
एक तपती दुपहरी में पार्क में खेलता आपका बच्चा अचानक सुस्त पड़ जाए या दस्त के कारण उसकी आँखें धंसी हुई दिखने लगें, तो एक माता-पिता के तौर पर घबराहट होना स्वाभाविक है। क्या आप जानते हैं कि बच्चों का शरीर वयस्कों के मुकाबले बहुत तेजी से पानी खोता है?
छोटी सी लापरवाही भी बच्चों में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) को गंभीर बना सकती है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैसे आप बच्चों में पानी की कमी को पहचान सकते हैं और घर पर ही इसको कैसे ठीक करें। अगर आपके बच्चे को लगातार उल्टी या दस्त की समस्या है, तो यह जानकारी आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श के लिए आप हमारे अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं।
डिहाइड्रेशन का सीधा सा मतलब है कि बच्चे के शरीर से जितना तरल पदार्थ (Fluid) बाहर निकल रहा है, वह उतनी मात्रा में पानी या लिक्विड नहीं ले पा रहा है। बच्चों का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और उनके शरीर का एक बड़ा हिस्सा पानी होता है, इसलिए पानी की मामूली कमी भी उनके अंगों के कामकाज को प्रभावित करने लगती है।
बच्चों में डिहाइड्रेशन के कारण कई हो सकते हैं -
एक सतर्क माता-पिता होने के नाते, आपको डॉक्टर के पास जाने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। कुछ बच्चों में डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें आप घर पर ही भांप सकते हैं जैसे कि -
यूनीसेफ (UNICEF) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण डायरिया से होने वाला डिहाइड्रेशन है। इसलिए, इन शुरुआती संकेतों को कभी भी 'मामूली' समझकर न छोड़ें।
जब डिहाइड्रेशन बढ़ जाता है, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे में डिहाइड्रेशन के संकेत काफी स्पष्ट और डरावने हो सकते हैं -
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि डिहाइड्रेशन कितना गंभीर है। इलाज का सबसे बड़ा हिस्सा है कि बच्चा का खान-पान कैसा है और वे पूरे दिन में क्या खा और पी रहा है -
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रमाणित ORS बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है। यह केवल पानी नहीं है, बल्कि इसमें नमक और चीनी का वह सटीक संतुलन होता है, जो आंतों को पानी सोखने में मदद करता है।
अगर बच्चा अभी मां का दूध पी रहा है, तो उसे बार-बार स्तनपान कराएं। माँ के दूध में वे सभी तत्व होते हैं जो डिहाइड्रेशन से लड़ने में मदद करते हैं।
बच्चों में उल्टी और दस्त में डिहाइड्रेशन होने पर ठोस आहार के बजाय तरल पदार्थों पर ध्यान दें। नारियल पानी या चावल का मांड (Moong dal water/Rice kanji) भी दिया जा सकता है, लेकिन ORS को प्राथमिकता दें।
बीमार पड़ने का इंतज़ार करने से बेहतर है कि हम डिहाइड्रेशन से बचाव बच्चों में सुनिश्चित करें। यहाँ कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं:
सीके बिरला हॉस्पिटल, कोलकाता (CMRI) के बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में जहां गर्मी का प्रकोप अधिक रहता है, माता-पिता को बच्चों को हाइड्रेट कैसे रखें, इस पर विशेष शिक्षा दी जानी चाहिए। क्लिनिकल डाटा बताते हैं कि समय पर दी गई ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी (ORT) 90% से अधिक गंभीर स्थितियों को अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही रोक सकती है।
यदि आपके बच्चे की स्थिति 24 घंटे में नहीं सुधरती, या उसे लगातार तेज बुखार है, तो आपको तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
बच्चों में डिहाइड्रेशन एक ऐसी स्थिति है, जिसे सावधानी और सही जानकारी से आसानी से संभाला जा सकता है। याद रखें, बच्चे अपनी प्यास या असहजता को हमेशा शब्दों में बयान नहीं कर पाते। एक सजग माता-पिता के रूप में आपकी भूमिका उनके शरीर की भाषा को समझना है। बच्चों में पानी की कमी के संकेतों को पहचानें, घर में हमेशा ORS बच्चों के लिए तैयार रहें और स्थिति गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
हाँ, ORS (Oral Rehydration Salts) बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और डिहाइड्रेशन का सबसे प्रभावी इलाज है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही मात्रा में देना फायदेमंद होता है।
6 महीने तक के बच्चों को केवल स्तनपान की जरूरत होती है। 1 से 3 साल के बच्चों को दिन में लगभग 1 से 1.5 लीटर (4-5 गिलास) तरल पदार्थ (दूध और भोजन मिलाकर) मिलना चाहिए।
जी हाँ, उल्टी और दस्त के दौरान शरीर से तेजी से तरल पदार्थ और मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। यदि इसकी भरपाई तुरंत न की जाए, तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
नारियल पानी बच्चों के लिए एक अच्छा प्राकृतिक पेय है, क्योंकि इसमें पोटेशियम और अन्य मिनरल्स होते हैं। हालांकि, गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में यह ORS का विकल्प नहीं हो सकता, पर सामान्य हाइड्रेशन के लिए बेहतरीन है।
यदि बच्चा 8 घंटे से पेशाब न करे, उसकी आँखें धंस गई हो, वह बहुत सुस्त हो, या उसे खून वाली दस्त हो, तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल (जैसे CMRI इमरजेंसी) ले जाएं।
छोटे शिशुओं (6 महीने से कम) को पानी देने से 'वॉटर इंटॉक्सिकेशन' हो सकता है। बड़े बच्चों के लिए संतुलित मात्रा जरूरी है। हमेशा ध्यान दें कि बच्चा प्यास के अनुसार पानी पिए।
Written and Verified by:
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Dr. Ruchi Golash is a Consultant in Paediatrics Dept. at CMRI Hospital, Kolkata with over 28 years of experience. She specializes in childhood malignancies, paediatric blood and liver disorders, rheumatology, and nutrition including pre-enteral feeding.
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