भारत में बच्चों का वैक्सीनेशन शेड्यूल
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भारत में बच्चों का वैक्सीनेशन शेड्यूल

Paediatrics | by Dr. Saugata Acharya on 17/07/2025 | Last Updated : 09/02/2026

Table of Contents

Summary

1. जन्म के तुरंत बाद (24 घंटे के भीतर)

जन्म के समय ये तीन टीके लगाना अनिवार्य है:

  • BCG (बी.सी.जी.): यह बच्चे को टीबी (तपेदिक) जैसी गंभीर बीमारी से बचाता है।
  • हेपेटाइटिस B (बर्थ डोज): यह लीवर को हेपेटाइटिस बी वायरस के संक्रमण से सुरक्षित रखता है।
  • OPV 0 (ओरल पोलियो वैक्सीन): पोलियो से सुरक्षा के लिए दी जाने वाली पहली मौखिक खुराक।

2. शुरुआती 3 महीनों में अनिवार्य टीकाकरण

6 सप्ताह की आयु में (लगभग 1.5 महीना):

  • DTwP/DTaP 1: डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी (Pertussis) से सुरक्षा की पहली खुराक।
  • IPV 1: इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (इंजेक्शन वाला पोलियो का टीका)।
  • हेपेटाइटिस B 2: हेपेटाइटिस बी की दूसरी खुराक।
  • Hib 1: हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (दिमागी बुखार और निमोनिया से बचाव)।
  • रोटावायरस 1: गंभीर दस्त (डायरिया) को रोकने के लिए दी जाने वाली खुराक।
  • PCV 1: निमोनिया और अन्य न्यूमोकोकल बीमारियों से बचाव का टीका।

10 सप्ताह की आयु में (लगभग 2.5 महीने):

  • DTwP/DTaP 2: दूसरी खुराक।
  • IPV 2: इंजेक्शन वाले पोलियो टीके की दूसरी खुराक।
  • Hib 2: दूसरी खुराक।
  • रोटावायरस 2: दूसरी खुराक।
  • PCV 2: दूसरी खुराक।

छोटे बच्चे दुनिया में आते ही ढेर सारी खुशियां लाते हैं, लेकिन साथ ही वह कई सारी बीमारियों के घेरे में भी आ सकते हैं। चिकित्सीय रूप से यह सच है कि छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता, जिससे उन्हें वायरस और बैक्टीरिया का जोखिम ज्यादा रहता है। इनमें खसरा, डिप्थीरिया, पोलियो जैसी गंभीर बीमारियां शामिल है।

लेकिन आपको यहां घबराने की आवश्यकता नहीं है। टीकाकरण की सहायता से आपके बच्चे कई खतरों से दूर रह पाते हैं। आंकड़ों की माने तो समय पर टीकाकरण हर साल दुनियाभर में 30 लाख से ज्यादा बच्चों की जान बचाता है। वहीं भारत सरकार बहुत सारे वैक्सीनेशन ड्राइव चला रहे हैं, जिससे माता-पिता टीकाकरण के संबंध में जागरूक हो रहे हैं। लगभग सभी अस्पतालों और क्लीनिक में टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन फिर भी लगभग 22 मिलियन से अधिक बच्चों को उचित और पूर्ण टीकाकरण नहीं मिलता है। 

चलिए इस ब्लॉग में पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके साथ-साथ आपको नवजात शिशु टीकाकरण चार्ट भी मिल जाएगा, जिससे उन माता-पिता को वैक्सीनेशन शेड्यूल को अच्छे से समझने में मदद मिलेगी। 

बच्चों का टीकाकरण क्यों जरूरी है?

टीकाकरण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है। वैक्सिनेशन चार्ट आपके बच्चे के लिए एक ऐसा टूल बन सकता है, जो उसके सेहत को दुरुस्त करने में मदद कर सकता है। इसकी मदद से आप अपने बच्चे को जानलेवा बीमारियों जैसे कि पोलियो, चेचक, हेपेटाइटिस और निमोनिया से बच सकते हैं। सही समय पर टीका लगवाने से न केवल बच्चा सुरक्षित रहता है, बल्कि समाज में भी बीमारियों के प्रसार को रोका जा सकता है।

बच्चों का टीकाकरण चार्ट 2026

नेशनल वैक्सीनेशन शेड्यूल के तहत, भारत में बच्चों का टीकाकरण अनुसूची नीचे उल्लिखित है।

बच्चों का टीकाकरण चार्ट 2025

जन्म के तुरंत बाद कौन-से टीके लगते हैं?

नवजात शिशु को टीका कब कब लगता है, यह सवाल हर नए माता-पिता के मन में होता है। जन्म के पहले 24 घंटों के भीतर शिशु को निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण टीके लगाए जाते हैं:

  • BCG: टीबी या ट्यूबरक्लोसिस (क्षय रोग) से बचाव के लिए यह टीका लगता है।
  • OPV (ओरल पोलियो वैक्सीन): पोलियो से सुरक्षा के लिए 'जीरो डोज'।
  • Hepatitis B: लीवर के संक्रमण से बचाव के लिए।

6 हफ्ते, 10 हफ्ते और 14 हफ्ते में कौन-से टीके लगते हैं?

