
कल्पना कीजिए कि आप सुबह सोकर उठते हैं, लेकिन तरोताजा महसूस करने के बजाय आपके सिर में भारीपन है, जबड़ों में जकड़न है और आपके दांतों में एक अजीब सी संवेदनशीलता महसूस हो रही है। अक्सर हम इन संकेतों को सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके शरीर का एक गंभीर संकेत हो सकता है? रात के सन्नाटे में अनजाने में अपने दांतों को एक-दूसरे पर रगड़ना सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक मेडिकल स्थिति है, जिसे ब्रुक्सिज्म कहा जाता है।
अक्सर मरीज हमारे पास तब आते हैं जब उनके दांतों की ऊपरी परत (Enamel) पूरी तरह घिस चुकी होती है या उन्हें खाना चबाने में भी दर्द होने लगता है। यदि आप भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि ब्रुक्सिज्म क्या है और यह आपकी मुस्कान को कैसे प्रभावित कर सकता है। समय पर सही जानकारी और विशेषज्ञ परामर्श न केवल आपके दांतों को बचा सकता है, बल्कि आपकी नींद की गुणवत्ता में भी सुधार कर सकता है। यदि आप भी सुबह उठकर थकान महसूस करते हैं, तो आपको तुरंत दांत पीसने का इलाज खोजने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके।
ब्रुक्सिज्म को समझना बहुत ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यह आपके पूरे जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अनजाने में अपने दांतों को आपस में पीसता है, रगड़ता है या जबड़ों को जोर से भींचता है। यह समस्या दिन में भी हो सकती है, जिसे अवेक ब्रुक्सिज्म (Awake Bruxism) कहा जाता है। रात को सोते समय होने वाली समस्या को स्लीप ब्रुक्सिज्म (Sleep Bruxism) कहा जाता है। डेंटल ब्रुक्सिज्म विशेष रूप से नींद के दौरान अधिक खतरनाक होता है, क्योंकि व्यक्ति को खुद पता ही नहीं चलता कि वह अपने दांतों पर कितना अत्यधिक दबाव डाल रहा है। एक रिसर्च के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 8% से 31% वयस्क इस समस्या का सामना करते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण इलाज में देरी हो जाती है। अभी भी कई लोग इस स्थिति को नजरअंदाज ही करते हैं और इलाज नहीं लेते हैं।
दांत पीसने या ब्रुक्सिज्म के पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं होता है, बल्कि यह शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और आनुवांशिक कारकों का मिश्रण हो सकता है।
ब्रुक्सिज्म लक्षण अक्सर सुबह के समय सबसे स्पष्ट होते हैं। यदि आपको नीचे दिए गए संकेतों में से कुछ भी महसूस हो रहा है, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए -
ब्रुक्सिज्म को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है -
माता-पिता या गार्जियन के लिए यह जानना जरूरी है कि बच्चों में ब्रुक्सिज्म काफी आम समस्या है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 15% से 33% बच्चे दांत पीसने की समस्या से परेशान है। इसके मुख्य कारण दूध के दांतों का गिरना और स्थायी दांतों का आना, कान में दर्द या स्कूल का तनाव हो सकते हैं।
अच्छी खबर यह है कि अधिकांश बच्चे किशोरावस्था तक पहुँचते-पहुँचते इस आदत को खुद ही छोड़ देते हैं, लेकिन यदि इससे दांतों को नुकसान पहुँच रहा हो, तो बाल दंत चिकित्सक (Child orthodontist) से परामर्श लेना अनिवार्य है। वह दांतों के सामान्य आकार को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
यदि आप ब्रुक्सिज्म उपचार को नजरअंदाज करते हैं, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। चलिए इसके कुछ संभावित गंभीर परिणामों को जानते हैं -
ब्रुक्सिज्म ट्रीटमेंट का मुख्य उद्देश्य दांतों को नुकसान से बचाना और दर्द को कम करना है। समय पर ब्रुक्सिज्म उपचार लेने से दांतों के इम्प्लांट के खर्च को 90% तक कम किया जा सकता है। कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI), कोलकाता में हम आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इसका स्थाई समाधान प्रदान करते हैं। हम इलाज के लिए निम्न विकल्पों का सुझाव देते हैं -
दांतों की सेहत का सीधा संबंध हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य से है। दांत पीसना केवल एक रात की आवाज नहीं है, बल्कि यह आपके मौखिक स्वास्थ्य के लिए एक चेतावनी है। सही समय पर ब्रुक्सिज्म लक्षण को पहचानना और विशेषज्ञ दंत चिकित्सक से सलाह लेना आपको भविष्य की बड़ी सर्जरी और दर्द से बचा सकता है।
यदि आप या आपका कोई प्रियजन इस समस्या से पीड़ित है, तो आज ही उचित ब्रुक्सिज्म उपचार की दिशा में कदम बढ़ाएं। आपकी एक स्वस्थ मुस्कान ही आपके आत्मविश्वास की कुंजी है। कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMRI), कोलकाता में हमारी टीम आपकी मुस्कान और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है।
मुख्य कारणों में अत्यधिक मानसिक तनाव, चिंता, नींद से संबंधित विकार (जैसे स्लीप एप्निया) और दांतों का आपस में सही तरीके से न मिलना शामिल हैं।
दांतों का घिसना, सुबह के समय जबड़ों में दर्द, सिरदर्द, दांतों में झनझनाहट और नींद के दौरान दांत रगड़ने की आवाज इसके प्रमुख लक्षण हैं।
तनाव कम करें, कैफीन और शराब का सेवन सीमित करें, और दांतों की सुरक्षा के लिए डेंटिस्ट द्वारा सुझाए गए नाइट गार्ड का नियमित उपयोग करें।
इससे दांतों का इनेमल घिस सकता है, दांत टूट सकते हैं, मसूड़ों में समस्या हो सकती है और टीएमजे (TMJ) विकार के कारण जबड़ा जाम हो सकता है।
इसके पीछे मनोवैज्ञानिक तनाव, गलत डेंटल अलाइनमेंट, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स और धूम्रपान या शराब जैसी जीवनशैली की आदतें मुख्य रूप से जिम्मेदार होती हैं।
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Dr. Samit Sikdar is a Consultant Dental Surgeon in Dental Science Dept. at CMRI, Kolkata, with over 19 years of experience. He specializes in cosmetic dentistry, including smile design, teeth reshaping, crowns and bridges, and oral surgery procedures.
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