टेस्ट या एक्स-रे नहीं है। अक्सर इसे "बहिष्करण का निदान" (Diagnosis of Exclusion) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि डॉक्टर पहले अन्य बीमारियों (जैसे थायरॉयड, अर्थराइटिस) की जांच करते हैं और जब सब कुछ सामान्य आता है, तब फाइब्रोमायल्जिया पर विचार किया जाता है।

हमारे डॉक्टर अमेरिकन कॉलेज ऑफ र्यूमेटोलॉजी (ACR) के दिशानिर्देशों का पालन करते हैं:

  • लक्षणों ही हिस्ट्री: क्या दर्द कम से कम 3 महीने से है?
  • टेंडर पॉइंट्स (Tender Points): पहले डॉक्टर शरीर के 18 विशिष्ट बिंदुओं को दबाकर जांच करते थे, हालांकि अब यह एकमात्र मानदंड नहीं है।
  • Widespread Pain Index (WPI): यह देखा जाता है कि शरीर के कितने हिस्सों में दर्द है।
  • रक्त परीक्षण: अन्य बीमारियों (जैसे एनीमिया, विटामिन डी की कमी) को बाहर करने के लिए CBC, ESR, और थायरॉयड टेस्ट किए जाते हैं।

फाइब्रोमायल्जिया का इलाज और दर्द प्रबंधन -

हालांकि फाइब्रोमायल्जिया का कोई जड़ से खत्म करने वाला इलाज (cure) नहीं है, लेकिन सही प्रबंधन से लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फाइब्रोमायल्जिया का इलाज एक बहुआयामी दृष्टिकोण (multidisciplinary approach) की मांग करता है, जो आपको CK Birla Hospitals में एक ही छत के नीचे मिलता है।

दवाएं (Medications):

डॉक्टर दर्द कम करने और नींद सुधारने के लिए दवाएं लिख सकते हैं।

  • दर्द निवारक: ओवर-द-काउंटर दवाएं जैसे इबुप्रोफेन या पेरासिटामोल।
  • एंटीडिप्रेसेंट्स: ये दवाएं केवल डिप्रेशन के लिए नहीं हैं; ये दर्द और थकान को कम करने में भी मदद करती हैं (जैसे Duloxetine)।
  • एंटी-सीजर दवाएं: कुछ दवाएं (जैसे Pregabalin) मस्तिष्क को भेजे जाने वाले दर्द संकेतों को कम करने में प्रभावी हैं।

थेरेपी (Therapy):

  • फिजिकल थेरेपी (Physiotherapy): एक फिजियोथेरेपिस्ट आपको ऐसे व्यायाम सिखा सकता है जो आपकी ताकत, लचीलापन और सहनशक्ति में सुधार करेंगे। हाइड्रोथेरेपी (पानी में व्यायाम) भी बहुत फायदेमंद साबित होती है।
  • काउंसलिंग (CBT): कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) आपको दर्द के साथ जीने और नकारात्मक विचारों को बदलने में मदद करती है। तनाव प्रबंधन इस इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes):

दवाओं के साथ-साथ, फाइब्रोमायल्जिया का इलाज आपकी दिनचर्या पर भी निर्भर करता है:

  • नींद की स्वच्छता (Sleep Hygiene): सोने और जागने का समय निश्चित करें।
  • नियमित व्यायाम: शुरुआत में दर्द हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे चलना, तैराकी या साइकिल चलाना लक्षणों को कम करता है।
  • पेसिंग (Pacing): अपनी ऊर्जा को बचाकर रखें। एक ही दिन में बहुत अधिक काम न करें।

फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों के लिए आहार

क्या फाइब्रोमायल्जिया के लिए कोई खास डाइट है? सीधे तौर पर कोई "फाइब्रो डाइट" नहीं है, लेकिन सूजन (inflammation) कम करने वाला भोजन मदद कर सकता है।

  • क्या खाएं: ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट)।
  • क्या न खाएं: प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (processed foods), अत्यधिक चीनी, और कैफीन। कुछ मरीजों को ग्लूटेन या डेयरी उत्पादों को छोड़ने से भी राहत मिलती है।