जब बच्चा डेढ़ महीने का होता है, तो टीकाकरण की मुख्य प्रक्रिया शुरू होती है। 1.5 महीने के बच्चे का टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।

  • 6 हफ्ते: पेंटावैलेंट-1, RVV-1 (रोटावायरस), fIPV-1 और PCV-1।
  • 10 हफ्ते: पेंटावैलेंट-2 और रोटावायरस-2।
  • 14 हफ्ते: पेंटावैलेंट-3, रोटावायरस-3, fIPV-2 और PCV-2। यह चरण बच्चे को काली खांसी, टिटनेस, डिप्थीरिया और रोटावायरस जैसे गंभीर रोगों से बचाता है।

6 महीने से 9 महीने के बीच कौन-से टीके जरूरी है?

6 महीने की उम्र में फ्लू की वैक्सीन की सलाह दी जाती है। वहीं, 9 महीने का होने पर बच्चे को आंगनवाड़ी टीकाकरण चार्ट के अनुसार विटामिन-A की पहली खुराक और MR (खसरा और रूबेला) का पहला टीका लगाया जाता है। साथ ही, PCV का बूस्टर शॉट भी इसी दौरान दिया जाता है।

12–18 महीने में कौन-से टीके लगवाने चाहिए?

इस उम्र में बच्चे की इम्यूनिटी को और मजबूत करने के लिए बूस्टर डोज दिए जाते हैं:

  • 15 महीने: MMR (खसरा, मम्स, रूबेला) और चिकन पॉक्स का टीका।
  • 16-18 महीने: DPT बूस्टर-1, पोलियो बूस्टर और हेपेटाइटिस-A।

4–6 साल और 10–16 साल में कौन-से बूस्टर डोज़ लगते हैं?

स्कूल जाने की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है:

  • 4–6 साल: DPT बूस्टर-2 और OPV बूस्टर।
  • 10–16 साल: टिटनेस और डिप्थीरिया (Td) का टीका। किशोरियों के लिए 10-12 साल की उम्र में HPV वैक्सीन (सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु) भी अनुशंसित है।

अगर बच्चे का टीका छूट जाए तो क्या करें?

कई बार किसी कारणवश माता-पिता बच्चे का टीका समय पर नहीं लगवा पाते। घबराएं नहीं, अगर कोई टीका छूट गया है, तो तुरंत अपने पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करें। ज्यादातर टीकों के लिए 'कैच-अप' शेड्यूल होता है, जिससे छूटे हुए टीके बाद में लगाए जा सकते हैं।

टीकाकरण के बाद बुखार/सूजन हो तो क्या करें?

टीकाकरण के बाद हल्का बुखार, चिड़चिड़ापन या इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन और दर्द होना सामान्य है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर वैक्सीन के प्रति प्रतिक्रिया दे रहा है।

  • दर्द वाली जगह पर ठंडे कपड़े से सिकाई करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न दें।
  • बच्चे को अधिक से अधिक स्तनपान या तरल पदार्थ दें।
  • यदि बुखार 102 डिग्री से ज्यादा हो या बच्चा लगातार रोए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

नवजात शिशु टीकाकरण: क्या करें और क्या ना करें 

टीकाकरण हर बच्चे के जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है, लेकिन कभी-कभी यह थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। कभी-कभी, टीके के बाद बच्चों को थोड़ी सी समस्या हो सकती है, जैसे हल्का बुखार, लाल चकत्ते या थोड़ा दर्द। छोटे बच्चे अपनी समस्याओं के बारे में बता नहीं सकते हैं, लेकिन वह लगातार रोते रहते हैं। सभी माता-पिताओं की चिंता को हम अब खत्म कर देंगे। हम यहां आपकी मदद के लिए हैं! 

हम आपको एक गाइड देंगे जिससे सभी माता-पिता को इस बात की जानकारी मिल जाएगी कि टीकाकरण के पहले और बाद में क्या करनी चाहिए और क्या नहीं जिससे बच्चों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो।

टीकाकरण से पहले:

टीकाकरण से पहले इन बातों का रखें विशेष ख्याल - 

  • शिशु टीकाकरण कार्ड साथ ले जाएं।
  • बच्चे को आरामदायक कपड़े पहनाएं, जिससे टीकाकरण के दौरान उन्हें उतारने में दिक्कत न हो।
  • ध्यान रहे कि 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को जांघों में टीका लगाया जाता है, वहीं इससे बड़े बच्चों को आस्तीन या फिर हाथ पर टीका लगाया जाता है। 
  • टीकाकरण के दौरान बच्चे को दर्द हो सकता है, तो उस दौरान उन्हें संभाल लें। 
  • यदि किसी भी कारणवश कोई इंजेक्शन छूट जाता है, तो पेडियाट्रिक्स डॉक्टर से बात करें और उसे लगवाएं। 
  • इंजेक्शन के बाद बच्चों को बुखार का सामना करना पड़ सकता है। उस दौरान उन्हें खूब सारा पानी पिलाएं। 
  • बुखार कम करने के लिए लिक्विड पेरासिटामोल या इबुप्रोफेन दे सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर से एक बार बात ज़रूर करें। 

