भारत में बच्चों का वैक्सीनेशन शेड्यूल
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भारत में बच्चों का वैक्सीनेशन शेड्यूल

Paediatrics | by Dr. Saugata Acharya on 17/07/2025 | Last Updated : 15/07/2026

Table of Contents

Summary

शिशु का इम्यून सिस्टम जन्म के समय पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए समय पर टीकाकरण हर साल दुनियाभर में 30 लाख से ज़्यादा बच्चों की जान बचाता है। भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार शिशु को कुल 12 अलग-अलग टीके लगते हैं।

जन्म के 24 घंटों के भीतर BCG, OPV-0 और Hepatitis B अनिवार्य हैं। इसके बाद 6, 10 और 14 हफ्तों में पेंटावैलेंट, रोटावायरस, PCV और IPV दिए जाते हैं। 9 महीने पर MR और Vitamin-A, 15-18 महीने पर MMR और DPT बूस्टर, 4-6 साल पर DPT और OPV बूस्टर और 10-16 साल पर Td टीका ज़रूरी है। किशोरियों के लिए HPV वैक्सीन भी अनुशंसित है।

इसके अलावा भारत में टाइफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन (TCV) और जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) जैसे टीके भी बीमारी के प्रसार को देखते हुए बेहद ज़रूरी माने जाते हैं, खासकर JE-प्रभावित राज्यों में।

याद रखें — कोई टीका छूट जाए तो घबराएं नहीं, "कैच-अप" शेड्यूल से बाद में लगवाया जा सकता है। टीकाकरण के बाद हल्का बुखार सामान्य है लेकिन 102°F से अधिक होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।

छोटे बच्चे दुनिया में आते ही ढेर सारी खुशियां लाते हैं, लेकिन साथ ही वह कई सारी बीमारियों के घेरे में भी आ सकते हैं। चिकित्सीय रूप से यह सच है कि छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता, जिससे उन्हें वायरस और बैक्टीरिया का जोखिम ज्यादा रहता है। इनमें खसरा, डिप्थीरिया, पोलियो जैसी गंभीर बीमारियां शामिल है।

लेकिन आपको यहां घबराने की आवश्यकता नहीं है। टीकाकरण की सहायता से आपके बच्चे कई खतरों से दूर रह पाते हैं। आंकड़ों की माने तो समय पर टीकाकरण हर साल दुनियाभर में 30 लाख से ज्यादा बच्चों की जान बचाता है। वहीं भारत सरकार बहुत सारे वैक्सीनेशन ड्राइव चला रहे हैं, जिससे माता-पिता टीकाकरण के संबंध में जागरूक हो रहे हैं। लगभग सभी अस्पतालों और क्लीनिक में टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन फिर भी लगभग 22 मिलियन से अधिक बच्चों को उचित और पूर्ण टीकाकरण नहीं मिलता है। 

चलिए इस ब्लॉग में पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके साथ-साथ आपको नवजात शिशु टीकाकरण चार्ट भी मिल जाएगा, जिससे उन माता-पिता को वैक्सीनेशन शेड्यूल को अच्छे से समझने में मदद मिलेगी। 

बच्चों का टीकाकरण क्यों जरूरी है?

टीकाकरण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है। वैक्सिनेशन चार्ट आपके बच्चे के लिए एक ऐसा टूल बन सकता है, जो उसके सेहत को दुरुस्त करने में मदद कर सकता है। इसकी मदद से आप अपने बच्चे को जानलेवा बीमारियों जैसे कि पोलियो, चेचक, हेपेटाइटिस और निमोनिया से बच सकते हैं। सही समय पर टीका लगवाने से न केवल बच्चा सुरक्षित रहता है, बल्कि समाज में भी बीमारियों के प्रसार को रोका जा सकता है।

बच्चों का टीकाकरण चार्ट 2026

नेशनल वैक्सीनेशन शेड्यूल के तहत, भारत में बच्चों का टीकाकरण अनुसूची नीचे उल्लिखित है।

बच्चों का टीकाकरण चार्ट 2025

जन्म के तुरंत बाद कौन-से टीके लगते हैं?