मानसिक स्वास्थ्य और फाइब्रोमायल्जिया

हम अक्सर शारीरिक दर्द पर ध्यान देते हैं, लेकिन फाइब्रोमायल्जिया मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। पुराना दर्द अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) का कारण बन सकता है। CK Birla Hospitals में, हम मरीज के मानसिक स्वास्थ्य को उपचार योजना का अभिन्न अंग मानते हैं। याद रखें, मानसिक तनाव से दर्द बढ़ता है, और दर्द से तनाव—इस चक्र को तोड़ना ही उपचार का लक्ष्य है।

निष्कर्ष

फाइब्रोमायल्जिया के साथ जीना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह असंभव नहीं है। आप असहाय नहीं हैं। सही चिकित्सा सहायता, जीवनशैली में बदलाव और एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ, आप अपने दर्द को नियंत्रित कर सकते हैं और एक सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण महसूस कर रहा है, तो आज ही सीके बिरला अस्पताल (CMRI), कोलकाता के विशेषज्ञों से संपर्क करें। हम अत्याधुनिक तकनीक और व्यक्तिगत देखभाल के साथ आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए तैयार हैं।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या फाइब्रोमायल्जिया स्थायी बीमारी है?

हां, फाइब्रोमायल्जिया एक पुरानी (chronic) स्थिति है जो लंबे समय तक रहती है। हालांकि, यह जानलेवा नहीं है और न ही यह जोड़ों या मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुँचाती है। सही उपचार और जीवनशैली प्रबंधन से इसके लक्षणों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

क्या फाइब्रोमायल्जिया मानसिक तनाव से बढ़ जाता है?

जी हां, तनाव और फाइब्रोमायल्जिया का गहरा संबंध है। मानसिक या भावनात्मक तनाव शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है और मांसपेशियों में तनाव पैदा करता है, जिससे दर्द और थकान के लक्षण (flare-ups) बढ़ जाते हैं।

फाइब्रोमायल्जिया और थकान सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome) में क्या अंतर है?

ये दोनों स्थितियां मिलती-जुलती हैं, लेकिन इनमें मुख्य अंतर यह है कि फाइब्रोमायल्जिया में मुख्य समस्या "दर्द" है, जबकि क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (CFS) में मुख्य समस्या "अत्यधिक थकान" है। हालांकि, कई मरीजों में ये दोनों समस्याएं एक साथ हो सकती हैं।

क्या फाइब्रोमायल्जिया के लिए कोई खास डाइट मदद कर सकती है?

हालांकि कोई विशिष्ट डाइट नहीं है, लेकिन एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट (सूजन कम करने वाला आहार) जैसे हरी सब्जियां, फल, और ओमेगा-3 मदद कर सकते हैं। प्रसंस्कृत भोजन (Processed food) और चीनी से परहेज करने पर कई मरीजों ने सुधार महसूस किया है।

क्या फाइब्रोमायल्जिया के दर्द के लिए फिजियोथेरेपी फायदेमंद होती है?

बिल्कुल, फिजियोथेरेपी मांसपेशियों की जकड़न को कम करने और लचीलेपन को बढ़ाने में बहुत प्रभावी है। फिजियोथेरेपिस्ट आपको ऐसे कोमल व्यायाम (low-impact exercises) सिखाते हैं जो दर्द बढ़ाए बिना आपकी ताकत वापस लाते हैं।

क्या फाइब्रोमायल्जिया की समस्या कम उम्र में भी हो सकती है?

हां, हालांकि यह आमतौर पर मध्यम आयु वर्ग (30-50 वर्ष) में शुरू होता है, लेकिन यह बच्चों और किशोरों (Juvenile Fibromyalgia) को भी प्रभावित कर सकता है। अगर बच्चे को लगातार शरीर दर्द और थकान हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

Written and Verified by:

Dr. Debaditya Roy

Dr. Debaditya Roy

Consultant Rheumatologist Exp: 10 Yr

Rheumatology

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Dr. Debaditya Roy is a Consultant in Rheumatology Dept. at CMRI, Kolkata, with over 10 years of experience. He specializes in managing autoimmune and connective tissue disorders, including rheumatoid arthritis, lupus, vasculitis, and myositis.

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