टीकाकरण के बाद की सावधानियां:

टीकाकरण के बाद इन बातों का रखें विशेष ख्याल - 

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर के पर्चे के दर्द और बुखार की दवा न दे।
  • बुखार में उन्हें अच्छे से कपड़े पहनाए, लेकिन ज्यादा कपड़े भी न पहनाएं जिससे उन्हें त्वचा की समस्या भी हो जाती है।
  • किसी भी टीकाकरण को मिस न करें और टीकाकरण के समय का विशेष ध्यान रखें।
  • यदि कोई समस्या आती भी है तो जल्दबाजी न करें और इलाज के सही विकल्पों का चयन करें।

टीकाकरण का महत्व

बच्चों, नवजात शिशुओं और किशोरों के लिए टीकाकरण बहुत ज्यादा आवश्यक है। यदि सही समय पर सारे टीकाकरण हो जाते हैं, तो बच्चा कुछ बीमारियों से दूर रहता है जैसे - 

इनके सिवाय भी बहुत सारी समस्याएं होती हैं, जो एक बच्चे को परेशान करती है, इसलिए समय पर टीकाकरण बहुत ज्यादा आवश्यक होता है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लोगों को समझने की आवश्यकता है कि बच्चों को सभी टीके 5 साल से पहले लगाए जाने चाहिए। इससे बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके लिए माता-पिता को टीकाकरण के संबंध में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। 

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीकाकरण के बाद शिशु की देखभाल कैसे करें?

  • डॉक्टर के द्वारा दी हुई टीकाकरण चार्ट पढ़ें
  • सूजन या लालिमा कम करने के लिए हल्का गीला और ठंडा कपड़ा लगाएं
  • हल्के बुखार की कोई चिंता न करें
  • तरल पदार्थों के सेवन को बढ़ाएं
  • शिशु के खाने पर ध्यान दें
  • नियोनेटोलॉजी डॉक्टर से संपर्क में रहें

क्या टीकाकरण के बाद बच्चे को नहलाया जा सकता है?

बिल्कुल! टीकाकरण के बाद बच्चे को हमेशा की तरह नहलाया जा सकता है। ध्यान दें कि अगर इंजेक्शन लगने वाली जगह लाल हो गई है और छूने से गर्माहट का एहसास हो तो आप उस जगह को ठंडे गीले तौलिये से सेक सकते हैं। लेकिन बर्फ की थैली का इस्तेमाल न करें और टीकाकरण के बाद बच्चे को बहुत सारे कंबल या कपड़े न पहनाएं।

बच्चे को पहला टीका कब लगता है?

सभी नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटों के भीतर हेपेटाइटिस बी का पहला टीका लगाया जाता है। 

क्या मैं टीकाकरण से पहले और बाद में बच्चे को दूध पिला सकती हूं?

हां, 1 साल तक के अधिकांश बच्चों में टीकाकरण से पहले और बाद में स्तनपान कराने से दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। 

नवजात शिशु को कितने टीके लगते हैं?

भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं को 12 अलग-अलग टीके लगते हैं। यह सारे टीके आपको किसी भी अस्पताल में मिल जाएंगे जहां पर बच्चों का इलाज होता है। 

5 साल के बच्चे को कौन सा टीका लगता है?

  • डीपीटी बूस्टर
  • पोलियो बूस्टर
  • खसरा-कण्ठमाला-रूबेला (एमएमआर) बूस्टर
  • जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) बूस्टर
  • टाइफाइड
  • हेपेटाइटिस ए

किस आयु में कौन सा टीका लगता है?

अलग-अलग उम्र में बच्चों को अलग-अलग टीका लगाया जाता है जैसे - 

  • 16-24 महीने - डीपीटी बूस्टर
  • 16-24 महीने - पोलियो बूस्टर
  • 4-6 साल - एमएमआर बूस्टर
  • 16-24 महीने और 4-6 साल - जेई बूस्टर
  • 1-15 साल - टाइफाइड
  • 1-15 साल - हेपेटाइटिस ए

Written and Verified by:

Dr. Saugata Acharya

Dr. Saugata Acharya

Consultant Exp: 37 Yr

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Dr. Saugata Acharya is a Consultant in Pediatrics Dept. at CMRI Hospital, Kolkata with over 20 years of experience. He specializes in pediatric gastroenterology, neonatology, community pediatrics, and child psychiatry.

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