नवजात शिशु को टीका कब कब लगता है, यह सवाल हर नए माता-पिता के मन में होता है। जन्म के पहले 24 घंटों के भीतर शिशु को निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण टीके लगाए जाते हैं:

  • BCG: टीबी या ट्यूबरक्लोसिस (क्षय रोग) से बचाव के लिए यह टीका लगता है।
  • OPV (ओरल पोलियो वैक्सीन): पोलियो से सुरक्षा के लिए 'जीरो डोज'।
  • Hepatitis B: लीवर के संक्रमण से बचाव के लिए।

समय से पहले जन्मे (Premature) बच्चों के लिए विशेष ध्यान

समय से पहले जन्मे शिशुओं का टीकाकरण उनकी असली जन्मतिथि (Chronological Age) के अनुसार ही किया जाता है, न कि उनकी "करेक्टेड एज" के अनुसार। इस बारे में नियोनेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना ज़रूरी है।

6 हफ्ते, 10 हफ्ते और 14 हफ्ते में कौन-से टीके लगते हैं?

जब बच्चा डेढ़ महीने का होता है, तो टीकाकरण की मुख्य प्रक्रिया शुरू होती है। 1.5 महीने के बच्चे का टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।

  • 6 हफ्ते: पेंटावैलेंट-1, RVV-1 (रोटावायरस), fIPV-1 और PCV-1।
  • 10 हफ्ते: पेंटावैलेंट-2 और रोटावायरस-2।
  • 14 हफ्ते: पेंटावैलेंट-3, रोटावायरस-3, fIPV-2 और PCV-2। यह चरण बच्चे को काली खांसी, टिटनेस, डिप्थीरिया और रोटावायरस जैसे गंभीर रोगों से बचाता है।

Note: पेंटावैलेंट वैक्सीन में DPT, हेपेटाइटिस-B और Hib (हीमोफिलस इन्फ्लुएंज़ी टाइप-B) — पांचों सुरक्षा एक ही इंजेक्शन में शामिल होती हैं, जिससे बच्चे को बार-बार सुई नहीं लगवानी पड़ती।

6 महीने से 9 महीने के बीच कौन-से टीके जरूरी है?

6 महीने की उम्र में फ्लू की वैक्सीन की सलाह दी जाती है। वहीं, 9 महीने का होने पर बच्चे को आंगनवाड़ी टीकाकरण चार्ट के अनुसार विटामिन-A की पहली खुराक और MR (खसरा और रूबेला) का पहला टीका लगाया जाता है। साथ ही, PCV का बूस्टर शॉट भी इसी दौरान दिया जाता है।

12–18 महीने में कौन-से टीके लगवाने चाहिए?

इस उम्र में बच्चे की इम्यूनिटी को और मजबूत करने के लिए बूस्टर डोज दिए जाते हैं:

  • 15 महीने: MMR (खसरा, मम्स, रूबेला) और चिकन पॉक्स का टीका।
  • 16-18 महीने: DPT बूस्टर-1, पोलियो बूस्टर और हेपेटाइटिस-A।

4–6 साल और 10–16 साल में कौन-से बूस्टर डोज़ लगते हैं?

स्कूल जाने की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है:

  • 4–6 साल: DPT बूस्टर-2 और OPV बूस्टर।
  • 10–16 साल: टिटनेस और डिप्थीरिया (Td) का टीका। किशोरियों के लिए 10-12 साल की उम्र में HPV वैक्सीन (सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु) भी अनुशंसित है।

Note: IAP-ACVIP की नवीनतम सिफारिशों के अनुसार, HPV वैक्सीन अब लड़कों के लिए भी अनुशंसित की जाती है, न कि सिर्फ लड़कियों के लिए — इससे HPV से जुड़े अन्य कैंसर के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

अगर बच्चे का टीका छूट जाए तो क्या करें?

कई बार किसी कारणवश माता-पिता बच्चे का टीका समय पर नहीं लगवा पाते। घबराएं नहीं, अगर कोई टीका छूट गया है, तो तुरंत अपने पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करें। ज्यादातर टीकों के लिए 'कैच-अप' शेड्यूल होता है, जिससे छूटे हुए टीके बाद में लगाए जा सकते हैं।

टीका 2-4 हफ्तों से ज़्यादा देरी से लगने पर बच्चा सबसे संवेदनशील अवधि के दौरान असुरक्षित रह सकता है, इसलिए देरी होते ही जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है। अपने बच्चे का टीकाकरण रिकॉर्ड सरकार के U-WIN पोर्टल पर भी ट्रैक किया जा सकता है, जहां मोबाइल नंबर से रजिस्टर करके नज़दीकी टीकाकरण केंद्र और स्लॉट खोजे जा सकते हैं।

टीकाकरण के बाद बुखार/सूजन हो तो क्या करें?

