
क्या आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, जिन्हें रात में ड्राइव करने में दिक्कत हो रही है या फिर किसी रोशनी के आस-पास कुछ ऐसी आकृतियां (Halos) दिख रही हैं, जो आपको देखने में दिक्कत दे रही है। यदि आप इसे सामान्य समझने की गलती कर रहे हैं, तो आपको ये समझना होगा कि ये मोतियाबिंद (Cataract) की दस्तक हो सकती है।
अच्छी बात यह है कि आज मेडिकल साइंस की मदद से इस समस्या का इलाज सुरक्षित तरीके से संभव है। अपनी आँखों की अनमोल रोशनी को सुरक्षित रखने के लिए आज ही हमारे अनुभवी डॉक्टरों से परामर्श करें और सीके बिरला हॉस्पिटल (RBH), जयपुर के अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ के साथ एक अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपकी आँखों को सही और समय पर देखभाल मिल सके।
हमारी आँख के भीतर एक प्राकृतिक और बिल्कुल पारदर्शी लेंस होता है। इस लेंस का काम ठीक वैसे ही होता है जैसे किसी कैमरे के लेंस का होता है। इस लेंस की मदद से आंख में आने वाली रोशनी सीधे आंख के पीछे वाले हिस्से यानी रेटिना पर फोकस होती है, जिसकी मदद से हम चीजों को एकदम साफ और स्पष्ट देख पाते हैं। यह प्राकृतिक लेंस पानी और प्रोटीन से मिलकर बनता है।
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, या कुछ अन्य शारीरिक बदलावों के कारण, इस लेंस में मौजूद प्रोटीन आपस में जुड़कर छोटे-छोटे गुच्छे बनाने लगते हैं। शुरुआत में ये गुच्छे बहुत बारीक होते हैं, इसलिए इनका पता नहीं चलता। लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ ये बड़े होते जाते हैं और लेंस के एक बड़े हिस्से को कवर कर लेते हैं। परिणाम यह होता है कि लेंस अपनी पारदर्शिता खोने लगता है और वो धुंधला या मटमैला हो जाता है, जो धीरे-धीरे एक परत बन जाता है, जो मोतियाबिंद होता है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब तक पूरी तरह दिखना बंद न हो जाए, तब तक मोतियाबिंद नहीं माना जा सकता। यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। मोतियाबिंद चुपके से आता है और इसके लक्षण बहुत ही धीरे-धीरे विकसित होते हैं। अगर आप नीचे दिए गए शुरुआती संकेतों पर ध्यान देंगे, तो आप समय रहते सही कदम उठा सकते हैं -

आखिर मोतियाबिंद के कारण क्या है? ये सवाल सबके मन में आता है कि आखिर ये समस्या क्यों होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत के नेशनल ब्लाइंडनेस सर्वे के हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अंधापन या दृष्टि हानि का सबसे बड़ा कारण (लगभग 62% से 66% मामलों में) मोतियाबिंद ही है। ये आंकड़े गंभीर हैं। मोतियाबिंद के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं -
जब आप सीके बिरला हॉस्पिटल (RBH) जैसे विश्वसनीय आई केयर सेंटर जाते हैं, तो कुछ टेस्ट की मदद से इस समस्या की पुष्टि की जा सकती है -
यह समझना जरूरी है कि मोतियाबिंद का इलाज किसी घरेलू नुस्खे, योग या आई ड्रॉप से संभव नहीं है। जब लेंस एक बार धुंधला हो जाता है, तो इसका एकमात्र प्रामाणिक समाधान Cataract surgery ही है। यह 10-15 मिनट की बेहद सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसमें धुंधले लेंस को हटाकर एक आधुनिक कृत्रिम लेंस (IOL) लगा दिया जाता है।
मोतियाबिंद उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा है, लेकिन इसके कारण अपनी आज़ादी और खुशियों से समझौता करना समझदारी नहीं है। आँखों की रोशनी कम होना आपके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करे, उससे पहले ही सही कदम उठाना जरूरी है।
सीके बिरला हॉस्पिटल (RBH), जयपुर में हमारे पास विश्वस्तरीय मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक डायग्नोस्टिक मशीनें और एक्सपीरियंस स्पेशलिस्ट की टीम है। अगर आप या आपके परिवार में कोई इस समस्या से जूझ रहा है, तो देर न करें; आज ही हमारे विशेषज्ञों से सलाह लें और एक साफ़ व स्पष्ट भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।
जी नहीं, मोतियाबिंद को बिना ऑपरेशन के ठीक नहीं किया जा सकता। किसी भी प्रकार की दवा, आई ड्रॉप, चश्मा या घरेलू उपाय धुंधले हो चुके लेंस को दोबारा पारदर्शी नहीं बना सकते। सर्जरी ही इसका एकमात्र और स्थायी समाधान है।
जब मोतियाबिंद के कारण आपके रोजमर्रा के काम जैसे कि पढ़ना, टीवी देखना, या रात में गाड़ी चलाना प्रभावित होने लगे, तो सर्जरी करा लेनी चाहिए। इसे बहुत अधिक पकाने का इंतज़ार करना आँखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
हाँ, आधुनिक फेको और लेजर तकनीकों के कारण मोतियाबिंद की सर्जरी दुनिया की सबसे सुरक्षित और सफल सर्जिकल प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें संक्रमण का खतरा न के बराबर होता है और सफलता दर 98% से अधिक है।
आधुनिक तकनीक (बिना टांके वाली सर्जरी) से मरीज अगले ही दिन से अपने हल्के-फुल्के काम शुरू कर सकता है। आँख को पूरी तरह से स्थिर होने और पूरी रोशनी वापस आने में लगभग 2 से 4 सप्ताह का समय लगता है।
हाँ, मोतियाबिंद आमतौर पर दोनों आँखों को प्रभावित करता है क्योंकि यह उम्र बढ़ने की एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, यह संभव है कि एक आँख में यह दूसरी आँख की तुलना में जल्दी विकसित हो जाए या ज्यादा गंभीर हो।
हाँ, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में मोतियाबिंद होना बेहद सामान्य है। जैसे सिर के बाल सफेद होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, वैसे ही उम्र के साथ आंखों के प्राकृतिक लेंस का धुंधला होना भी एक स्वाभाविक शारीरिक बदलाव है।
आपकी जीवनशैली और जरूरतों के आधार पर लेंस का चयन होता है। यदि आप चश्मे से पूरी तरह मुक्ति चाहते हैं, तो 'ट्राइफोकल' या 'मल्टीफोकल' लेंस सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं, जो कंप्यूटर और पढ़ाई दोनों में मदद करते हैं।
ऑपरेशन के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक आंखों में पानी जाने से बचाएं, आँखों को ज़ोर से न मलें, धूल-धुएं वाली जगहों पर जाने से बचें और डॉक्टर द्वारा बताए गए आई ड्रॉप्स को नियमित रूप से समय पर डालें।
Written and Verified by:

Dr. Shubhnav Jain is a Consultant Ophthalmologist at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 9 years of experience. He specializes in cataract surgery, glaucoma management, and refractive error correction.
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