टीकाकरण के बाद हल्का बुखार, चिड़चिड़ापन या इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन और दर्द होना सामान्य है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर वैक्सीन के प्रति प्रतिक्रिया दे रहा है।

  • दर्द वाली जगह पर ठंडे कपड़े से सिकाई करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न दें।
  • बच्चे को अधिक से अधिक स्तनपान या तरल पदार्थ दें।
  • यदि बुखार 102 डिग्री से ज्यादा हो या बच्चा लगातार रोए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

नवजात शिशु टीकाकरण: क्या करें और क्या ना करें 

टीकाकरण हर बच्चे के जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है, लेकिन कभी-कभी यह थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। कभी-कभी, टीके के बाद बच्चों को थोड़ी सी समस्या हो सकती है, जैसे हल्का बुखार, लाल चकत्ते या थोड़ा दर्द। छोटे बच्चे अपनी समस्याओं के बारे में बता नहीं सकते हैं, लेकिन वह लगातार रोते रहते हैं। सभी माता-पिताओं की चिंता को हम अब खत्म कर देंगे। हम यहां आपकी मदद के लिए हैं! 

हम आपको एक गाइड देंगे जिससे सभी माता-पिता को इस बात की जानकारी मिल जाएगी कि टीकाकरण के पहले और बाद में क्या करनी चाहिए और क्या नहीं जिससे बच्चों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो।

टीकाकरण से पहले:

टीकाकरण से पहले इन बातों का रखें विशेष ख्याल - 

  • शिशु टीकाकरण कार्ड साथ ले जाएं।
  • बच्चे को आरामदायक कपड़े पहनाएं, जिससे टीकाकरण के दौरान उन्हें उतारने में दिक्कत न हो।
  • ध्यान रहे कि 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को जांघों में टीका लगाया जाता है, वहीं इससे बड़े बच्चों को आस्तीन या फिर हाथ पर टीका लगाया जाता है। 
  • टीकाकरण के दौरान बच्चे को दर्द हो सकता है, तो उस दौरान उन्हें संभाल लें। 
  • यदि किसी भी कारणवश कोई इंजेक्शन छूट जाता है, तो पेडियाट्रिक्स डॉक्टर से बात करें और उसे लगवाएं। 
  • इंजेक्शन के बाद बच्चों को बुखार का सामना करना पड़ सकता है। उस दौरान उन्हें खूब सारा पानी पिलाएं। 
  • बुखार कम करने के लिए लिक्विड पेरासिटामोल या इबुप्रोफेन दे सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर से एक बार बात ज़रूर करें। 

टीकाकरण के बाद की सावधानियां:

टीकाकरण के बाद इन बातों का रखें विशेष ख्याल - 

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर के पर्चे के दर्द और बुखार की दवा न दे।
  • बुखार में उन्हें अच्छे से कपड़े पहनाए, लेकिन ज्यादा कपड़े भी न पहनाएं जिससे उन्हें त्वचा की समस्या भी हो जाती है।
  • किसी भी टीकाकरण को मिस न करें और टीकाकरण के समय का विशेष ध्यान रखें।
  • यदि कोई समस्या आती भी है तो जल्दबाजी न करें और इलाज के सही विकल्पों का चयन करें।

Myths vs Facts

मिथक (Myth) तथ्य (Fact)
MMR वैक्सीन से ऑटिज़्म होता है यह दावा 1998 के एक फर्जी अध्ययन पर आधारित था, जिसे पूरी तरह खारिज किया जा चुका है और लेखक का मेडिकल लाइसेंस रद्द हो गया था। कोई भी विश्वसनीय अध्ययन MMR और ऑटिज़्म के बीच कोई संबंध नहीं दिखाता।
एक दिन में एक से ज़्यादा टीके लगाना असुरक्षित है कई टीके एक साथ लगवाना सुरक्षित और प्रभावी है - इससे बार-बार अस्पताल जाने की ज़रूरत कम होती है और सुरक्षा समय पर मिलती है।
सरकारी (UIP) टीके निजी टीकों से कमज़ोर होते हैं UIP के सभी टीके वही गुणवत्ता मानक (WHO/CDSCO) पूरे करते हैं जो निजी टीकों में होते हैं - सिर्फ ब्रांड और अतिरिक्त कवरेज में फर्क होता है।
हल्की बीमारी में टीका टाल देना चाहिए हल्की सर्दी-जुकाम या मामूली बुखार में भी डॉक्टर की सलाह से टीका समय पर लगाया जा सकता है - इसे टालना ज़रूरी नहीं।

टीकाकरण का महत्व

बच्चों, नवजात शिशुओं और किशोरों के लिए टीकाकरण बहुत ज्यादा आवश्यक है। यदि सही समय पर सारे टीकाकरण हो जाते हैं, तो बच्चा कुछ बीमारियों से दूर रहता है जैसे - 

इनके सिवाय भी बहुत सारी समस्याएं होती हैं, जो एक बच्चे को परेशान करती है, इसलिए समय पर टीकाकरण बहुत ज्यादा आवश्यक होता है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लोगों को समझने की आवश्यकता है कि बच्चों को सभी टीके 5 साल से पहले लगाए जाने चाहिए। इससे बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके लिए माता-पिता को टीकाकरण के संबंध में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। 

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीकाकरण के बाद शिशु की देखभाल कैसे करें?

  • डॉक्टर के द्वारा दी हुई टीकाकरण चार्ट पढ़ें
  • सूजन या लालिमा कम करने के लिए हल्का गीला और ठंडा कपड़ा लगाएं
  • हल्के बुखार की कोई चिंता न करें
  • तरल पदार्थों के सेवन को बढ़ाएं
  • शिशु के खाने पर ध्यान दें
  • नियोनेटोलॉजी डॉक्टर से संपर्क में रहें

क्या टीकाकरण के बाद बच्चे को नहलाया जा सकता है?

बिल्कुल! टीकाकरण के बाद बच्चे को हमेशा की तरह नहलाया जा सकता है। ध्यान दें कि अगर इंजेक्शन लगने वाली जगह लाल हो गई है और छूने से गर्माहट का एहसास हो तो आप उस जगह को ठंडे गीले तौलिये से सेक सकते हैं। लेकिन बर्फ की थैली का इस्तेमाल न करें और टीकाकरण के बाद बच्चे को बहुत सारे कंबल या कपड़े न पहनाएं।

बच्चे को पहला टीका कब लगता है?

सभी नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटों के भीतर हेपेटाइटिस बी का पहला टीका लगाया जाता है। 

क्या मैं टीकाकरण से पहले और बाद में बच्चे को दूध पिला सकती हूं?

हां, 1 साल तक के अधिकांश बच्चों में टीकाकरण से पहले और बाद में स्तनपान कराने से दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। 

नवजात शिशु को कितने टीके लगते हैं?

भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं को 12 अलग-अलग टीके लगते हैं। यह सारे टीके आपको किसी भी अस्पताल में मिल जाएंगे जहां पर बच्चों का इलाज होता है। 

5 साल के बच्चे को कौन सा टीका लगता है?

  • डीपीटी बूस्टर
  • पोलियो बूस्टर
  • खसरा-कण्ठमाला-रूबेला (एमएमआर) बूस्टर
  • जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) बूस्टर
  • टाइफाइड
  • हेपेटाइटिस ए

किस आयु में कौन सा टीका लगता है?

अलग-अलग उम्र में बच्चों को अलग-अलग टीका लगाया जाता है जैसे - 

  • 16-24 महीने - डीपीटी बूस्टर
  • 16-24 महीने - पोलियो बूस्टर
  • 4-6 साल - एमएमआर बूस्टर
  • 16-24 महीने और 4-6 साल - जेई बूस्टर
  • 1-15 साल - टाइफाइड
  • 1-15 साल - हेपेटाइटिस ए

अगर बच्चे का कोई वैक्सीन छूट जाए तो क्या करें?

घबराएं नहीं। छूटी हुई वैक्सीन को अक्सर कैच-अप वैक्सीनेशन के माध्यम से लगाया जा सकता है। सही समय जानने के लिए अपने बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

वैक्सीन लगने के बाद बच्चे को बुखार आना सामान्य है?

हाँ, हल्का बुखार, सूजन या इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द होना सामान्य प्रतिक्रिया है और आमतौर पर 1–2 दिनों में ठीक हो जाता है। यदि तेज बुखार या गंभीर लक्षण हों, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें

क्या एक दिन में एक से अधिक टीके लगवाना सुरक्षित है?

हाँ, डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक ही दिन में कई टीके लगवाना सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। इससे बच्चे को समय पर सुरक्षा मिलती है और बार-बार अस्पताल जाने की आवश्यकता कम होती है.

टाइफाइड और JE वैक्सीन कब लगवाएं?

टाइफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन (TCV) 9-12 महीने की उम्र से लगवाई जा सकती है, जिसमें हर 3 साल में बूस्टर ज़रूरी है। JE वैक्सीन सिर्फ स्थानिक (endemic) क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए 9 महीने और 16-24 महीने पर अनुशंसित है - अपने क्षेत्र की स्थिति जानने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से पूछें।

Written and Verified by:

Dr. Saugata Acharya

Dr. Saugata Acharya

Consultant Exp: 38 Yr

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Dr. Saugata Acharya is a Consultant in Pediatrics Dept. at CMRI Hospital, Kolkata with over 20 years of experience. He specializes in pediatric gastroenterology, neonatology, community pediatrics, and child psychiatry.

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